IIM Act 5अध्याय II · The Institutes
धारा 5 · संस्थानों के निगमन का प्रभाव।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
इस अधिनियम के लागू होने की तिथि से,---
(क) किसी अनुबंध या अन्य दस्तावेज में किसी मौजूदा संस्थान के किसी भी संदर्भ को संबंधित संस्थान के संदर्भ के रूप में माना जाएगा;
(ख) प्रत्येक मौजूदा संस्थान की सभी चल और अचल संपत्तियां, या उससे संबंधित संपत्तियां, संबंधित संस्थान में निहित होंगी;
(ग) प्रत्येक विद्यमान संस्थान के सभी अधिकार, ऋण और अन्य दायित्व संबंधित संस्थान को हस्तांतरित कर दिए जाएंगे और वे संबंधित संस्थान के अधिकार और दायित्व होंगे;
(घ) 1. [प्रत्येक व्यक्ति, किसी भी मौजूदा संस्थान में नियुक्त निदेशक के अलावा] ऐसे प्रारंभ होने से ठीक पहले संबंधित संस्थान में उसी कार्यकाल, उसी पारिश्रमिक और उसी शर्तों और नियमों के साथ तथा पेंशन, अवकाश, ग्रेच्युटी, भविष्य निधि और अन्य मामलों के संबंध में उसी अधिकार और विशेषाधिकारों के साथ अपना पद या सेवा धारण करेगा, जैसा कि वह इस अधिनियम के अधिनियमित न होने की स्थिति में धारण करता, और ऐसा तब तक करता रहेगा जब तक कि उसका रोजगार समाप्त न हो जाए या जब तक कि विनियमों द्वारा ऐसे कार्यकाल, पारिश्रमिक और शर्तों और नियमों में विधिवत परिवर्तन न हो जाए:
बशर्ते कि यदि इस प्रकार किया गया परिवर्तन ऐसे कर्मचारी को स्वीकार्य नहीं है, तो संस्थान द्वारा कर्मचारी के साथ अनुबंध की शर्तों के अनुसार उसकी नौकरी समाप्त की जा सकती है, या यदि इस संबंध में अनुबंध में कोई प्रावधान नहीं है, तो संस्थान द्वारा उसे स्थायी कर्मचारी के मामले में तीन महीने के पारिश्रमिक के बराबर और अन्य कर्मचारी के मामले में एक महीने के पारिश्रमिक के बराबर मुआवजा देकर उसकी नौकरी समाप्त की जा सकती है।
इसके अलावा, किसी भी कानून के तहत या किसी भी दस्तावेज में, चाहे शब्दों के किसी भी रूप में, किसी मौजूदा संस्थान के निदेशक और अन्य अधिकारियों के संदर्भ को संबंधित संस्थानों के निदेशक और अन्य अधिकारियों के संदर्भ के रूप में समझा जाएगा;
2 [यह भी प्रावधान है कि प्रथम परंतुक के प्रावधान संस्थानों के निदेशकों पर भी लागू होंगे;]
(ई) इस अधिनियम के प्रारंभ होने से पहले, किसी भी मौजूदा संस्थान में कोई भी शैक्षणिक या अनुसंधान पाठ्यक्रम करने वाला प्रत्येक व्यक्ति, ऐसे पाठ्यक्रम के प्रारंभ होने पर, उस संस्थान में उसी स्तर पर स्थानांतरित और पंजीकृत माना जाएगा, जिस संस्थान से वह व्यक्ति स्थानांतरित हुआ था;
(f) इस अधिनियम के प्रारंभ होने से ठीक पहले किसी मौजूदा संस्थान द्वारा या उसके विरुद्ध शुरू किए गए या शुरू किए जा सकने वाले सभी मुकदमे और अन्य कानूनी कार्यवाही संबंधित संस्थान द्वारा जारी रखी जाएंगी या उसके विरुद्ध शुरू की जाएंगी।
2 [ स्पष्टीकरण। ---संदेहों को दूर करने के लिए, यह स्पष्ट किया जाता है कि भारतीय प्रबंधन संस्थान, मुंबई के संबंध में, धारा 4 और 5 में निम्नलिखित अभिव्यक्तियों का संदर्भ---
(i) "इस अधिनियम के प्रारंभ होने की तिथि से";
(ii) "ऐसे प्रारंभ से पहले";
(iii) "इस अधिनियम के प्रारंभ होने से पहले"; और
(iv) "इस अधिनियम के प्रारंभ होने से पहले",
यहां इसका अर्थ उस तिथि से लगाया जाएगा जिस दिन से भारतीय प्रबंधन संस्थान (संशोधन) अधिनियम, 2023 के प्रावधान लागू होते हैं।
(क) किसी अनुबंध या अन्य दस्तावेज में किसी मौजूदा संस्थान के किसी भी संदर्भ को संबंधित संस्थान के संदर्भ के रूप में माना जाएगा;
(ख) प्रत्येक मौजूदा संस्थान की सभी चल और अचल संपत्तियां, या उससे संबंधित संपत्तियां, संबंधित संस्थान में निहित होंगी;
(ग) प्रत्येक विद्यमान संस्थान के सभी अधिकार, ऋण और अन्य दायित्व संबंधित संस्थान को हस्तांतरित कर दिए जाएंगे और वे संबंधित संस्थान के अधिकार और दायित्व होंगे;
(घ) 1. [प्रत्येक व्यक्ति, किसी भी मौजूदा संस्थान में नियुक्त निदेशक के अलावा] ऐसे प्रारंभ होने से ठीक पहले संबंधित संस्थान में उसी कार्यकाल, उसी पारिश्रमिक और उसी शर्तों और नियमों के साथ तथा पेंशन, अवकाश, ग्रेच्युटी, भविष्य निधि और अन्य मामलों के संबंध में उसी अधिकार और विशेषाधिकारों के साथ अपना पद या सेवा धारण करेगा, जैसा कि वह इस अधिनियम के अधिनियमित न होने की स्थिति में धारण करता, और ऐसा तब तक करता रहेगा जब तक कि उसका रोजगार समाप्त न हो जाए या जब तक कि विनियमों द्वारा ऐसे कार्यकाल, पारिश्रमिक और शर्तों और नियमों में विधिवत परिवर्तन न हो जाए:
बशर्ते कि यदि इस प्रकार किया गया परिवर्तन ऐसे कर्मचारी को स्वीकार्य नहीं है, तो संस्थान द्वारा कर्मचारी के साथ अनुबंध की शर्तों के अनुसार उसकी नौकरी समाप्त की जा सकती है, या यदि इस संबंध में अनुबंध में कोई प्रावधान नहीं है, तो संस्थान द्वारा उसे स्थायी कर्मचारी के मामले में तीन महीने के पारिश्रमिक के बराबर और अन्य कर्मचारी के मामले में एक महीने के पारिश्रमिक के बराबर मुआवजा देकर उसकी नौकरी समाप्त की जा सकती है।
इसके अलावा, किसी भी कानून के तहत या किसी भी दस्तावेज में, चाहे शब्दों के किसी भी रूप में, किसी मौजूदा संस्थान के निदेशक और अन्य अधिकारियों के संदर्भ को संबंधित संस्थानों के निदेशक और अन्य अधिकारियों के संदर्भ के रूप में समझा जाएगा;
2 [यह भी प्रावधान है कि प्रथम परंतुक के प्रावधान संस्थानों के निदेशकों पर भी लागू होंगे;]
(ई) इस अधिनियम के प्रारंभ होने से पहले, किसी भी मौजूदा संस्थान में कोई भी शैक्षणिक या अनुसंधान पाठ्यक्रम करने वाला प्रत्येक व्यक्ति, ऐसे पाठ्यक्रम के प्रारंभ होने पर, उस संस्थान में उसी स्तर पर स्थानांतरित और पंजीकृत माना जाएगा, जिस संस्थान से वह व्यक्ति स्थानांतरित हुआ था;
(f) इस अधिनियम के प्रारंभ होने से ठीक पहले किसी मौजूदा संस्थान द्वारा या उसके विरुद्ध शुरू किए गए या शुरू किए जा सकने वाले सभी मुकदमे और अन्य कानूनी कार्यवाही संबंधित संस्थान द्वारा जारी रखी जाएंगी या उसके विरुद्ध शुरू की जाएंगी।
2 [ स्पष्टीकरण। ---संदेहों को दूर करने के लिए, यह स्पष्ट किया जाता है कि भारतीय प्रबंधन संस्थान, मुंबई के संबंध में, धारा 4 और 5 में निम्नलिखित अभिव्यक्तियों का संदर्भ---
(i) "इस अधिनियम के प्रारंभ होने की तिथि से";
(ii) "ऐसे प्रारंभ से पहले";
(iii) "इस अधिनियम के प्रारंभ होने से पहले"; और
(iv) "इस अधिनियम के प्रारंभ होने से पहले",
यहां इसका अर्थ उस तिथि से लगाया जाएगा जिस दिन से भारतीय प्रबंधन संस्थान (संशोधन) अधिनियम, 2023 के प्रावधान लागू होते हैं।
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