The Right to Fair Compensation and Transparency in Land Acquisition, Rehabilitation and Resettlement Act, 2013 11अध्याय IV · Notification and Acquisition
धारा 11 · प्रारंभिक अधिसूचना का प्रकाशन और उसके बाद अधिकारियों को प्राप्त होने वाली शक्तियां।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) जब भी उपयुक्त सरकार को यह प्रतीत हो कि किसी क्षेत्र में किसी सार्वजनिक प्रयोजन के लिए भूमि की आवश्यकता है या आवश्यकता होने की संभावना है, तो इस संबंध में एक अधिसूचना (जिसे इसके बाद प्रारंभिक अधिसूचना कहा जाएगा) ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में अधिग्रहित की जाने वाली भूमि के विवरण सहित निम्नलिखित तरीके से प्रकाशित की जाएगी, अर्थात्:—
(क) राजपत्र में;
(ख) ऐसे क्षेत्र के इलाके में प्रसारित होने वाले दो दैनिक समाचार पत्रों में, जिनमें से एक क्षेत्रीय भाषा में होगा;
(ग) पंचायत, नगरपालिका या नगर निगम में, जैसा भी मामला हो, तथा जिला कलेक्टर, उप-विभागीय मजिस्ट्रेट और तहसील के कार्यालयों में स्थानीय भाषा में;
(घ) उपयुक्त सरकार की वेबसाइट पर अपलोड किया गया;
(ई) प्रभावित क्षेत्रों में, ऐसे तरीके से जैसा निर्धारित किया जाए।
(2) उपधारा (1) के तहत अधिसूचना जारी होने के तुरंत बाद, भूमि अधिग्रहण के सभी मामलों में संबंधित ग्राम सभा या ग्राम स्तर पर सभाओं, नगरपालिका क्षेत्रों के मामले में नगरपालिकाओं और संविधान की छठी अनुसूची में निर्दिष्ट क्षेत्रों के मामले में स्वायत्त परिषदों को उक्त उपधारा के तहत जारी अधिसूचना की विषयवस्तु के बारे में इस उद्देश्य के लिए विशेष रूप से बुलाई गई बैठक में सूचित किया जाएगा।
(3) उपधारा (1) के तहत जारी अधिसूचना में संबंधित सार्वजनिक उद्देश्य की प्रकृति, प्रभावित व्यक्तियों के विस्थापन को आवश्यक बनाने वाले कारण, सामाजिक प्रभाव आकलन रिपोर्ट का सारांश और धारा 43 के तहत पुनर्वास और पुनर्स्थापन के प्रयोजनों के लिए नियुक्त प्रशासक का विवरण भी शामिल होगा।
(4) कोई भी व्यक्ति प्रारंभिक अधिसूचना में निर्दिष्ट भूमि का कोई लेन-देन नहीं करेगा या किसी भूमि का लेन-देन नहीं करवाएगा या ऐसी अधिसूचना के प्रकाशन की तारीख से लेकर इस अध्याय के अंतर्गत कार्यवाही पूरी होने तक ऐसी भूमि पर कोई भार उत्पन्न नहीं करेगा:
बशर्ते कि कलेक्टर, अधिसूचित भूमि के स्वामी द्वारा किए गए आवेदन पर, लिखित रूप में दर्ज की जाने वाली विशेष परिस्थितियों में, ऐसे स्वामी को इस उपधारा के संचालन से छूट दे सकता है:
इसके अलावा, इस प्रावधान का जानबूझकर उल्लंघन करने के कारण किसी व्यक्ति को हुई किसी भी हानि या चोट की भरपाई कलेक्टर द्वारा नहीं की जाएगी।
(5) उपधारा (1) के तहत नोटिस जारी करने के बाद, कलेक्टर धारा 19 के तहत घोषणा जारी करने से पहले, निर्धारित अनुसार भूमि अभिलेखों को अद्यतन करने का कार्य दो महीने की अवधि के भीतर करेगा और उसे पूरा करेगा।
(क) राजपत्र में;
(ख) ऐसे क्षेत्र के इलाके में प्रसारित होने वाले दो दैनिक समाचार पत्रों में, जिनमें से एक क्षेत्रीय भाषा में होगा;
(ग) पंचायत, नगरपालिका या नगर निगम में, जैसा भी मामला हो, तथा जिला कलेक्टर, उप-विभागीय मजिस्ट्रेट और तहसील के कार्यालयों में स्थानीय भाषा में;
(घ) उपयुक्त सरकार की वेबसाइट पर अपलोड किया गया;
(ई) प्रभावित क्षेत्रों में, ऐसे तरीके से जैसा निर्धारित किया जाए।
(2) उपधारा (1) के तहत अधिसूचना जारी होने के तुरंत बाद, भूमि अधिग्रहण के सभी मामलों में संबंधित ग्राम सभा या ग्राम स्तर पर सभाओं, नगरपालिका क्षेत्रों के मामले में नगरपालिकाओं और संविधान की छठी अनुसूची में निर्दिष्ट क्षेत्रों के मामले में स्वायत्त परिषदों को उक्त उपधारा के तहत जारी अधिसूचना की विषयवस्तु के बारे में इस उद्देश्य के लिए विशेष रूप से बुलाई गई बैठक में सूचित किया जाएगा।
(3) उपधारा (1) के तहत जारी अधिसूचना में संबंधित सार्वजनिक उद्देश्य की प्रकृति, प्रभावित व्यक्तियों के विस्थापन को आवश्यक बनाने वाले कारण, सामाजिक प्रभाव आकलन रिपोर्ट का सारांश और धारा 43 के तहत पुनर्वास और पुनर्स्थापन के प्रयोजनों के लिए नियुक्त प्रशासक का विवरण भी शामिल होगा।
(4) कोई भी व्यक्ति प्रारंभिक अधिसूचना में निर्दिष्ट भूमि का कोई लेन-देन नहीं करेगा या किसी भूमि का लेन-देन नहीं करवाएगा या ऐसी अधिसूचना के प्रकाशन की तारीख से लेकर इस अध्याय के अंतर्गत कार्यवाही पूरी होने तक ऐसी भूमि पर कोई भार उत्पन्न नहीं करेगा:
बशर्ते कि कलेक्टर, अधिसूचित भूमि के स्वामी द्वारा किए गए आवेदन पर, लिखित रूप में दर्ज की जाने वाली विशेष परिस्थितियों में, ऐसे स्वामी को इस उपधारा के संचालन से छूट दे सकता है:
इसके अलावा, इस प्रावधान का जानबूझकर उल्लंघन करने के कारण किसी व्यक्ति को हुई किसी भी हानि या चोट की भरपाई कलेक्टर द्वारा नहीं की जाएगी।
(5) उपधारा (1) के तहत नोटिस जारी करने के बाद, कलेक्टर धारा 19 के तहत घोषणा जारी करने से पहले, निर्धारित अनुसार भूमि अभिलेखों को अद्यतन करने का कार्य दो महीने की अवधि के भीतर करेगा और उसे पूरा करेगा।
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