ESI Act 45Gअध्याय IV · Contributions
धारा 45G · वसूली के अन्य ढंग
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) धारा 45ग के अधीन वसूली अधिकारी को प्रमाणपत्र जारी किए जाने पर भी, महानिदेशक या निगम द्वारा प्राधिकृत अन्य कोई अधिकारी इस धारा में उपबंधित किसी एक या अधिक ढंग से रकम वसूल कर सकेगा ।
(2) यदि किसी व्यक्ति से किसी कारखाने या स्थापन या, यथास्थिति, प्रधान या अव्यवहित नियोजक को, जिस पर बकाया है, कोई रकम शोध्य है तो महानिदेशक या निगम द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत्त कोई अन्य अधिकारी ऐसे व्यक्ति से इस अधिनियम के अधीन ऐसे कारखाने या स्थापन या, यथास्थिति, प्रधान या अव्यवहित नियोजक से शोध्य बकाया की उक्त रकम से ऐसे कटौती करने की अपेक्षा कर सकेगा और ऐसा व्यक्ति ऐसी किसी अध्यपेक्षा का अनुपालन करेगा तथा इस प्रकार कटौती की गई राशि का संदाय निगम के खाते में करेगाः
परन्तु इस उपधारा की कोई बात सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) की धारा 60 के अधीन सिविल न्यायालय की डिक्री के निष्पादन में कुर्की से छूटप्राप्त रकम के किसी भाग को लागू नहीं होगी ।
(3) (i) महानिदेशक या निगम द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत कोई अन्य अधिकारी, किसी भी समय या समय-समय पर, लिखित सूचना द्वारा, किसी ऐसे व्यक्ति से, जिससे धन, कारखाने या स्थापन या, यथास्थिति, प्रधान या अव्यवहित नियोजक को शोध्य है या, शोध्य हो सकता है, या किसी ऐसे व्यक्ति से, जो कारखाने या स्थापन या, यथास्थिति, प्रधान या अव्यवहित नियोजक के लिए उसके मद्धे धन धारण करता है या बाद में धन धारण करे, यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह महानिदेशक को या तो धन के शोध्य होने पर तत्काल या धारण किए जाने पर या सूचना में विनिर्दिष्ट समय पर या उसके भीतर (जो धन शोध्य होने या धारण करने के पूर्व न हो) उतने धन का संदाय करे जितना बकाया के सम्बन्ध में कारखाने या स्थापन या, यथास्थिति, प्रधान या अव्यवहित नियोजक से शोध्य रकम का संदाय करने के लिए पर्याप्त हैं या जब वह उस रकम के बराबर है या उससे कम है तो संपूर्ण धन का संदाय करे ।
(ii) इस उपधारा के अधीन सूचना किसी ऐसे व्यक्ति को जारी की जा सकेगी जो किसी अन्य व्यक्ति के साथ संयुक्ततः प्रधान या अव्यवहित नियोजक के लिए या उसके मद्धे कोई धन धारण करता है या बाद में धारण करे और इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, ऐसे खाते में संयुक्त धारकों के अंशों के बारे में, जब तक कि तत्प्रतिकूल साबित न हो, यह उपधारण की जाएगी कि वे बराबर हैं ।
(iii) सूचना की एक प्रति, प्रधान या अव्यवहित नियोजक को, यथास्थिति, महानिदेशक को या इस प्रकार प्राधिकृत अधिकारी को ज्ञात उसके अन्तिम पते पर और संयुक्त खाता होने की दशा में सभी संयुक्त धारकों को या महानिदेशक को या इस प्रकार प्राधिकृत अधिकारी को ज्ञात उनके अन्तिम पतों पर अग्रेषित की जाएगी ।
(iv) इस उपधारा में जैसा अन्यथा उपबन्धित है, उसके सिवाय, ऐसा प्रत्येक व्यक्ति जिसे इस उपधारा के अधीन सूचना दी जाती है, ऐसी सूचना का अनुपालन करने के लिए आबद्ध होगा और विशिष्टतया जहां ऐसी कोई सूचना किसी डाकघर, बैंक या बीमाकर्ता को जारी की जाती है वहां किसी नियम, पद्धति या अध्यपेक्षा के तत्प्रतिकूल होने पर भी, किसी पासबुक, निक्षेप रसीद, पालिसी या किसी अन्य दस्तावेज का, संदाय के पूर्व किसी प्रविष्टि, पृष्ठांकन या ऐसे ही किसी प्रयोजन के लिए पेश करना आवश्यक नहीं होगा ।
(v) किसी ऐसी सम्पत्ति के संबंध में, जिसके संबंध में इस उपधारा के अधीन कोई सूचना जारी की गई है, कोई दावा, जो सूचना की तारीख के पश्चात् उद्भूत होता है, सूचना में अन्तर्विष्ट किसी मांग के विरुद्ध शून्य होगा ।
(vi) जहां कोई ऐसा व्यक्ति, जिसे इस उपधारा के अधीन कोई सूचना भेजी गई है, शपथ पर यह कथन करके उसके संबंध में आक्षेप करता है कि मांग की गई राशि या उसका कोई भाग प्रधान या अव्यवहित नियोजक को देय नहीं है या वह प्रधान या अव्यवहित नियोजक के लिए या उसके मद्धे कोई धन धारण नहीं करता है वहां इस धारा की किसी बात से यह नहीं समझा जाएगा कि वह ऐसे व्यक्ति से, यथास्थिति, ऐसी कोई राशि या उसका भार संदत्त करने की अपेक्षा करती है, किन्तु यदि यह पता चलता है कि ऐसा कथन किसी तात्त्विक विशिष्टि में मिथ्या था तो ऐसा व्यक्ति, महानिदेशक या इस प्रकार प्राधिकृत अधिकारी के प्रति, सूचना की तारीख को, प्रधान या अव्यवहित नियोजक के प्रति स्वयं अपने दायित्व की सीमा तक, या इस अधिनियम के अधीन देय किसी राशि के लिए प्रधान या अव्यवहित नियोजक के दायित्व की सीमा तक, इनमें से जो भी कम हो, व्यक्तिगत रूप से दायी होगा ।
(vii) महानिदेशक या इस प्रकार प्राधिकृत अधिकारी किसी भी समय या समय-समय पर इस उपधारा के अधीन जारी की गई किसी सूचना को संशोधित या प्रतिसहृंत कर सकेगा या ऐसी सूचना के अनुसरण में कोई संदाय करने के लिए समय बढ़ा सकेगा ।
(viii) महानिदेशक या इस प्रकार प्राधिकृत अधिकारी इस उपधारा के अधीन जारी की गई सूचना के अनुपालन में संदत्त की गई किसी रकम की रसीद देगा और इस प्रकार संदाय करने वाला व्यक्ति, इस प्रकार संदत्त रकम के परिमाण तक प्रधान या अव्यवहित नियोजक के प्रति अपने दायित्व से पूर्णतः उन्मोचित हो जाएगा ।
(ix) इस उपधारा के अधीन सूचना प्राप्त करने के पश्चात् प्रधान या अव्यवहित नियोजक के प्रति किसी दायित्व का उन्मोचन करने वाला कोई व्यक्ति, इस प्रकार उन्मोचित प्रधान या अव्यवहित नियोजक के प्रति अपने स्वयं के दायित्व के विस्तार तक या इस अधिनियम के अधीन देय किसी राशि के लिए प्रधान या अव्यवहित नियोजक के दायित्व के विस्तार तक, इनमें से जो भी कम हो, महानिदेशक या इस प्रकार प्राधिकृत अधिकारी के प्रति व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होगा ।
(x) यदि वह व्यक्ति, जिसे इस उपधारा के अधीन सूचना भेजी गई है, महानिदेशक या इस प्रकार प्राधिकृत अधिकारी को उसके अनुसरण में संदाय करने में असफल रहता है, तो उसे सूचना में विनिर्दिष्ट रकम की बाबत व्यतिक्रमी प्रधान या अव्यवहित नियोजक समझा जाएगा और उस रकम की वसूली के लिए धारा 45ग से धारा 45च में उपबन्धित रीति से उसके विरुद्ध आगे कार्यवाही की जा सकेगी मानो वह उससे देय बकाया रकम है और सूचना का वही प्रभाव होगा जैसी वसूली अधिकारी द्वारा धारा 45ग के अधीन अपनी शक्तियों के प्रयोग में ऋण की कुर्की का होता है ।
(4) महानिदेशक या निगम द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत अधिकारी उस न्यायालय को, जिसकी अभिरक्षा में प्रधान या अव्यवहित नियोजक का धन है, ऐसे धन की समस्त रकम का या यदि वह देय रकम से अधिक है तो उतनी रकम का जितना देय रकम का उन्मोचित करने के लिए पर्याप्त है, उसे संदाय करने के लिए आवेदन कर सकेगा ।
(5) यदि केन्द्रीय सरकार द्वारा, साधारण या विशेष आदेश द्वारा, महानिदेशक या निगम के किसी अधिकारी को इस प्रकार प्राधिकृत किया गया हो तो वह, किसी कारखाने या स्थापन से, या, यथास्थिति, प्रधान या अव्यवहित नियोजक से देय रकम की किसी बकाया की वसूली उसकी जंगम संपत्ति के करस्थम् और विक्रय द्वारा आय-कर अधिनियम, 1961 (1961 का 43) की तीसरी अनुसूची में अधिकथित रीति से कर सकेगा ।
(2) यदि किसी व्यक्ति से किसी कारखाने या स्थापन या, यथास्थिति, प्रधान या अव्यवहित नियोजक को, जिस पर बकाया है, कोई रकम शोध्य है तो महानिदेशक या निगम द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत्त कोई अन्य अधिकारी ऐसे व्यक्ति से इस अधिनियम के अधीन ऐसे कारखाने या स्थापन या, यथास्थिति, प्रधान या अव्यवहित नियोजक से शोध्य बकाया की उक्त रकम से ऐसे कटौती करने की अपेक्षा कर सकेगा और ऐसा व्यक्ति ऐसी किसी अध्यपेक्षा का अनुपालन करेगा तथा इस प्रकार कटौती की गई राशि का संदाय निगम के खाते में करेगाः
परन्तु इस उपधारा की कोई बात सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) की धारा 60 के अधीन सिविल न्यायालय की डिक्री के निष्पादन में कुर्की से छूटप्राप्त रकम के किसी भाग को लागू नहीं होगी ।
(3) (i) महानिदेशक या निगम द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत कोई अन्य अधिकारी, किसी भी समय या समय-समय पर, लिखित सूचना द्वारा, किसी ऐसे व्यक्ति से, जिससे धन, कारखाने या स्थापन या, यथास्थिति, प्रधान या अव्यवहित नियोजक को शोध्य है या, शोध्य हो सकता है, या किसी ऐसे व्यक्ति से, जो कारखाने या स्थापन या, यथास्थिति, प्रधान या अव्यवहित नियोजक के लिए उसके मद्धे धन धारण करता है या बाद में धन धारण करे, यह अपेक्षा कर सकेगा कि वह महानिदेशक को या तो धन के शोध्य होने पर तत्काल या धारण किए जाने पर या सूचना में विनिर्दिष्ट समय पर या उसके भीतर (जो धन शोध्य होने या धारण करने के पूर्व न हो) उतने धन का संदाय करे जितना बकाया के सम्बन्ध में कारखाने या स्थापन या, यथास्थिति, प्रधान या अव्यवहित नियोजक से शोध्य रकम का संदाय करने के लिए पर्याप्त हैं या जब वह उस रकम के बराबर है या उससे कम है तो संपूर्ण धन का संदाय करे ।
(ii) इस उपधारा के अधीन सूचना किसी ऐसे व्यक्ति को जारी की जा सकेगी जो किसी अन्य व्यक्ति के साथ संयुक्ततः प्रधान या अव्यवहित नियोजक के लिए या उसके मद्धे कोई धन धारण करता है या बाद में धारण करे और इस उपधारा के प्रयोजनों के लिए, ऐसे खाते में संयुक्त धारकों के अंशों के बारे में, जब तक कि तत्प्रतिकूल साबित न हो, यह उपधारण की जाएगी कि वे बराबर हैं ।
(iii) सूचना की एक प्रति, प्रधान या अव्यवहित नियोजक को, यथास्थिति, महानिदेशक को या इस प्रकार प्राधिकृत अधिकारी को ज्ञात उसके अन्तिम पते पर और संयुक्त खाता होने की दशा में सभी संयुक्त धारकों को या महानिदेशक को या इस प्रकार प्राधिकृत अधिकारी को ज्ञात उनके अन्तिम पतों पर अग्रेषित की जाएगी ।
(iv) इस उपधारा में जैसा अन्यथा उपबन्धित है, उसके सिवाय, ऐसा प्रत्येक व्यक्ति जिसे इस उपधारा के अधीन सूचना दी जाती है, ऐसी सूचना का अनुपालन करने के लिए आबद्ध होगा और विशिष्टतया जहां ऐसी कोई सूचना किसी डाकघर, बैंक या बीमाकर्ता को जारी की जाती है वहां किसी नियम, पद्धति या अध्यपेक्षा के तत्प्रतिकूल होने पर भी, किसी पासबुक, निक्षेप रसीद, पालिसी या किसी अन्य दस्तावेज का, संदाय के पूर्व किसी प्रविष्टि, पृष्ठांकन या ऐसे ही किसी प्रयोजन के लिए पेश करना आवश्यक नहीं होगा ।
(v) किसी ऐसी सम्पत्ति के संबंध में, जिसके संबंध में इस उपधारा के अधीन कोई सूचना जारी की गई है, कोई दावा, जो सूचना की तारीख के पश्चात् उद्भूत होता है, सूचना में अन्तर्विष्ट किसी मांग के विरुद्ध शून्य होगा ।
(vi) जहां कोई ऐसा व्यक्ति, जिसे इस उपधारा के अधीन कोई सूचना भेजी गई है, शपथ पर यह कथन करके उसके संबंध में आक्षेप करता है कि मांग की गई राशि या उसका कोई भाग प्रधान या अव्यवहित नियोजक को देय नहीं है या वह प्रधान या अव्यवहित नियोजक के लिए या उसके मद्धे कोई धन धारण नहीं करता है वहां इस धारा की किसी बात से यह नहीं समझा जाएगा कि वह ऐसे व्यक्ति से, यथास्थिति, ऐसी कोई राशि या उसका भार संदत्त करने की अपेक्षा करती है, किन्तु यदि यह पता चलता है कि ऐसा कथन किसी तात्त्विक विशिष्टि में मिथ्या था तो ऐसा व्यक्ति, महानिदेशक या इस प्रकार प्राधिकृत अधिकारी के प्रति, सूचना की तारीख को, प्रधान या अव्यवहित नियोजक के प्रति स्वयं अपने दायित्व की सीमा तक, या इस अधिनियम के अधीन देय किसी राशि के लिए प्रधान या अव्यवहित नियोजक के दायित्व की सीमा तक, इनमें से जो भी कम हो, व्यक्तिगत रूप से दायी होगा ।
(vii) महानिदेशक या इस प्रकार प्राधिकृत अधिकारी किसी भी समय या समय-समय पर इस उपधारा के अधीन जारी की गई किसी सूचना को संशोधित या प्रतिसहृंत कर सकेगा या ऐसी सूचना के अनुसरण में कोई संदाय करने के लिए समय बढ़ा सकेगा ।
(viii) महानिदेशक या इस प्रकार प्राधिकृत अधिकारी इस उपधारा के अधीन जारी की गई सूचना के अनुपालन में संदत्त की गई किसी रकम की रसीद देगा और इस प्रकार संदाय करने वाला व्यक्ति, इस प्रकार संदत्त रकम के परिमाण तक प्रधान या अव्यवहित नियोजक के प्रति अपने दायित्व से पूर्णतः उन्मोचित हो जाएगा ।
(ix) इस उपधारा के अधीन सूचना प्राप्त करने के पश्चात् प्रधान या अव्यवहित नियोजक के प्रति किसी दायित्व का उन्मोचन करने वाला कोई व्यक्ति, इस प्रकार उन्मोचित प्रधान या अव्यवहित नियोजक के प्रति अपने स्वयं के दायित्व के विस्तार तक या इस अधिनियम के अधीन देय किसी राशि के लिए प्रधान या अव्यवहित नियोजक के दायित्व के विस्तार तक, इनमें से जो भी कम हो, महानिदेशक या इस प्रकार प्राधिकृत अधिकारी के प्रति व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होगा ।
(x) यदि वह व्यक्ति, जिसे इस उपधारा के अधीन सूचना भेजी गई है, महानिदेशक या इस प्रकार प्राधिकृत अधिकारी को उसके अनुसरण में संदाय करने में असफल रहता है, तो उसे सूचना में विनिर्दिष्ट रकम की बाबत व्यतिक्रमी प्रधान या अव्यवहित नियोजक समझा जाएगा और उस रकम की वसूली के लिए धारा 45ग से धारा 45च में उपबन्धित रीति से उसके विरुद्ध आगे कार्यवाही की जा सकेगी मानो वह उससे देय बकाया रकम है और सूचना का वही प्रभाव होगा जैसी वसूली अधिकारी द्वारा धारा 45ग के अधीन अपनी शक्तियों के प्रयोग में ऋण की कुर्की का होता है ।
(4) महानिदेशक या निगम द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत अधिकारी उस न्यायालय को, जिसकी अभिरक्षा में प्रधान या अव्यवहित नियोजक का धन है, ऐसे धन की समस्त रकम का या यदि वह देय रकम से अधिक है तो उतनी रकम का जितना देय रकम का उन्मोचित करने के लिए पर्याप्त है, उसे संदाय करने के लिए आवेदन कर सकेगा ।
(5) यदि केन्द्रीय सरकार द्वारा, साधारण या विशेष आदेश द्वारा, महानिदेशक या निगम के किसी अधिकारी को इस प्रकार प्राधिकृत किया गया हो तो वह, किसी कारखाने या स्थापन से, या, यथास्थिति, प्रधान या अव्यवहित नियोजक से देय रकम की किसी बकाया की वसूली उसकी जंगम संपत्ति के करस्थम् और विक्रय द्वारा आय-कर अधिनियम, 1961 (1961 का 43) की तीसरी अनुसूची में अधिकथित रीति से कर सकेगा ।
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