The Right to Fair Compensation and Transparency in Land Acquisition, Rehabilitation and Resettlement Act, 2013 4अध्याय II · A.--preliminary Investigation for Determination of Social Impact and Public Purpose
धारा 4 · सामाजिक प्रभाव आकलन अध्ययन की तैयारी।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) जब भी उपयुक्त सरकार किसी सार्वजनिक प्रयोजन के लिए भूमि अधिग्रहण करना चाहे, तो वह प्रभावित क्षेत्र में ग्राम स्तर या वार्ड स्तर पर संबंधित पंचायत, नगरपालिका या नगर निगम से परामर्श करेगी तथा उनके साथ परामर्श करके सामाजिक प्रभाव आकलन अध्ययन करेगी, ऐसे तरीके से और ऐसी तिथि से जैसा कि ऐसी सरकार अधिसूचना द्वारा निर्दिष्ट करे।
(2) उपधारा (1) के तहत परामर्श और सामाजिक प्रभाव आकलन अध्ययन शुरू करने के लिए उपयुक्त सरकार द्वारा जारी अधिसूचना पंचायत, नगरपालिका या नगर निगम, जैसा भी मामला हो, तथा जिला कलेक्टर, उप-विभागीय मजिस्ट्रेट और तहसील के कार्यालयों में स्थानीय भाषा में उपलब्ध कराई जाएगी तथा प्रभावित क्षेत्रों में निर्धारित तरीके से प्रकाशित की जाएगी तथा उपयुक्त सरकार की वेबसाइट पर अपलोड की जाएगी।
बशर्ते कि उपयुक्त सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि सामाजिक प्रभाव आकलन अध्ययन के संचालन के चरण में पंचायत, ग्राम सभा, नगरपालिका या नगर निगम के प्रतिनिधियों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिया गया हो:
इसके अलावा, संबंधित सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि सामाजिक प्रभाव आकलन अध्ययन इसके प्रारंभ होने की तिथि से छह महीने की अवधि के भीतर पूरा हो जाए।
(3) उपधारा (1) में निर्दिष्ट सामाजिक प्रभाव आकलन अध्ययन रिपोर्ट धारा 6 के तहत निर्धारित तरीके से जनता को उपलब्ध कराई जाएगी।
(4) उपधारा (1) में निर्दिष्ट सामाजिक प्रभाव आकलन अध्ययन में अन्य बातों के साथ-साथ निम्नलिखित सभी बातें भी शामिल होंगी, अर्थात्:—
(क) इस बात का आकलन कि क्या प्रस्तावित अधिग्रहण सार्वजनिक उद्देश्य की पूर्ति करता है;
(ख) प्रभावित परिवारों का अनुमान और उनमें से विस्थापित होने की संभावना वाले परिवारों की संख्या;
(ग) प्रस्तावित अधिग्रहण से प्रभावित होने वाली सार्वजनिक और निजी भूमि, मकान, बस्तियां और अन्य साझा संपत्तियों का विस्तार;
(घ) क्या अधिग्रहण के लिए प्रस्तावित भूमि का क्षेत्रफल परियोजना के लिए आवश्यक न्यूनतम क्षेत्रफल है;
(ई) क्या किसी वैकल्पिक स्थान पर भूमि अधिग्रहण पर विचार किया गया है और उसे व्यवहार्य नहीं पाया गया है;
(f) परियोजना के सामाजिक प्रभावों का अध्ययन, तथा उनसे निपटने की प्रकृति और लागत तथा परियोजना के लाभों के सापेक्ष परियोजना की समग्र लागत पर इन लागतों का प्रभाव:
बशर्ते कि यदि कोई पर्यावरण प्रभाव आकलन अध्ययन किया जाना हो, तो वह साथ-साथ किया जाएगा और सामाजिक प्रभाव आकलन अध्ययन के पूरा होने पर निर्भर नहीं होगा।
(5) उपधारा (1) के तहत सामाजिक प्रभाव आकलन अध्ययन करते समय, उपयुक्त सरकार अन्य बातों के साथ-साथ, परियोजना के विभिन्न घटकों जैसे प्रभावित परिवारों की आजीविका, सार्वजनिक और सामुदायिक संपत्तियों, परिसंपत्तियों और बुनियादी ढांचे, विशेष रूप से सड़कों, सार्वजनिक परिवहन, जल निकासी, स्वच्छता, पेयजल के स्रोतों, पशुओं के लिए जल के स्रोतों, सामुदायिक तालाबों, चरागाह भूमि, वृक्षारोपण, डाकघरों, उचित मूल्य की दुकानों, खाद्य भंडारण गोदामों, बिजली आपूर्ति, स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं, स्कूलों और शैक्षिक या प्रशिक्षण सुविधाओं, आंगनवाड़ियों, बच्चों के पार्कों, पूजा स्थलों, पारंपरिक आदिवासी संस्थानों के लिए भूमि और दफन और श्मशान भूमि पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को ध्यान में रखेगी।
(6) उपयुक्त सरकार सामाजिक प्रभाव आकलन अध्ययन करने वाले प्राधिकरण से सामाजिक प्रभाव प्रबंधन योजना तैयार करने की अपेक्षा करेगी, जिसमें उप-धारा (5) में निर्दिष्ट किसी विशिष्ट घटक के प्रभाव को दूर करने के लिए आवश्यक सुधारात्मक उपायों की सूची होगी, और ऐसे उपाय उस क्षेत्र में केंद्र सरकार या, जैसा भी मामला हो, राज्य सरकार द्वारा संचालित किसी योजना या कार्यक्रम के अंतर्गत प्रदान किए गए उपायों से कम नहीं होंगे।
(2) उपधारा (1) के तहत परामर्श और सामाजिक प्रभाव आकलन अध्ययन शुरू करने के लिए उपयुक्त सरकार द्वारा जारी अधिसूचना पंचायत, नगरपालिका या नगर निगम, जैसा भी मामला हो, तथा जिला कलेक्टर, उप-विभागीय मजिस्ट्रेट और तहसील के कार्यालयों में स्थानीय भाषा में उपलब्ध कराई जाएगी तथा प्रभावित क्षेत्रों में निर्धारित तरीके से प्रकाशित की जाएगी तथा उपयुक्त सरकार की वेबसाइट पर अपलोड की जाएगी।
बशर्ते कि उपयुक्त सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि सामाजिक प्रभाव आकलन अध्ययन के संचालन के चरण में पंचायत, ग्राम सभा, नगरपालिका या नगर निगम के प्रतिनिधियों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिया गया हो:
इसके अलावा, संबंधित सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि सामाजिक प्रभाव आकलन अध्ययन इसके प्रारंभ होने की तिथि से छह महीने की अवधि के भीतर पूरा हो जाए।
(3) उपधारा (1) में निर्दिष्ट सामाजिक प्रभाव आकलन अध्ययन रिपोर्ट धारा 6 के तहत निर्धारित तरीके से जनता को उपलब्ध कराई जाएगी।
(4) उपधारा (1) में निर्दिष्ट सामाजिक प्रभाव आकलन अध्ययन में अन्य बातों के साथ-साथ निम्नलिखित सभी बातें भी शामिल होंगी, अर्थात्:—
(क) इस बात का आकलन कि क्या प्रस्तावित अधिग्रहण सार्वजनिक उद्देश्य की पूर्ति करता है;
(ख) प्रभावित परिवारों का अनुमान और उनमें से विस्थापित होने की संभावना वाले परिवारों की संख्या;
(ग) प्रस्तावित अधिग्रहण से प्रभावित होने वाली सार्वजनिक और निजी भूमि, मकान, बस्तियां और अन्य साझा संपत्तियों का विस्तार;
(घ) क्या अधिग्रहण के लिए प्रस्तावित भूमि का क्षेत्रफल परियोजना के लिए आवश्यक न्यूनतम क्षेत्रफल है;
(ई) क्या किसी वैकल्पिक स्थान पर भूमि अधिग्रहण पर विचार किया गया है और उसे व्यवहार्य नहीं पाया गया है;
(f) परियोजना के सामाजिक प्रभावों का अध्ययन, तथा उनसे निपटने की प्रकृति और लागत तथा परियोजना के लाभों के सापेक्ष परियोजना की समग्र लागत पर इन लागतों का प्रभाव:
बशर्ते कि यदि कोई पर्यावरण प्रभाव आकलन अध्ययन किया जाना हो, तो वह साथ-साथ किया जाएगा और सामाजिक प्रभाव आकलन अध्ययन के पूरा होने पर निर्भर नहीं होगा।
(5) उपधारा (1) के तहत सामाजिक प्रभाव आकलन अध्ययन करते समय, उपयुक्त सरकार अन्य बातों के साथ-साथ, परियोजना के विभिन्न घटकों जैसे प्रभावित परिवारों की आजीविका, सार्वजनिक और सामुदायिक संपत्तियों, परिसंपत्तियों और बुनियादी ढांचे, विशेष रूप से सड़कों, सार्वजनिक परिवहन, जल निकासी, स्वच्छता, पेयजल के स्रोतों, पशुओं के लिए जल के स्रोतों, सामुदायिक तालाबों, चरागाह भूमि, वृक्षारोपण, डाकघरों, उचित मूल्य की दुकानों, खाद्य भंडारण गोदामों, बिजली आपूर्ति, स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं, स्कूलों और शैक्षिक या प्रशिक्षण सुविधाओं, आंगनवाड़ियों, बच्चों के पार्कों, पूजा स्थलों, पारंपरिक आदिवासी संस्थानों के लिए भूमि और दफन और श्मशान भूमि पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को ध्यान में रखेगी।
(6) उपयुक्त सरकार सामाजिक प्रभाव आकलन अध्ययन करने वाले प्राधिकरण से सामाजिक प्रभाव प्रबंधन योजना तैयार करने की अपेक्षा करेगी, जिसमें उप-धारा (5) में निर्दिष्ट किसी विशिष्ट घटक के प्रभाव को दूर करने के लिए आवश्यक सुधारात्मक उपायों की सूची होगी, और ऐसे उपाय उस क्षेत्र में केंद्र सरकार या, जैसा भी मामला हो, राज्य सरकार द्वारा संचालित किसी योजना या कार्यक्रम के अंतर्गत प्रदान किए गए उपायों से कम नहीं होंगे।
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