WLP Act 38अध्याय IV · Sanctuaries or National Parks declared by Central Government
धारा 38 · क्षेत्रों की अभयारण्य और राष्ट्रीय उपवन घोषित करने की केन्द्रीय सरकार की शक्ति
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) जहां राज्य सरकार अपने नियंत्रणाधीन कोई क्षेत्र, जो किसी अभयारण्य के भीतर का क्षेत्र नहीं है केन्द्रीय सरकार को पट्टे पर दे देती है या अन्यथा अन्तरित कर देती है वहां यदि केन्द्रीय सरकार का यह समाधान हो जाता है कि धारा 18 में विनिर्दिष्ट शर्तें उसे इस प्रकार अन्तरित किए गए क्षेत्र के बारे में पूरी कर दी गई हैं तो वह अधिसूचना द्वारा ऐसे क्षेत्र को अभयारण्य घोषित कर सकेगी और [धारा 18 से धारा 35] (जिसमें ये दोनों धाराएं भी सम्मिलित हैं), धारा 54 और धारा 55 के उपबन्ध ऐसे अभयारण्य के बारे में वैसे ही लागू होंगे जैसे वे राज्य सरकार द्वारा घोषित किसी अभयारण्य के बारे में लागू होते हैं ।
(2) यदि केन्द्रीय सरकार का यह समाधान हो जाता है कि धारा 35 में विनिर्दिष्ट शर्तें उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट किसी क्षेत्र के बारे में, चाहे ऐसा क्षेत्र केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार द्वारा अभयारण्य घोषित किया गया है या नहीं, पूरी हो गई हैं तो वह अधिसूचना द्वारा ऐसे क्षेत्र को राष्ट्रीय उपवन घोषित कर सकेगी और धारा 35, धारा 54 और धारा 55 के उपबन्ध ऐसे राष्ट्रीय उपवन के बारे में वैसे ही लागू होंगे, जैसे वे राज्य सरकार द्वारा घोषित किसी राष्ट्रीय उपवन के बारे में लागू होते हैं ।
(3) केन्द्रीय सरकार द्वारा घोषित किसी अभयारण्य या राष्ट्रीय उपवन के बारे में उपधारा (1) और उपधारा (2) में निर्दिष्ट धाराओं के अधीन मुख्य वन्य जीव संरक्षक की शक्तियों और कर्तव्यों का प्रयोग और निर्वहन निदेशक द्वारा या ऐसे अन्य अधिकारी द्वारा जो निदेशक द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किया जाए, किया जाएगा, तथा पूर्वोक्त धाराओं में राज्य सरकार के प्रति निर्देशों का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वे केन्द्रीय सरकार के प्रति निर्देश हैं तथा उनमें राज्य के विधान-मण्डल के प्रति निर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह संसद् के प्रति निर्देश हैं ।
(2) यदि केन्द्रीय सरकार का यह समाधान हो जाता है कि धारा 35 में विनिर्दिष्ट शर्तें उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट किसी क्षेत्र के बारे में, चाहे ऐसा क्षेत्र केन्द्रीय सरकार या राज्य सरकार द्वारा अभयारण्य घोषित किया गया है या नहीं, पूरी हो गई हैं तो वह अधिसूचना द्वारा ऐसे क्षेत्र को राष्ट्रीय उपवन घोषित कर सकेगी और धारा 35, धारा 54 और धारा 55 के उपबन्ध ऐसे राष्ट्रीय उपवन के बारे में वैसे ही लागू होंगे, जैसे वे राज्य सरकार द्वारा घोषित किसी राष्ट्रीय उपवन के बारे में लागू होते हैं ।
(3) केन्द्रीय सरकार द्वारा घोषित किसी अभयारण्य या राष्ट्रीय उपवन के बारे में उपधारा (1) और उपधारा (2) में निर्दिष्ट धाराओं के अधीन मुख्य वन्य जीव संरक्षक की शक्तियों और कर्तव्यों का प्रयोग और निर्वहन निदेशक द्वारा या ऐसे अन्य अधिकारी द्वारा जो निदेशक द्वारा इस निमित्त प्राधिकृत किया जाए, किया जाएगा, तथा पूर्वोक्त धाराओं में राज्य सरकार के प्रति निर्देशों का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वे केन्द्रीय सरकार के प्रति निर्देश हैं तथा उनमें राज्य के विधान-मण्डल के प्रति निर्देश का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वह संसद् के प्रति निर्देश हैं ।
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