LLP Act 34अध्याय VII · Financial Disclosures
धारा 34 · लेखा-पुस्तकों, अन्य अभिलेखों और लेखापरीक्षा आदि का रखरखाव।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) सीमित देयता साझेदारी अपने अस्तित्व के प्रत्येक वर्ष के लिए नकद आधार या उपार्जन आधार पर तथा दोहरी प्रविष्टि लेखांकन प्रणाली के अनुसार अपने कार्यों से संबंधित उचित लेखा-पुस्तकें रखेगी तथा उन्हें अपने पंजीकृत कार्यालय में निर्धारित अवधि के लिए रखेगी।
(2) प्रत्येक सीमित देयता साझेदारी प्रत्येक वित्तीय वर्ष की समाप्ति से छह माह की अवधि के भीतर उक्त वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन के लिए निर्धारित प्रारूप में उक्त वित्तीय वर्ष का लेखा-जोखा और दिवालियापन विवरण तैयार करेगी, और ऐसे विवरण पर सीमित देयता साझेदारी के नामित साझेदारों द्वारा हस्ताक्षर किए जाएंगे।
(3) प्रत्येक सीमित देयता साझेदारी उपधारा (2) के अनुसार तैयार किए गए लेखा और दिवालियापन विवरण को निर्धारित समय के भीतर रजिस्ट्रार के पास प्रत्येक वर्ष ऐसे प्रपत्र और तरीके से तथा ऐसे शुल्क के साथ प्रस्तुत करेगी जैसा कि निर्धारित किया जा सकता है।
(4) सीमित देयता साझेदारी के खातों का लेखापरीक्षा ऐसे नियमों के अनुसार की जाएगी जो निर्धारित किए जा सकते हैं:
बशर्ते कि केंद्र सरकार आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना द्वारा सीमित देयता भागीदारी के किसी वर्ग या वर्गों को इस उपधारा की आवश्यकताओं से छूट दे सकती है।
1 [(5) कोई भी सीमित देयता साझेदारी जो उप-धारा (3) के प्रावधानों का अनुपालन करने में विफल रहती है, ऐसी सीमित देयता साझेदारी और उसके नामित साझेदारों पर प्रत्येक दिन के लिए सौ रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा, जिस दौरान ऐसी विफलता जारी रहती है, सीमित देयता साझेदारी के लिए अधिकतम एक लाख रुपये और प्रत्येक नामित साझेदार के लिए पचास हजार रुपये तक।
(6) कोई भी सीमित देयता साझेदारी जो उप-धारा (1), उप-धारा (2) और उप-धारा (4) के प्रावधानों का पालन करने में विफल रहती है, ऐसी सीमित देयता साझेदारी पर कम से कम पच्चीस हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा, जो कि पांच लाख रुपये तक हो सकता है, और ऐसी सीमित देयता साझेदारी के प्रत्येक नामित साझेदार पर कम से कम दस हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा, जो कि एक लाख रुपये तक हो सकता है।]
(2) प्रत्येक सीमित देयता साझेदारी प्रत्येक वित्तीय वर्ष की समाप्ति से छह माह की अवधि के भीतर उक्त वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन के लिए निर्धारित प्रारूप में उक्त वित्तीय वर्ष का लेखा-जोखा और दिवालियापन विवरण तैयार करेगी, और ऐसे विवरण पर सीमित देयता साझेदारी के नामित साझेदारों द्वारा हस्ताक्षर किए जाएंगे।
(3) प्रत्येक सीमित देयता साझेदारी उपधारा (2) के अनुसार तैयार किए गए लेखा और दिवालियापन विवरण को निर्धारित समय के भीतर रजिस्ट्रार के पास प्रत्येक वर्ष ऐसे प्रपत्र और तरीके से तथा ऐसे शुल्क के साथ प्रस्तुत करेगी जैसा कि निर्धारित किया जा सकता है।
(4) सीमित देयता साझेदारी के खातों का लेखापरीक्षा ऐसे नियमों के अनुसार की जाएगी जो निर्धारित किए जा सकते हैं:
बशर्ते कि केंद्र सरकार आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना द्वारा सीमित देयता भागीदारी के किसी वर्ग या वर्गों को इस उपधारा की आवश्यकताओं से छूट दे सकती है।
1 [(5) कोई भी सीमित देयता साझेदारी जो उप-धारा (3) के प्रावधानों का अनुपालन करने में विफल रहती है, ऐसी सीमित देयता साझेदारी और उसके नामित साझेदारों पर प्रत्येक दिन के लिए सौ रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा, जिस दौरान ऐसी विफलता जारी रहती है, सीमित देयता साझेदारी के लिए अधिकतम एक लाख रुपये और प्रत्येक नामित साझेदार के लिए पचास हजार रुपये तक।
(6) कोई भी सीमित देयता साझेदारी जो उप-धारा (1), उप-धारा (2) और उप-धारा (4) के प्रावधानों का पालन करने में विफल रहती है, ऐसी सीमित देयता साझेदारी पर कम से कम पच्चीस हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा, जो कि पांच लाख रुपये तक हो सकता है, और ऐसी सीमित देयता साझेदारी के प्रत्येक नामित साझेदार पर कम से कम दस हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा, जो कि एक लाख रुपये तक हो सकता है।]
अपराध एक नज़र में
- जुर्माना
- ₹5,00,000
- संज्ञेय
- असंज्ञेय
- जमानतीय
- जमानतीय
- विचारण न्यायालय
- विशेष न्यायालय
- असंज्ञेय — पुलिस बिना मजिस्ट्रेट की अनुमति के जाँच नहीं कर सकती
- जमानतीय — जमानत आपका अधिकार है — थाने से भी मिल सकती है
इस धारा की अलग-अलग उपधाराओं में अलग दंड हैं; यहाँ अधिकतम दिखाया गया है।
प्रथम अनुसूची भाग II के नियम से निकाला गया — धारावार सूचीबद्ध नहीं
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