ESI Act 77अध्याय VI · Adjudication of Dispute and Claims
धारा 77 · कार्यवाहियों का प्रारम्भ
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) कर्मचारी बीमा न्यायालय के समक्ष कार्यवाहियां आवेदन द्वारा प्रारम्भ होंगी ।
(1क) ऐसा हर आवेदन उस तारीख से तीन वर्ष की कालावधि के भीतर किया जाएगा जिस तारीख को वाद-हेतुक पैदा हुआ था ।
स्पष्टीकरण-इस उपधारा के प्रयोजन के लिए,-
(क) प्रसुविधा के दावे की बाबत वाद-हेतुक तब के सिवाय पैदा हुआ नहीं समझा जाएगा जब बीमाकृत व्यक्ति, या आश्रित-प्रसुविधा की दशा में बीमाकृत व्यक्ति के आश्रित उस प्रसुविधा का दावा, दावे के शोध्य हो जाने के पश्चात् बारह मास की कालावधि के भीतर या ऐसी अतिरिक्त कालावधि के भीतर, जैसी कर्मचारी बीमा न्यायालय उन आधारों पर अनुज्ञात करे जो उसे युक्तियुक्त प्रतीत हों, उस निमित्त बनाए गए विनियमों के अनुसार नहीं करता या नहीं करते;
(ख) प्रधान नियोजक से अभिदाय (जिसके अंतर्गत ब्याज और नुकसानी भी है) वसूल करने के लिए निगम द्वारा किए गए दावे की बाबत वाद-हेतू तक, उस तारीख को जिसको ऐसा दावा प्रथम बार निगम द्वारा किया जाता है, उद्भूत हुआ समझा जाएगाः
परंतु कोई भी दावा निगम द्वारा उस कालावधि के जिससे दावा संबंधित है, पांच वर्ष के पश्चात् नहीं किया जाएगाः
(ग) किसी अव्यवहित नियोजक से अभिदाय वसूल करने के लिए प्रधान नियोजक द्वारा किए गए दावे की बाबन वाद-हेतुक उस तारीख तक जिस तक अभिदाय संदत्त किए जाने का साक्ष्य निगम द्वारा विनियमों के अधीन प्राप्त किया जाना नियत है, उद्भूत हुआ नहीं समझा जाएगा ।
(2) हर ऐसा आवेदन ऐसे प्ररूप में होगा जैसा और उसमें ऐसी विशिष्टियां अंतर्विष्ट होंगी और उसके साथ ऐसी फीस होगी, यदि कोई हो, जैसी निगम के परामर्श से राज्य सरकार द्वारा बनाए गए नियमों द्वारा विहित की जाएं ।
(1क) ऐसा हर आवेदन उस तारीख से तीन वर्ष की कालावधि के भीतर किया जाएगा जिस तारीख को वाद-हेतुक पैदा हुआ था ।
स्पष्टीकरण-इस उपधारा के प्रयोजन के लिए,-
(क) प्रसुविधा के दावे की बाबत वाद-हेतुक तब के सिवाय पैदा हुआ नहीं समझा जाएगा जब बीमाकृत व्यक्ति, या आश्रित-प्रसुविधा की दशा में बीमाकृत व्यक्ति के आश्रित उस प्रसुविधा का दावा, दावे के शोध्य हो जाने के पश्चात् बारह मास की कालावधि के भीतर या ऐसी अतिरिक्त कालावधि के भीतर, जैसी कर्मचारी बीमा न्यायालय उन आधारों पर अनुज्ञात करे जो उसे युक्तियुक्त प्रतीत हों, उस निमित्त बनाए गए विनियमों के अनुसार नहीं करता या नहीं करते;
(ख) प्रधान नियोजक से अभिदाय (जिसके अंतर्गत ब्याज और नुकसानी भी है) वसूल करने के लिए निगम द्वारा किए गए दावे की बाबत वाद-हेतू तक, उस तारीख को जिसको ऐसा दावा प्रथम बार निगम द्वारा किया जाता है, उद्भूत हुआ समझा जाएगाः
परंतु कोई भी दावा निगम द्वारा उस कालावधि के जिससे दावा संबंधित है, पांच वर्ष के पश्चात् नहीं किया जाएगाः
(ग) किसी अव्यवहित नियोजक से अभिदाय वसूल करने के लिए प्रधान नियोजक द्वारा किए गए दावे की बाबन वाद-हेतुक उस तारीख तक जिस तक अभिदाय संदत्त किए जाने का साक्ष्य निगम द्वारा विनियमों के अधीन प्राप्त किया जाना नियत है, उद्भूत हुआ नहीं समझा जाएगा ।
(2) हर ऐसा आवेदन ऐसे प्ररूप में होगा जैसा और उसमें ऐसी विशिष्टियां अंतर्विष्ट होंगी और उसके साथ ऐसी फीस होगी, यदि कोई हो, जैसी निगम के परामर्श से राज्य सरकार द्वारा बनाए गए नियमों द्वारा विहित की जाएं ।
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