The Right to Fair Compensation and Transparency in Land Acquisition, Rehabilitation and Resettlement Act, 2013 24अध्याय IV · Notification and Acquisition
धारा 24 · कुछ मामलों में अधिनियम संख्या 1, 1984 के तहत भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया समाप्त मानी जाएगी।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) इस अधिनियम में किसी बात के होते हुए भी, भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 के अंतर्गत आरंभ की गई किसी भी भूमि अधिग्रहण कार्यवाही के मामले में,--
(क) जहां उक्त भूमि अधिग्रहण अधिनियम की धारा 11 के तहत कोई पुरस्कार नहीं दिया गया है, तो मुआवजे के निर्धारण से संबंधित इस अधिनियम के सभी प्रावधान लागू होंगे; या
(ख) जहां उक्त धारा 11 के तहत कोई पुरस्कार दिया गया है, तो ऐसी कार्यवाही उक्त भूमि अधिग्रहण अधिनियम के प्रावधानों के तहत जारी रहेगी, मानो उक्त अधिनियम निरस्त नहीं किया गया हो।
(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 (1 ऑफ 1894) के तहत शुरू की गई भूमि अधिग्रहण कार्यवाही के मामले में, जहां उक्त धारा 11 के तहत इस अधिनियम के प्रारंभ होने से पांच वर्ष या उससे अधिक पूर्व कोई पुरस्कार दिया गया हो, लेकिन भूमि का भौतिक कब्जा नहीं लिया गया हो या मुआवजा नहीं दिया गया हो, तो उक्त कार्यवाही समाप्त मानी जाएगी और उपयुक्त सरकार, यदि चाहे तो, इस अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार ऐसी भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही नए सिरे से शुरू करेगी।
बशर्ते कि जहां कोई पुरस्कार दिया गया है और अधिकांश भूमि जोतों के संबंध में मुआवजा लाभार्थियों के खाते में जमा नहीं किया गया है, तो उक्त भूमि अधिग्रहण अधिनियम की धारा 4 के तहत अधिग्रहण के लिए अधिसूचना में निर्दिष्ट सभी लाभार्थी इस अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार मुआवजे के हकदार होंगे।
राज्य संशोधन
आंध्र प्रदेश
मूल अधिनियम में, धारा 24 में, उपधारा (2) में, ---
(1) मौजूदा परंतुक में, "जहां कोई पुरस्कार दिया गया है" अभिव्यक्ति के स्थान पर "जहां उक्त पुरस्कार इस अधिनियम के प्रारंभ होने से 5 वर्ष या अधिक पूर्व दिया गया है" अभिव्यक्ति प्रतिस्थापित की जाएगी;
(2) यथार्थ प्रावधान के पश्चात, निम्नलिखित प्रावधान जोड़ा जाएगा, अर्थात्:--
इसके अलावा, इस उपधारा में निर्दिष्ट अवधि की गणना करते समय, वह अवधि या अवधियाँ जिनमें किसी न्यायालय द्वारा जारी किसी आदेश, रोक, निलंबन या निषेधाज्ञा के कारण भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही रुकी रही हो, या किसी न्यायाधिकरण के निर्णय में कब्जा लेने के लिए निर्दिष्ट अवधि, या ऐसी अवधि जिसमें कब्जा ले लिया गया हो लेकिन मुआवजा किसी न्यायालय में या इस उद्देश्य के लिए बनाए गए किसी निर्दिष्ट खाते में जमा हो, को शामिल नहीं किया जाएगा।
[आंध्र प्रदेश अधिनियम 22, 2018, धारा 5 (1-1-2014 से प्रभावी )]
महाराष्ट्र
मुख्य अधिनियम की धारा 24 की उपधारा (2) में परंतुक के बाद निम्नलिखित परंतुक जोड़ा जाएगा, अर्थात्:--
इसके अलावा, इस उपधारा में निर्दिष्ट अवधि की गणना करते समय, वह अवधि या अवधियाँ जिनमें किसी न्यायालय द्वारा जारी किसी स्थगन या निषेधाज्ञा के कारण भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही रुकी रही हो, या किसी न्यायाधिकरण के निर्णय में कब्ज़ा लेने के लिए निर्दिष्ट अवधि, या ऐसी अवधि जिसमें कब्ज़ा ले लिया गया हो, लेकिन भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 (1894 का प्रथम वर्ष) की धारा 12 की उपधारा (2) के तहत नोटिस प्राप्त होने के बावजूद मुआवज़ा प्राप्त करने से इनकार करने या आगे न आने के कारण मुआवज़ा किसी न्यायालय में या इस उद्देश्य के लिए बनाए गए किसी निर्दिष्ट खाते में जमा हो, उसे शामिल नहीं किया जाएगा। साथ ही, यदि उक्त भूमि अधिग्रहण निकाय के नाम पर निर्णय पारित होने के तीन वर्ष के भीतर म्यूटेट हो जाती है, तो यह माना जाएगा कि भूमि का कब्ज़ा ले लिया गया है।
[महाराष्ट्र अधिनियम 37, 2018, धारा 5 (26-4-2018) के अनुसार ]
हरयाणा
मुख्य अधिनियम की धारा 24 में,-
(i) उपधारा (1) के स्थान पर निम्नलिखित स्पष्टीकरण जोड़ा जाएगा, अर्थात्:-
स्पष्टीकरण .-इस उपधारा के प्रयोजन के लिए, भूमि अधिग्रहण कार्यवाही को भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 (केंद्रीय अधिनियम 1 ऑफ 1894) के तहत आरंभ किया गया माना जाएगा, जहाँ उक्त अधिनियम की धारा 4 के तहत अधिसूचना उक्त धारा की उपधारा (1) के तहत किसी भी रूप में प्रकाशित की गई हो।
(ii) उपधारा (2) में,-
(क) 'शारीरिक' शब्द को हटा दिया जाएगा;
(ख) “भूमि का कब्ज़ा नहीं लिया गया है” शब्दों के बाद आने वाले शब्द “या” के स्थान पर “और” शब्द प्रतिस्थापित किया जाएगा;
(ग) परंतुक में, अंत में स्थित “.” चिह्न के स्थान पर “:” चिह्न प्रतिस्थापित किया जाएगा; और
(घ) यथार्थ परंतु के पश्चात, निम्नलिखित परंतु अंत में जोड़ा जाएगा, अर्थात्:-
इसके अलावा, इस उपधारा में निर्दिष्ट अवधि की गणना करते समय, किसी भी न्यायालय के आदेश द्वारा जारी किसी स्थगन या निषेधाज्ञा के कारण भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही में हुई किसी भी अवधि को शामिल नहीं किया जाएगा।
इसके अलावा, भूमि अधिग्रहण अधिकारी या राजस्व अधिकारी द्वारा दर्ज की गई कब्जे को लेने या सौंपने संबंधी रापट रोजनामचा में दर्ज प्रविष्टि को सभी उद्देश्यों के लिए कब्जा लिया गया माना जाएगा।
[हरियाणा अधिनियम 21, 2018, धारा 2 (9-5-2018) के अनुसार ]
(क) जहां उक्त भूमि अधिग्रहण अधिनियम की धारा 11 के तहत कोई पुरस्कार नहीं दिया गया है, तो मुआवजे के निर्धारण से संबंधित इस अधिनियम के सभी प्रावधान लागू होंगे; या
(ख) जहां उक्त धारा 11 के तहत कोई पुरस्कार दिया गया है, तो ऐसी कार्यवाही उक्त भूमि अधिग्रहण अधिनियम के प्रावधानों के तहत जारी रहेगी, मानो उक्त अधिनियम निरस्त नहीं किया गया हो।
(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 (1 ऑफ 1894) के तहत शुरू की गई भूमि अधिग्रहण कार्यवाही के मामले में, जहां उक्त धारा 11 के तहत इस अधिनियम के प्रारंभ होने से पांच वर्ष या उससे अधिक पूर्व कोई पुरस्कार दिया गया हो, लेकिन भूमि का भौतिक कब्जा नहीं लिया गया हो या मुआवजा नहीं दिया गया हो, तो उक्त कार्यवाही समाप्त मानी जाएगी और उपयुक्त सरकार, यदि चाहे तो, इस अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार ऐसी भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही नए सिरे से शुरू करेगी।
बशर्ते कि जहां कोई पुरस्कार दिया गया है और अधिकांश भूमि जोतों के संबंध में मुआवजा लाभार्थियों के खाते में जमा नहीं किया गया है, तो उक्त भूमि अधिग्रहण अधिनियम की धारा 4 के तहत अधिग्रहण के लिए अधिसूचना में निर्दिष्ट सभी लाभार्थी इस अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार मुआवजे के हकदार होंगे।
राज्य संशोधन
आंध्र प्रदेश
मूल अधिनियम में, धारा 24 में, उपधारा (2) में, ---
(1) मौजूदा परंतुक में, "जहां कोई पुरस्कार दिया गया है" अभिव्यक्ति के स्थान पर "जहां उक्त पुरस्कार इस अधिनियम के प्रारंभ होने से 5 वर्ष या अधिक पूर्व दिया गया है" अभिव्यक्ति प्रतिस्थापित की जाएगी;
(2) यथार्थ प्रावधान के पश्चात, निम्नलिखित प्रावधान जोड़ा जाएगा, अर्थात्:--
इसके अलावा, इस उपधारा में निर्दिष्ट अवधि की गणना करते समय, वह अवधि या अवधियाँ जिनमें किसी न्यायालय द्वारा जारी किसी आदेश, रोक, निलंबन या निषेधाज्ञा के कारण भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही रुकी रही हो, या किसी न्यायाधिकरण के निर्णय में कब्जा लेने के लिए निर्दिष्ट अवधि, या ऐसी अवधि जिसमें कब्जा ले लिया गया हो लेकिन मुआवजा किसी न्यायालय में या इस उद्देश्य के लिए बनाए गए किसी निर्दिष्ट खाते में जमा हो, को शामिल नहीं किया जाएगा।
[आंध्र प्रदेश अधिनियम 22, 2018, धारा 5 (1-1-2014 से प्रभावी )]
महाराष्ट्र
मुख्य अधिनियम की धारा 24 की उपधारा (2) में परंतुक के बाद निम्नलिखित परंतुक जोड़ा जाएगा, अर्थात्:--
इसके अलावा, इस उपधारा में निर्दिष्ट अवधि की गणना करते समय, वह अवधि या अवधियाँ जिनमें किसी न्यायालय द्वारा जारी किसी स्थगन या निषेधाज्ञा के कारण भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही रुकी रही हो, या किसी न्यायाधिकरण के निर्णय में कब्ज़ा लेने के लिए निर्दिष्ट अवधि, या ऐसी अवधि जिसमें कब्ज़ा ले लिया गया हो, लेकिन भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 (1894 का प्रथम वर्ष) की धारा 12 की उपधारा (2) के तहत नोटिस प्राप्त होने के बावजूद मुआवज़ा प्राप्त करने से इनकार करने या आगे न आने के कारण मुआवज़ा किसी न्यायालय में या इस उद्देश्य के लिए बनाए गए किसी निर्दिष्ट खाते में जमा हो, उसे शामिल नहीं किया जाएगा। साथ ही, यदि उक्त भूमि अधिग्रहण निकाय के नाम पर निर्णय पारित होने के तीन वर्ष के भीतर म्यूटेट हो जाती है, तो यह माना जाएगा कि भूमि का कब्ज़ा ले लिया गया है।
[महाराष्ट्र अधिनियम 37, 2018, धारा 5 (26-4-2018) के अनुसार ]
हरयाणा
मुख्य अधिनियम की धारा 24 में,-
(i) उपधारा (1) के स्थान पर निम्नलिखित स्पष्टीकरण जोड़ा जाएगा, अर्थात्:-
स्पष्टीकरण .-इस उपधारा के प्रयोजन के लिए, भूमि अधिग्रहण कार्यवाही को भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 (केंद्रीय अधिनियम 1 ऑफ 1894) के तहत आरंभ किया गया माना जाएगा, जहाँ उक्त अधिनियम की धारा 4 के तहत अधिसूचना उक्त धारा की उपधारा (1) के तहत किसी भी रूप में प्रकाशित की गई हो।
(ii) उपधारा (2) में,-
(क) 'शारीरिक' शब्द को हटा दिया जाएगा;
(ख) “भूमि का कब्ज़ा नहीं लिया गया है” शब्दों के बाद आने वाले शब्द “या” के स्थान पर “और” शब्द प्रतिस्थापित किया जाएगा;
(ग) परंतुक में, अंत में स्थित “.” चिह्न के स्थान पर “:” चिह्न प्रतिस्थापित किया जाएगा; और
(घ) यथार्थ परंतु के पश्चात, निम्नलिखित परंतु अंत में जोड़ा जाएगा, अर्थात्:-
इसके अलावा, इस उपधारा में निर्दिष्ट अवधि की गणना करते समय, किसी भी न्यायालय के आदेश द्वारा जारी किसी स्थगन या निषेधाज्ञा के कारण भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही में हुई किसी भी अवधि को शामिल नहीं किया जाएगा।
इसके अलावा, भूमि अधिग्रहण अधिकारी या राजस्व अधिकारी द्वारा दर्ज की गई कब्जे को लेने या सौंपने संबंधी रापट रोजनामचा में दर्ज प्रविष्टि को सभी उद्देश्यों के लिए कब्जा लिया गया माना जाएगा।
[हरियाणा अधिनियम 21, 2018, धारा 2 (9-5-2018) के अनुसार ]
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