IIIT Act 7अध्याय II · The Institutes
धारा 7 · संस्थान की शक्तियां और कार्य।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) इस अधिनियम के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, प्रत्येक संस्थान निम्नलिखित शक्तियों का प्रयोग करेगा और निम्नलिखित कार्यों का निष्पादन करेगा, अर्थात्:—
(क) सूचना प्रौद्योगिकी और संबद्ध क्षेत्रों से संबंधित ज्ञान के ऐसे क्षेत्रों में निर्देश प्रदान करना जिन्हें संस्थान अधिगम की उन्नति और ज्ञान के प्रसार के लिए उपयुक्त समझे;
(ख) सूचना प्रौद्योगिकी और ज्ञान के संबद्ध क्षेत्रों में अनुसंधान और नवाचार का नेतृत्व करना, आयोजन करना और संचालन करना, ऐसे तरीके से जैसा संस्थान उचित समझे, जिसमें राष्ट्रीय या वैश्विक स्तर पर किसी अन्य संस्थान, शैक्षणिक संस्थान, अनुसंधान संगठन, निगमित निकाय या वित्तीय संगठनों के साथ सहयोग या साझेदारी शामिल है;
(ग) परीक्षाएं आयोजित करना तथा डिग्री, डिप्लोमा और अन्य शैक्षणिक उपाधियाँ या पदवी प्रदान करना तथा मानद डिग्री प्रदान करना;
(घ) संस्थान के निदेशक पद के अलावा संस्थान के अधीन शैक्षणिक, प्रशासनिक, तकनीकी, मंत्रिस्तरीय और अन्य पदों का सृजन करना और उन पर नियुक्तियाँ करना;
(ई) किसी अन्य संस्थान या शैक्षणिक संस्थान में कार्यरत व्यक्तियों को या किसी उद्योग में महत्वपूर्ण अनुसंधान में संलग्न व्यक्तियों को संस्थान के सहायक, अतिथि या आगंतुक संकाय के रूप में ऐसी शर्तों और ऐसी अवधि के लिए नियुक्त करना जैसा संस्थान तय करे;
(f) प्रशासनिक और अन्य पदों का सृजन करना तथा बोर्ड द्वारा निर्धारित मानदंडों के आधार पर उन पदों पर नियुक्तियाँ करना;
(जी) अनुसंधान से प्राप्त ज्ञान के प्रसार के लिए प्रावधान करना और उस उद्देश्य के लिए अन्य संस्थानों, उद्योग, नागरिक समाज या अन्य संगठनों के साथ परामर्श और सलाहकार सेवाओं सहित ऐसी व्यवस्था करना, जैसा संस्थान आवश्यक समझे;
(h) एक वेबसाइट बनाना, जिसमें छात्रों, प्रवेश, शुल्क, प्रशासनिक संरचना, भर्ती नियमों सहित नीतियों, संकाय और गैर-संकाय पदों, वार्षिक रिपोर्टों और संस्थान के वित्तीय विवरणों सहित लेखा विवरण से संबंधित सभी सूचनाओं को उजागर करना;
(i) संस्थान द्वारा छात्रों और किसी अन्य व्यक्ति, संस्था या निगमित निकाय से प्रशिक्षण, परामर्श और सलाहकार सेवाओं सहित निर्देश और अन्य सेवाओं के लिए, जैसा संस्थान उचित समझे, शुल्क और अन्य प्रभारों का निर्धारण, निर्धारण और भुगतान प्राप्त करना;
(j) संस्थान के उद्देश्यों की उन्नति के लिए संस्थान द्वारा उचित समझे जाने वाले तरीके से संस्थान से संबंधित या संस्थान में निहित किसी भी संपत्ति से निपटना:
बशर्ते कि संबंधित राज्य सरकार और केंद्र सरकार की पूर्व स्वीकृति के बिना संस्थान द्वारा कोई भूमि या अन्य अचल संपत्ति का निपटान नहीं किया जाएगा;
(k) सरकार से उपहार, अनुदान, दान या परोपकार प्राप्त करना तथा वसीयतकर्ताओं, दानदाताओं या हस्तांतरणकर्ताओं से वसीयत, दान और चल या अचल संपत्तियों का हस्तांतरण प्राप्त करना;
(एल) दुनिया के किसी भी हिस्से में स्थित शैक्षणिक या अन्य संस्थानों के साथ, जिनके उद्देश्य संस्थान के उद्देश्यों से पूर्णतः या आंशिक रूप से मिलते-जुलते हों, शिक्षकों और विद्वानों के आदान-प्रदान के माध्यम से और सामान्यतः इस प्रकार से सहयोग करना जो उनके सामान्य उद्देश्यों के लिए सहायक हो;
(m) संस्थान के उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए आवश्यक, प्रासंगिक या सहायक ऐसी अवसंरचना स्थापित करना और उसका रखरखाव करना;
(n) फेलोशिप, छात्रवृत्ति, प्रदर्शनियों, पुरस्कार और पदकों की स्थापना और प्रदान करना; और
(ओ) संस्थान के सभी या किसी भी उद्देश्य की प्राप्ति के लिए आवश्यक, आकस्मिक या सहायक सभी कार्य करना।
(2) इस अधिनियम के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, प्रत्येक संस्थान निम्नलिखित कार्य कर सकता है, अर्थात्:—
(क) क्षेत्र या प्रदेश में स्थित तकनीकी या सूचना प्रौद्योगिकी पाठ्यक्रम प्रदान करने वाले शैक्षणिक संस्थानों का समर्थन करना और उनके साथ सहयोग करना;
(ख) सूचना प्रौद्योगिकी और अन्य तकनीकी मुद्दों के संबंध में अपने क्षेत्र में शामिल राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेश प्रशासनों को सलाह देना, जिन्हें वे सलाह के लिए संस्थान को भेजते हैं।
(क) सूचना प्रौद्योगिकी और संबद्ध क्षेत्रों से संबंधित ज्ञान के ऐसे क्षेत्रों में निर्देश प्रदान करना जिन्हें संस्थान अधिगम की उन्नति और ज्ञान के प्रसार के लिए उपयुक्त समझे;
(ख) सूचना प्रौद्योगिकी और ज्ञान के संबद्ध क्षेत्रों में अनुसंधान और नवाचार का नेतृत्व करना, आयोजन करना और संचालन करना, ऐसे तरीके से जैसा संस्थान उचित समझे, जिसमें राष्ट्रीय या वैश्विक स्तर पर किसी अन्य संस्थान, शैक्षणिक संस्थान, अनुसंधान संगठन, निगमित निकाय या वित्तीय संगठनों के साथ सहयोग या साझेदारी शामिल है;
(ग) परीक्षाएं आयोजित करना तथा डिग्री, डिप्लोमा और अन्य शैक्षणिक उपाधियाँ या पदवी प्रदान करना तथा मानद डिग्री प्रदान करना;
(घ) संस्थान के निदेशक पद के अलावा संस्थान के अधीन शैक्षणिक, प्रशासनिक, तकनीकी, मंत्रिस्तरीय और अन्य पदों का सृजन करना और उन पर नियुक्तियाँ करना;
(ई) किसी अन्य संस्थान या शैक्षणिक संस्थान में कार्यरत व्यक्तियों को या किसी उद्योग में महत्वपूर्ण अनुसंधान में संलग्न व्यक्तियों को संस्थान के सहायक, अतिथि या आगंतुक संकाय के रूप में ऐसी शर्तों और ऐसी अवधि के लिए नियुक्त करना जैसा संस्थान तय करे;
(f) प्रशासनिक और अन्य पदों का सृजन करना तथा बोर्ड द्वारा निर्धारित मानदंडों के आधार पर उन पदों पर नियुक्तियाँ करना;
(जी) अनुसंधान से प्राप्त ज्ञान के प्रसार के लिए प्रावधान करना और उस उद्देश्य के लिए अन्य संस्थानों, उद्योग, नागरिक समाज या अन्य संगठनों के साथ परामर्श और सलाहकार सेवाओं सहित ऐसी व्यवस्था करना, जैसा संस्थान आवश्यक समझे;
(h) एक वेबसाइट बनाना, जिसमें छात्रों, प्रवेश, शुल्क, प्रशासनिक संरचना, भर्ती नियमों सहित नीतियों, संकाय और गैर-संकाय पदों, वार्षिक रिपोर्टों और संस्थान के वित्तीय विवरणों सहित लेखा विवरण से संबंधित सभी सूचनाओं को उजागर करना;
(i) संस्थान द्वारा छात्रों और किसी अन्य व्यक्ति, संस्था या निगमित निकाय से प्रशिक्षण, परामर्श और सलाहकार सेवाओं सहित निर्देश और अन्य सेवाओं के लिए, जैसा संस्थान उचित समझे, शुल्क और अन्य प्रभारों का निर्धारण, निर्धारण और भुगतान प्राप्त करना;
(j) संस्थान के उद्देश्यों की उन्नति के लिए संस्थान द्वारा उचित समझे जाने वाले तरीके से संस्थान से संबंधित या संस्थान में निहित किसी भी संपत्ति से निपटना:
बशर्ते कि संबंधित राज्य सरकार और केंद्र सरकार की पूर्व स्वीकृति के बिना संस्थान द्वारा कोई भूमि या अन्य अचल संपत्ति का निपटान नहीं किया जाएगा;
(k) सरकार से उपहार, अनुदान, दान या परोपकार प्राप्त करना तथा वसीयतकर्ताओं, दानदाताओं या हस्तांतरणकर्ताओं से वसीयत, दान और चल या अचल संपत्तियों का हस्तांतरण प्राप्त करना;
(एल) दुनिया के किसी भी हिस्से में स्थित शैक्षणिक या अन्य संस्थानों के साथ, जिनके उद्देश्य संस्थान के उद्देश्यों से पूर्णतः या आंशिक रूप से मिलते-जुलते हों, शिक्षकों और विद्वानों के आदान-प्रदान के माध्यम से और सामान्यतः इस प्रकार से सहयोग करना जो उनके सामान्य उद्देश्यों के लिए सहायक हो;
(m) संस्थान के उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए आवश्यक, प्रासंगिक या सहायक ऐसी अवसंरचना स्थापित करना और उसका रखरखाव करना;
(n) फेलोशिप, छात्रवृत्ति, प्रदर्शनियों, पुरस्कार और पदकों की स्थापना और प्रदान करना; और
(ओ) संस्थान के सभी या किसी भी उद्देश्य की प्राप्ति के लिए आवश्यक, आकस्मिक या सहायक सभी कार्य करना।
(2) इस अधिनियम के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, प्रत्येक संस्थान निम्नलिखित कार्य कर सकता है, अर्थात्:—
(क) क्षेत्र या प्रदेश में स्थित तकनीकी या सूचना प्रौद्योगिकी पाठ्यक्रम प्रदान करने वाले शैक्षणिक संस्थानों का समर्थन करना और उनके साथ सहयोग करना;
(ख) सूचना प्रौद्योगिकी और अन्य तकनीकी मुद्दों के संबंध में अपने क्षेत्र में शामिल राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेश प्रशासनों को सलाह देना, जिन्हें वे सलाह के लिए संस्थान को भेजते हैं।
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