The Right to Fair Compensation and Transparency in Land Acquisition, Rehabilitation and Resettlement Act, 2013 3अध्याय I · Preliminary
धारा 3 · परिभाषाएँ।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
इस अधिनियम में, जब तक संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो,--
(क) "प्रशासक" से तात्पर्य धारा 43 की उपधारा (1) के अधीन प्रभावित परिवारों के पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन के उद्देश्य से नियुक्त अधिकारी से है;
(ख) "प्रभावित क्षेत्र" से तात्पर्य ऐसे क्षेत्र से है जिसे भूमि अधिग्रहण के प्रयोजनों के लिए उपयुक्त सरकार द्वारा अधिसूचित किया जा सकता है;
(ग) "प्रभावित परिवार" में शामिल हैं--
(i) वह परिवार जिसकी भूमि या अन्य अचल संपत्ति का अधिग्रहण किया गया हो;
(ii) ऐसा परिवार जिसके पास कोई भूमि नहीं है, लेकिन ऐसे परिवार का कोई सदस्य या सदस्य कृषि मजदूर, किरायेदार (किसी भी प्रकार की किरायेदारी या उपयोग का अधिकार रखने वाले), बटाईदार या कारीगर हो सकते हैं, या जो भूमि अधिग्रहण से तीन वर्ष पहले प्रभावित क्षेत्र में काम कर रहे हों, जिनकी आजीविका का प्राथमिक स्रोत भूमि अधिग्रहण से प्रभावित होता है;
(iii) अनुसूचित जनजातियाँ और अन्य पारंपरिक वनवासी जिन्होंने भूमि अधिग्रहण के कारण अनुसूचित जनजातियाँ और अन्य पारंपरिक वनवासी (वन अधिकार मान्यता) अधिनियम, 2006 (2 ऑफ 2007) के तहत मान्यता प्राप्त अपने किसी भी वन अधिकार को खो दिया है;
(iv) वह परिवार जिसकी आजीविका का प्राथमिक स्रोत भूमि अधिग्रहण से तीन वर्ष पूर्व वनों या जल निकायों पर निर्भर है और इसमें वन उत्पाद संग्राहक, शिकारी, मछुआरे और नाविक शामिल हैं और भूमि अधिग्रहण के कारण ऐसी आजीविका प्रभावित होती है;
(v) परिवार का कोई सदस्य जिसे राज्य सरकार या केंद्र सरकार द्वारा अपनी किसी योजना के अंतर्गत भूमि आवंटित की गई हो और ऐसी भूमि अधिग्रहण के अधीन हो;
(vi) कोई परिवार जो भूमि अधिग्रहण से पूर्व तीन वर्ष या उससे अधिक समय से शहरी क्षेत्रों में किसी भूमि पर निवास कर रहा हो या जिसकी आजीविका का प्राथमिक स्रोत भूमि अधिग्रहण से पूर्व तीन वर्षों तक भूमि अधिग्रहण से प्रभावित हो;
(घ) "कृषि भूमि" से तात्पर्य उस भूमि से है जिसका उपयोग निम्नलिखित प्रयोजनों के लिए किया जाता है--
(i) कृषि या बागवानी;
(ii) दुग्ध उत्पादन, मुर्गी पालन, मत्स्य पालन, रेशम उत्पादन, बीज उत्पादन, पशुधन प्रजनन या औषधीय जड़ी-बूटियों की नर्सरी उगाना;
(iii) फसलों, वृक्षों, घास या बगीचे की उपज की खेती; और
(iv) मवेशियों को चराने के लिए प्रयुक्त भूमि;
(ई) "उपयुक्त सरकार" से तात्पर्य है,--
(i) किसी राज्य के क्षेत्र में स्थित भूमि के अधिग्रहण के संबंध में, राज्य सरकार;
(ii) केंद्र शासित प्रदेश (पुडुचेरी को छोड़कर) के भीतर स्थित भूमि के अधिग्रहण के संबंध में, केंद्र सरकार;
(iii) पुडुचेरी केंद्र शासित प्रदेश के भीतर स्थित भूमि के अधिग्रहण के संबंध में, पुडुचेरी केंद्र शासित प्रदेश की सरकार;
(iv) एक से अधिक राज्यों में सार्वजनिक प्रयोजन के लिए भूमि अधिग्रहण के संबंध में, केंद्र सरकार, संबंधित राज्य सरकारों या केंद्र शासित प्रदेशों के परामर्श से; और
(v) संघ के प्रयोजनों के लिए, अधिसूचना द्वारा निर्दिष्ट किए जाने पर, केंद्र सरकार द्वारा भूमि अधिग्रहण के संबंध में:
बशर्ते कि किसी जिले में सार्वजनिक प्रयोजन के लिए, ऐसे क्षेत्र के लिए जो उपयुक्त सरकार द्वारा अधिसूचित क्षेत्र से अधिक न हो, उस जिले के कलेक्टर को उपयुक्त सरकार माना जाएगा;
(f) "प्राधिकरण" से तात्पर्य धारा 51 के अधीन स्थापित भूमि अधिग्रहण एवं पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन प्राधिकरण से है;
(जी) "कलेक्टर" से तात्पर्य राजस्व जिले के कलेक्टर से है, और इसमें उपायुक्त तथा इस अधिनियम के अंतर्गत कलेक्टर के कार्यों को करने के लिए उपयुक्त सरकार द्वारा विशेष रूप से नामित कोई अधिकारी शामिल है;
(h) "आयुक्त" से तात्पर्य धारा 44 की उपधारा (1) के अधीन नियुक्त पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन आयुक्त से है;
(i) "अधिग्रहण लागत" में शामिल है
(i) मुआवजे की राशि जिसमें सोलेटियम, भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन प्राधिकरण या न्यायालय द्वारा आदेशित कोई भी बढ़ी हुई क्षतिपूर्ति और उस पर देय ब्याज तथा ऐसे प्राधिकरण या न्यायालय द्वारा प्रभावित परिवारों को देय निर्धारित कोई अन्य राशि शामिल है;
(ii) अधिग्रहण की प्रक्रिया में भूमि और खड़ी फसलों को हुए नुकसान के लिए विलंब शुल्क का भुगतान किया जाएगा;
(iii) विस्थापित या प्रतिकूल रूप से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए भूमि और भवन के अधिग्रहण की लागत;
(iv) पुनर्वास क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे और सुविधाओं के विकास की लागत;
(v) इस अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार निर्धारित पुनर्वास और पुनर्स्थापन की लागत;
(vi) प्रशासनिक लागत,--
(ए) परियोजना स्थल और परियोजना क्षेत्र से बाहर की भूमि सहित भूमि अधिग्रहण के लिए, मुआवजे की लागत के ऐसे प्रतिशत से अधिक नहीं, जैसा कि उपयुक्त सरकार द्वारा निर्दिष्ट किया जा सकता है;
(ख) भूमि के मालिकों और अन्य प्रभावित परिवारों, जिनकी भूमि का अधिग्रहण किया गया है या अधिग्रहण करने का प्रस्ताव है, या ऐसे अधिग्रहण से प्रभावित अन्य परिवारों के पुनर्वास और पुनर्स्थापन के लिए;
(vii) 'सामाजिक प्रभाव आकलन अध्ययन' करने की लागत;
(j) "कंपनी" से तात्पर्य है--
(i) कंपनी अधिनियम, 1956 (1 ऑफ 1956) की धारा 3 में परिभाषित कंपनी, सरकारी कंपनी के अलावा;
(ii) सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 (21 ऑफ 1860) या किसी राज्य में उस समय लागू किसी संबंधित कानून के तहत पंजीकृत सोसायटी;
(k) "विस्थापित परिवार" से तात्पर्य किसी ऐसे परिवार से है, जिसे भूमि अधिग्रहण के कारण प्रभावित क्षेत्र से पुनर्वास क्षेत्र में स्थानांतरित और पुनर्स्थापित किया जाना है;
(l) किसी व्यक्ति के संबंध में "कार्य करने के हकदार" में निम्नलिखित व्यक्ति शामिल माने जाएंगे, अर्थात्:--
(i) किसी ऐसे मामले के संबंध में अन्य लाभकारी हितधारक व्यक्तियों के लिए न्यासी, और उस सीमा तक जिस सीमा तक लाभकारी हितधारक व्यक्ति अक्षमता से मुक्त होने पर कार्य कर सकता था;
(ii) नाबालिगों के अभिभावक और मानसिक रूप से विक्षिप्त व्यक्तियों की समितियाँ या प्रबंधक उसी हद तक कार्य कर सकते हैं, जिस हद तक वे नाबालिग, मानसिक रूप से विक्षिप्त व्यक्ति या अन्य विक्षिप्त व्यक्ति स्वयं, यदि अक्षमता से मुक्त होते, तो कार्य कर सकते थे:
बशर्ते कि सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) की पहली अनुसूची के आदेश XXXII के प्रावधान, यथावश्यक परिवर्तनों के साथ , इस अधिनियम के तहत कार्यवाही में कलेक्टर या प्राधिकरण के समक्ष किसी निकट मित्र या मामले के संरक्षक के माध्यम से उपस्थित होने वाले इच्छुक व्यक्तियों के मामले में लागू होंगे;
(m) "परिवार" में एक व्यक्ति, उसका जीवनसाथी, उस पर आश्रित नाबालिग बच्चे, नाबालिग भाई और नाबालिग बहनें शामिल हैं:
इस प्रकार, विधवाओं, तलाकशुदा महिलाओं और परिवार द्वारा परित्यक्त महिलाओं को अलग परिवार माना जाएगा।
स्पष्टीकरण । -- इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए, पति/पत्नी, बच्चों या आश्रितों सहित या उनके साथ किसी भी लिंग के वयस्क को एक अलग परिवार माना जाएगा;
(n) "भूमि का स्वामित्व" से तात्पर्य किसी व्यक्ति द्वारा स्वामी, अधिभोगी या किरायेदार के रूप में या अन्यथा धारित कुल भूमि से है;
(ओ) "अवसंरचना परियोजना" में धारा 2 की उपधारा (1) के खंड (ख) में निर्दिष्ट एक या एक से अधिक मदें शामिल होंगी;
(पी) "भूमि" में भूमि से उत्पन्न होने वाले लाभ और पृथ्वी से जुड़ी हुई वस्तुएँ या पृथ्वी से जुड़ी किसी भी वस्तु से स्थायी रूप से जुड़ी हुई वस्तुएँ शामिल हैं;
(q) "भूमिहीन" से तात्पर्य ऐसे व्यक्तियों या व्यक्तियों के वर्ग से है जो हो सकते हैं,
(i) किसी राज्य कानून के तहत इस प्रकार माना या निर्दिष्ट किया गया हो; या
(ii) उपखंड (i) के अंतर्गत निर्दिष्ट न किए गए भूमिहीन व्यक्ति के मामले में, जैसा कि उपयुक्त सरकार द्वारा निर्दिष्ट किया जा सकता है;
(r) "भूमि स्वामी" में कोई भी व्यक्ति शामिल है,
(i) जिसका नाम संबंधित प्राधिकारी के अभिलेखों में भूमि या भवन या उसके किसी भाग के स्वामी के रूप में दर्ज है; या
(ii) कोई भी व्यक्ति जिसे अनुसूचित जनजाति और अन्य पारंपरिक वनवासी (वन अधिकार मान्यता) अधिनियम, 2006 (2 ऑफ 2007) या उस समय लागू किसी अन्य कानून के तहत वन अधिकार प्रदान किए गए हों; या
(iii) जो राज्य के किसी भी कानून के तहत, जिसमें आवंटित भूमि भी शामिल है, भूमि पर पट्टा अधिकार प्राप्त करने का हकदार है; या
(iv) कोई भी व्यक्ति जिसे न्यायालय या प्राधिकरण के आदेश द्वारा ऐसा घोषित किया गया हो;
(s) "स्थानीय प्राधिकरण" में किसी भी कानून के तहत स्थापित नगर नियोजन प्राधिकरण (चाहे किसी भी नाम से पुकारा जाए), अनुच्छेद 243 में परिभाषित पंचायत और संविधान के अनुच्छेद 243पी में परिभाषित नगरपालिका शामिल हैं;
(टी) "सीमांत किसान" से तात्पर्य एक हेक्टेयर तक की असिंचित भूमि या आधे हेक्टेयर तक की सिंचित भूमि वाले कृषक से है;
(u) "बाजार मूल्य" से तात्पर्य धारा 26 के अनुसार निर्धारित भूमि के मूल्य से है;
(v) "अधिसूचना" से तात्पर्य भारत के राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना से है, या जैसा भी मामला हो, किसी राज्य के राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना से है, और "अधिसूचित करना" अभिव्यक्ति का अर्थ तदनुसार समझा जाएगा;
(w) "पट्टा" का वही अर्थ होगा जो संबंधित केंद्रीय या राज्य अधिनियमों या उनके अंतर्गत बनाए गए नियमों या विनियमों में इसे दिया गया है;
(x) "हितधारक व्यक्ति" का अर्थ है
(i) इस अधिनियम के अधीन भूमि अधिग्रहण के कारण किए जाने वाले मुआवजे में हित का दावा करने वाले सभी व्यक्ति;
(ii) अनुसूचित जनजातियाँ और अन्य पारंपरिक वनवासी, जिन्होंने अनुसूचित जनजातियाँ और अन्य पारंपरिक वनवासी (वन अधिकार मान्यता) अधिनियम, 2006 (2 ऑफ 2007) के तहत मान्यता प्राप्त किसी भी वन अधिकार को खो दिया है;
(iii) भूमि को प्रभावित करने वाले सुगम अधिकार में रुचि रखने वाला व्यक्ति;
(iv) संबंधित राज्य कानूनों के तहत किरायेदारी अधिकार रखने वाले व्यक्ति, जिनमें बटाईदार भी शामिल हैं, चाहे उन्हें किसी भी नाम से पुकारा जाए; और
(v) कोई भी व्यक्ति जिसकी आजीविका का प्राथमिक स्रोत प्रतिकूल रूप से प्रभावित होने की संभावना हो;
(y) निर्धारित का अर्थ है इस अधिनियम के अंतर्गत बनाए गए नियमों द्वारा निर्धारित;
(ज़) "परियोजना" से तात्पर्य ऐसी परियोजना से है जिसके लिए भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है, प्रभावित व्यक्तियों की संख्या से कोई फर्क नहीं पड़ता;
(za) "सार्वजनिक उद्देश्य" से तात्पर्य धारा 2 की उपधारा (1) के अधीन निर्दिष्ट गतिविधियों से है;
(zb) "आवश्यक निकाय" से तात्पर्य किसी कंपनी, निगमित निकाय, संस्था, या किसी अन्य संगठन या व्यक्ति से है जिसके लिए उपयुक्त सरकार द्वारा भूमि का अधिग्रहण किया जाना है, और इसमें उपयुक्त सरकार भी शामिल है, यदि भूमि का अधिग्रहण ऐसी सरकार के लिए या तो अपने स्वयं के उपयोग के लिए या बाद में सार्वजनिक प्रयोजन के लिए किसी कंपनी, निगमित निकाय, संस्था, या किसी अन्य संगठन को पट्टे, लाइसेंस या भूमि हस्तांतरण के किसी अन्य तरीके से ऐसी भूमि के हस्तांतरण के लिए किया जाता है;
(जेडसी) "पुनर्वास क्षेत्र" से तात्पर्य उस क्षेत्र से है जहां भूमि अधिग्रहण के परिणामस्वरूप विस्थापित हुए प्रभावित परिवारों को उपयुक्त सरकार द्वारा पुनर्स्थापित किया जाता है;
(ज़ेडडी) "अनुसूचित क्षेत्र" से तात्पर्य पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम, 1996 (1996 का 40) के प्रावधानों की धारा 2 में परिभाषित अनुसूचित क्षेत्रों से है;
(ze) "छोटा किसान" से तात्पर्य दो हेक्टेयर तक की असिंचित भूमि या एक हेक्टेयर तक की सिंचित भूमि वाले, लेकिन सीमांत किसान की भूमि से अधिक भूमि वाले कृषक से है।
(क) "प्रशासक" से तात्पर्य धारा 43 की उपधारा (1) के अधीन प्रभावित परिवारों के पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन के उद्देश्य से नियुक्त अधिकारी से है;
(ख) "प्रभावित क्षेत्र" से तात्पर्य ऐसे क्षेत्र से है जिसे भूमि अधिग्रहण के प्रयोजनों के लिए उपयुक्त सरकार द्वारा अधिसूचित किया जा सकता है;
(ग) "प्रभावित परिवार" में शामिल हैं--
(i) वह परिवार जिसकी भूमि या अन्य अचल संपत्ति का अधिग्रहण किया गया हो;
(ii) ऐसा परिवार जिसके पास कोई भूमि नहीं है, लेकिन ऐसे परिवार का कोई सदस्य या सदस्य कृषि मजदूर, किरायेदार (किसी भी प्रकार की किरायेदारी या उपयोग का अधिकार रखने वाले), बटाईदार या कारीगर हो सकते हैं, या जो भूमि अधिग्रहण से तीन वर्ष पहले प्रभावित क्षेत्र में काम कर रहे हों, जिनकी आजीविका का प्राथमिक स्रोत भूमि अधिग्रहण से प्रभावित होता है;
(iii) अनुसूचित जनजातियाँ और अन्य पारंपरिक वनवासी जिन्होंने भूमि अधिग्रहण के कारण अनुसूचित जनजातियाँ और अन्य पारंपरिक वनवासी (वन अधिकार मान्यता) अधिनियम, 2006 (2 ऑफ 2007) के तहत मान्यता प्राप्त अपने किसी भी वन अधिकार को खो दिया है;
(iv) वह परिवार जिसकी आजीविका का प्राथमिक स्रोत भूमि अधिग्रहण से तीन वर्ष पूर्व वनों या जल निकायों पर निर्भर है और इसमें वन उत्पाद संग्राहक, शिकारी, मछुआरे और नाविक शामिल हैं और भूमि अधिग्रहण के कारण ऐसी आजीविका प्रभावित होती है;
(v) परिवार का कोई सदस्य जिसे राज्य सरकार या केंद्र सरकार द्वारा अपनी किसी योजना के अंतर्गत भूमि आवंटित की गई हो और ऐसी भूमि अधिग्रहण के अधीन हो;
(vi) कोई परिवार जो भूमि अधिग्रहण से पूर्व तीन वर्ष या उससे अधिक समय से शहरी क्षेत्रों में किसी भूमि पर निवास कर रहा हो या जिसकी आजीविका का प्राथमिक स्रोत भूमि अधिग्रहण से पूर्व तीन वर्षों तक भूमि अधिग्रहण से प्रभावित हो;
(घ) "कृषि भूमि" से तात्पर्य उस भूमि से है जिसका उपयोग निम्नलिखित प्रयोजनों के लिए किया जाता है--
(i) कृषि या बागवानी;
(ii) दुग्ध उत्पादन, मुर्गी पालन, मत्स्य पालन, रेशम उत्पादन, बीज उत्पादन, पशुधन प्रजनन या औषधीय जड़ी-बूटियों की नर्सरी उगाना;
(iii) फसलों, वृक्षों, घास या बगीचे की उपज की खेती; और
(iv) मवेशियों को चराने के लिए प्रयुक्त भूमि;
(ई) "उपयुक्त सरकार" से तात्पर्य है,--
(i) किसी राज्य के क्षेत्र में स्थित भूमि के अधिग्रहण के संबंध में, राज्य सरकार;
(ii) केंद्र शासित प्रदेश (पुडुचेरी को छोड़कर) के भीतर स्थित भूमि के अधिग्रहण के संबंध में, केंद्र सरकार;
(iii) पुडुचेरी केंद्र शासित प्रदेश के भीतर स्थित भूमि के अधिग्रहण के संबंध में, पुडुचेरी केंद्र शासित प्रदेश की सरकार;
(iv) एक से अधिक राज्यों में सार्वजनिक प्रयोजन के लिए भूमि अधिग्रहण के संबंध में, केंद्र सरकार, संबंधित राज्य सरकारों या केंद्र शासित प्रदेशों के परामर्श से; और
(v) संघ के प्रयोजनों के लिए, अधिसूचना द्वारा निर्दिष्ट किए जाने पर, केंद्र सरकार द्वारा भूमि अधिग्रहण के संबंध में:
बशर्ते कि किसी जिले में सार्वजनिक प्रयोजन के लिए, ऐसे क्षेत्र के लिए जो उपयुक्त सरकार द्वारा अधिसूचित क्षेत्र से अधिक न हो, उस जिले के कलेक्टर को उपयुक्त सरकार माना जाएगा;
(f) "प्राधिकरण" से तात्पर्य धारा 51 के अधीन स्थापित भूमि अधिग्रहण एवं पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन प्राधिकरण से है;
(जी) "कलेक्टर" से तात्पर्य राजस्व जिले के कलेक्टर से है, और इसमें उपायुक्त तथा इस अधिनियम के अंतर्गत कलेक्टर के कार्यों को करने के लिए उपयुक्त सरकार द्वारा विशेष रूप से नामित कोई अधिकारी शामिल है;
(h) "आयुक्त" से तात्पर्य धारा 44 की उपधारा (1) के अधीन नियुक्त पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन आयुक्त से है;
(i) "अधिग्रहण लागत" में शामिल है
(i) मुआवजे की राशि जिसमें सोलेटियम, भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन प्राधिकरण या न्यायालय द्वारा आदेशित कोई भी बढ़ी हुई क्षतिपूर्ति और उस पर देय ब्याज तथा ऐसे प्राधिकरण या न्यायालय द्वारा प्रभावित परिवारों को देय निर्धारित कोई अन्य राशि शामिल है;
(ii) अधिग्रहण की प्रक्रिया में भूमि और खड़ी फसलों को हुए नुकसान के लिए विलंब शुल्क का भुगतान किया जाएगा;
(iii) विस्थापित या प्रतिकूल रूप से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए भूमि और भवन के अधिग्रहण की लागत;
(iv) पुनर्वास क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे और सुविधाओं के विकास की लागत;
(v) इस अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार निर्धारित पुनर्वास और पुनर्स्थापन की लागत;
(vi) प्रशासनिक लागत,--
(ए) परियोजना स्थल और परियोजना क्षेत्र से बाहर की भूमि सहित भूमि अधिग्रहण के लिए, मुआवजे की लागत के ऐसे प्रतिशत से अधिक नहीं, जैसा कि उपयुक्त सरकार द्वारा निर्दिष्ट किया जा सकता है;
(ख) भूमि के मालिकों और अन्य प्रभावित परिवारों, जिनकी भूमि का अधिग्रहण किया गया है या अधिग्रहण करने का प्रस्ताव है, या ऐसे अधिग्रहण से प्रभावित अन्य परिवारों के पुनर्वास और पुनर्स्थापन के लिए;
(vii) 'सामाजिक प्रभाव आकलन अध्ययन' करने की लागत;
(j) "कंपनी" से तात्पर्य है--
(i) कंपनी अधिनियम, 1956 (1 ऑफ 1956) की धारा 3 में परिभाषित कंपनी, सरकारी कंपनी के अलावा;
(ii) सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 (21 ऑफ 1860) या किसी राज्य में उस समय लागू किसी संबंधित कानून के तहत पंजीकृत सोसायटी;
(k) "विस्थापित परिवार" से तात्पर्य किसी ऐसे परिवार से है, जिसे भूमि अधिग्रहण के कारण प्रभावित क्षेत्र से पुनर्वास क्षेत्र में स्थानांतरित और पुनर्स्थापित किया जाना है;
(l) किसी व्यक्ति के संबंध में "कार्य करने के हकदार" में निम्नलिखित व्यक्ति शामिल माने जाएंगे, अर्थात्:--
(i) किसी ऐसे मामले के संबंध में अन्य लाभकारी हितधारक व्यक्तियों के लिए न्यासी, और उस सीमा तक जिस सीमा तक लाभकारी हितधारक व्यक्ति अक्षमता से मुक्त होने पर कार्य कर सकता था;
(ii) नाबालिगों के अभिभावक और मानसिक रूप से विक्षिप्त व्यक्तियों की समितियाँ या प्रबंधक उसी हद तक कार्य कर सकते हैं, जिस हद तक वे नाबालिग, मानसिक रूप से विक्षिप्त व्यक्ति या अन्य विक्षिप्त व्यक्ति स्वयं, यदि अक्षमता से मुक्त होते, तो कार्य कर सकते थे:
बशर्ते कि सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) की पहली अनुसूची के आदेश XXXII के प्रावधान, यथावश्यक परिवर्तनों के साथ , इस अधिनियम के तहत कार्यवाही में कलेक्टर या प्राधिकरण के समक्ष किसी निकट मित्र या मामले के संरक्षक के माध्यम से उपस्थित होने वाले इच्छुक व्यक्तियों के मामले में लागू होंगे;
(m) "परिवार" में एक व्यक्ति, उसका जीवनसाथी, उस पर आश्रित नाबालिग बच्चे, नाबालिग भाई और नाबालिग बहनें शामिल हैं:
इस प्रकार, विधवाओं, तलाकशुदा महिलाओं और परिवार द्वारा परित्यक्त महिलाओं को अलग परिवार माना जाएगा।
स्पष्टीकरण । -- इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए, पति/पत्नी, बच्चों या आश्रितों सहित या उनके साथ किसी भी लिंग के वयस्क को एक अलग परिवार माना जाएगा;
(n) "भूमि का स्वामित्व" से तात्पर्य किसी व्यक्ति द्वारा स्वामी, अधिभोगी या किरायेदार के रूप में या अन्यथा धारित कुल भूमि से है;
(ओ) "अवसंरचना परियोजना" में धारा 2 की उपधारा (1) के खंड (ख) में निर्दिष्ट एक या एक से अधिक मदें शामिल होंगी;
(पी) "भूमि" में भूमि से उत्पन्न होने वाले लाभ और पृथ्वी से जुड़ी हुई वस्तुएँ या पृथ्वी से जुड़ी किसी भी वस्तु से स्थायी रूप से जुड़ी हुई वस्तुएँ शामिल हैं;
(q) "भूमिहीन" से तात्पर्य ऐसे व्यक्तियों या व्यक्तियों के वर्ग से है जो हो सकते हैं,
(i) किसी राज्य कानून के तहत इस प्रकार माना या निर्दिष्ट किया गया हो; या
(ii) उपखंड (i) के अंतर्गत निर्दिष्ट न किए गए भूमिहीन व्यक्ति के मामले में, जैसा कि उपयुक्त सरकार द्वारा निर्दिष्ट किया जा सकता है;
(r) "भूमि स्वामी" में कोई भी व्यक्ति शामिल है,
(i) जिसका नाम संबंधित प्राधिकारी के अभिलेखों में भूमि या भवन या उसके किसी भाग के स्वामी के रूप में दर्ज है; या
(ii) कोई भी व्यक्ति जिसे अनुसूचित जनजाति और अन्य पारंपरिक वनवासी (वन अधिकार मान्यता) अधिनियम, 2006 (2 ऑफ 2007) या उस समय लागू किसी अन्य कानून के तहत वन अधिकार प्रदान किए गए हों; या
(iii) जो राज्य के किसी भी कानून के तहत, जिसमें आवंटित भूमि भी शामिल है, भूमि पर पट्टा अधिकार प्राप्त करने का हकदार है; या
(iv) कोई भी व्यक्ति जिसे न्यायालय या प्राधिकरण के आदेश द्वारा ऐसा घोषित किया गया हो;
(s) "स्थानीय प्राधिकरण" में किसी भी कानून के तहत स्थापित नगर नियोजन प्राधिकरण (चाहे किसी भी नाम से पुकारा जाए), अनुच्छेद 243 में परिभाषित पंचायत और संविधान के अनुच्छेद 243पी में परिभाषित नगरपालिका शामिल हैं;
(टी) "सीमांत किसान" से तात्पर्य एक हेक्टेयर तक की असिंचित भूमि या आधे हेक्टेयर तक की सिंचित भूमि वाले कृषक से है;
(u) "बाजार मूल्य" से तात्पर्य धारा 26 के अनुसार निर्धारित भूमि के मूल्य से है;
(v) "अधिसूचना" से तात्पर्य भारत के राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना से है, या जैसा भी मामला हो, किसी राज्य के राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना से है, और "अधिसूचित करना" अभिव्यक्ति का अर्थ तदनुसार समझा जाएगा;
(w) "पट्टा" का वही अर्थ होगा जो संबंधित केंद्रीय या राज्य अधिनियमों या उनके अंतर्गत बनाए गए नियमों या विनियमों में इसे दिया गया है;
(x) "हितधारक व्यक्ति" का अर्थ है
(i) इस अधिनियम के अधीन भूमि अधिग्रहण के कारण किए जाने वाले मुआवजे में हित का दावा करने वाले सभी व्यक्ति;
(ii) अनुसूचित जनजातियाँ और अन्य पारंपरिक वनवासी, जिन्होंने अनुसूचित जनजातियाँ और अन्य पारंपरिक वनवासी (वन अधिकार मान्यता) अधिनियम, 2006 (2 ऑफ 2007) के तहत मान्यता प्राप्त किसी भी वन अधिकार को खो दिया है;
(iii) भूमि को प्रभावित करने वाले सुगम अधिकार में रुचि रखने वाला व्यक्ति;
(iv) संबंधित राज्य कानूनों के तहत किरायेदारी अधिकार रखने वाले व्यक्ति, जिनमें बटाईदार भी शामिल हैं, चाहे उन्हें किसी भी नाम से पुकारा जाए; और
(v) कोई भी व्यक्ति जिसकी आजीविका का प्राथमिक स्रोत प्रतिकूल रूप से प्रभावित होने की संभावना हो;
(y) निर्धारित का अर्थ है इस अधिनियम के अंतर्गत बनाए गए नियमों द्वारा निर्धारित;
(ज़) "परियोजना" से तात्पर्य ऐसी परियोजना से है जिसके लिए भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है, प्रभावित व्यक्तियों की संख्या से कोई फर्क नहीं पड़ता;
(za) "सार्वजनिक उद्देश्य" से तात्पर्य धारा 2 की उपधारा (1) के अधीन निर्दिष्ट गतिविधियों से है;
(zb) "आवश्यक निकाय" से तात्पर्य किसी कंपनी, निगमित निकाय, संस्था, या किसी अन्य संगठन या व्यक्ति से है जिसके लिए उपयुक्त सरकार द्वारा भूमि का अधिग्रहण किया जाना है, और इसमें उपयुक्त सरकार भी शामिल है, यदि भूमि का अधिग्रहण ऐसी सरकार के लिए या तो अपने स्वयं के उपयोग के लिए या बाद में सार्वजनिक प्रयोजन के लिए किसी कंपनी, निगमित निकाय, संस्था, या किसी अन्य संगठन को पट्टे, लाइसेंस या भूमि हस्तांतरण के किसी अन्य तरीके से ऐसी भूमि के हस्तांतरण के लिए किया जाता है;
(जेडसी) "पुनर्वास क्षेत्र" से तात्पर्य उस क्षेत्र से है जहां भूमि अधिग्रहण के परिणामस्वरूप विस्थापित हुए प्रभावित परिवारों को उपयुक्त सरकार द्वारा पुनर्स्थापित किया जाता है;
(ज़ेडडी) "अनुसूचित क्षेत्र" से तात्पर्य पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम, 1996 (1996 का 40) के प्रावधानों की धारा 2 में परिभाषित अनुसूचित क्षेत्रों से है;
(ze) "छोटा किसान" से तात्पर्य दो हेक्टेयर तक की असिंचित भूमि या एक हेक्टेयर तक की सिंचित भूमि वाले, लेकिन सीमांत किसान की भूमि से अधिक भूमि वाले कृषक से है।
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