ESI Act 69अध्याय V · General
धारा 69 · कारखानों आदि के स्वामी या अधिभोगी का अत्यधिक बीमारी-प्रसुविधा के लिए दायित्व
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) जहां निगम समझता है कि बीमाकृत व्यक्तियों में बीमारी का आपतन-
(i) किसी कारखाने या स्थापन में काम करने की अस्वास्थ्यकर परिस्थितियों के कारण या कारखाने या स्थापन के स्वामी या अधिभोगी द्वारा किन्हीं ऐसे स्वास्थ्य विनियमों का जो उस पर किसी अधिनियमिति द्वारा या उसके अधीन व्यादिष्ट है अनुपालन करने में उपेक्षा की जाने के कारण, अथवा
(ii) बीमाकृत व्यक्तियों के अधिभोग में के किन्हीं वासगृहों या वासों की अस्वच्छ दशाओं के कारण, जो अस्वच्छ दशाओं किन्हीं ऐसे स्वास्थय विनियमों की, जिनका अनुपालन करने के लिए वासगृहों या वासों का स्वामी किसी अधिनियमिति के द्वारा या उसके अधीन व्यादिष्ट है, उस स्वामी द्वारा उपेक्षा की जाने के कारण मानी जा सकती है,
अत्यधिक बढ़ जाता है वहां निगम, यथास्थिति, उस कारखाने या स्थापन के स्वामी या अधिभोगी को या, उन वासगृहों या वासों के स्वामी को उस अतिरिक्त व्यय की रकम का संदाय करने के लिए दावा भेज सकेगा जो बीमारी-प्रसुविधा के रूप में निगम ने उपगत किया है; और यदि दावा सहमति द्वारा निपटाया नहीं जाता तो निगम वह मामला, अपने दावे के समर्थन में कथन सहित, समुचित सरकार को निर्देशित कर सकेगा ।
(2) यदि समुचित सरकार की राय हो कि जांच के लिए प्रथमदृष्ट्या कोई मामला प्रकट होता है तो वह उस मामले में जांच करने के लिए सक्षम व्यक्ति या व्यक्तियों को नियुक्त कर सकेगी ।
(3) यदि ऐसी जांच पर जांच करने वाले व्यक्ति या व्यक्तियों को समाधान प्रदान करने वाले रूप में यह साबित हो जाता है कि बीमाकृत व्यक्तियों में अत्यधिक बीमारी का कारण, यथास्थिति, कारखाने या स्थापन के स्वामी या अधिभोगी का या, वासगृहों या वासों के स्वामी द्वारा व्यतिक्रम या उपेक्षा है तो उक्त व्यक्ति बीमारी-प्रसुविधा के रूप में उपगत अतिरिक्त व्यय की रकम को और जिस व्यक्ति या जिन व्यक्तियों द्वारा ऐसी सम्पूर्ण राशि या उनका कोई भाग निगम को दिया जाएगा उसे या उन्हें अवधारित करेगा या करेंगे ।
(4) उपधारा (3) के अधीन किया गया अवधारण इस प्रकार प्रवर्तित किया जा सकेगा मानो वह किसी वाद में सिविल न्यायालय द्वारा पारित धन के संदाय की कोई डिक्री हो ।
(5) इस धारा के प्रयोजनों के लिए या वासगृहों या वासों के “स्वामी" के अन्तर्गत स्वामी का कोई अभिकर्ता और कोई ऐसा व्यक्ति आता है, जो स्वामी के पट्टेदार के रूप में वासगृहों या वासों का भाटक संगृहित करने का हकदार है ।
(i) किसी कारखाने या स्थापन में काम करने की अस्वास्थ्यकर परिस्थितियों के कारण या कारखाने या स्थापन के स्वामी या अधिभोगी द्वारा किन्हीं ऐसे स्वास्थ्य विनियमों का जो उस पर किसी अधिनियमिति द्वारा या उसके अधीन व्यादिष्ट है अनुपालन करने में उपेक्षा की जाने के कारण, अथवा
(ii) बीमाकृत व्यक्तियों के अधिभोग में के किन्हीं वासगृहों या वासों की अस्वच्छ दशाओं के कारण, जो अस्वच्छ दशाओं किन्हीं ऐसे स्वास्थय विनियमों की, जिनका अनुपालन करने के लिए वासगृहों या वासों का स्वामी किसी अधिनियमिति के द्वारा या उसके अधीन व्यादिष्ट है, उस स्वामी द्वारा उपेक्षा की जाने के कारण मानी जा सकती है,
अत्यधिक बढ़ जाता है वहां निगम, यथास्थिति, उस कारखाने या स्थापन के स्वामी या अधिभोगी को या, उन वासगृहों या वासों के स्वामी को उस अतिरिक्त व्यय की रकम का संदाय करने के लिए दावा भेज सकेगा जो बीमारी-प्रसुविधा के रूप में निगम ने उपगत किया है; और यदि दावा सहमति द्वारा निपटाया नहीं जाता तो निगम वह मामला, अपने दावे के समर्थन में कथन सहित, समुचित सरकार को निर्देशित कर सकेगा ।
(2) यदि समुचित सरकार की राय हो कि जांच के लिए प्रथमदृष्ट्या कोई मामला प्रकट होता है तो वह उस मामले में जांच करने के लिए सक्षम व्यक्ति या व्यक्तियों को नियुक्त कर सकेगी ।
(3) यदि ऐसी जांच पर जांच करने वाले व्यक्ति या व्यक्तियों को समाधान प्रदान करने वाले रूप में यह साबित हो जाता है कि बीमाकृत व्यक्तियों में अत्यधिक बीमारी का कारण, यथास्थिति, कारखाने या स्थापन के स्वामी या अधिभोगी का या, वासगृहों या वासों के स्वामी द्वारा व्यतिक्रम या उपेक्षा है तो उक्त व्यक्ति बीमारी-प्रसुविधा के रूप में उपगत अतिरिक्त व्यय की रकम को और जिस व्यक्ति या जिन व्यक्तियों द्वारा ऐसी सम्पूर्ण राशि या उनका कोई भाग निगम को दिया जाएगा उसे या उन्हें अवधारित करेगा या करेंगे ।
(4) उपधारा (3) के अधीन किया गया अवधारण इस प्रकार प्रवर्तित किया जा सकेगा मानो वह किसी वाद में सिविल न्यायालय द्वारा पारित धन के संदाय की कोई डिक्री हो ।
(5) इस धारा के प्रयोजनों के लिए या वासगृहों या वासों के “स्वामी" के अन्तर्गत स्वामी का कोई अभिकर्ता और कोई ऐसा व्यक्ति आता है, जो स्वामी के पट्टेदार के रूप में वासगृहों या वासों का भाटक संगृहित करने का हकदार है ।
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