MV Act 212अध्याय XIV · Miscellaneous
धारा 212 · नियमों और अधिसूचनाओं का प्रकाशन, प्रारंभ और प्रस्तुतीकरण।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) इस अधिनियम के अंतर्गत नियम बनाने की शक्ति इस शर्त के अधीन है कि नियम पूर्व प्रकाशन के बाद बनाए जाएंगे।
(2) इस अधिनियम के अंतर्गत बनाए गए सभी नियम आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित किए जाएंगे, और जब तक कोई बाद की तिथि नियुक्त न की जाए, वे प्रकाशन की तिथि से लागू होंगे।
(3) किसी राज्य सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के बाद यथाशीघ्र राज्य विधानमंडल के समक्ष रखा जाएगा।
(4) इस अधिनियम के तहत केंद्र सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम, धारा 75 की उपधारा (1) और धारा 163 की उपधारा (1) के तहत केंद्र सरकार द्वारा बनाई गई प्रत्येक योजना और धारा 41 की उपधारा (4), धारा 58 की उपधारा (1), धारा 59 की उपधारा (1), धारा 112 की उपधारा (1) के परंतुक, धारा 118, धारा 163 ए की उपधारा ( 4 ) और धारा 213 की उपधारा ( 4 ) के तहत केंद्र सरकार द्वारा जारी की गई प्रत्येक अधिसूचना, बनाए जाने के तुरंत बाद, संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिनों की अवधि के लिए रखी जाएगी, जो एक सत्र या दो या दो से अधिक लगातार सत्रों में शामिल हो सकती है, और यदि उपर्युक्त सत्र या लगातार सत्रों के तुरंत बाद वाले सत्र की समाप्ति से पहले, दोनों सदन किसी भी संशोधन करने पर सहमत हों, यदि नियम, योजना या अधिसूचना को रद्द कर दिया जाता है या दोनों सदन इस बात पर सहमत होते हैं कि नियम या योजना नहीं बनाई जानी चाहिए या अधिसूचना जारी नहीं की जानी चाहिए, तो नियम, योजना या अधिसूचना इसके बाद केवल संशोधित रूप में ही प्रभावी होगी या अप्रभावी होगी; हालांकि, ऐसा कोई भी संशोधन या निरस्तीकरण उस नियम, योजना या अधिसूचना के तहत पहले किए गए किसी भी कार्य की वैधता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेगा।
1 [(5) धारा 210ए के तहत राज्य सरकार द्वारा जारी की गई प्रत्येक अधिसूचना, जारी होने के तुरंत बाद, राज्य विधानमंडल के प्रत्येक सदन के समक्ष रखी जाएगी, यदि उसमें दो सदन हों, या यदि ऐसे विधानमंडल में एक सदन हो, तो उस सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिनों की अवधि के लिए, जो एक सत्र या दो या दो से अधिक लगातार सत्रों में समाहित हो सकती है, और यदि उपर्युक्त सत्र या लगातार सत्रों के तुरंत बाद वाले सत्र की समाप्ति से पहले, सदन या दोनों सदन, जैसा भी मामला हो, अधिसूचना में कोई संशोधन करने पर सहमत हों, या सदन या दोनों सदन, जैसा भी मामला हो, यह तय करें कि अधिसूचना जारी नहीं की जानी चाहिए, तो अधिसूचना इसके बाद केवल ऐसे संशोधित रूप में प्रभावी होगी या जैसा भी मामला हो, अप्रभावी होगी; यद्यपि, ऐसा कोई भी संशोधन या निरस्तीकरण उस अधिसूचना के तहत पहले किए गए किसी भी कार्य की वैधता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना होगा।]
(2) इस अधिनियम के अंतर्गत बनाए गए सभी नियम आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित किए जाएंगे, और जब तक कोई बाद की तिथि नियुक्त न की जाए, वे प्रकाशन की तिथि से लागू होंगे।
(3) किसी राज्य सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के बाद यथाशीघ्र राज्य विधानमंडल के समक्ष रखा जाएगा।
(4) इस अधिनियम के तहत केंद्र सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम, धारा 75 की उपधारा (1) और धारा 163 की उपधारा (1) के तहत केंद्र सरकार द्वारा बनाई गई प्रत्येक योजना और धारा 41 की उपधारा (4), धारा 58 की उपधारा (1), धारा 59 की उपधारा (1), धारा 112 की उपधारा (1) के परंतुक, धारा 118, धारा 163 ए की उपधारा ( 4 ) और धारा 213 की उपधारा ( 4 ) के तहत केंद्र सरकार द्वारा जारी की गई प्रत्येक अधिसूचना, बनाए जाने के तुरंत बाद, संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिनों की अवधि के लिए रखी जाएगी, जो एक सत्र या दो या दो से अधिक लगातार सत्रों में शामिल हो सकती है, और यदि उपर्युक्त सत्र या लगातार सत्रों के तुरंत बाद वाले सत्र की समाप्ति से पहले, दोनों सदन किसी भी संशोधन करने पर सहमत हों, यदि नियम, योजना या अधिसूचना को रद्द कर दिया जाता है या दोनों सदन इस बात पर सहमत होते हैं कि नियम या योजना नहीं बनाई जानी चाहिए या अधिसूचना जारी नहीं की जानी चाहिए, तो नियम, योजना या अधिसूचना इसके बाद केवल संशोधित रूप में ही प्रभावी होगी या अप्रभावी होगी; हालांकि, ऐसा कोई भी संशोधन या निरस्तीकरण उस नियम, योजना या अधिसूचना के तहत पहले किए गए किसी भी कार्य की वैधता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेगा।
1 [(5) धारा 210ए के तहत राज्य सरकार द्वारा जारी की गई प्रत्येक अधिसूचना, जारी होने के तुरंत बाद, राज्य विधानमंडल के प्रत्येक सदन के समक्ष रखी जाएगी, यदि उसमें दो सदन हों, या यदि ऐसे विधानमंडल में एक सदन हो, तो उस सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिनों की अवधि के लिए, जो एक सत्र या दो या दो से अधिक लगातार सत्रों में समाहित हो सकती है, और यदि उपर्युक्त सत्र या लगातार सत्रों के तुरंत बाद वाले सत्र की समाप्ति से पहले, सदन या दोनों सदन, जैसा भी मामला हो, अधिसूचना में कोई संशोधन करने पर सहमत हों, या सदन या दोनों सदन, जैसा भी मामला हो, यह तय करें कि अधिसूचना जारी नहीं की जानी चाहिए, तो अधिसूचना इसके बाद केवल ऐसे संशोधित रूप में प्रभावी होगी या जैसा भी मामला हो, अप्रभावी होगी; यद्यपि, ऐसा कोई भी संशोधन या निरस्तीकरण उस अधिसूचना के तहत पहले किए गए किसी भी कार्य की वैधता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना होगा।]
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