The Right to Fair Compensation and Transparency in Land Acquisition, Rehabilitation and Resettlement Act, 2013 101अध्याय XIII · Miscellaneous
धारा 101 · अनुपयोगित भूमि की वापसी।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
इस अधिनियम के तहत अधिग्रहित कोई भी भूमि, कब्जे की तारीख से पांच वर्ष की अवधि तक अनुपयोगित रहने पर, उसे मूल स्वामी या स्वामियों या उनके कानूनी वारिसों को, जैसा भी मामला हो, या उपयुक्त सरकार के भूमि बैंक को उपयुक्त सरकार द्वारा निर्धारित तरीके से वापस कर दिया जाएगा।
स्पष्टीकरण .--इस धारा के प्रयोजन के लिए, भूमि बैंक का अर्थ एक सरकारी संस्था है जो सरकार के स्वामित्व वाली खाली, परित्यक्त, अप्रयुक्त अधिग्रहित भूमि और कर बकाया संपत्तियों को उत्पादक उपयोग में परिवर्तित करने पर ध्यान केंद्रित करती है।
राज्य संशोधन
आंध्र प्रदेश
मूल अधिनियम में, धारा 101 में, "पांच वर्ष की अवधि" शब्दों के स्थान पर, "किसी परियोजना की स्थापना के लिए निर्दिष्ट अवधि या पांच वर्ष, जो भी बाद में हो" शब्द प्रतिस्थापित किए जाएंगे।
[आंध्र प्रदेश अधिनियम 22, 2018, धारा 11 (1-1-2014 से प्रभावी )]
हरयाणा
मूल अधिनियम की धारा 101 के बाद निम्नलिखित धारा जोड़ी जाएगी, अर्थात्:-
“101ए. भूमि को अधिसूचित न करने की शक्ति.- जब कोई सार्वजनिक उद्देश्य, जिसके लिए भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 (केंद्रीय अधिनियम 1 ऑफ 1894) के तहत अधिग्रहित भूमि का उपयोग संभव न हो या वह आवश्यक न रह जाए, तो राज्य सरकार ऐसी भूमि को, राज्य सरकार द्वारा उचित समझे जाने वाली शर्तों पर, अधिसूचित न करने के लिए स्वतंत्र होगी, जिसमें भूमि स्वामी को अधिग्रहण के कारण हुई किसी भी क्षति के लिए मुआवजे का भुगतान भी शामिल है:
बशर्ते कि यदि अधिग्रहित भूमि के किसी भाग का उपयोग किया गया हो या उस पर कोई भार उत्पन्न हुआ हो, तो भूस्वामी को राज्य सरकार द्वारा निर्धारित क्षतिपूर्ति के भुगतान के साथ-साथ वैकल्पिक भूमि उपलब्ध कराकर मुआवजा दिया जा सकता है।
[हरियाणा अधिनियम 21, 2018, धारा 5 (9-5-2018 से प्रभावी )]
स्पष्टीकरण .--इस धारा के प्रयोजन के लिए, भूमि बैंक का अर्थ एक सरकारी संस्था है जो सरकार के स्वामित्व वाली खाली, परित्यक्त, अप्रयुक्त अधिग्रहित भूमि और कर बकाया संपत्तियों को उत्पादक उपयोग में परिवर्तित करने पर ध्यान केंद्रित करती है।
राज्य संशोधन
आंध्र प्रदेश
मूल अधिनियम में, धारा 101 में, "पांच वर्ष की अवधि" शब्दों के स्थान पर, "किसी परियोजना की स्थापना के लिए निर्दिष्ट अवधि या पांच वर्ष, जो भी बाद में हो" शब्द प्रतिस्थापित किए जाएंगे।
[आंध्र प्रदेश अधिनियम 22, 2018, धारा 11 (1-1-2014 से प्रभावी )]
हरयाणा
मूल अधिनियम की धारा 101 के बाद निम्नलिखित धारा जोड़ी जाएगी, अर्थात्:-
“101ए. भूमि को अधिसूचित न करने की शक्ति.- जब कोई सार्वजनिक उद्देश्य, जिसके लिए भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 (केंद्रीय अधिनियम 1 ऑफ 1894) के तहत अधिग्रहित भूमि का उपयोग संभव न हो या वह आवश्यक न रह जाए, तो राज्य सरकार ऐसी भूमि को, राज्य सरकार द्वारा उचित समझे जाने वाली शर्तों पर, अधिसूचित न करने के लिए स्वतंत्र होगी, जिसमें भूमि स्वामी को अधिग्रहण के कारण हुई किसी भी क्षति के लिए मुआवजे का भुगतान भी शामिल है:
बशर्ते कि यदि अधिग्रहित भूमि के किसी भाग का उपयोग किया गया हो या उस पर कोई भार उत्पन्न हुआ हो, तो भूस्वामी को राज्य सरकार द्वारा निर्धारित क्षतिपूर्ति के भुगतान के साथ-साथ वैकल्पिक भूमि उपलब्ध कराकर मुआवजा दिया जा सकता है।
[हरियाणा अधिनियम 21, 2018, धारा 5 (9-5-2018 से प्रभावी )]
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