CAF Act 4अध्याय II · Establishment, Management and Utilisation of National Compensatory Afforestation Fund and State Compensatory Afforestation Funds
धारा 4 · राज्य निधि की स्थापना।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) प्रत्येक राज्य सरकार द्वारा राजपत्र में अधिसूचना द्वारा इस संबंध में नियुक्त तिथि से, इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए, ऐसे राज्य के सार्वजनिक खातों के अधीन, "राज्य क्षतिपूर्ति वनरोपण कोष-......... (राज्य का नाम)" नामक एक विशेष कोष स्थापित किया जाएगा।
बशर्ते कि यदि किसी केंद्र शासित प्रदेश में विधानमंडल न हो, तो ऐसे कोष की स्थापना भारत संघ के सार्वजनिक खाते के अधीन उस तिथि से की जाएगी, जिस तिथि से केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना द्वारा इस संबंध में नियुक्त करे।
(2) प्रत्येक राज्य में राज्य निधि उस राज्य की राज्य सरकार के नियंत्रण में होगी तथा उस राज्य के राज्य प्राधिकरण द्वारा निर्धारित तरीके से प्रबंधित की जाएगी।
(3) किसी राज्य के राज्य कोष में निम्नलिखित राशि जमा की जाएगी—
(i) तदर्थ प्राधिकरण द्वारा राज्य क्षतिपूर्ति वनरोपण निधि प्रबंधन एवं योजना प्राधिकरण को हस्तांतरित की गई सभी धनराशि का अव्यय शेष;
(ii) धारा 5 के खंड (क) के अधीन राष्ट्रीय निधि से हस्तांतरणीय सभी धन;
(iii) क्षतिपूर्ति वनरोपण, अतिरिक्त क्षतिपूर्ति वनरोपण, दंडात्मक क्षतिपूर्ति वनरोपण, शुद्ध वर्तमान मूल्य, जलग्रहण क्षेत्र उपचार योजना या केंद्र सरकार द्वारा वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 (69 ऑफ 1980) के प्रावधानों के तहत अनुमोदन प्रदान करते समय निर्धारित शर्तों के अनुपालन के लिए ऐसे राज्य द्वारा उपयोगकर्ता एजेंसियों से प्राप्त सभी धन; और
(iv) ऐसे मामलों में जहां वन भूमि का स्थानांतरण संरक्षित क्षेत्रों के अंतर्गत आता है, अर्थात् वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 (1972 का 53) की धारा 18, 26ए या 35 के तहत जैव विविधता और वन्यजीवों के संरक्षण से संबंधित गतिविधियों को करने के लिए अधिसूचित क्षेत्रों में, ऐसे राज्य द्वारा उपयोगकर्ता एजेंसियों से वसूली योग्य निधि।
(4) राज्य सरकार अपने द्वारा गठित राज्य निधि में निम्नलिखित मदों को भी जमा कर सकती है—
(i) राज्य प्राधिकरण द्वारा प्राप्त अनुदान-सहायता, यदि कोई हो;
(ii) राज्य प्राधिकरण द्वारा लिया गया कोई ऋण या लिया गया कोई उधार;
(iii) राज्य प्राधिकरण द्वारा दान, उपहार या चंदे के रूप में प्राप्त कोई अन्य राशि।
(5) राज्य निधि में प्राप्त धन सार्वजनिक खातों के अंतर्गत ब्याज अर्जित करने वाली निधि होगी।
(6) प्रत्येक राज्य निधि में शेष राशि अपव्यय योग्य नहीं होगी और केंद्र सरकार द्वारा घोषित दर के अनुसार वर्ष दर वर्ष ब्याज प्राप्त करेगी।
बशर्ते कि यदि किसी केंद्र शासित प्रदेश में विधानमंडल न हो, तो ऐसे कोष की स्थापना भारत संघ के सार्वजनिक खाते के अधीन उस तिथि से की जाएगी, जिस तिथि से केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना द्वारा इस संबंध में नियुक्त करे।
(2) प्रत्येक राज्य में राज्य निधि उस राज्य की राज्य सरकार के नियंत्रण में होगी तथा उस राज्य के राज्य प्राधिकरण द्वारा निर्धारित तरीके से प्रबंधित की जाएगी।
(3) किसी राज्य के राज्य कोष में निम्नलिखित राशि जमा की जाएगी—
(i) तदर्थ प्राधिकरण द्वारा राज्य क्षतिपूर्ति वनरोपण निधि प्रबंधन एवं योजना प्राधिकरण को हस्तांतरित की गई सभी धनराशि का अव्यय शेष;
(ii) धारा 5 के खंड (क) के अधीन राष्ट्रीय निधि से हस्तांतरणीय सभी धन;
(iii) क्षतिपूर्ति वनरोपण, अतिरिक्त क्षतिपूर्ति वनरोपण, दंडात्मक क्षतिपूर्ति वनरोपण, शुद्ध वर्तमान मूल्य, जलग्रहण क्षेत्र उपचार योजना या केंद्र सरकार द्वारा वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 (69 ऑफ 1980) के प्रावधानों के तहत अनुमोदन प्रदान करते समय निर्धारित शर्तों के अनुपालन के लिए ऐसे राज्य द्वारा उपयोगकर्ता एजेंसियों से प्राप्त सभी धन; और
(iv) ऐसे मामलों में जहां वन भूमि का स्थानांतरण संरक्षित क्षेत्रों के अंतर्गत आता है, अर्थात् वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 (1972 का 53) की धारा 18, 26ए या 35 के तहत जैव विविधता और वन्यजीवों के संरक्षण से संबंधित गतिविधियों को करने के लिए अधिसूचित क्षेत्रों में, ऐसे राज्य द्वारा उपयोगकर्ता एजेंसियों से वसूली योग्य निधि।
(4) राज्य सरकार अपने द्वारा गठित राज्य निधि में निम्नलिखित मदों को भी जमा कर सकती है—
(i) राज्य प्राधिकरण द्वारा प्राप्त अनुदान-सहायता, यदि कोई हो;
(ii) राज्य प्राधिकरण द्वारा लिया गया कोई ऋण या लिया गया कोई उधार;
(iii) राज्य प्राधिकरण द्वारा दान, उपहार या चंदे के रूप में प्राप्त कोई अन्य राशि।
(5) राज्य निधि में प्राप्त धन सार्वजनिक खातों के अंतर्गत ब्याज अर्जित करने वाली निधि होगी।
(6) प्रत्येक राज्य निधि में शेष राशि अपव्यय योग्य नहीं होगी और केंद्र सरकार द्वारा घोषित दर के अनुसार वर्ष दर वर्ष ब्याज प्राप्त करेगी।
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