LLP Act 58अध्याय X · Conversion Into Limited Liability Partnership
धारा 58 · पंजीकरण और रूपांतरण का प्रभाव।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) रजिस्ट्रार, इस बात से संतुष्ट होने पर कि कोई फर्म, निजी कंपनी या गैर-सूचीबद्ध सार्वजनिक कंपनी, जैसा भी मामला हो, ने द्वितीय अनुसूची, तृतीय अनुसूची या चतुर्थ अनुसूची, जैसा भी मामला हो, के प्रावधानों का अनुपालन किया है, इस अधिनियम और इसके अंतर्गत बनाए गए नियमों के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, ऐसी अनुसूची के अंतर्गत प्रस्तुत दस्तावेजों को पंजीकृत करेगा और रजिस्ट्रार द्वारा निर्धारित प्रारूप में पंजीकरण प्रमाण पत्र जारी करेगा जिसमें यह कहा जाएगा कि सीमित देयता भागीदारी, प्रमाण पत्र में निर्दिष्ट तिथि से, इस अधिनियम के अंतर्गत पंजीकृत है:
बशर्ते कि सीमित देयता भागीदारी, पंजीकरण की तिथि से पंद्रह दिनों के भीतर, संबंधित फर्मों के रजिस्ट्रार या कंपनियों के रजिस्ट्रार को, जैसा भी मामला हो, जिसके साथ यह भारतीय भागीदारी अधिनियम, 1932 (1932 का 9) या [कंपनी अधिनियम, 2013 (2013 का 18 )] के प्रावधानों के तहत पंजीकृत थी, रूपांतरण और सीमित देयता भागीदारी के विवरण के बारे में ऐसे प्रपत्र और तरीके से सूचित करेगी जैसा कि निर्धारित किया जा सकता है।
(2) ऐसे रूपांतरण पर, फर्म के साझेदार, निजी कंपनी या गैर-सूचीबद्ध सार्वजनिक कंपनी के शेयरधारक, जैसा भी मामला हो, सीमित देयता साझेदारी जिसमें ऐसी फर्म या ऐसी कंपनी परिवर्तित हुई है, और सीमित देयता साझेदारी के साझेदार, द्वितीय अनुसूची, तृतीय अनुसूची या चतुर्थ अनुसूची के प्रावधानों से बाध्य होंगे, जैसा भी मामला हो, जो उन पर लागू होते हैं।
(3) ऐसे रूपांतरण पर, पंजीकरण प्रमाण पत्र की तिथि से, रूपांतरण के प्रभाव ऐसे होंगे जैसे दूसरी अनुसूची, तीसरी अनुसूची या चौथी अनुसूची में निर्दिष्ट हों, जैसा भी मामला हो।
(4) किसी अन्य कानून में इस समय लागू किसी बात के होते हुए भी, द्वितीय अनुसूची, तृतीय अनुसूची या चतुर्थ अनुसूची के अंतर्गत जारी पंजीकरण प्रमाण पत्र में निर्दिष्ट पंजीकरण तिथि से,--
(क) इस अधिनियम के तहत पंजीकृत पंजीकरण प्रमाण पत्र में निर्दिष्ट नाम से एक सीमित देयता साझेदारी होगी;
(ख) फर्म या कंपनी में निहित सभी मूर्त (चल या अचल) और अमूर्त संपत्ति, फर्म या कंपनी से संबंधित सभी परिसंपत्तियां, हित, अधिकार, विशेषाधिकार, देनदारियां, दायित्व और फर्म या कंपनी का संपूर्ण उपक्रम बिना किसी और आश्वासन, कार्य या विलेख के सीमित देयता भागीदारी को हस्तांतरित कर दिया जाएगा और उसमें निहित हो जाएगा; और
(ग) फर्म या कंपनी, जैसा भी मामला हो, भंग मानी जाएगी और फर्म रजिस्ट्रार या कंपनी रजिस्ट्रार के अभिलेखों से हटा दी जाएगी।
बशर्ते कि सीमित देयता भागीदारी, पंजीकरण की तिथि से पंद्रह दिनों के भीतर, संबंधित फर्मों के रजिस्ट्रार या कंपनियों के रजिस्ट्रार को, जैसा भी मामला हो, जिसके साथ यह भारतीय भागीदारी अधिनियम, 1932 (1932 का 9) या [कंपनी अधिनियम, 2013 (2013 का 18 )] के प्रावधानों के तहत पंजीकृत थी, रूपांतरण और सीमित देयता भागीदारी के विवरण के बारे में ऐसे प्रपत्र और तरीके से सूचित करेगी जैसा कि निर्धारित किया जा सकता है।
(2) ऐसे रूपांतरण पर, फर्म के साझेदार, निजी कंपनी या गैर-सूचीबद्ध सार्वजनिक कंपनी के शेयरधारक, जैसा भी मामला हो, सीमित देयता साझेदारी जिसमें ऐसी फर्म या ऐसी कंपनी परिवर्तित हुई है, और सीमित देयता साझेदारी के साझेदार, द्वितीय अनुसूची, तृतीय अनुसूची या चतुर्थ अनुसूची के प्रावधानों से बाध्य होंगे, जैसा भी मामला हो, जो उन पर लागू होते हैं।
(3) ऐसे रूपांतरण पर, पंजीकरण प्रमाण पत्र की तिथि से, रूपांतरण के प्रभाव ऐसे होंगे जैसे दूसरी अनुसूची, तीसरी अनुसूची या चौथी अनुसूची में निर्दिष्ट हों, जैसा भी मामला हो।
(4) किसी अन्य कानून में इस समय लागू किसी बात के होते हुए भी, द्वितीय अनुसूची, तृतीय अनुसूची या चतुर्थ अनुसूची के अंतर्गत जारी पंजीकरण प्रमाण पत्र में निर्दिष्ट पंजीकरण तिथि से,--
(क) इस अधिनियम के तहत पंजीकृत पंजीकरण प्रमाण पत्र में निर्दिष्ट नाम से एक सीमित देयता साझेदारी होगी;
(ख) फर्म या कंपनी में निहित सभी मूर्त (चल या अचल) और अमूर्त संपत्ति, फर्म या कंपनी से संबंधित सभी परिसंपत्तियां, हित, अधिकार, विशेषाधिकार, देनदारियां, दायित्व और फर्म या कंपनी का संपूर्ण उपक्रम बिना किसी और आश्वासन, कार्य या विलेख के सीमित देयता भागीदारी को हस्तांतरित कर दिया जाएगा और उसमें निहित हो जाएगा; और
(ग) फर्म या कंपनी, जैसा भी मामला हो, भंग मानी जाएगी और फर्म रजिस्ट्रार या कंपनी रजिस्ट्रार के अभिलेखों से हटा दी जाएगी।
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