The Right to Fair Compensation and Transparency in Land Acquisition, Rehabilitation and Resettlement Act, 2013 87अध्याय XII · Offences and Penalties
धारा 87 · सरकारी विभागों द्वारा किए गए अपराध।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) यदि इस अधिनियम के अंतर्गत कोई अपराध सरकार के किसी विभाग द्वारा किया गया है, तो विभाग का प्रमुख उस अपराध का दोषी माना जाएगा और उसके विरुद्ध कार्यवाही की जाएगी तथा तदनुसार दंडित किया जाएगा।
बशर्ते कि इस धारा में निहित कोई भी बात किसी व्यक्ति को किसी भी दंड के लिए उत्तरदायी नहीं ठहराएगी यदि वह व्यक्ति यह साबित कर दे कि अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था या उस व्यक्ति ने ऐसे अपराध को रोकने के लिए सभी आवश्यक सावधानी बरती थी।
(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, यदि इस अधिनियम के अंतर्गत कोई अपराध सरकार के किसी विभाग द्वारा किया गया हो और यह सिद्ध हो जाए कि वह अपराध विभाग के प्रमुख के अतिरिक्त किसी अन्य अधिकारी की सहमति या मिलीभगत से किया गया हो, या उसकी लापरवाही के कारण हुआ हो, तो ऐसा अधिकारी भी उस अपराध का दोषी माना जाएगा और उसके विरुद्ध कार्यवाही की जाएगी तथा तदनुसार दंडित किया जाएगा।
राज्य संशोधन
आंध्र प्रदेश
मूल अधिनियम में, धारा 87 के स्थान पर, हाशिये के शीर्षक के साथ निम्नलिखित धारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्:-
87. सरकारी अधिकारियों द्वारा किए गए अपराध। --- यदि इस अधिनियम के अंतर्गत कोई अपराध किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा किया गया है जो कथित अपराध के समय केंद्र सरकार या राज्य सरकार में कार्यरत था या कार्यरत है, तो न्यायालय ऐसे अपराध का संज्ञान लेगा, बशर्ते दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (अधिनियम 2 ऑफ 1974) की धारा 197 में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया हो।
[आंध्र प्रदेश अधिनियम 22, 2018, धारा 10 (1-1-2014 से प्रभावी )]
महाराष्ट्र
मूल अधिनियम की धारा 87 के स्थान पर निम्नलिखित धारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्:---
87. सरकारी अधिकारियों द्वारा किए गए अपराध। -- यदि इस अधिनियम के अंतर्गत कोई अपराध किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा किया गया है जो कथित अपराध के समय केंद्र सरकार या राज्य सरकार में कार्यरत था या कार्यरत है, तो न्यायालय ऐसे अपराध का संज्ञान लेगा, बशर्ते कि महाराष्ट्र राज्य पर लागू दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (2 ऑफ 1974) की धारा 197 में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाए।
[महाराष्ट्र अधिनियम 37, 2018, धारा 9 (दिनांक 26-4-2018 से प्रभावी )]
हरयाणा
मूल अधिनियम की धारा 87 के बाद, निम्नलिखित धारा जोड़ी जाएगी, अर्थात्:-
“87ए. सरकारी अधिकारियों द्वारा किए गए अपराध.- यदि इस अधिनियम के अंतर्गत कोई अपराध ऐसे व्यक्ति द्वारा किया गया है जो कथित अपराध के घटित होने के समय केंद्र सरकार या राज्य सरकार में कार्यरत था या कार्यरत है, तो कोई भी न्यायालय ऐसे अपराध का संज्ञान तब तक नहीं लेगा जब तक कि दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (केंद्रीय अधिनियम 2 ऑफ 1974) की धारा 197 में निर्धारित प्रक्रिया का पालन न किया गया हो।”
[हरियाणा अधिनियम 21, 2018, धारा 4 (9-5-2018 से प्रभावी )]
बशर्ते कि इस धारा में निहित कोई भी बात किसी व्यक्ति को किसी भी दंड के लिए उत्तरदायी नहीं ठहराएगी यदि वह व्यक्ति यह साबित कर दे कि अपराध उसकी जानकारी के बिना किया गया था या उस व्यक्ति ने ऐसे अपराध को रोकने के लिए सभी आवश्यक सावधानी बरती थी।
(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, यदि इस अधिनियम के अंतर्गत कोई अपराध सरकार के किसी विभाग द्वारा किया गया हो और यह सिद्ध हो जाए कि वह अपराध विभाग के प्रमुख के अतिरिक्त किसी अन्य अधिकारी की सहमति या मिलीभगत से किया गया हो, या उसकी लापरवाही के कारण हुआ हो, तो ऐसा अधिकारी भी उस अपराध का दोषी माना जाएगा और उसके विरुद्ध कार्यवाही की जाएगी तथा तदनुसार दंडित किया जाएगा।
राज्य संशोधन
आंध्र प्रदेश
मूल अधिनियम में, धारा 87 के स्थान पर, हाशिये के शीर्षक के साथ निम्नलिखित धारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्:-
87. सरकारी अधिकारियों द्वारा किए गए अपराध। --- यदि इस अधिनियम के अंतर्गत कोई अपराध किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा किया गया है जो कथित अपराध के समय केंद्र सरकार या राज्य सरकार में कार्यरत था या कार्यरत है, तो न्यायालय ऐसे अपराध का संज्ञान लेगा, बशर्ते दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (अधिनियम 2 ऑफ 1974) की धारा 197 में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया हो।
[आंध्र प्रदेश अधिनियम 22, 2018, धारा 10 (1-1-2014 से प्रभावी )]
महाराष्ट्र
मूल अधिनियम की धारा 87 के स्थान पर निम्नलिखित धारा प्रतिस्थापित की जाएगी, अर्थात्:---
87. सरकारी अधिकारियों द्वारा किए गए अपराध। -- यदि इस अधिनियम के अंतर्गत कोई अपराध किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा किया गया है जो कथित अपराध के समय केंद्र सरकार या राज्य सरकार में कार्यरत था या कार्यरत है, तो न्यायालय ऐसे अपराध का संज्ञान लेगा, बशर्ते कि महाराष्ट्र राज्य पर लागू दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (2 ऑफ 1974) की धारा 197 में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाए।
[महाराष्ट्र अधिनियम 37, 2018, धारा 9 (दिनांक 26-4-2018 से प्रभावी )]
हरयाणा
मूल अधिनियम की धारा 87 के बाद, निम्नलिखित धारा जोड़ी जाएगी, अर्थात्:-
“87ए. सरकारी अधिकारियों द्वारा किए गए अपराध.- यदि इस अधिनियम के अंतर्गत कोई अपराध ऐसे व्यक्ति द्वारा किया गया है जो कथित अपराध के घटित होने के समय केंद्र सरकार या राज्य सरकार में कार्यरत था या कार्यरत है, तो कोई भी न्यायालय ऐसे अपराध का संज्ञान तब तक नहीं लेगा जब तक कि दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (केंद्रीय अधिनियम 2 ऑफ 1974) की धारा 197 में निर्धारित प्रक्रिया का पालन न किया गया हो।”
[हरियाणा अधिनियम 21, 2018, धारा 4 (9-5-2018 से प्रभावी )]
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