The Right to Fair Compensation and Transparency in Land Acquisition, Rehabilitation and Resettlement Act, 2013 23अध्याय IV · Notification and Acquisition
धारा 23 · कलेक्टर द्वारा जांच और भूमि अधिग्रहण संबंधी आदेश।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
निर्धारित तिथि पर, या किसी अन्य तिथि पर जिस पर जांच स्थगित की गई हो, कलेक्टर धारा 21 के तहत जारी नोटिस के अनुसार किसी भी हितधारक द्वारा धारा 20 के तहत किए गए मापों पर उठाई गई आपत्तियों (यदि कोई हो) की जांच करेगा, अधिसूचना के प्रकाशन की तिथि पर भूमि के मूल्य की जांच करेगा, और मुआवजे और पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन का दावा करने वाले व्यक्तियों के संबंधित हितों की जांच करेगा, और अपने हस्ताक्षर से एक निर्णय जारी करेगा--
(क) भूमि का वास्तविक क्षेत्रफल;
(ख) धारा 27 के तहत निर्धारित मुआवजा, धारा 31 के तहत निर्धारित पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन पुरस्कार के साथ, जो उनकी राय में भूमि के लिए दिया जाना चाहिए; और
(ग) उक्त मुआवजे का बंटवारा उन सभी व्यक्तियों के बीच किया जाएगा जो भूमि में रुचि रखते हों या जिनके बारे में उसे जानकारी हो, चाहे वे क्रमशः उसके समक्ष उपस्थित हुए हों या नहीं।
राज्य संशोधन
आंध्र प्रदेश
मूल अधिनियम में धारा 23 के बाद निम्नलिखित धारा जोड़ी जाएगी, अर्थात्:--
23क. संबंधित व्यक्तियों के समझौते की स्थिति में कलेक्टर द्वारा बिना जांच के निर्णय.-- (1) धारा 23 में किसी बात के होते हुए भी, यदि कार्यवाही के किसी भी चरण में कलेक्टर संतुष्ट हो कि भूमि में रुचि रखने वाले सभी व्यक्ति जो उसके समक्ष उपस्थित हुए हैं, कलेक्टर द्वारा निर्धारित प्रारूप में दिए जाने वाले निर्णय में शामिल किए जाने वाले मामलों पर लिखित रूप में सहमत हो गए हैं, तो वह आगे कोई जांच किए बिना, ऐसे समझौते की शर्तों के अनुसार निर्णय दे सकता है।
(2) उपधारा (1) के अधीन किसी भूमि के लिए मुआवजे का निर्धारण, इस अधिनियम के अन्य प्रावधानों के अनुसार उसी इलाके या कहीं और स्थित अन्य भूमियों के संबंध में मुआवजे के निर्धारण को किसी भी तरह से प्रभावित नहीं करेगा।
(3) पंजीकरण अधिनियम, 1908 (अधिनियम 16 ऑफ 1908) में किसी बात के होते हुए भी, उप-धारा (1) के तहत किया गया कोई भी समझौता उस अधिनियम के तहत पंजीकरण के लिए उत्तरदायी नहीं होगा।
[आंध्र प्रदेश अधिनियम 22, 2018, धारा 4 (1-1-2014 से प्रभावी)]
महाराष्ट्र
मूल अधिनियम की धारा 23 के बाद, निम्नलिखित धारा जोड़ी जाएगी, अर्थात्:-
23क. संबंधित व्यक्तियों के समझौते की स्थिति में कलेक्टर द्वारा बिना जांच के निर्णय – (1) धारा 23 में किसी बात के होते हुए भी, यदि कार्यवाही के किसी भी चरण में कलेक्टर संतुष्ट हो कि भूमि में रुचि रखने वाले सभी व्यक्ति जो उसके समक्ष उपस्थित हुए हैं, उन्होंने राज्य सरकार द्वारा बनाए गए नियमों के अनुसार कलेक्टर के निर्णय में शामिल किए जाने वाले मामलों पर लिखित रूप में सहमति व्यक्त की है, तो वह आगे कोई जांच किए बिना, ऐसे समझौते की शर्तों के अनुसार निर्णय दे सकता है।
(2) उपधारा (1) के अधीन किसी भूमि के लिए मुआवजे का निर्धारण, इस अधिनियम के अन्य प्रावधानों के अनुसार उसी इलाके या कहीं और स्थित अन्य भूमियों के संबंध में मुआवजे के निर्धारण को किसी भी तरह से प्रभावित नहीं करेगा।
(3) पंजीकरण अधिनियम, 1908 (16 ऑफ 1908) में किसी बात के होते हुए भी, उप-धारा (1) के तहत किया गया कोई भी समझौता उस अधिनियम के तहत पंजीकरण के लिए उत्तरदायी नहीं होगा।
[महाराष्ट्र अधिनियम 37, 2018, धारा 4 (दिनांक 26-4-2014 से प्रभावी)]
(क) भूमि का वास्तविक क्षेत्रफल;
(ख) धारा 27 के तहत निर्धारित मुआवजा, धारा 31 के तहत निर्धारित पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन पुरस्कार के साथ, जो उनकी राय में भूमि के लिए दिया जाना चाहिए; और
(ग) उक्त मुआवजे का बंटवारा उन सभी व्यक्तियों के बीच किया जाएगा जो भूमि में रुचि रखते हों या जिनके बारे में उसे जानकारी हो, चाहे वे क्रमशः उसके समक्ष उपस्थित हुए हों या नहीं।
राज्य संशोधन
आंध्र प्रदेश
मूल अधिनियम में धारा 23 के बाद निम्नलिखित धारा जोड़ी जाएगी, अर्थात्:--
23क. संबंधित व्यक्तियों के समझौते की स्थिति में कलेक्टर द्वारा बिना जांच के निर्णय.-- (1) धारा 23 में किसी बात के होते हुए भी, यदि कार्यवाही के किसी भी चरण में कलेक्टर संतुष्ट हो कि भूमि में रुचि रखने वाले सभी व्यक्ति जो उसके समक्ष उपस्थित हुए हैं, कलेक्टर द्वारा निर्धारित प्रारूप में दिए जाने वाले निर्णय में शामिल किए जाने वाले मामलों पर लिखित रूप में सहमत हो गए हैं, तो वह आगे कोई जांच किए बिना, ऐसे समझौते की शर्तों के अनुसार निर्णय दे सकता है।
(2) उपधारा (1) के अधीन किसी भूमि के लिए मुआवजे का निर्धारण, इस अधिनियम के अन्य प्रावधानों के अनुसार उसी इलाके या कहीं और स्थित अन्य भूमियों के संबंध में मुआवजे के निर्धारण को किसी भी तरह से प्रभावित नहीं करेगा।
(3) पंजीकरण अधिनियम, 1908 (अधिनियम 16 ऑफ 1908) में किसी बात के होते हुए भी, उप-धारा (1) के तहत किया गया कोई भी समझौता उस अधिनियम के तहत पंजीकरण के लिए उत्तरदायी नहीं होगा।
[आंध्र प्रदेश अधिनियम 22, 2018, धारा 4 (1-1-2014 से प्रभावी)]
महाराष्ट्र
मूल अधिनियम की धारा 23 के बाद, निम्नलिखित धारा जोड़ी जाएगी, अर्थात्:-
23क. संबंधित व्यक्तियों के समझौते की स्थिति में कलेक्टर द्वारा बिना जांच के निर्णय – (1) धारा 23 में किसी बात के होते हुए भी, यदि कार्यवाही के किसी भी चरण में कलेक्टर संतुष्ट हो कि भूमि में रुचि रखने वाले सभी व्यक्ति जो उसके समक्ष उपस्थित हुए हैं, उन्होंने राज्य सरकार द्वारा बनाए गए नियमों के अनुसार कलेक्टर के निर्णय में शामिल किए जाने वाले मामलों पर लिखित रूप में सहमति व्यक्त की है, तो वह आगे कोई जांच किए बिना, ऐसे समझौते की शर्तों के अनुसार निर्णय दे सकता है।
(2) उपधारा (1) के अधीन किसी भूमि के लिए मुआवजे का निर्धारण, इस अधिनियम के अन्य प्रावधानों के अनुसार उसी इलाके या कहीं और स्थित अन्य भूमियों के संबंध में मुआवजे के निर्धारण को किसी भी तरह से प्रभावित नहीं करेगा।
(3) पंजीकरण अधिनियम, 1908 (16 ऑफ 1908) में किसी बात के होते हुए भी, उप-धारा (1) के तहत किया गया कोई भी समझौता उस अधिनियम के तहत पंजीकरण के लिए उत्तरदायी नहीं होगा।
[महाराष्ट्र अधिनियम 37, 2018, धारा 4 (दिनांक 26-4-2014 से प्रभावी)]
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