WLP Act 66अध्याय VII · Miscellaneous
धारा 66 · निरसन और व्यावृत्तियां
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) इस अधिनियम के प्रारम्भ से ही इस अधिनियम में अन्तर्विष्ट किसी विषय से सम्बद्ध प्रत्येक अन्य अधिनियम जो किसी राज्य में प्रवृत्त है वहां तक जहां तक कि वह अधिनियम या उसका कोई उपबंध इस अधिनियम या इस अधिनियम के किसी उपबंध का तत्स्थानी या उसके विरुद्ध है, निरसित हो जाएगा :
परन्तु ऐसा निरसन-
(i) इस प्रकार निरसित किसी अधिनियम के पूर्व-प्रवर्तन पर अथवा इसके अधीन सम्यक्रूप से की गई या सहन की गई किसी भी बात पर प्रभाव नहीं डालेगा;
(ii) इस प्रकार निरसित किसी अधिनियम के अधीन अर्जित, प्रोद्भूत या उपगत किसी अधिकार, विशेषाधिकार, बाध्यता या दायित्व पर प्रभाव नहीं डालेगा;
(iii) इस प्रकार निरसित अधिनियम के विरुद्ध किए गए किसी अपराध की बाबत किसी शास्ति, समपहरण या दण्ड पर प्रभाव नहीं डालेगा; अथवा
(iv) यथा पूर्वोक्त किसी ऐसे अधिकार, विशेषाधिकार, बाध्यता, दायित्व, शास्ति, समपहरण या दण्ड के बारे में किसी अन्वेषण, विधिक कार्यवाही या उपचार पर प्रभाव नहीं डालेगा;
तथा ऐसा कोई अन्वेषण, विधिक कार्यवाही या उपचार ऐसे संस्थित किया जा सकेगा, चालू रखा जा सकेगा या प्रवर्तित किया जा सकेगा, और ऐसी कोई शास्ति, समपहरण और दंड ऐसे अधिरोपित किया जा सकेगा, मानो पूर्वोक्त अधिनियम निरसित नहीं किया गया है ।
(2) ऐसे निरसन के होते हुए भी,-
(क) इस प्रकार निरसित अधिनियम के अधीन की गई कोई बात या कार्रवाई जिसके अन्तर्गत जारी की कोई अधिसूचना, आदेश, प्रमाणपत्र, सूचना, रसीद, किया गया आवेदन या दी गई अनुज्ञा भी है, जो इस अधिनियम के उपबंधों से असंगत नहीं हैं, इस अधिनियम के तत्स्थानी उपबंधों के अधीन वैसे ही की गई समझी जाएगी, मानो यह अधिनियम उस समय प्रवृत्त था जब ऐसी बात का कार्रवाई की गई थी, तथा वह तब तक प्रवृत्त रहेगी जब तक कि वह इस अधिनियम के अधीन की गई किसी बात या कार्रवाई द्वारा अतिष्ठित नहीं कर दी जाती;
(ख) इस प्रकार निरसित तथा इस अधिनियम के प्रारम्भ के ठीक पूर्व प्रवृत्त किसी अधिनियम के अधीन दी गई प्रत्येक अनुज्ञप्ति, इस अधिनियम के तत्स्थानी उपबंधों के अधीन दी गई समझी जाएगी, तथा इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन रहते हुए, उस अवधि के अनवसित भाग के लिए जिसके लिए अनुज्ञप्ति दी गई थी, प्रवृत्त बनी रहेगी ।
(3) शंकाओं को दूर करने के लिए इसके द्वारा घोषित किया जाता है कि उपधारा (1) के अधीन निरसित किसी अधिनियम के अधीन किसी राज्य सरकार द्वारा घोषित किसी अभयारण्य या राष्ट्रीय उपवन की बाबत यह समझा जाएगा कि वह इस अधिनियम के अधीन राज्य सरकार द्वारा घोषित, यथास्थिति, अभयारण्य या राष्ट्रीय उपवन है, तथा जहां किसी ऐसे राष्ट्रीय उपवन में किसी भूमि में या उस पर कोई अधिकार इस अधिनियम के प्रारम्भ पर या उसके पूर्व उक्त अधिनियम के अधीन निर्वापित नहीं हुआ था वहां ऐसे अधिकारों का निर्वापन इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार किया जाएगा ।
(4) शंकाओं के निवारण के लिए यह और घोषित किया जाता है कि जहां वन्य जीव (संरक्षण) संशोधन अधिनियम, 1991 के प्रारंभ की तारीख को धारा 19 से धारा 25 के (जिसमें ये दोनों धाराएं भी सम्मिलित हैं) किसी उपबंध के अधीन कोई कार्यवाही लंबित है, वहां ऐसे प्रारंभ की तारीख से पूर्व अभयारण्य के रूप में धारा 18 के अधीन घोषित किसी अभयारण्य के भीतर समाविष्ट किसी आरक्षित वन या राज्यक्षेत्रीय सागरखंड के बारे में यह समझा जाएगा कि वह धारा 26क के अधीन घोषित अभयारण्य है ।
परन्तु ऐसा निरसन-
(i) इस प्रकार निरसित किसी अधिनियम के पूर्व-प्रवर्तन पर अथवा इसके अधीन सम्यक्रूप से की गई या सहन की गई किसी भी बात पर प्रभाव नहीं डालेगा;
(ii) इस प्रकार निरसित किसी अधिनियम के अधीन अर्जित, प्रोद्भूत या उपगत किसी अधिकार, विशेषाधिकार, बाध्यता या दायित्व पर प्रभाव नहीं डालेगा;
(iii) इस प्रकार निरसित अधिनियम के विरुद्ध किए गए किसी अपराध की बाबत किसी शास्ति, समपहरण या दण्ड पर प्रभाव नहीं डालेगा; अथवा
(iv) यथा पूर्वोक्त किसी ऐसे अधिकार, विशेषाधिकार, बाध्यता, दायित्व, शास्ति, समपहरण या दण्ड के बारे में किसी अन्वेषण, विधिक कार्यवाही या उपचार पर प्रभाव नहीं डालेगा;
तथा ऐसा कोई अन्वेषण, विधिक कार्यवाही या उपचार ऐसे संस्थित किया जा सकेगा, चालू रखा जा सकेगा या प्रवर्तित किया जा सकेगा, और ऐसी कोई शास्ति, समपहरण और दंड ऐसे अधिरोपित किया जा सकेगा, मानो पूर्वोक्त अधिनियम निरसित नहीं किया गया है ।
(2) ऐसे निरसन के होते हुए भी,-
(क) इस प्रकार निरसित अधिनियम के अधीन की गई कोई बात या कार्रवाई जिसके अन्तर्गत जारी की कोई अधिसूचना, आदेश, प्रमाणपत्र, सूचना, रसीद, किया गया आवेदन या दी गई अनुज्ञा भी है, जो इस अधिनियम के उपबंधों से असंगत नहीं हैं, इस अधिनियम के तत्स्थानी उपबंधों के अधीन वैसे ही की गई समझी जाएगी, मानो यह अधिनियम उस समय प्रवृत्त था जब ऐसी बात का कार्रवाई की गई थी, तथा वह तब तक प्रवृत्त रहेगी जब तक कि वह इस अधिनियम के अधीन की गई किसी बात या कार्रवाई द्वारा अतिष्ठित नहीं कर दी जाती;
(ख) इस प्रकार निरसित तथा इस अधिनियम के प्रारम्भ के ठीक पूर्व प्रवृत्त किसी अधिनियम के अधीन दी गई प्रत्येक अनुज्ञप्ति, इस अधिनियम के तत्स्थानी उपबंधों के अधीन दी गई समझी जाएगी, तथा इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन रहते हुए, उस अवधि के अनवसित भाग के लिए जिसके लिए अनुज्ञप्ति दी गई थी, प्रवृत्त बनी रहेगी ।
(3) शंकाओं को दूर करने के लिए इसके द्वारा घोषित किया जाता है कि उपधारा (1) के अधीन निरसित किसी अधिनियम के अधीन किसी राज्य सरकार द्वारा घोषित किसी अभयारण्य या राष्ट्रीय उपवन की बाबत यह समझा जाएगा कि वह इस अधिनियम के अधीन राज्य सरकार द्वारा घोषित, यथास्थिति, अभयारण्य या राष्ट्रीय उपवन है, तथा जहां किसी ऐसे राष्ट्रीय उपवन में किसी भूमि में या उस पर कोई अधिकार इस अधिनियम के प्रारम्भ पर या उसके पूर्व उक्त अधिनियम के अधीन निर्वापित नहीं हुआ था वहां ऐसे अधिकारों का निर्वापन इस अधिनियम के उपबंधों के अनुसार किया जाएगा ।
(4) शंकाओं के निवारण के लिए यह और घोषित किया जाता है कि जहां वन्य जीव (संरक्षण) संशोधन अधिनियम, 1991 के प्रारंभ की तारीख को धारा 19 से धारा 25 के (जिसमें ये दोनों धाराएं भी सम्मिलित हैं) किसी उपबंध के अधीन कोई कार्यवाही लंबित है, वहां ऐसे प्रारंभ की तारीख से पूर्व अभयारण्य के रूप में धारा 18 के अधीन घोषित किसी अभयारण्य के भीतर समाविष्ट किसी आरक्षित वन या राज्यक्षेत्रीय सागरखंड के बारे में यह समझा जाएगा कि वह धारा 26क के अधीन घोषित अभयारण्य है ।
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