WLP Act 5Aअध्याय II · Authorities to Be Appointed or Constitutes Under the Act
धारा 5A · वन्य जीव के लिए राष्ट्रीय वन्य जीव बोर्ड का गठन
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) केन्द्रीय सरकार, वन्य जीव (संरक्षण) संशोधन अधिनियम, 2002 के प्रारंभ से तीन मास के भीतर राष्ट्रीय वन्य जीव बोर्ड का गठन करेगी, जो निम्नलिखित सदस्यों से मिलकर बनेगा, अर्थात् :-
(क) अध्यक्ष के रूप में प्रधानमंत्री;
(ख) उपाध्यक्ष के रूप में वन और वन्य जीव का भारसाधक मंत्री;
(ग) संसद् के तीन सदस्य, जिनमें से दो लोक सभा से तथा एक राज्य सभा से होगा;
(घ) सदस्य, योजना आयोग में वन और वन्य जीव का भारसाधक;
(ङ) केन्द्रीय सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट किए जाने वाले गैर-सरकारी संगठनों का प्रतिनिधित्व करने वाले पांच व्यक्ति;
(च) केन्द्रीय सरकार द्वारा सुविख्यात संरक्षण विज्ञानियों, परिस्थितिकीय विज्ञानियों तथा पर्यावरण विज्ञानियों में से नामनिर्दिष्ट किए जाने वाले दस व्यक्ति;
(छ) वन और वन्य जीव से संबंधित भारत सरकार में केन्द्रीय सरकार के मंत्रालय या विभाग का भारसाधक सचिव;
(ज) थल सेना अध्यक्ष;
(झ) भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय का भारसाधक सचिव;
(ञ) भारत सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय का भारसाधक सचिव;
(ट) भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग का भारसाधक सचिव;
(ठ) भारत सरकार के जनजाति कल्याण मंत्रालय का सचिव;
(ड) वन और वन्य जीव से संबंधित केन्द्रीय सरकार के मंत्रालय या विभाग का वन महानिदेशक;
(ढ) पर्यटन महानिदेशक, भारत सरकार;
(ण) महानिदेशक, भारतीय वन अनुसंधान और शिक्षा परिषद्, देहरादून;
(त) निदेशक, भारतीय वन्य जीव संस्थान, देहरादून;
(थ) निदेशक, भारतीय प्राणी विज्ञान सर्वेक्षण;
(द) निदेशक, भारतीय वनस्पति विज्ञान सर्वेक्षण;
(ध) निदेशक, भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान;
(न) सदस्य-सचिव, केन्द्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण;
(प) निदेशक, राष्ट्रीय महासागर विज्ञान संस्थान;
(फ) दस राज्यों और संघ राज्यक्षेत्रों से प्रत्येक में से चक्रानुक्रम के आधार पर केन्द्रीय सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट किया जाने वाला एक-एक प्रतिनिधि;
(ब) निदेशक, वन्य जीव परिरक्षण जो राष्ट्रीय बोर्ड का सदस्य-सचिव होगा ।
(2) उन सदस्यों से, भिन्न सदस्यों की पदावधि, जो पदेन सदस्य हैं, उपधारा (1) के खंड (ङ), खंड (च) और खंड (फ) में निर्दिष्ट रिक्तियों को भरने की रीति और राष्ट्रीय बोर्ड के सदस्यों द्वारा उनके कृत्यों के निर्वहन में अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया ऐसी होगी जो विहित की जाए ।
(3) सदस्य (पदेन सदस्यों के सिवाय) अपने कर्तव्यों के पालन में उपगत व्ययों के संबंध में ऐसे भत्ते प्राप्त करने के हकदार होंगे, जो विहित किए जाएं ।
(4) तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, राष्ट्रीय बोर्ड के सदस्य का पद लाभ का पद नहीं समझा जाएगा ।
(क) अध्यक्ष के रूप में प्रधानमंत्री;
(ख) उपाध्यक्ष के रूप में वन और वन्य जीव का भारसाधक मंत्री;
(ग) संसद् के तीन सदस्य, जिनमें से दो लोक सभा से तथा एक राज्य सभा से होगा;
(घ) सदस्य, योजना आयोग में वन और वन्य जीव का भारसाधक;
(ङ) केन्द्रीय सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट किए जाने वाले गैर-सरकारी संगठनों का प्रतिनिधित्व करने वाले पांच व्यक्ति;
(च) केन्द्रीय सरकार द्वारा सुविख्यात संरक्षण विज्ञानियों, परिस्थितिकीय विज्ञानियों तथा पर्यावरण विज्ञानियों में से नामनिर्दिष्ट किए जाने वाले दस व्यक्ति;
(छ) वन और वन्य जीव से संबंधित भारत सरकार में केन्द्रीय सरकार के मंत्रालय या विभाग का भारसाधक सचिव;
(ज) थल सेना अध्यक्ष;
(झ) भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय का भारसाधक सचिव;
(ञ) भारत सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय का भारसाधक सचिव;
(ट) भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग का भारसाधक सचिव;
(ठ) भारत सरकार के जनजाति कल्याण मंत्रालय का सचिव;
(ड) वन और वन्य जीव से संबंधित केन्द्रीय सरकार के मंत्रालय या विभाग का वन महानिदेशक;
(ढ) पर्यटन महानिदेशक, भारत सरकार;
(ण) महानिदेशक, भारतीय वन अनुसंधान और शिक्षा परिषद्, देहरादून;
(त) निदेशक, भारतीय वन्य जीव संस्थान, देहरादून;
(थ) निदेशक, भारतीय प्राणी विज्ञान सर्वेक्षण;
(द) निदेशक, भारतीय वनस्पति विज्ञान सर्वेक्षण;
(ध) निदेशक, भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान;
(न) सदस्य-सचिव, केन्द्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण;
(प) निदेशक, राष्ट्रीय महासागर विज्ञान संस्थान;
(फ) दस राज्यों और संघ राज्यक्षेत्रों से प्रत्येक में से चक्रानुक्रम के आधार पर केन्द्रीय सरकार द्वारा नामनिर्दिष्ट किया जाने वाला एक-एक प्रतिनिधि;
(ब) निदेशक, वन्य जीव परिरक्षण जो राष्ट्रीय बोर्ड का सदस्य-सचिव होगा ।
(2) उन सदस्यों से, भिन्न सदस्यों की पदावधि, जो पदेन सदस्य हैं, उपधारा (1) के खंड (ङ), खंड (च) और खंड (फ) में निर्दिष्ट रिक्तियों को भरने की रीति और राष्ट्रीय बोर्ड के सदस्यों द्वारा उनके कृत्यों के निर्वहन में अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया ऐसी होगी जो विहित की जाए ।
(3) सदस्य (पदेन सदस्यों के सिवाय) अपने कर्तव्यों के पालन में उपगत व्ययों के संबंध में ऐसे भत्ते प्राप्त करने के हकदार होंगे, जो विहित किए जाएं ।
(4) तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि में किसी बात के होते हुए भी, राष्ट्रीय बोर्ड के सदस्य का पद लाभ का पद नहीं समझा जाएगा ।
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