ESI Act 58अध्याय V · Benefits
धारा 58 · राज्य सरकार द्वारा चिकित्सीय उपचार का उपबन्ध
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) राज्य सरकार बीमाकृत व्यक्तियों और (जहां ऐसी प्रसुविधा उनके कुटुम्बों के लिए भी विस्तारित की गई है वहां) उनके कुटुम्बों के लिए राज्य में युक्तियुक्त चिकित्सीय, और शल्य तथा प्रासूतिक चिकित्सा का उपबंध करेगीः
परन्तु राज्य सरकार, निगम के अनुमोदन से, चिकित्सा व्यवयासियों के क्लिनिकों में चिकित्सीय उपचार की व्यवस्था ऐसे पैमाने पर और ऐसे निबंधनों और शर्तों पर कर सकेगी जिनका करार हो जाए ।
(2) जहां वह पाया जाए कि बीमाकृत व्यक्तियों के बीमारी-प्रसुविधा संदाय का आपतन किसी राज्य में अखिल भारतीय औसत से अधिक हो गया है, वहां ऐसे आधिक्य की राशि निगम और राज्य सरकार द्वारा ऐसे अनुपात में बांट ली जाएगी जैसा उनके बीच करार द्वारा नियत कर दिया जाएः
परन्तु निगम किसी भी मामले में उस पूरे अंश की या उसके किसी भाग की जिसका वहन राज्य सरकार द्वारा किया जाना है, वसूली का अधित्यजन कर सकेगा ।
(3) निगम उस चिकित्सीय उपचार की (जिसके अंतर्गत भवन, उपस्कर, औषधियां और कर्मचारिवृन्द का उपबंध किया जाना आता है) प्रकृति और पैमाने के बारे में, जो बीमाकृत व्यक्तियों को और (जहां ऐसी चिकित्सा-प्रसुविधा उनके कुटुम्बों के लिए भी विस्तारित की गई है वहां) उनके कुटुम्बों को उपबन्धित की जानी चाहिए, और उसके खर्च और बीमाकृत व्यक्तियों के बीमारी प्रसुविधा से आपतन में के किसी आधिक्य के निगम और राज्य सरकार के बीच बांटे जाने के लिए करार राज्य सरकार के साथ कर सकेगा ।
(4) निगम और किसी राज्य सरकार के बीच यथापूर्वोक्त करार के अभाव में उस चिकित्सीय उपचार की प्रकृति और विस्तार जिसका, राज्य सरकार द्वारा उपबंध किया जाना है, और वह अनुपात जिसमें उसके खर्चें और बीमारी-प्रसुविधा के आपतन के आधिक्य निगम और उस राज्य सरकार के बीच बांटे जाएंगे, भारत के मुख्य न्यायाधिपति द्वारा नियुक्त एक मध्यस्थ द्वारा (जो [किसी राज्य के [उच्च न्यायालय]] का न्यायाधीश हो या रह चुका हो) अवधारित किया जाएगा और मध्यस्थ का अधिनिर्णय निगम और राज्य सरकार पर आबद्धकर होगा ।
(5) राज्य सरकार, इस अधिनियम के अधीन निगम के अतिरिक्त, केन्द्रीय सरकार के पूर्व अनुमोदन से, बीमारी, प्रसूति और नियोजन क्षति की दशा में कर्मचारियों के लिए कतिपय फायदों का उपबंध करने के लिए ऐसे संगठन (चाहे जिस नाम से ज्ञात) की स्थापना कर सकेगीः
परंतु अधिनियम में राज्य सरकार के प्रति किसी निर्देश में, जब कभी ऐसा संगठन राज्य सरकार द्वारा स्थापित किया जाता है, उस संगठन के प्रति निर्देश भी सम्मिलित होगा ।
(6) उपधारा (5) में निर्दिष्ट संगठन की संरचना ऐसी होगी और वह ऐसे कृत्यों का निर्वहन, ऐसी शक्तियों का प्रयोग और ऐसे क्रियाकलाप करेगा, जो विहित किए जाएं ।
परन्तु राज्य सरकार, निगम के अनुमोदन से, चिकित्सा व्यवयासियों के क्लिनिकों में चिकित्सीय उपचार की व्यवस्था ऐसे पैमाने पर और ऐसे निबंधनों और शर्तों पर कर सकेगी जिनका करार हो जाए ।
(2) जहां वह पाया जाए कि बीमाकृत व्यक्तियों के बीमारी-प्रसुविधा संदाय का आपतन किसी राज्य में अखिल भारतीय औसत से अधिक हो गया है, वहां ऐसे आधिक्य की राशि निगम और राज्य सरकार द्वारा ऐसे अनुपात में बांट ली जाएगी जैसा उनके बीच करार द्वारा नियत कर दिया जाएः
परन्तु निगम किसी भी मामले में उस पूरे अंश की या उसके किसी भाग की जिसका वहन राज्य सरकार द्वारा किया जाना है, वसूली का अधित्यजन कर सकेगा ।
(3) निगम उस चिकित्सीय उपचार की (जिसके अंतर्गत भवन, उपस्कर, औषधियां और कर्मचारिवृन्द का उपबंध किया जाना आता है) प्रकृति और पैमाने के बारे में, जो बीमाकृत व्यक्तियों को और (जहां ऐसी चिकित्सा-प्रसुविधा उनके कुटुम्बों के लिए भी विस्तारित की गई है वहां) उनके कुटुम्बों को उपबन्धित की जानी चाहिए, और उसके खर्च और बीमाकृत व्यक्तियों के बीमारी प्रसुविधा से आपतन में के किसी आधिक्य के निगम और राज्य सरकार के बीच बांटे जाने के लिए करार राज्य सरकार के साथ कर सकेगा ।
(4) निगम और किसी राज्य सरकार के बीच यथापूर्वोक्त करार के अभाव में उस चिकित्सीय उपचार की प्रकृति और विस्तार जिसका, राज्य सरकार द्वारा उपबंध किया जाना है, और वह अनुपात जिसमें उसके खर्चें और बीमारी-प्रसुविधा के आपतन के आधिक्य निगम और उस राज्य सरकार के बीच बांटे जाएंगे, भारत के मुख्य न्यायाधिपति द्वारा नियुक्त एक मध्यस्थ द्वारा (जो [किसी राज्य के [उच्च न्यायालय]] का न्यायाधीश हो या रह चुका हो) अवधारित किया जाएगा और मध्यस्थ का अधिनिर्णय निगम और राज्य सरकार पर आबद्धकर होगा ।
(5) राज्य सरकार, इस अधिनियम के अधीन निगम के अतिरिक्त, केन्द्रीय सरकार के पूर्व अनुमोदन से, बीमारी, प्रसूति और नियोजन क्षति की दशा में कर्मचारियों के लिए कतिपय फायदों का उपबंध करने के लिए ऐसे संगठन (चाहे जिस नाम से ज्ञात) की स्थापना कर सकेगीः
परंतु अधिनियम में राज्य सरकार के प्रति किसी निर्देश में, जब कभी ऐसा संगठन राज्य सरकार द्वारा स्थापित किया जाता है, उस संगठन के प्रति निर्देश भी सम्मिलित होगा ।
(6) उपधारा (5) में निर्दिष्ट संगठन की संरचना ऐसी होगी और वह ऐसे कृत्यों का निर्वहन, ऐसी शक्तियों का प्रयोग और ऐसे क्रियाकलाप करेगा, जो विहित किए जाएं ।
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