IIIT Act 19अध्याय III · Authorities of Indian Institutes of Information Technology Established in Public-private Partnership
धारा 19 · सीनेट की शक्तियां और कार्य।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) इस अधिनियम, विधानों और अध्यादेशों के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, सीनेट संस्थान का प्रमुख शैक्षणिक निकाय होगा और उसे शैक्षणिक मामलों और छात्रों के मामलों और कल्याण से संबंधित अध्यादेशों को अधिनियमित करने, संशोधित करने या बदलने का अधिकार होगा।
(2) उपधारा (1) के प्रावधानों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, सीनेट को निम्नलिखित शक्तियां प्राप्त होंगी, अर्थात्:—
(क) संस्थान द्वारा प्रस्तावित पाठ्यक्रमों या अध्ययन कार्यक्रमों में प्रवेश के लिए मानदंड और प्रक्रिया निर्दिष्ट करना;
(ख) शिक्षण और अन्य शैक्षणिक पदों के सृजन, ऐसे पदों की संख्या और पारिश्रमिक के निर्धारण तथा शिक्षकों और अन्य शैक्षणिक पदों के कर्तव्यों और सेवा शर्तों को परिभाषित करने के लिए बोर्ड को अनुशंसा करना;
(ग) नए कार्यक्रमों या अध्ययन पाठ्यक्रमों को शुरू करने के संबंध में बोर्ड को अनुशंसा करना;
(घ) कार्यक्रमों और अध्ययन पाठ्यक्रमों की व्यापक शैक्षणिक सामग्री निर्दिष्ट करना और उसमें संशोधन करना;
(ई) शैक्षणिक कैलेंडर निर्दिष्ट करना और डिग्री, डिप्लोमा और अन्य शैक्षणिक उपाधियों या उपाधियों के अनुदान को मंजूरी देना;
(f) विभिन्न परीक्षाओं के लिए परीक्षकों, मॉडरेटरों, सारणीकारों और ऐसे अन्य कर्मियों की नियुक्ति करना;
(जी) विश्वविद्यालयों और अन्य संस्थानों के डिप्लोमा और डिग्री को मान्यता देना और संस्थान के डिप्लोमा और डिग्री के साथ उनकी समतुल्यता निर्धारित करना;
(h) विभागीय समन्वय के लिए उपाय सुझाना;
(i) बोर्ड ऑफ गवर्नर्स को निम्नलिखित विषयों पर प्रमुख सिफारिशें प्रस्तुत करना—
(ए) शिक्षण, प्रशिक्षण और अनुसंधान के स्तर में सुधार के उपाय;
(ख) पदों, फेलोशिप, छात्रवृत्ति, स्टूडेंटशिप, फ्रीशिप, पदक और पुरस्कारों की स्थापना और अन्य संबंधित मामले;
(सी) विभागों या केंद्रों की स्थापना या उन्मूलन; और
(घ) संस्थान का शैक्षणिक संचालन, अनुशासन, आवास, प्रवेश, परीक्षाएँ, फैलोशिप और छात्रवृत्ति, फ्रीशिप, रियायतें, उपस्थिति और अन्य संबंधित मामले;
(j) बोर्ड या स्वयं द्वारा संदर्भित विशिष्ट मामलों पर सलाह देने के लिए उप-समितियों की नियुक्ति करना;
(ख) उप-समितियों की सिफारिशों पर विचार करना और बोर्ड को सिफारिशें करने सहित ऐसी कार्रवाई करना जो आवश्यक हो;
(एल) विभागों या केंद्रों की गतिविधियों की समय-समय पर समीक्षा करना और संस्थानों में शिक्षण के मानकों को बनाए रखने और सुधारने के उद्देश्य से बोर्ड को सिफारिशें करने सहित उचित कार्रवाई करना; और
(m) ऐसे अन्य अधिकार प्रयोग करना और ऐसे अन्य कार्यों का निर्वहन करना जो बोर्ड द्वारा क़ानूनों या अन्यथा द्वारा उसे सौंपे जा सकते हैं।
(2) उपधारा (1) के प्रावधानों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, सीनेट को निम्नलिखित शक्तियां प्राप्त होंगी, अर्थात्:—
(क) संस्थान द्वारा प्रस्तावित पाठ्यक्रमों या अध्ययन कार्यक्रमों में प्रवेश के लिए मानदंड और प्रक्रिया निर्दिष्ट करना;
(ख) शिक्षण और अन्य शैक्षणिक पदों के सृजन, ऐसे पदों की संख्या और पारिश्रमिक के निर्धारण तथा शिक्षकों और अन्य शैक्षणिक पदों के कर्तव्यों और सेवा शर्तों को परिभाषित करने के लिए बोर्ड को अनुशंसा करना;
(ग) नए कार्यक्रमों या अध्ययन पाठ्यक्रमों को शुरू करने के संबंध में बोर्ड को अनुशंसा करना;
(घ) कार्यक्रमों और अध्ययन पाठ्यक्रमों की व्यापक शैक्षणिक सामग्री निर्दिष्ट करना और उसमें संशोधन करना;
(ई) शैक्षणिक कैलेंडर निर्दिष्ट करना और डिग्री, डिप्लोमा और अन्य शैक्षणिक उपाधियों या उपाधियों के अनुदान को मंजूरी देना;
(f) विभिन्न परीक्षाओं के लिए परीक्षकों, मॉडरेटरों, सारणीकारों और ऐसे अन्य कर्मियों की नियुक्ति करना;
(जी) विश्वविद्यालयों और अन्य संस्थानों के डिप्लोमा और डिग्री को मान्यता देना और संस्थान के डिप्लोमा और डिग्री के साथ उनकी समतुल्यता निर्धारित करना;
(h) विभागीय समन्वय के लिए उपाय सुझाना;
(i) बोर्ड ऑफ गवर्नर्स को निम्नलिखित विषयों पर प्रमुख सिफारिशें प्रस्तुत करना—
(ए) शिक्षण, प्रशिक्षण और अनुसंधान के स्तर में सुधार के उपाय;
(ख) पदों, फेलोशिप, छात्रवृत्ति, स्टूडेंटशिप, फ्रीशिप, पदक और पुरस्कारों की स्थापना और अन्य संबंधित मामले;
(सी) विभागों या केंद्रों की स्थापना या उन्मूलन; और
(घ) संस्थान का शैक्षणिक संचालन, अनुशासन, आवास, प्रवेश, परीक्षाएँ, फैलोशिप और छात्रवृत्ति, फ्रीशिप, रियायतें, उपस्थिति और अन्य संबंधित मामले;
(j) बोर्ड या स्वयं द्वारा संदर्भित विशिष्ट मामलों पर सलाह देने के लिए उप-समितियों की नियुक्ति करना;
(ख) उप-समितियों की सिफारिशों पर विचार करना और बोर्ड को सिफारिशें करने सहित ऐसी कार्रवाई करना जो आवश्यक हो;
(एल) विभागों या केंद्रों की गतिविधियों की समय-समय पर समीक्षा करना और संस्थानों में शिक्षण के मानकों को बनाए रखने और सुधारने के उद्देश्य से बोर्ड को सिफारिशें करने सहित उचित कार्रवाई करना; और
(m) ऐसे अन्य अधिकार प्रयोग करना और ऐसे अन्य कार्यों का निर्वहन करना जो बोर्ड द्वारा क़ानूनों या अन्यथा द्वारा उसे सौंपे जा सकते हैं।
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