ESI Act 68अध्याय V · General
धारा 68 · जहां प्रधान नियोजक कोई अभिदाय देने में असफल रहता है या उपेक्षा करता है वहां निगम के अधिकार
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) यदि कोई प्रधान नियोजक कोई ऐसा अभिदाय देने में असफल रहता है या उपेक्षा करता है, जिसे किसी कर्मचारी की बाबत इस अधिनियम के अधीन देने के लिए वह जिम्मेदार है, और ऐसा होने से ऐसा व्यक्ति प्रसुविधा के लिए निर्हकित हो जाता है या किसी निचले पैमाने पर प्रसुविधा का हकदार हो जाता है तो, निगम यह समाधान हो जाने पर कि अभिदाय प्रधान नियोजक द्वारा किया जाना चाहिए था, उस प्रसुविधा का उस दर पर संदाय कर सकेगा जिसका हकदार वह उस दशा में होता जिसमें कि वह असफलता या उपेक्षा न हुई होती, और निगम प्रधान नियोजक से या तो-
(i) निगम द्वारा उक्त व्यक्ति को दी गई प्रसुविधा की रकम के और उस प्रसुविधा की रकम को, जो उन अभिदायों के आधार पर संदेय होती, जो नियोजक द्वारा वस्तुतः दिए गए थे, बीच का अन्तर, अथवा
(ii) जिस अभिदाय को देने में नियोजक असफल रहा है या उसने उपेक्षा की है उसकी दुगनी रकम,
दोनों में से जो भी अधिक हो, वसूल करने का हकदार होगा ।
(2) इस धारा के अधीन [या धारा 45ग से धारा 45झ तक के अधीन] वसूलीय रकम ऐसे वसूल की जा सकेगी मानो वह भू-राजस्व की बकाया हो ।
(i) निगम द्वारा उक्त व्यक्ति को दी गई प्रसुविधा की रकम के और उस प्रसुविधा की रकम को, जो उन अभिदायों के आधार पर संदेय होती, जो नियोजक द्वारा वस्तुतः दिए गए थे, बीच का अन्तर, अथवा
(ii) जिस अभिदाय को देने में नियोजक असफल रहा है या उसने उपेक्षा की है उसकी दुगनी रकम,
दोनों में से जो भी अधिक हो, वसूल करने का हकदार होगा ।
(2) इस धारा के अधीन [या धारा 45ग से धारा 45झ तक के अधीन] वसूलीय रकम ऐसे वसूल की जा सकेगी मानो वह भू-राजस्व की बकाया हो ।
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