WLP Act 35अध्याय IV · Natioanl Parks
धारा 35 · राष्ट्रीय उपवनों की घोषणा
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) जब कभी राज्य सरकार को यह प्रतीत होता है कि कोई क्षेत्र जो किसी अभयारण्य के भीतर है या नहीं, अपने पारिस्थितिक, प्राणी-जात, वनस्पति-जात, भू-आकृति विज्ञानजात या प्राणी विज्ञान-जात महत्व के कारण उसमें वन्य जीवों के और उसके पर्यावरण के संरक्षण, संवर्धन या विकास के प्रयोजन के लिए राष्ट्रीय उपवन के रूप में गठित किया जाना आवश्यक है, तो वह अधिसूचना द्वारा ऐसे क्षेत्र को राष्ट्रीय उपवन के रूप में गठित करने के अपने आशय की घोषणा कर सकेगी :
[परन्तु जहां राज्यक्षेत्रीय सागरखंड के किसी भाग को ऐसे राष्ट्रीय उपवन में सम्मिलित करना प्रस्थापित है वहां धारा 26क के उपबंध, जहां तक हो सके, राष्ट्रीय उपवन की घोषणा के संबंध में उसी प्रकार लागू होंगे जैसे वे किसी अभयारण्य की घोषणा के संबंध में लागू होते हैं ।]
(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट अधिसूचना में उस क्षेत्र की सीमाएं परिनिश्चित की जाएंगी जिसे राष्ट्रीय उपवन के रूप में घोषित करने का आशय है ।
(3) जहां किसी क्षेत्र को राष्ट्रीय उपवन के रूप में घोषित करने का आशय है वहां [धारा 19 से धारा 26क के (जिसमें धारा 24 की उपधारा (2) के खंड (ग) के सिवाय ये दोनों धाराएं भी सम्मिलित हैं)] उपबन्ध यथाशक्य ऐसे क्षेत्र में किसी भूमि के संबंध में दावों के अन्वेषण और अवधारण को तथा अधिकारों के निर्वापन को वैसे ही लागू होंगे जैसे वे किसी अभयारण्य में किसी भूमि के संबंध में उक्त बातों के बारे में लागू होते हैं ।
(4) जब निम्नलिखित घटनाएं घटित हो गई हैं, अर्थात् :-
(क) दावे करने की अवधि बीत चुकी है और राष्ट्रीय उपवन के रूप में घोषित किए जाने के लिए आशयित किसी क्षेत्र में किसी भूमि के सम्बन्ध में किए गए दावे, यदि कोई हों, राज्य सरकार द्वारा निपटा दिए गए हैं, और
(ख) राष्ट्रीय उपवन में सम्मिलित किए गए जाने के लिए प्रस्थापित भूमि के बारे में सभी अधिकार राज्य सरकार में निहित हो गए हैं,
तब राज्य सरकार अधिसूचना प्रकाशित करेगी जिसमें क्षेत्र की वे सीमाएं विनिर्दिष्ट की जाएंगी जो राष्ट्रीय उपवन में समाविष्ट होंगी और यह घोषित करेगी कि उक्त क्षेत्र ऐसी तारीख को और से, जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाए, राष्ट्रीय उपवन होगा ।
[(5) राज्य सरकार द्वारा किसी राष्ट्रीय उपवन की सीमाओं में कोई परिवर्तन राष्ट्रीय बोर्ड की सिफारिश पर ही किया जाएगा अन्यथा नहीं ।
(6) कोई भी व्यक्ति मुख्य वन्य जीव संरक्षक द्वारा दी गई किसी अनुज्ञा के अधीन और उसके अनुसार के सिवाय, किसी कार्य द्वारा वह चाहे जो भी हो, किसी राष्ट्रीय पार्क में वनोत्पाद सहित किसी वन्य जीवन को नष्ट नहीं करेगा, उसका विदोहन नहीं करेगा या उसको नहीं हटाएगा अथवा राष्ट्रीय पार्क में या उसके बाहर जल के प्रवाह का अपवर्तन नहीं करेगा, उसे रोकेगा नहीं अथवा उसमें वृद्धि नहीं करेगा और कोई ऐसी अनुज्ञा तब तक नहीं दी जाएगी जब तक कि राज्य सरकार, बोर्ड के परामर्श से, यह समाधान हो जाने पर कि राष्ट्रीय पार्क से किसी वन्य जीव को इस प्रकार हटाया जाना या राष्ट्रीय पार्क में या उसके बाहर जल के प्रवाह में ऐसा परिवर्तन वहां के वन्य जीवन के सुधार और अधिक अच्छे परिवर्तन के लिए आवश्यक है, ऐसे अनुज्ञापत्र का जारी किया जाना प्राधिकृत नहीं करती है :
परन्तु जहां किसी राष्ट्रीय उपवन से वनोत्पाद को हटाया जाता है, वहां उसका उपयोग राष्ट्रीय उपवन में अथवा उसके आस-पास रहने वाले लोगों की वास्तविक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए किया जा सकेगा और किसी वाणिज्यिक प्रयोजन के लिए उसका उपयोग नहीं किया जाएगा ।]
(7) किसी [पशुधन] को सिवाय उस दशा के जिसमें कि ऐसे 1[पशुधन] का, ऐसे राष्ट्रीय उपवन में प्रवेश करने के लिए प्राधिकृत किसी व्यक्ति द्वारा यान के रूप में उपयोग किया जाता है, किसी राष्ट्रीय उपवन में चरने नहीं दिया जाएगा और किसी (पशुधन) को उसमें प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा ।
(8) धारा 27 और धारा 28, धारा 30 से धारा 32 (जिसमें ये दोनों धाराएं भी सम्मिलित हैं) और [धारा 33, धारा 33क] के खण्ड (क), खण्ड (ख) और खण्ड (ग) तथा धारा 34 के उपबन्ध किसी राष्ट्रीय उपवन के सम्बन्ध में यावत्शक्य वैसे ही लागू होंगे जैसे वे अभयारण्य के सम्बन्ध में लागू होते हैं ।
स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए, किसी ऐसे क्षेत्र की दशा में, चाहे वह अभयारण्य में हो या न हो, जहां अधिकारों को निर्वापित कर दिया गया है और भूमि किसी विधि के अधीन या अन्यथा राज्य सरकार में निहित हो गई है, वहां उसके द्वारा ऐसे क्षेत्र को अधिसूचना द्वारा, राष्ट्रीय उपवन अधिसूचित किया जा सकेगा और धारा 19 से धारा 26 तक (दोनों धाराओं को सम्मिलित करते हुए) के अधीन कार्यवाहियां तथा इस धारा की उपधारा (3 ) और उपधारा (4) के उपबंध लागू नहीं होंगे ।
[परन्तु जहां राज्यक्षेत्रीय सागरखंड के किसी भाग को ऐसे राष्ट्रीय उपवन में सम्मिलित करना प्रस्थापित है वहां धारा 26क के उपबंध, जहां तक हो सके, राष्ट्रीय उपवन की घोषणा के संबंध में उसी प्रकार लागू होंगे जैसे वे किसी अभयारण्य की घोषणा के संबंध में लागू होते हैं ।]
(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट अधिसूचना में उस क्षेत्र की सीमाएं परिनिश्चित की जाएंगी जिसे राष्ट्रीय उपवन के रूप में घोषित करने का आशय है ।
(3) जहां किसी क्षेत्र को राष्ट्रीय उपवन के रूप में घोषित करने का आशय है वहां [धारा 19 से धारा 26क के (जिसमें धारा 24 की उपधारा (2) के खंड (ग) के सिवाय ये दोनों धाराएं भी सम्मिलित हैं)] उपबन्ध यथाशक्य ऐसे क्षेत्र में किसी भूमि के संबंध में दावों के अन्वेषण और अवधारण को तथा अधिकारों के निर्वापन को वैसे ही लागू होंगे जैसे वे किसी अभयारण्य में किसी भूमि के संबंध में उक्त बातों के बारे में लागू होते हैं ।
(4) जब निम्नलिखित घटनाएं घटित हो गई हैं, अर्थात् :-
(क) दावे करने की अवधि बीत चुकी है और राष्ट्रीय उपवन के रूप में घोषित किए जाने के लिए आशयित किसी क्षेत्र में किसी भूमि के सम्बन्ध में किए गए दावे, यदि कोई हों, राज्य सरकार द्वारा निपटा दिए गए हैं, और
(ख) राष्ट्रीय उपवन में सम्मिलित किए गए जाने के लिए प्रस्थापित भूमि के बारे में सभी अधिकार राज्य सरकार में निहित हो गए हैं,
तब राज्य सरकार अधिसूचना प्रकाशित करेगी जिसमें क्षेत्र की वे सीमाएं विनिर्दिष्ट की जाएंगी जो राष्ट्रीय उपवन में समाविष्ट होंगी और यह घोषित करेगी कि उक्त क्षेत्र ऐसी तारीख को और से, जो अधिसूचना में विनिर्दिष्ट की जाए, राष्ट्रीय उपवन होगा ।
[(5) राज्य सरकार द्वारा किसी राष्ट्रीय उपवन की सीमाओं में कोई परिवर्तन राष्ट्रीय बोर्ड की सिफारिश पर ही किया जाएगा अन्यथा नहीं ।
(6) कोई भी व्यक्ति मुख्य वन्य जीव संरक्षक द्वारा दी गई किसी अनुज्ञा के अधीन और उसके अनुसार के सिवाय, किसी कार्य द्वारा वह चाहे जो भी हो, किसी राष्ट्रीय पार्क में वनोत्पाद सहित किसी वन्य जीवन को नष्ट नहीं करेगा, उसका विदोहन नहीं करेगा या उसको नहीं हटाएगा अथवा राष्ट्रीय पार्क में या उसके बाहर जल के प्रवाह का अपवर्तन नहीं करेगा, उसे रोकेगा नहीं अथवा उसमें वृद्धि नहीं करेगा और कोई ऐसी अनुज्ञा तब तक नहीं दी जाएगी जब तक कि राज्य सरकार, बोर्ड के परामर्श से, यह समाधान हो जाने पर कि राष्ट्रीय पार्क से किसी वन्य जीव को इस प्रकार हटाया जाना या राष्ट्रीय पार्क में या उसके बाहर जल के प्रवाह में ऐसा परिवर्तन वहां के वन्य जीवन के सुधार और अधिक अच्छे परिवर्तन के लिए आवश्यक है, ऐसे अनुज्ञापत्र का जारी किया जाना प्राधिकृत नहीं करती है :
परन्तु जहां किसी राष्ट्रीय उपवन से वनोत्पाद को हटाया जाता है, वहां उसका उपयोग राष्ट्रीय उपवन में अथवा उसके आस-पास रहने वाले लोगों की वास्तविक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए किया जा सकेगा और किसी वाणिज्यिक प्रयोजन के लिए उसका उपयोग नहीं किया जाएगा ।]
(7) किसी [पशुधन] को सिवाय उस दशा के जिसमें कि ऐसे 1[पशुधन] का, ऐसे राष्ट्रीय उपवन में प्रवेश करने के लिए प्राधिकृत किसी व्यक्ति द्वारा यान के रूप में उपयोग किया जाता है, किसी राष्ट्रीय उपवन में चरने नहीं दिया जाएगा और किसी (पशुधन) को उसमें प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा ।
(8) धारा 27 और धारा 28, धारा 30 से धारा 32 (जिसमें ये दोनों धाराएं भी सम्मिलित हैं) और [धारा 33, धारा 33क] के खण्ड (क), खण्ड (ख) और खण्ड (ग) तथा धारा 34 के उपबन्ध किसी राष्ट्रीय उपवन के सम्बन्ध में यावत्शक्य वैसे ही लागू होंगे जैसे वे अभयारण्य के सम्बन्ध में लागू होते हैं ।
स्पष्टीकरण-इस धारा के प्रयोजनों के लिए, किसी ऐसे क्षेत्र की दशा में, चाहे वह अभयारण्य में हो या न हो, जहां अधिकारों को निर्वापित कर दिया गया है और भूमि किसी विधि के अधीन या अन्यथा राज्य सरकार में निहित हो गई है, वहां उसके द्वारा ऐसे क्षेत्र को अधिसूचना द्वारा, राष्ट्रीय उपवन अधिसूचित किया जा सकेगा और धारा 19 से धारा 26 तक (दोनों धाराओं को सम्मिलित करते हुए) के अधीन कार्यवाहियां तथा इस धारा की उपधारा (3 ) और उपधारा (4) के उपबंध लागू नहीं होंगे ।
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