WLP Act 6अध्याय II · Authorities to Be Appointed or Constitutes Under the Act
धारा 6 · राज्य वन्य जीव बोर्ड का गठन
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) राज्य सरकार वन्य जीव (संरक्षण) संशोधन अधिनियम, 2002 के प्रारंभ की तारीख से छह मास की अवधि के भीतर एक राज्य वन्य जीव बोर्ड का गठन करेगी, जो निम्नलिखित सदस्यों से मिलकर बनेगा, अर्थात् :-
(क) राज्य का मुख्यमंत्री और संघ राज्यक्षेत्र की दशा में, यथास्थिति, मुख्यमंत्री या प्रशासक-अध्यक्ष;
(ख) वन और वन्य जीव का भारसाधक मंत्री-उपाध्यक्ष;
(ग) राज्य विधान-मंडल के तीन सदस्य या विधान-मंडल वाले संघ राज्यक्षेत्र की दशा में, उस संघ राज्यक्षेत्र की विधान सभा के दो सदस्य;
(घ) राज्य सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट किए जाने वाले वन्य जीव से संबंधित गैर-सरकारी संगठनों का प्रतिनिधित्व करने के लिए तीन व्यक्ति;
(ङ) राज्य सरकार द्वारा सुविख्यात संरक्षण विज्ञानियों, पारिस्थितिकी विज्ञानियों और पर्यावरण विज्ञानियों, में से जिनके अन्तर्गत अनुसूचित जनजाति के कम से कम दो प्रतिनिधि होंगे नामनिर्दिष्ट किए जाने वाले दस व्यक्ति;
(च) यथास्थिति, राज्य सरकार या संघ राज्यक्षेत्र सरकार का सचिव जो वन और वन्य जीव का भारसाधक हो;
(छ) राज्य वन विभाग का भारसाधक अधिकारी;
(ज) राज्य सरकार के जनजाति कल्याण विभाग का सचिव;
(झ) प्रबंध निदेशक, राज्य पर्यटन विकास निगम;
(ञ) राज्य के पुलिस विभाग का एक अधिकारी जो महानिरीक्षक की पंक्ति से नीचे का न हो;
(ट) केन्द्रीय सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट किया जाने वाला सशस्त्र बलों का एक प्रतिनिधि जो ब्रिगेडियर की पंक्ति से नीचे का न हो;
(ठ) निदेशक,राज्य पशुपालन विभाग;
(ड) निदेशक, राज्य मत्स्य विभाग;
(ढ) निदेशक, वन्य जीव परिरक्षण द्वारा नामनिर्दिष्ट किया जाने वाला एक अधिकारी;
(ण) भारतीय वन्य संस्थान, देहरादून का एक प्रतिनिधि;
(त) भारतीय वनस्पति विज्ञान सर्वेक्षण का एक प्रतिनिधि;
(थ) भारतीय प्राणीविज्ञान सर्वेक्षण का एक प्रतिनिधि;
(द) मुख्य वन्य जीव संरक्षक, जो सदस्य-सचिव होगा ।
(2) पदेन सदस्य से भिन्न सदस्यों की पदावधि और उपधारा (1) के खंड (घ) और खंड (ङ) में निर्दिष्ट रिक्तियों को भरने की रीति तथा अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया ऐसी होगी जो विहित की जाए ।
(3) सदस्य (पदेन सदस्यों के सिवाय) अपने कर्तव्यों के पालन में उपगत व्ययों के संबंधों में ऐसे भत्ते प्राप्त करने के हकदार होंगे जो विहित किए जाएंगे ।
(क) राज्य का मुख्यमंत्री और संघ राज्यक्षेत्र की दशा में, यथास्थिति, मुख्यमंत्री या प्रशासक-अध्यक्ष;
(ख) वन और वन्य जीव का भारसाधक मंत्री-उपाध्यक्ष;
(ग) राज्य विधान-मंडल के तीन सदस्य या विधान-मंडल वाले संघ राज्यक्षेत्र की दशा में, उस संघ राज्यक्षेत्र की विधान सभा के दो सदस्य;
(घ) राज्य सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट किए जाने वाले वन्य जीव से संबंधित गैर-सरकारी संगठनों का प्रतिनिधित्व करने के लिए तीन व्यक्ति;
(ङ) राज्य सरकार द्वारा सुविख्यात संरक्षण विज्ञानियों, पारिस्थितिकी विज्ञानियों और पर्यावरण विज्ञानियों, में से जिनके अन्तर्गत अनुसूचित जनजाति के कम से कम दो प्रतिनिधि होंगे नामनिर्दिष्ट किए जाने वाले दस व्यक्ति;
(च) यथास्थिति, राज्य सरकार या संघ राज्यक्षेत्र सरकार का सचिव जो वन और वन्य जीव का भारसाधक हो;
(छ) राज्य वन विभाग का भारसाधक अधिकारी;
(ज) राज्य सरकार के जनजाति कल्याण विभाग का सचिव;
(झ) प्रबंध निदेशक, राज्य पर्यटन विकास निगम;
(ञ) राज्य के पुलिस विभाग का एक अधिकारी जो महानिरीक्षक की पंक्ति से नीचे का न हो;
(ट) केन्द्रीय सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट किया जाने वाला सशस्त्र बलों का एक प्रतिनिधि जो ब्रिगेडियर की पंक्ति से नीचे का न हो;
(ठ) निदेशक,राज्य पशुपालन विभाग;
(ड) निदेशक, राज्य मत्स्य विभाग;
(ढ) निदेशक, वन्य जीव परिरक्षण द्वारा नामनिर्दिष्ट किया जाने वाला एक अधिकारी;
(ण) भारतीय वन्य संस्थान, देहरादून का एक प्रतिनिधि;
(त) भारतीय वनस्पति विज्ञान सर्वेक्षण का एक प्रतिनिधि;
(थ) भारतीय प्राणीविज्ञान सर्वेक्षण का एक प्रतिनिधि;
(द) मुख्य वन्य जीव संरक्षक, जो सदस्य-सचिव होगा ।
(2) पदेन सदस्य से भिन्न सदस्यों की पदावधि और उपधारा (1) के खंड (घ) और खंड (ङ) में निर्दिष्ट रिक्तियों को भरने की रीति तथा अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया ऐसी होगी जो विहित की जाए ।
(3) सदस्य (पदेन सदस्यों के सिवाय) अपने कर्तव्यों के पालन में उपगत व्ययों के संबंधों में ऐसे भत्ते प्राप्त करने के हकदार होंगे जो विहित किए जाएंगे ।
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