WLP Act 26Aअध्याय IV · Sanctuaries
धारा 26A · क्षेत्र की अभयारण्य के रूप में घोषणा
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) यदि,-
(क) धारा 18 के अधीन कोई अधिसूचना जारी कर दी गई है और दावे करने की अवधि समाप्त हो गई है और अभयारण्य के रूप में घोषित किए जाने के लिए आशयित किसी क्षेत्र में किसी भूमि के संबंध में सभी दावे, यदि कोई हों, राज्य सरकार द्वारा निपटा दिए गए हैं; या
(ख) किसी आरक्षित वन के भीतर समाविष्ट कोई क्षेत्र या राज्यक्षेत्रीय सागरखंड का कोई भाग, जिसे राज्य सरकार द्वारा वन्य जीव या उसके पर्यावरण के संरक्षण, संवर्द्धन या विकास के प्रयोजन के लिए पर्याप्त रूप से पारिस्थितिक, प्राणी-जात, वनस्पति जात, भू-आकृति विज्ञान-जात, प्राकृतिक या प्राणी विज्ञान-जात महत्व का समझा जाता है, किसी अभयारण्य में सम्मिलित किया जाना है,
तो राज्य सरकार उस क्षेत्र की सीमाएं विनिर्दिष्ट करते हुए, जो अभयारण्य में समाविष्ट किया जाएगा, अधिसूचना जारी करेगी और यह घोषित करेगी कि उक्त क्षेत्र उस तारीख से ही, जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाए, अभयारण्य होगा :
परन्तु जहां राज्यक्षेत्रीय सागरखंड का कोई भाग इस प्रकार सम्मिलित किया जाना है वहां राज्य सरकार केन्द्रीय सरकार की पूर्व सहमति अभिप्राप्त करेगी :
परन्तु यह और कि अभयारण्य में सम्मिलित किए जाने वाले राज्यक्षेत्रीय सागरखंड के क्षेत्र की सीमाएं, केन्द्रीय सरकार के मुख्य नौ जलराशि-सर्वेक्षक के परामर्श से और स्थानीय मछुआरों के वृत्तिक हितों की रक्षा के लिए पर्याप्त उपाय करने के पश्चात् अवधारित की जाएंगी ।
(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, उपधारा (1) के अधीन जारी की गई अधिसूचना से राज्यक्षेत्रीय सागरखंड से किसी जलयान या नौका के निर्दोष आवागमन का अधिकार प्रभावित नहीं होगा ।
[(3) राष्ट्रीय बोर्ड की सिफारिश के सिवाय राज्य सरकार द्वारा अभयारण्य की सीमाओं में कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा ।]
(क) धारा 18 के अधीन कोई अधिसूचना जारी कर दी गई है और दावे करने की अवधि समाप्त हो गई है और अभयारण्य के रूप में घोषित किए जाने के लिए आशयित किसी क्षेत्र में किसी भूमि के संबंध में सभी दावे, यदि कोई हों, राज्य सरकार द्वारा निपटा दिए गए हैं; या
(ख) किसी आरक्षित वन के भीतर समाविष्ट कोई क्षेत्र या राज्यक्षेत्रीय सागरखंड का कोई भाग, जिसे राज्य सरकार द्वारा वन्य जीव या उसके पर्यावरण के संरक्षण, संवर्द्धन या विकास के प्रयोजन के लिए पर्याप्त रूप से पारिस्थितिक, प्राणी-जात, वनस्पति जात, भू-आकृति विज्ञान-जात, प्राकृतिक या प्राणी विज्ञान-जात महत्व का समझा जाता है, किसी अभयारण्य में सम्मिलित किया जाना है,
तो राज्य सरकार उस क्षेत्र की सीमाएं विनिर्दिष्ट करते हुए, जो अभयारण्य में समाविष्ट किया जाएगा, अधिसूचना जारी करेगी और यह घोषित करेगी कि उक्त क्षेत्र उस तारीख से ही, जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाए, अभयारण्य होगा :
परन्तु जहां राज्यक्षेत्रीय सागरखंड का कोई भाग इस प्रकार सम्मिलित किया जाना है वहां राज्य सरकार केन्द्रीय सरकार की पूर्व सहमति अभिप्राप्त करेगी :
परन्तु यह और कि अभयारण्य में सम्मिलित किए जाने वाले राज्यक्षेत्रीय सागरखंड के क्षेत्र की सीमाएं, केन्द्रीय सरकार के मुख्य नौ जलराशि-सर्वेक्षक के परामर्श से और स्थानीय मछुआरों के वृत्तिक हितों की रक्षा के लिए पर्याप्त उपाय करने के पश्चात् अवधारित की जाएंगी ।
(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, उपधारा (1) के अधीन जारी की गई अधिसूचना से राज्यक्षेत्रीय सागरखंड से किसी जलयान या नौका के निर्दोष आवागमन का अधिकार प्रभावित नहीं होगा ।
[(3) राष्ट्रीय बोर्ड की सिफारिश के सिवाय राज्य सरकार द्वारा अभयारण्य की सीमाओं में कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा ।]
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