ESI Act 97अध्याय VIII · Miscellaneous
धारा 97 · निगम की विनियम बनाने की शक्ति
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) निगम, *** पूर्व प्रकाशन की शर्त के अध्यधीन रहते हुए, निगम के कामकाज के प्रशासन के लिए और इस अधिनियम के उपबंधों को क्रियान्वित करने के लिए ऐसे विनियम बना सकेगा, जो इस अधिनियम और तद्धीन बनाए गए नियमों से असंगत न हों ।
(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे विनियम निम्नलिखित सभी विषयों के लिए या उनमें से किसी के लिए उपबंध कर सकेंगे, अर्थात्ः-
(i) निगम, स्थायी समिति और चिकित्सा प्रसुविधा परिषद् के अधिवेशनों का समय और स्थान और वह प्रक्रिया जिसका ऐसे अधिवेशनों में अनुसरण किया जाएगा;
(iक) वह समय जिसके भीतर और वह रीति जिससे कारखाना या स्थापन रजिस्ट्रीकृत किया जाएगा;
(ii) वे विषय जो विनिश्चय के लिए स्थायी समिति द्वारा निगम को निर्देशित किए जाएंगे;
(iii) वह रीति, जिससे इस अधिनियम के अधीन संदेय कोई अभिदान निर्धारित और संगृहीत किया जाएगा;
(iiiक) अभिदायों के विलंबित संदाय पर ब्याज की बारह प्रतिशत से उच्चतर दर;
(iv) इस अधिनियम के अधीन संदेय अभिदाय को नियत करने के प्रयोजन के लिए मजदूरी की संगणना;
(ivक) कर्मचारियों का रजिस्टर अव्यवहित नियोजक द्वारा रखा जाना;
(ivख) किसी ऐसे दिन को जिसको व्यक्ति काम करता है या छुट्टी या अवकाश पर रहता है जिसकी बाबत वह मजदूरी प्राप्त करता है अथवा किसी ऐसे दिन के लिए जिसको वह हड़ताल पर रहता है, अस्थायी निःशक्तता के लिए बीमारी-प्रसुविधा या निःशक्तता-प्रसुविधा की हकदारी;
(v) किसी नकद प्रसुविधा के लिए बीमारी और पात्रता का प्रमाणन;
(vi) यह अवधारित करने की पद्धति कि क्या बीमाकृत व्यक्ति तृतीय अनुसूची में विनिर्दिष्ट रोगों में से एक या अधिक से पीड़ित है;
(vii) किसी ऐसी प्रसुविधा का, जो नकद प्रसुविधा नहीं है, धन के रूप में मूल्य निर्धारित करना;
(viii) वह समय जिसके भीतर [और वह प्ररूप और रीति जिसमेंट प्रसुविधा के लिए कोई दावा किया जा सकेगा, और वे विशिष्टियां जो ऐसे दावे में विनिर्दिष्ट की जाएंगी;
(ix) वे परिस्थितियां जिनमें कोई ऐसा कर्मचारी, जिसे निःशक्तता प्रसुविधा मिल रही है, पदच्युत, उन्मोचित या अवनत किया जा सकेगा या अन्यथा दंडित किया जा सकेगा;
(x) वह रीति जिससे और वह स्थान जहां और वह समय जब कोई प्रसुविधा दी जाएगी;
(xi) संदेय नकद प्रसुविधा की रकम की गणना करने की पद्धति और वे परिस्थितियां जिनमें और वह विस्तार जिस तक निःशक्तता प्रसुविधा और आश्रित-प्रसुविधा का संराशीकरण अनुज्ञात किया जा सकेगा और संराशीकरण-मूल्य की गणना करने की पद्धति;
(xii) गर्भावस्था की या प्रसवावस्था की सूचना और बीमारी की सूचना और सबूत;
(xiiक) उस प्राधिकारी का विनिर्दिष्ट किया जाना जो प्रसूति-प्रसुविधा के लिए पात्रता का प्रमाण-पत्र देने के लिए सक्षम होगा;
(xiiख) किसी बीमाकृत स्त्री द्वारा यह नामनिर्देशित किए जाने की रीति कि उसकी या उसके बच्चे की मृत्यु हो जाने की दशा में प्रसूति-प्रसुविधा किसे संदत्त की जाए;
(xiiग) प्रसूति-प्रसुविधा या अतिरिक्त प्रसूति-प्रसुविधा के दावे के समर्थन में सबूत का पेश किया जाना;
(xiii) वे दशाएं जिनमें कोई प्रसुविधा निलम्बित की जा सकेगी;
(xiv) वे शर्तें जिनका किसी व्यक्ति द्वारा तब अनुपालन किया जाना है जब उसे कोई प्रसुविधा प्राप्त हो रही हो, और ऐसे व्यक्तियों की कालिक चिकित्सीय परीक्षाः
(xvi) इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए चिकित्सा-व्यवसायियों की नियुक्ति, ऐसे व्यवसायियों के कर्तव्य और चिकित्सक प्रमाणपत्रों का प्ररूप;
(xviक) वे अर्हताएं और अनुभव जो बीमारी का प्रमाणपत्र देने के लिए किसी व्यक्ति के पास होने चाहिएं;
(xviख) चिकित्सक बोर्डों और चिकित्सा अपील अधिकरणों का गठन;
(xvii) वे शास्तियां जो विनियमों के भंग के लिए कर्मचारियों पर जुर्माने द्वारा अधिपोपित की जा सकेंगी (ये शास्तियां प्रथम भंग के लिए दो दिन की मजदूरी से और किसी उत्तरवर्ती भंग के लिए तीन दिन की मजदूरी से अधिक न होंगी);
(xviiक) शास्ति के रूप में वसूल की जाने वाली नुकसानी की रकम;
(xviiख) किसी रुग्ण औद्योगिक कंपनी के संबंध में नुकसानी में कमी या उसके अधित्यजन के लिए निबंधन और शर्तें ;
(xviii) वे परिस्थितियां जिनमें और वे शर्तें, जिनके अध्यधीन किसी विनियम को शिथिल किया जा सकेगा, वह विस्तार जिस तक ऐसा शिथिलीकरण किया जा सकेगा और वह प्राधिकारी जिसके द्वारा ऐसा शिथिलीकरण अनुदत्त किया जा सकेगा;
(xix) वे विरवणियां जो प्रधान नियोजकों और अव्यवहित नियोजकों द्वारा निवेदित की जाएंगी और वे रजिस्टर या अभिलेख जो उनके द्वारा रखे जाएंगे, ऐसी विवरणियों, रजिस्टरों या अभिलेखों के प्ररूप और वे समय जब ऐसी विवरणियां निवेदित की जानी चाहिएं और वे विशिष्टियां, जो ऐसी विवरणियों, रजिस्टरों और अभिलेखों में अन्तर्विष्ट होनी चाहिएं;
(xx) वे [सामाजिक सुरक्षा अधिकारियों] और निगम के अन्य अधिकारियों और सेवकों के कर्तव्य और शक्तियां;
(xxक) अपील प्राधिकारी का गठन और निगम के पास नियोजक द्वारा जमा की गई रकम पर ब्याज ;
(xxi) [महानिदेशक और वित्त आयुक्त] से भिन्न निगम के अधिकारियों और सेवकों की भर्ती की पद्धति, वेतन और भत्ते, अनुशासन, अधिवार्षिकी प्रसुविधाएं और सेवा की अन्य शर्तें;
(xxii) वह प्रक्रिया जिसका अनुसरण निगम को अभिदाय प्रेषत करने में किया जाएगा; तथा
(xxiii) कोई ऐसा विषय, जिसकी बाबत इस अधिनियम द्वारा विनियमों का बनाया जाना अपेक्षित या अनुज्ञात है ।
(2क) पूर्व प्रकाशन की शर्त उपधारा (2) के खंड (xxi) में विनिर्दिष्ट प्रकार के विनियमों को लागू नहीं होगी ।
(3) निगम द्वारा बनाए गए विनियम भारत के राजपत्र में प्रकाशित किए जाएंगे और तदुपरि इस प्रकार प्रभावी होंगे मानो वे इस अधिनियम में अधिनियमित हों ।
(4) प्रत्येक विनियम, बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, निगम द्वारा केन्द्रीय सरकार को भेजा जाएगा और वह सरकार उसकी एक प्रति संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखवाएगी । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस विनियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह विनियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु विनियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।
(2) विशिष्टतया और पूर्वगामी शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे विनियम निम्नलिखित सभी विषयों के लिए या उनमें से किसी के लिए उपबंध कर सकेंगे, अर्थात्ः-
(i) निगम, स्थायी समिति और चिकित्सा प्रसुविधा परिषद् के अधिवेशनों का समय और स्थान और वह प्रक्रिया जिसका ऐसे अधिवेशनों में अनुसरण किया जाएगा;
(iक) वह समय जिसके भीतर और वह रीति जिससे कारखाना या स्थापन रजिस्ट्रीकृत किया जाएगा;
(ii) वे विषय जो विनिश्चय के लिए स्थायी समिति द्वारा निगम को निर्देशित किए जाएंगे;
(iii) वह रीति, जिससे इस अधिनियम के अधीन संदेय कोई अभिदान निर्धारित और संगृहीत किया जाएगा;
(iiiक) अभिदायों के विलंबित संदाय पर ब्याज की बारह प्रतिशत से उच्चतर दर;
(iv) इस अधिनियम के अधीन संदेय अभिदाय को नियत करने के प्रयोजन के लिए मजदूरी की संगणना;
(ivक) कर्मचारियों का रजिस्टर अव्यवहित नियोजक द्वारा रखा जाना;
(ivख) किसी ऐसे दिन को जिसको व्यक्ति काम करता है या छुट्टी या अवकाश पर रहता है जिसकी बाबत वह मजदूरी प्राप्त करता है अथवा किसी ऐसे दिन के लिए जिसको वह हड़ताल पर रहता है, अस्थायी निःशक्तता के लिए बीमारी-प्रसुविधा या निःशक्तता-प्रसुविधा की हकदारी;
(v) किसी नकद प्रसुविधा के लिए बीमारी और पात्रता का प्रमाणन;
(vi) यह अवधारित करने की पद्धति कि क्या बीमाकृत व्यक्ति तृतीय अनुसूची में विनिर्दिष्ट रोगों में से एक या अधिक से पीड़ित है;
(vii) किसी ऐसी प्रसुविधा का, जो नकद प्रसुविधा नहीं है, धन के रूप में मूल्य निर्धारित करना;
(viii) वह समय जिसके भीतर [और वह प्ररूप और रीति जिसमेंट प्रसुविधा के लिए कोई दावा किया जा सकेगा, और वे विशिष्टियां जो ऐसे दावे में विनिर्दिष्ट की जाएंगी;
(ix) वे परिस्थितियां जिनमें कोई ऐसा कर्मचारी, जिसे निःशक्तता प्रसुविधा मिल रही है, पदच्युत, उन्मोचित या अवनत किया जा सकेगा या अन्यथा दंडित किया जा सकेगा;
(x) वह रीति जिससे और वह स्थान जहां और वह समय जब कोई प्रसुविधा दी जाएगी;
(xi) संदेय नकद प्रसुविधा की रकम की गणना करने की पद्धति और वे परिस्थितियां जिनमें और वह विस्तार जिस तक निःशक्तता प्रसुविधा और आश्रित-प्रसुविधा का संराशीकरण अनुज्ञात किया जा सकेगा और संराशीकरण-मूल्य की गणना करने की पद्धति;
(xii) गर्भावस्था की या प्रसवावस्था की सूचना और बीमारी की सूचना और सबूत;
(xiiक) उस प्राधिकारी का विनिर्दिष्ट किया जाना जो प्रसूति-प्रसुविधा के लिए पात्रता का प्रमाण-पत्र देने के लिए सक्षम होगा;
(xiiख) किसी बीमाकृत स्त्री द्वारा यह नामनिर्देशित किए जाने की रीति कि उसकी या उसके बच्चे की मृत्यु हो जाने की दशा में प्रसूति-प्रसुविधा किसे संदत्त की जाए;
(xiiग) प्रसूति-प्रसुविधा या अतिरिक्त प्रसूति-प्रसुविधा के दावे के समर्थन में सबूत का पेश किया जाना;
(xiii) वे दशाएं जिनमें कोई प्रसुविधा निलम्बित की जा सकेगी;
(xiv) वे शर्तें जिनका किसी व्यक्ति द्वारा तब अनुपालन किया जाना है जब उसे कोई प्रसुविधा प्राप्त हो रही हो, और ऐसे व्यक्तियों की कालिक चिकित्सीय परीक्षाः
(xvi) इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए चिकित्सा-व्यवसायियों की नियुक्ति, ऐसे व्यवसायियों के कर्तव्य और चिकित्सक प्रमाणपत्रों का प्ररूप;
(xviक) वे अर्हताएं और अनुभव जो बीमारी का प्रमाणपत्र देने के लिए किसी व्यक्ति के पास होने चाहिएं;
(xviख) चिकित्सक बोर्डों और चिकित्सा अपील अधिकरणों का गठन;
(xvii) वे शास्तियां जो विनियमों के भंग के लिए कर्मचारियों पर जुर्माने द्वारा अधिपोपित की जा सकेंगी (ये शास्तियां प्रथम भंग के लिए दो दिन की मजदूरी से और किसी उत्तरवर्ती भंग के लिए तीन दिन की मजदूरी से अधिक न होंगी);
(xviiक) शास्ति के रूप में वसूल की जाने वाली नुकसानी की रकम;
(xviiख) किसी रुग्ण औद्योगिक कंपनी के संबंध में नुकसानी में कमी या उसके अधित्यजन के लिए निबंधन और शर्तें ;
(xviii) वे परिस्थितियां जिनमें और वे शर्तें, जिनके अध्यधीन किसी विनियम को शिथिल किया जा सकेगा, वह विस्तार जिस तक ऐसा शिथिलीकरण किया जा सकेगा और वह प्राधिकारी जिसके द्वारा ऐसा शिथिलीकरण अनुदत्त किया जा सकेगा;
(xix) वे विरवणियां जो प्रधान नियोजकों और अव्यवहित नियोजकों द्वारा निवेदित की जाएंगी और वे रजिस्टर या अभिलेख जो उनके द्वारा रखे जाएंगे, ऐसी विवरणियों, रजिस्टरों या अभिलेखों के प्ररूप और वे समय जब ऐसी विवरणियां निवेदित की जानी चाहिएं और वे विशिष्टियां, जो ऐसी विवरणियों, रजिस्टरों और अभिलेखों में अन्तर्विष्ट होनी चाहिएं;
(xx) वे [सामाजिक सुरक्षा अधिकारियों] और निगम के अन्य अधिकारियों और सेवकों के कर्तव्य और शक्तियां;
(xxक) अपील प्राधिकारी का गठन और निगम के पास नियोजक द्वारा जमा की गई रकम पर ब्याज ;
(xxi) [महानिदेशक और वित्त आयुक्त] से भिन्न निगम के अधिकारियों और सेवकों की भर्ती की पद्धति, वेतन और भत्ते, अनुशासन, अधिवार्षिकी प्रसुविधाएं और सेवा की अन्य शर्तें;
(xxii) वह प्रक्रिया जिसका अनुसरण निगम को अभिदाय प्रेषत करने में किया जाएगा; तथा
(xxiii) कोई ऐसा विषय, जिसकी बाबत इस अधिनियम द्वारा विनियमों का बनाया जाना अपेक्षित या अनुज्ञात है ।
(2क) पूर्व प्रकाशन की शर्त उपधारा (2) के खंड (xxi) में विनिर्दिष्ट प्रकार के विनियमों को लागू नहीं होगी ।
(3) निगम द्वारा बनाए गए विनियम भारत के राजपत्र में प्रकाशित किए जाएंगे और तदुपरि इस प्रकार प्रभावी होंगे मानो वे इस अधिनियम में अधिनियमित हों ।
(4) प्रत्येक विनियम, बनाए जाने के पश्चात् यथाशीघ्र, निगम द्वारा केन्द्रीय सरकार को भेजा जाएगा और वह सरकार उसकी एक प्रति संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिन की अवधि के लिए रखवाएगी । यह अवधि एक सत्र में अथवा दो या अधिक आनुक्रमिक सत्रों में पूरी हो सकेगी । यदि उस सत्र के या पूर्वोक्त आनुक्रमिक सत्रों के ठीक बाद के सत्र के अवसान के पूर्व दोनों सदन उस विनियम में कोई परिवर्तन करने के लिए सहमत हो जाएं तो तत्पश्चात् वह ऐसे परिवर्तित रूप में ही प्रभावी होगा । यदि उक्त अवसान के पूर्व दोनों सदन सहमत हो जाएं कि वह विनियम नहीं बनाया जाना चाहिए तो तत्पश्चात् वह निष्प्रभाव हो जाएगा । किन्तु विनियम के ऐसे परिवर्तित या निष्प्रभाव होने से उसके अधीन पहले की गई किसी बात की विधिमान्यता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।
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