IIIT Act 11अध्याय II · The Institutes
धारा 11 · केंद्र सरकार, राज्य सरकार और उद्योग भागीदारों द्वारा संस्थान की स्थापना।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) राज्य सरकार सहयोग हेतु कम से कम एक उद्योग भागीदार, और अधिमानतः तीन उद्योग भागीदारों की पहचान करेगी तथा केंद्र सरकार को एक प्रस्ताव प्रस्तुत करेगी।
(2) केंद्र सरकार निर्धारित मानदंडों के आधार पर प्रस्ताव की जांच करेगी, जिनमें निम्नलिखित शामिल होंगे, अर्थात्:—
(क) प्रस्तावित संस्थान की स्थापना के लिए आवश्यक पूंजी निवेश केंद्र सरकार, संबंधित राज्य सरकार और उद्योग साझेदारों द्वारा 50:35:15 के अनुपात में वहन किया जाएगा और संचालन के पहले पांच वर्षों के दौरान आवश्यक समझे जाने वाले आवर्ती व्यय केंद्र सरकार द्वारा उपलब्ध कराए जाएंगे:
बशर्ते कि उत्तर पूर्वी राज्यों में प्रस्तावित संस्थान की स्थापना के लिए आवश्यक पूंजी निवेश का अनुपात 57.5:35:7.5 होगा;
(ख) उपधारा (1) में प्रस्तावित उद्योग भागीदारों की सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विशेषज्ञता और प्रतिष्ठा;
(ग) संस्थान को सहयोग देने के लिए उद्योग भागीदारों की क्षमता, वित्तीय और अन्य संसाधनों का आकलन;
(घ) राज्य सरकार द्वारा पचास से सौ एकड़ तक पर्याप्त भूमि नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाने की उपयुक्तता;
(ई) प्रस्तावित स्थल पर पर्याप्त भौतिक अवसंरचना, अर्थात् जल, बिजली, सड़क संपर्क और सुरक्षा की उपलब्धता, या राज्य सरकार द्वारा इसे उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता।
(3) केंद्र सरकार, संबंधित राज्य सरकार की सहमति से, उपधारा (1) के अधीन उसे प्रस्तुत किए गए प्रस्ताव में, यदि कोई संशोधन हो, तो उसका सुझाव दे सकती है।
(4) यदि उपधारा (1) के अंतर्गत राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव केंद्र सरकार को स्वीकार्य नहीं है, तो केंद्र सरकार उस राज्य सरकार को अपने निर्णय की सूचना देगी, जिसमें निर्णय के कारण स्पष्ट किए जाएंगे।
(5) केंद्र सरकार, उपधारा (3) के तहत किसी भी संशोधन सहित प्रस्ताव को स्वीकार करने पर, प्रस्तावित संस्थान की स्थापना के लिए संबंधित राज्य सरकार और उद्योग भागीदारों के साथ समझौता ज्ञापन या समझौता करेगी।
(6) उद्योग भागीदार निम्नलिखित कार्य करेगा—
(क) समग्र ढांचे के भीतर संस्थान के शासन में सक्रिय रूप से भाग लेना;
(ख) भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थानों के साथ संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं को वित्त पोषण, सहयोग या किसी अन्य तरीके से समर्थन और सुविधा प्रदान करना;
(ग) अनुभवी व्यक्तियों को सहायक संकाय के रूप में प्रतिनियुक्त करना;
(घ) छात्रों को अपने उद्यम के भीतर, उनके पाठ्यक्रम के हिस्से के रूप में अनुसंधान परियोजना करने के लिए प्रोत्साहित करना, सक्षम बनाना, समर्थन करना और मार्गदर्शन करना;
(ई) भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थानों के संकाय सदस्यों को उद्योग के साथ अल्पावधि के लिए काम करने हेतु अवकाश पर स्वीकार करना;
(f) संस्थान के साथ मिलकर उद्योग की आवश्यकताओं के अनुसार कार्यक्रम तैयार करना;
(जी) भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थानों के छात्रों को इंटर्नशिप प्रदान करना;
(h) भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थानों से छात्रों के प्लेसमेंट की सुविधा प्रदान करना;
(i) अपने पात्र कर्मचारियों को भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थानों में डॉक्टरेट की पढ़ाई के लिए प्रायोजित करना; और
(j) संस्थान में स्टार्टअप्स को वित्त पोषण और मार्गदर्शन प्रदान करना।
(7) उपधारा (5) में निर्दिष्ट प्रत्येक समझौता ज्ञापन या अनुबंध में निम्नलिखित शामिल होगा—
(क) संस्थान की स्थापना में पूंजी निवेश का प्रस्ताव तथा संबंधित शेयर, जैसा कि निर्धारित किया जा सकता है;
(ख) संस्थान के प्रथम विधान;
(ग) प्रस्तावित संस्थान को स्वायत्तता सुनिश्चित करने में केंद्र सरकार, संबंधित राज्य सरकार और उद्योग भागीदार की प्रतिबद्धता; और
(घ) उद्योग साझेदारों के बाहर निकलने की स्थिति।
(2) केंद्र सरकार निर्धारित मानदंडों के आधार पर प्रस्ताव की जांच करेगी, जिनमें निम्नलिखित शामिल होंगे, अर्थात्:—
(क) प्रस्तावित संस्थान की स्थापना के लिए आवश्यक पूंजी निवेश केंद्र सरकार, संबंधित राज्य सरकार और उद्योग साझेदारों द्वारा 50:35:15 के अनुपात में वहन किया जाएगा और संचालन के पहले पांच वर्षों के दौरान आवश्यक समझे जाने वाले आवर्ती व्यय केंद्र सरकार द्वारा उपलब्ध कराए जाएंगे:
बशर्ते कि उत्तर पूर्वी राज्यों में प्रस्तावित संस्थान की स्थापना के लिए आवश्यक पूंजी निवेश का अनुपात 57.5:35:7.5 होगा;
(ख) उपधारा (1) में प्रस्तावित उद्योग भागीदारों की सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विशेषज्ञता और प्रतिष्ठा;
(ग) संस्थान को सहयोग देने के लिए उद्योग भागीदारों की क्षमता, वित्तीय और अन्य संसाधनों का आकलन;
(घ) राज्य सरकार द्वारा पचास से सौ एकड़ तक पर्याप्त भूमि नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाने की उपयुक्तता;
(ई) प्रस्तावित स्थल पर पर्याप्त भौतिक अवसंरचना, अर्थात् जल, बिजली, सड़क संपर्क और सुरक्षा की उपलब्धता, या राज्य सरकार द्वारा इसे उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता।
(3) केंद्र सरकार, संबंधित राज्य सरकार की सहमति से, उपधारा (1) के अधीन उसे प्रस्तुत किए गए प्रस्ताव में, यदि कोई संशोधन हो, तो उसका सुझाव दे सकती है।
(4) यदि उपधारा (1) के अंतर्गत राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव केंद्र सरकार को स्वीकार्य नहीं है, तो केंद्र सरकार उस राज्य सरकार को अपने निर्णय की सूचना देगी, जिसमें निर्णय के कारण स्पष्ट किए जाएंगे।
(5) केंद्र सरकार, उपधारा (3) के तहत किसी भी संशोधन सहित प्रस्ताव को स्वीकार करने पर, प्रस्तावित संस्थान की स्थापना के लिए संबंधित राज्य सरकार और उद्योग भागीदारों के साथ समझौता ज्ञापन या समझौता करेगी।
(6) उद्योग भागीदार निम्नलिखित कार्य करेगा—
(क) समग्र ढांचे के भीतर संस्थान के शासन में सक्रिय रूप से भाग लेना;
(ख) भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थानों के साथ संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं को वित्त पोषण, सहयोग या किसी अन्य तरीके से समर्थन और सुविधा प्रदान करना;
(ग) अनुभवी व्यक्तियों को सहायक संकाय के रूप में प्रतिनियुक्त करना;
(घ) छात्रों को अपने उद्यम के भीतर, उनके पाठ्यक्रम के हिस्से के रूप में अनुसंधान परियोजना करने के लिए प्रोत्साहित करना, सक्षम बनाना, समर्थन करना और मार्गदर्शन करना;
(ई) भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थानों के संकाय सदस्यों को उद्योग के साथ अल्पावधि के लिए काम करने हेतु अवकाश पर स्वीकार करना;
(f) संस्थान के साथ मिलकर उद्योग की आवश्यकताओं के अनुसार कार्यक्रम तैयार करना;
(जी) भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थानों के छात्रों को इंटर्नशिप प्रदान करना;
(h) भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थानों से छात्रों के प्लेसमेंट की सुविधा प्रदान करना;
(i) अपने पात्र कर्मचारियों को भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थानों में डॉक्टरेट की पढ़ाई के लिए प्रायोजित करना; और
(j) संस्थान में स्टार्टअप्स को वित्त पोषण और मार्गदर्शन प्रदान करना।
(7) उपधारा (5) में निर्दिष्ट प्रत्येक समझौता ज्ञापन या अनुबंध में निम्नलिखित शामिल होगा—
(क) संस्थान की स्थापना में पूंजी निवेश का प्रस्ताव तथा संबंधित शेयर, जैसा कि निर्धारित किया जा सकता है;
(ख) संस्थान के प्रथम विधान;
(ग) प्रस्तावित संस्थान को स्वायत्तता सुनिश्चित करने में केंद्र सरकार, संबंधित राज्य सरकार और उद्योग भागीदार की प्रतिबद्धता; और
(घ) उद्योग साझेदारों के बाहर निकलने की स्थिति।
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