IVC Act 3अध्याय II · Indian Veterinary Council
धारा 3 · परिषद की स्थापना और संरचना।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) केंद्र सरकार द्वारा आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना द्वारा इस संबंध में नियुक्त तिथि से, एक परिषद की स्थापना की जाएगी जिसे भारतीय पशु चिकित्सा परिषद कहा जाएगा।
(2) परिषद उपर्युक्त नाम से निगमित निकाय होगी, जिसका शाश्वत उत्तराधिकार और एक सामान्य मुहर होगी, और उसे चल और अचल दोनों प्रकार की संपत्ति प्राप्त करने, धारण करने और निपटाने तथा अनुबंध करने का अधिकार होगा तथा उक्त नाम से मुकदमा कर सकेगी या उस पर मुकदमा किया जा सकेगा।
(3) परिषद में निम्नलिखित सदस्य होंगे, अर्थात्:--
(क) इस अधिनियम के अंतर्गत आने वाले राज्यों के पशुपालन निदेशकों (चाहे किसी भी नाम से पुकारा जाए) में से केंद्र सरकार द्वारा पांच सदस्यों को मनोनीत किया जाएगा;
(ख) इस अधिनियम के अंतर्गत आने वाले राज्यों में पशु चिकित्सा संस्थानों के प्रमुखों में से केंद्र सरकार द्वारा चार सदस्यों को मनोनीत किया जाएगा;
(ग) भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा एक सदस्य को मनोनीत किया जाएगा;
(घ) भारत सरकार के पशुपालन आयुक्त, पदेन ;
(ई) केंद्रीय सरकार द्वारा पशुपालन से संबंधित केंद्रीय सरकार के मंत्रालय का प्रतिनिधित्व करने के लिए एक सदस्य को मनोनीत किया जाएगा;
(f) भारतीय पशु चिकित्सा संघ द्वारा एक सदस्य को मनोनीत किया जाएगा;
(जी) भारतीय पशु चिकित्सा चिकित्सकों के रजिस्टर में पंजीकृत व्यक्तियों में से ग्यारह सदस्यों का चुनाव किया जाएगा;
(h) इस अधिनियम के अंतर्गत आने वाले राज्यों के पशु चिकित्सा परिषदों के अध्यक्षों में से केंद्र सरकार द्वारा एक सदस्य मनोनीत किया जाएगा;
(i) इस अधिनियम के अंतर्गत आने वाले राज्यों के राज्य पशु चिकित्सा संघों के अध्यक्षों में से केंद्र सरकार द्वारा एक सदस्य मनोनीत किया जाएगा;
(जे) सचिव, भारतीय पशु चिकित्सा परिषद, पदेन।
(4) अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव सदस्यों द्वारा अपने बीच से इस प्रकार किया जाएगा जैसा कि विनियमों द्वारा निर्धारित किया जाएगा।
(5) जब भी राष्ट्रपति के पद में रिक्ति हो, उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति के कार्यों का निर्वहन करेंगे।
(6) सदस्यों के रूप में मनोनीत या निर्वाचित व्यक्तियों के नाम केंद्र सरकार द्वारा आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचित किए जाएंगे।
(7) कोई व्यक्ति परिषद में नामांकन या चुनाव के लिए तब तक योग्य नहीं होगा जब तक कि उसके पास मान्यता प्राप्त पशु चिकित्सा योग्यता न हो।
(2) परिषद उपर्युक्त नाम से निगमित निकाय होगी, जिसका शाश्वत उत्तराधिकार और एक सामान्य मुहर होगी, और उसे चल और अचल दोनों प्रकार की संपत्ति प्राप्त करने, धारण करने और निपटाने तथा अनुबंध करने का अधिकार होगा तथा उक्त नाम से मुकदमा कर सकेगी या उस पर मुकदमा किया जा सकेगा।
(3) परिषद में निम्नलिखित सदस्य होंगे, अर्थात्:--
(क) इस अधिनियम के अंतर्गत आने वाले राज्यों के पशुपालन निदेशकों (चाहे किसी भी नाम से पुकारा जाए) में से केंद्र सरकार द्वारा पांच सदस्यों को मनोनीत किया जाएगा;
(ख) इस अधिनियम के अंतर्गत आने वाले राज्यों में पशु चिकित्सा संस्थानों के प्रमुखों में से केंद्र सरकार द्वारा चार सदस्यों को मनोनीत किया जाएगा;
(ग) भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा एक सदस्य को मनोनीत किया जाएगा;
(घ) भारत सरकार के पशुपालन आयुक्त, पदेन ;
(ई) केंद्रीय सरकार द्वारा पशुपालन से संबंधित केंद्रीय सरकार के मंत्रालय का प्रतिनिधित्व करने के लिए एक सदस्य को मनोनीत किया जाएगा;
(f) भारतीय पशु चिकित्सा संघ द्वारा एक सदस्य को मनोनीत किया जाएगा;
(जी) भारतीय पशु चिकित्सा चिकित्सकों के रजिस्टर में पंजीकृत व्यक्तियों में से ग्यारह सदस्यों का चुनाव किया जाएगा;
(h) इस अधिनियम के अंतर्गत आने वाले राज्यों के पशु चिकित्सा परिषदों के अध्यक्षों में से केंद्र सरकार द्वारा एक सदस्य मनोनीत किया जाएगा;
(i) इस अधिनियम के अंतर्गत आने वाले राज्यों के राज्य पशु चिकित्सा संघों के अध्यक्षों में से केंद्र सरकार द्वारा एक सदस्य मनोनीत किया जाएगा;
(जे) सचिव, भारतीय पशु चिकित्सा परिषद, पदेन।
(4) अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव सदस्यों द्वारा अपने बीच से इस प्रकार किया जाएगा जैसा कि विनियमों द्वारा निर्धारित किया जाएगा।
(5) जब भी राष्ट्रपति के पद में रिक्ति हो, उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति के कार्यों का निर्वहन करेंगे।
(6) सदस्यों के रूप में मनोनीत या निर्वाचित व्यक्तियों के नाम केंद्र सरकार द्वारा आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचित किए जाएंगे।
(7) कोई व्यक्ति परिषद में नामांकन या चुनाव के लिए तब तक योग्य नहीं होगा जब तक कि उसके पास मान्यता प्राप्त पशु चिकित्सा योग्यता न हो।
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