IIIT Act 27अध्याय IV · Accounts and Audit
धारा 27 · संस्थान का कोष।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) प्रत्येक संस्थान एक निधि का रखरखाव करेगा जिसमें निम्नलिखित राशि जमा की जाएगी—
(क) केंद्र सरकार या राज्य सरकार या उद्योग भागीदार द्वारा प्रदान की गई सभी धनराशि, जैसा भी मामला हो;
(ख) संस्थान द्वारा छात्रों से प्राप्त सभी शुल्क और अन्य प्रभार;
(ग) संस्थान द्वारा अनुदान, उपहार, दान, परोपकार, वसीयत या हस्तांतरण के रूप में प्राप्त सभी धनराशि;
(घ) संस्थान द्वारा अनुसंधान कार्यों या परामर्श सेवाओं के प्रावधान से उत्पन्न बौद्धिक संपदा के उपयोग से प्राप्त सभी धनराशि; और
(ई) संस्थान द्वारा किसी अन्य तरीके से या किसी अन्य स्रोत से प्राप्त सभी धनराशि।
(2) प्रत्येक संस्थान की निधि का उपयोग संस्थान के व्ययों को पूरा करने के लिए किया जाएगा, जिसमें इस अधिनियम के तहत अपनी शक्तियों के प्रयोग और कर्तव्यों के निर्वहन में किए गए व्यय, संस्थान में या अन्य शैक्षणिक संस्थानों या उद्योग के साथ सहयोग में अनुसंधान को बढ़ावा देना और संस्थान के विकास और वृद्धि के उद्देश्य से पूंजी निवेश करना शामिल है।
(3) प्रत्येक संस्थान के कोष में जमा की गई सभी धनराशि ऐसे बैंकों में जमा की जाएगी या ऐसे तरीके से निवेश की जाएगी जैसा संस्थान बोर्ड की स्वीकृति से तय करे।
(4) प्रत्येक संस्थान संस्थान की दीर्घकालिक स्थिरता के लिए एक कोष निधि का सृजन करेगा, जिसमें संस्थान की शुद्ध आय का उतना प्रतिशत तथा विशेष रूप से ऐसी कोष निधि के लिए किए गए दान जमा किए जाएंगे, जितना केंद्र सरकार आयकर अधिनियम, 1961 (43 ऑफ 1961) के प्रावधानों के अनुसार अधिसूचित करे:
इसके अलावा, बोर्ड विशिष्ट उद्देश्यों के लिए बंदोबस्ती निधि भी बना सकता है, जिसमें विशेष रूप से दान दिया जा सकता है।
(क) केंद्र सरकार या राज्य सरकार या उद्योग भागीदार द्वारा प्रदान की गई सभी धनराशि, जैसा भी मामला हो;
(ख) संस्थान द्वारा छात्रों से प्राप्त सभी शुल्क और अन्य प्रभार;
(ग) संस्थान द्वारा अनुदान, उपहार, दान, परोपकार, वसीयत या हस्तांतरण के रूप में प्राप्त सभी धनराशि;
(घ) संस्थान द्वारा अनुसंधान कार्यों या परामर्श सेवाओं के प्रावधान से उत्पन्न बौद्धिक संपदा के उपयोग से प्राप्त सभी धनराशि; और
(ई) संस्थान द्वारा किसी अन्य तरीके से या किसी अन्य स्रोत से प्राप्त सभी धनराशि।
(2) प्रत्येक संस्थान की निधि का उपयोग संस्थान के व्ययों को पूरा करने के लिए किया जाएगा, जिसमें इस अधिनियम के तहत अपनी शक्तियों के प्रयोग और कर्तव्यों के निर्वहन में किए गए व्यय, संस्थान में या अन्य शैक्षणिक संस्थानों या उद्योग के साथ सहयोग में अनुसंधान को बढ़ावा देना और संस्थान के विकास और वृद्धि के उद्देश्य से पूंजी निवेश करना शामिल है।
(3) प्रत्येक संस्थान के कोष में जमा की गई सभी धनराशि ऐसे बैंकों में जमा की जाएगी या ऐसे तरीके से निवेश की जाएगी जैसा संस्थान बोर्ड की स्वीकृति से तय करे।
(4) प्रत्येक संस्थान संस्थान की दीर्घकालिक स्थिरता के लिए एक कोष निधि का सृजन करेगा, जिसमें संस्थान की शुद्ध आय का उतना प्रतिशत तथा विशेष रूप से ऐसी कोष निधि के लिए किए गए दान जमा किए जाएंगे, जितना केंद्र सरकार आयकर अधिनियम, 1961 (43 ऑफ 1961) के प्रावधानों के अनुसार अधिसूचित करे:
इसके अलावा, बोर्ड विशिष्ट उद्देश्यों के लिए बंदोबस्ती निधि भी बना सकता है, जिसमें विशेष रूप से दान दिया जा सकता है।
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