MV Act 151अध्याय XI · Insurance of Motor Vehicles Against Third Party Risks
धारा 151 · बीमित व्यक्ति के दिवालिया होने की स्थिति में बीमाकर्ताओं के विरुद्ध तीसरे पक्ष के अधिकार
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
1 [बीमाधारक की दिवालियापन की स्थिति में बीमाकर्ताओं के विरुद्ध तृतीय पक्ष के अधिकार।] -- (1) जहाँ इस अध्याय के प्रावधानों के अनुसार संपन्न किसी बीमा अनुबंध के अंतर्गत, किसी व्यक्ति का तृतीय पक्ष के प्रति उसके द्वारा उत्पन्न होने वाली देनदारियों के विरुद्ध बीमा किया जाता है, तो--
(क) यदि वह व्यक्ति दिवालिया हो जाता है या अपने लेनदारों के साथ कोई समझौता या व्यवस्था कर लेता है; या
(ख) यदि बीमित व्यक्ति कोई कंपनी है, तो कंपनी के संबंध में परिसमापन आदेश जारी होने या स्वैच्छिक परिसमापन का प्रस्ताव पारित होने की स्थिति में, या कंपनी के व्यवसाय या उपक्रम के लिए रिसीवर या प्रबंधक की विधिवत नियुक्ति होने की स्थिति में, या किसी फ्लोटिंग चार्ज द्वारा सुरक्षित किसी संपत्ति पर, जो उस चार्ज में शामिल है या उसके अधीन है, किसी डिबेंचर के धारकों द्वारा या उनकी ओर से कब्जा लेने की स्थिति में, यदि उस घटना से पहले या बाद में, बीमित व्यक्ति द्वारा कोई ऐसी देनदारी उत्पन्न होती है, तो उस देनदारी के संबंध में अनुबंध के तहत बीमाकर्ता के विरुद्ध उसके अधिकार, कानून के किसी भी प्रावधान में इसके विपरीत कुछ भी होने के बावजूद, उस तीसरे पक्ष को हस्तांतरित हो जाएंगे और उसमें निहित हो जाएंगे, जिस पर इस प्रकार देनदारी उत्पन्न हुई थी।
(2) जहां किसी मृतक देनदार की संपत्ति के प्रशासन के लिए दिवालियापन कानून के अनुसार कोई आदेश दिया जाता है, तो यदि मृतक द्वारा किसी तीसरे पक्ष के प्रति किसी दायित्व के संबंध में कोई दिवालियापन में सिद्ध होने योग्य ऋण देय है, जिसके विरुद्ध उसने इस अध्याय के प्रावधानों के अनुसार बीमा अनुबंध के तहत बीमा कराया था, तो उस दायित्व के संबंध में बीमाकर्ता के विरुद्ध मृतक देनदार के अधिकार, कानून के किसी भी प्रावधान में इसके विपरीत कुछ भी होने के बावजूद, उस व्यक्ति को हस्तांतरित हो जाएंगे और उसमें निहित हो जाएंगे, जिसके प्रति ऋण देय है।
(3) इस अध्याय के प्रयोजनों के लिए जारी की गई किसी पॉलिसी में कोई भी शर्त, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से, पॉलिसी को रद्द करने या उपधारा (1) के खंड (क) या खंड (ख) में निर्दिष्ट किसी घटना के घटित होने पर या दिवालियापन कानून के अनुसार किसी मृतक देनदार की संपत्ति के प्रशासन के लिए आदेश जारी होने पर उसके तहत पक्षकारों के अधिकारों को बदलने का इरादा रखती हो, अप्रभावी होगी।
(4) उपधारा (1) या उपधारा (2) के तहत हस्तांतरण होने पर, बीमाकर्ता तीसरे पक्ष के प्रति उसी दायित्व के अधीन होगा जो वह बीमित व्यक्ति के प्रति होता, परन्तु--
(क) यदि बीमाकर्ता का बीमित व्यक्ति के प्रति दायित्व, बीमित व्यक्ति के तीसरे पक्ष के प्रति दायित्व से अधिक हो, तो इस अध्याय की कोई भी बात अतिरिक्त राशि के संबंध में बीमाकर्ता के विरुद्ध बीमित व्यक्ति के अधिकारों को प्रभावित नहीं करेगी; और
(ख) यदि बीमाकर्ता का बीमित व्यक्ति के प्रति दायित्व, बीमित व्यक्ति के तीसरे पक्ष के प्रति दायित्व से कम है, तो इस अध्याय की कोई भी बात शेष राशि के संबंध में बीमित व्यक्ति के विरुद्ध तीसरे पक्ष के अधिकारों को प्रभावित नहीं करेगी।]
(क) यदि वह व्यक्ति दिवालिया हो जाता है या अपने लेनदारों के साथ कोई समझौता या व्यवस्था कर लेता है; या
(ख) यदि बीमित व्यक्ति कोई कंपनी है, तो कंपनी के संबंध में परिसमापन आदेश जारी होने या स्वैच्छिक परिसमापन का प्रस्ताव पारित होने की स्थिति में, या कंपनी के व्यवसाय या उपक्रम के लिए रिसीवर या प्रबंधक की विधिवत नियुक्ति होने की स्थिति में, या किसी फ्लोटिंग चार्ज द्वारा सुरक्षित किसी संपत्ति पर, जो उस चार्ज में शामिल है या उसके अधीन है, किसी डिबेंचर के धारकों द्वारा या उनकी ओर से कब्जा लेने की स्थिति में, यदि उस घटना से पहले या बाद में, बीमित व्यक्ति द्वारा कोई ऐसी देनदारी उत्पन्न होती है, तो उस देनदारी के संबंध में अनुबंध के तहत बीमाकर्ता के विरुद्ध उसके अधिकार, कानून के किसी भी प्रावधान में इसके विपरीत कुछ भी होने के बावजूद, उस तीसरे पक्ष को हस्तांतरित हो जाएंगे और उसमें निहित हो जाएंगे, जिस पर इस प्रकार देनदारी उत्पन्न हुई थी।
(2) जहां किसी मृतक देनदार की संपत्ति के प्रशासन के लिए दिवालियापन कानून के अनुसार कोई आदेश दिया जाता है, तो यदि मृतक द्वारा किसी तीसरे पक्ष के प्रति किसी दायित्व के संबंध में कोई दिवालियापन में सिद्ध होने योग्य ऋण देय है, जिसके विरुद्ध उसने इस अध्याय के प्रावधानों के अनुसार बीमा अनुबंध के तहत बीमा कराया था, तो उस दायित्व के संबंध में बीमाकर्ता के विरुद्ध मृतक देनदार के अधिकार, कानून के किसी भी प्रावधान में इसके विपरीत कुछ भी होने के बावजूद, उस व्यक्ति को हस्तांतरित हो जाएंगे और उसमें निहित हो जाएंगे, जिसके प्रति ऋण देय है।
(3) इस अध्याय के प्रयोजनों के लिए जारी की गई किसी पॉलिसी में कोई भी शर्त, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से, पॉलिसी को रद्द करने या उपधारा (1) के खंड (क) या खंड (ख) में निर्दिष्ट किसी घटना के घटित होने पर या दिवालियापन कानून के अनुसार किसी मृतक देनदार की संपत्ति के प्रशासन के लिए आदेश जारी होने पर उसके तहत पक्षकारों के अधिकारों को बदलने का इरादा रखती हो, अप्रभावी होगी।
(4) उपधारा (1) या उपधारा (2) के तहत हस्तांतरण होने पर, बीमाकर्ता तीसरे पक्ष के प्रति उसी दायित्व के अधीन होगा जो वह बीमित व्यक्ति के प्रति होता, परन्तु--
(क) यदि बीमाकर्ता का बीमित व्यक्ति के प्रति दायित्व, बीमित व्यक्ति के तीसरे पक्ष के प्रति दायित्व से अधिक हो, तो इस अध्याय की कोई भी बात अतिरिक्त राशि के संबंध में बीमाकर्ता के विरुद्ध बीमित व्यक्ति के अधिकारों को प्रभावित नहीं करेगी; और
(ख) यदि बीमाकर्ता का बीमित व्यक्ति के प्रति दायित्व, बीमित व्यक्ति के तीसरे पक्ष के प्रति दायित्व से कम है, तो इस अध्याय की कोई भी बात शेष राशि के संबंध में बीमित व्यक्ति के विरुद्ध तीसरे पक्ष के अधिकारों को प्रभावित नहीं करेगी।]
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