WLP Act 39अध्याय V · Trade or Commerce in Wild Animals, Animal Articles and Trophies
धारा 39 · वन्य प्राणियों आदि का सरकार की सम्पत्ति होना
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) (क) पीड़क जन्तु से भिन्न प्रत्येक वन्य प्राणी जिसका धारा 11 या धारा 29 की उपधारा (1) या धारा 35 की उपधारा (6) के अधीन आखेट किया जाता है या जो इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए किसी नियम या आदेश के किन्हीं उपबन्धों के उल्लंघन में [बंदी स्थिति में रखा जाता है या पैदा होता है या उसका शिकार किया जाता हैट अथवा जिसे मृत पाया जाता है या जिसका ॥। भूल से वध कर दिया जाता है; और
(ख) खण्ड (क) में निर्दिष्ट किसी वन्य प्राणी से, जिसके सम्बन्ध में कोई अपराध इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए किसी नियम या आदेश के विरुद्ध किया गया है, व्युत्पन्न प्रत्येक प्राणी-वस्तु, ट्राफी या असंसाधित ट्राफी या मांस;
[(ग) भारत में आयातित हाथी दांत और ऐसे हाथी दांत से बनी कोई वस्तु जिसकी बाबत इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए किसी नियम या किए गए किसी आदेश के विरुद्ध कोई अपराध किया गया है;
(घ) यान, जलयान, आयुध, फांसा या औजार जिसका प्रयोग अपराध करने के लिए किया गया है और जिसका इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन अभिग्रहण किया गया है,]
राज्य सरकार की सम्पत्ति होगा और जहां ऐसे प्राणी का, केन्द्रीय सरकार द्वारा घोषित किसी अभयारण्य या राष्ट्रीय उपवन में आखेट किया जाता है वहां ऐसा प्राणी या ऐसे प्राणी से व्युत्पन्न कोई प्राणी-वस्तु, ट्राफी, असंसाधित ट्राफी या मांस 3[या ऐसे आखेट में प्रयुक्त कोई यान, जलयान, आयुध, फांसा या औजारट केन्द्रीय सरकार की सम्पत्ति होगा ।
(2) कोई व्यक्ति जो किसी भी प्रकार से सरकारी सम्पत्ति का कब्जा अभिप्राप्त करता है, ऐसा कब्जा अभिप्राप्त करने से अड़तालीस घंटों के भीतर ऐसे कब्जे की रिपोर्ट निकटतम थाने या प्राधिकृत अधिकारी को देगा और, यदि उससे ऐसी अपेक्षा की जाए तो ऐसी सम्पत्ति, यथास्थिति, ऐसे थाने के भारसाधक अधिकारी या ऐसे प्राधिकृत अधिकारी के हवाले कर देगा ।
(3) कोई भी व्यक्ति मुख्य वन्य जीव संरक्षक या प्राधिकृत अधिकारी की पूर्व अनुज्ञा के बिना ऐसी सरकारी सम्पत्ति,-
(क) अर्जित नहीं करेगा, अपने कब्जे, अभिरक्षा या नियंत्रण में नहीं रखेगा;
(ख) किसी व्यक्ति को दान के तौर पर, विक्रय द्वारा या अन्यथा अन्तरित नहीं करेगा; या
(ग) नष्ट नहीं करेगा या उसे नुकसान नहीं पहुंचाएगा ।
(ख) खण्ड (क) में निर्दिष्ट किसी वन्य प्राणी से, जिसके सम्बन्ध में कोई अपराध इस अधिनियम या इसके अधीन बनाए गए किसी नियम या आदेश के विरुद्ध किया गया है, व्युत्पन्न प्रत्येक प्राणी-वस्तु, ट्राफी या असंसाधित ट्राफी या मांस;
[(ग) भारत में आयातित हाथी दांत और ऐसे हाथी दांत से बनी कोई वस्तु जिसकी बाबत इस अधिनियम या उसके अधीन बनाए गए किसी नियम या किए गए किसी आदेश के विरुद्ध कोई अपराध किया गया है;
(घ) यान, जलयान, आयुध, फांसा या औजार जिसका प्रयोग अपराध करने के लिए किया गया है और जिसका इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन अभिग्रहण किया गया है,]
राज्य सरकार की सम्पत्ति होगा और जहां ऐसे प्राणी का, केन्द्रीय सरकार द्वारा घोषित किसी अभयारण्य या राष्ट्रीय उपवन में आखेट किया जाता है वहां ऐसा प्राणी या ऐसे प्राणी से व्युत्पन्न कोई प्राणी-वस्तु, ट्राफी, असंसाधित ट्राफी या मांस 3[या ऐसे आखेट में प्रयुक्त कोई यान, जलयान, आयुध, फांसा या औजारट केन्द्रीय सरकार की सम्पत्ति होगा ।
(2) कोई व्यक्ति जो किसी भी प्रकार से सरकारी सम्पत्ति का कब्जा अभिप्राप्त करता है, ऐसा कब्जा अभिप्राप्त करने से अड़तालीस घंटों के भीतर ऐसे कब्जे की रिपोर्ट निकटतम थाने या प्राधिकृत अधिकारी को देगा और, यदि उससे ऐसी अपेक्षा की जाए तो ऐसी सम्पत्ति, यथास्थिति, ऐसे थाने के भारसाधक अधिकारी या ऐसे प्राधिकृत अधिकारी के हवाले कर देगा ।
(3) कोई भी व्यक्ति मुख्य वन्य जीव संरक्षक या प्राधिकृत अधिकारी की पूर्व अनुज्ञा के बिना ऐसी सरकारी सम्पत्ति,-
(क) अर्जित नहीं करेगा, अपने कब्जे, अभिरक्षा या नियंत्रण में नहीं रखेगा;
(ख) किसी व्यक्ति को दान के तौर पर, विक्रय द्वारा या अन्यथा अन्तरित नहीं करेगा; या
(ग) नष्ट नहीं करेगा या उसे नुकसान नहीं पहुंचाएगा ।
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