LLP Act 24अध्याय IV · Partners and Their Relations
धारा 24 · साझेदारी हित की समाप्ति।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) कोई व्यक्ति अन्य साझेदारों के साथ समझौते के अनुसार या अन्य साझेदारों के साथ साझेदार होने की समाप्ति के संबंध में समझौते के अभाव में, साझेदार के रूप में त्यागपत्र देने के अपने इरादे की तीस दिनों से कम की लिखित सूचना अन्य साझेदारों को देकर सीमित देयता साझेदारी का साझेदार होना छोड़ सकता है।
(2) कोई व्यक्ति सीमित देयता साझेदारी का साझेदार नहीं रहेगा--
(क) उसकी मृत्यु या सीमित देयता साझेदारी के विघटन पर; या
(ख) यदि किसी सक्षम न्यायालय द्वारा उसे मानसिक रूप से अस्वस्थ घोषित कर दिया जाए; या
(ग) यदि उसने दिवालिया घोषित किए जाने या दिवालिया घोषित किए जाने के लिए आवेदन किया हो।
(3) जहाँ कोई व्यक्ति किसी सीमित देयता साझेदारी का भागीदार नहीं रह गया है (जिसे इसके बाद "पूर्व भागीदार" कहा जाएगा), तो पूर्व भागीदार को (सीमित देयता साझेदारी के साथ लेन-देन करने वाले किसी भी व्यक्ति के संबंध में) सीमित देयता साझेदारी का भागीदार माना जाएगा, जब तक कि--
(क) उस व्यक्ति को यह सूचना मिल गई है कि पूर्व साझेदार अब सीमित देयता साझेदारी का साझेदार नहीं रहा है; या
(ख) यह सूचना रजिस्ट्रार को दी जा चुकी है कि पूर्व साझेदार सीमित देयता साझेदारी का साझेदार नहीं रह गया है।
(4) किसी साझेदार का सीमित देयता साझेदारी से अलग होना, उसे स्वयं सीमित देयता साझेदारी या अन्य साझेदारों या किसी अन्य व्यक्ति के प्रति किसी दायित्व से मुक्त नहीं करता है, जो उसने साझेदार रहते हुए अर्जित किया था।
(5) यदि किसी सीमित देयता साझेदारी का कोई साझेदार साझेदार नहीं रहता है, तो सीमित देयता साझेदारी समझौते में अन्यथा प्रावधान न होने पर, पूर्व साझेदार या पूर्व साझेदार की मृत्यु या दिवालियापन के परिणामस्वरूप उसके हिस्से का हकदार व्यक्ति सीमित देयता साझेदारी से प्राप्त करने का हकदार होगा--
(क) पूर्व साझेदार द्वारा सीमित देयता साझेदारी में वास्तव में किए गए पूंजी योगदान के बराबर राशि; और
(ख) सीमित देयता साझेदारी के संचित लाभों में उसका हिस्सा, सीमित देयता साझेदारी के संचित नुकसानों की कटौती के बाद, उस तिथि तक निर्धारित किया जाएगा जिस तिथि को पूर्व साझेदार ने साझेदार रहना छोड़ दिया था।
(6) पूर्व साझेदार या पूर्व साझेदार की मृत्यु या दिवालियापन के परिणामस्वरूप उसके हिस्से का हकदार व्यक्ति सीमित देयता साझेदारी के प्रबंधन में हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं रखेगा।
(2) कोई व्यक्ति सीमित देयता साझेदारी का साझेदार नहीं रहेगा--
(क) उसकी मृत्यु या सीमित देयता साझेदारी के विघटन पर; या
(ख) यदि किसी सक्षम न्यायालय द्वारा उसे मानसिक रूप से अस्वस्थ घोषित कर दिया जाए; या
(ग) यदि उसने दिवालिया घोषित किए जाने या दिवालिया घोषित किए जाने के लिए आवेदन किया हो।
(3) जहाँ कोई व्यक्ति किसी सीमित देयता साझेदारी का भागीदार नहीं रह गया है (जिसे इसके बाद "पूर्व भागीदार" कहा जाएगा), तो पूर्व भागीदार को (सीमित देयता साझेदारी के साथ लेन-देन करने वाले किसी भी व्यक्ति के संबंध में) सीमित देयता साझेदारी का भागीदार माना जाएगा, जब तक कि--
(क) उस व्यक्ति को यह सूचना मिल गई है कि पूर्व साझेदार अब सीमित देयता साझेदारी का साझेदार नहीं रहा है; या
(ख) यह सूचना रजिस्ट्रार को दी जा चुकी है कि पूर्व साझेदार सीमित देयता साझेदारी का साझेदार नहीं रह गया है।
(4) किसी साझेदार का सीमित देयता साझेदारी से अलग होना, उसे स्वयं सीमित देयता साझेदारी या अन्य साझेदारों या किसी अन्य व्यक्ति के प्रति किसी दायित्व से मुक्त नहीं करता है, जो उसने साझेदार रहते हुए अर्जित किया था।
(5) यदि किसी सीमित देयता साझेदारी का कोई साझेदार साझेदार नहीं रहता है, तो सीमित देयता साझेदारी समझौते में अन्यथा प्रावधान न होने पर, पूर्व साझेदार या पूर्व साझेदार की मृत्यु या दिवालियापन के परिणामस्वरूप उसके हिस्से का हकदार व्यक्ति सीमित देयता साझेदारी से प्राप्त करने का हकदार होगा--
(क) पूर्व साझेदार द्वारा सीमित देयता साझेदारी में वास्तव में किए गए पूंजी योगदान के बराबर राशि; और
(ख) सीमित देयता साझेदारी के संचित लाभों में उसका हिस्सा, सीमित देयता साझेदारी के संचित नुकसानों की कटौती के बाद, उस तिथि तक निर्धारित किया जाएगा जिस तिथि को पूर्व साझेदार ने साझेदार रहना छोड़ दिया था।
(6) पूर्व साझेदार या पूर्व साझेदार की मृत्यु या दिवालियापन के परिणामस्वरूप उसके हिस्से का हकदार व्यक्ति सीमित देयता साझेदारी के प्रबंधन में हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं रखेगा।
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