CAF Act 30अध्याय VI · Miscellaneous
धारा 30 · नियम बनाने की शक्ति।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) केंद्र सरकार, राज्य सरकारों से परामर्श करके, पूर्व प्रकाशन के बाद, इस अधिनियम के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए नियम बना सकती है।
(2) विशेष रूप से, और पूर्वोक्त शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित सभी या इनमें से किसी भी मामले के लिए प्रावधान कर सकते हैं, अर्थात्:—
(क) धारा 3 की उपधारा (2) के अधीन राष्ट्रीय प्राधिकरण द्वारा राष्ट्रीय निधि का प्रबंधन;
(ख) धारा 4 की उपधारा (2) के अधीन राज्य प्राधिकरणों द्वारा राज्य निधि का प्रबंधन;
(ग) धारा 6 के खंड (ख) में निर्दिष्ट प्रयोजनों के लिए धन का उपयोग करने का तरीका;
(घ) धारा 6 के खंड (ग) में निर्दिष्ट प्रयोजनों के लिए धन का उपयोग करने का तरीका;
(ई) धारा 6 के खंड (एफ) के अधीन राज्य प्राधिकरण के अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों को देय वेतन और भत्तों के भुगतान का तरीका;
(f) धारा 7 के अंतर्गत राष्ट्रीय निधि और राज्य निधियों में धन जमा करने के तरीके को विनियमित करने वाली लेखांकन प्रक्रिया;
(जी) राष्ट्रीय प्राधिकरण के सदस्यों, कार्यकारी समिति, निगरानी समूह, मुख्य कार्यकारी अधिकारी और राष्ट्रीय प्राधिकरण द्वारा नियुक्त अधिकारियों, राज्य प्राधिकरण के सदस्यों, संचालन समिति और प्रत्येक राज्य प्राधिकरण की कार्यकारी समिति के सदस्यों के कार्यकाल और सेवा की अन्य शर्तें धारा 12 के अधीन होंगी;
(h) राष्ट्रीय प्राधिकरण के शासी निकाय और कार्यकारी समिति तथा राष्ट्रीय प्राधिकरण के निगरानी समूह के कामकाज के संचालन के संबंध में नियम और प्रक्रियाएं तथा बैठक का स्थान, जिसमें धारा 14 की उपधारा (3) के अधीन कोरम भी शामिल है;
(i) राज्य प्राधिकरण के शासी निकाय, संचालन समिति और कार्यकारी समिति के कामकाज के संचालन के संबंध में नियम और प्रक्रियाएं तथा बैठक का स्थान, जिसमें धारा 17 की उपधारा (3) के अधीन कोरम भी शामिल है;
(j) धारा 20 की उपधारा (1) के अधीन राष्ट्रीय प्राधिकरण के बजट की तैयारी;
(k) वित्तीय विनियमन एवं प्रक्रियाएँ, विशेष रूप से धारा 20 की उपधारा (2) के अधीन राष्ट्रीय प्राधिकरण के बजट को तैयार करने एवं लागू करने की प्रक्रिया;
(एल) धारा 21 के अधीन राष्ट्रीय प्राधिकरण के कोषों का निवेश;
(m) धारा 22 की उपधारा (1) के अधीन राष्ट्रीय प्राधिकरण द्वारा खातों और अन्य प्रासंगिक अभिलेखों का रखरखाव तथा खातों का वार्षिक विवरण तैयार करना;
(n) धारा 23 की उपधारा (1) के अधीन राष्ट्रीय प्राधिकरण द्वारा वार्षिक रिपोर्ट की तैयारी;
(ओ) धारा 25 की उपधारा (1) के अधीन राज्य प्राधिकरण के बजट की तैयारी;
(पी) वित्तीय विनियमन और प्रक्रियाएं, विशेष रूप से धारा 25 की उपधारा (2) के तहत राज्य प्राधिकरणों के बजट को तैयार करने और लागू करने की प्रक्रिया;
(q) धारा 26 के अधीन राज्य प्राधिकरणों द्वारा निधियों का निवेश;
(आर) धारा 27 की उपधारा (1) के अधीन प्रत्येक राज्य प्राधिकरण द्वारा खातों और अन्य प्रासंगिक अभिलेखों का रखरखाव और खातों के वार्षिक विवरण की तैयारी;
(एस) धारा 28 की उपधारा (1) के अधीन राज्य प्राधिकरणों द्वारा वार्षिक रिपोर्ट की तैयारी; और
(टी) कोई अन्य मामला जिसे निर्धारित करना आवश्यक है, या निर्धारित किया जा सकता है।
(3) इस अधिनियम के तहत बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के तुरंत बाद, संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिनों की अवधि के लिए रखा जाएगा, जो एक सत्र या दो या दो से अधिक लगातार सत्रों में समाहित हो सकती है, और यदि उपर्युक्त सत्र या लगातार सत्रों के तुरंत बाद वाले सत्र की समाप्ति से पहले, दोनों सदन नियम में कोई संशोधन करने पर सहमत हों या दोनों सदन इस बात पर सहमत हों कि नियम नहीं बनाया जाना चाहिए, तो नियम इसके बाद केवल ऐसे संशोधित रूप में प्रभावी होगा या अप्रभावी होगा, जैसा भी मामला हो; यद्यपि, ऐसा कोई भी संशोधन या निरस्तीकरण उस नियम के तहत पहले किए गए किसी भी कार्य की वैधता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेगा।
(2) विशेष रूप से, और पूर्वोक्त शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित सभी या इनमें से किसी भी मामले के लिए प्रावधान कर सकते हैं, अर्थात्:—
(क) धारा 3 की उपधारा (2) के अधीन राष्ट्रीय प्राधिकरण द्वारा राष्ट्रीय निधि का प्रबंधन;
(ख) धारा 4 की उपधारा (2) के अधीन राज्य प्राधिकरणों द्वारा राज्य निधि का प्रबंधन;
(ग) धारा 6 के खंड (ख) में निर्दिष्ट प्रयोजनों के लिए धन का उपयोग करने का तरीका;
(घ) धारा 6 के खंड (ग) में निर्दिष्ट प्रयोजनों के लिए धन का उपयोग करने का तरीका;
(ई) धारा 6 के खंड (एफ) के अधीन राज्य प्राधिकरण के अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों को देय वेतन और भत्तों के भुगतान का तरीका;
(f) धारा 7 के अंतर्गत राष्ट्रीय निधि और राज्य निधियों में धन जमा करने के तरीके को विनियमित करने वाली लेखांकन प्रक्रिया;
(जी) राष्ट्रीय प्राधिकरण के सदस्यों, कार्यकारी समिति, निगरानी समूह, मुख्य कार्यकारी अधिकारी और राष्ट्रीय प्राधिकरण द्वारा नियुक्त अधिकारियों, राज्य प्राधिकरण के सदस्यों, संचालन समिति और प्रत्येक राज्य प्राधिकरण की कार्यकारी समिति के सदस्यों के कार्यकाल और सेवा की अन्य शर्तें धारा 12 के अधीन होंगी;
(h) राष्ट्रीय प्राधिकरण के शासी निकाय और कार्यकारी समिति तथा राष्ट्रीय प्राधिकरण के निगरानी समूह के कामकाज के संचालन के संबंध में नियम और प्रक्रियाएं तथा बैठक का स्थान, जिसमें धारा 14 की उपधारा (3) के अधीन कोरम भी शामिल है;
(i) राज्य प्राधिकरण के शासी निकाय, संचालन समिति और कार्यकारी समिति के कामकाज के संचालन के संबंध में नियम और प्रक्रियाएं तथा बैठक का स्थान, जिसमें धारा 17 की उपधारा (3) के अधीन कोरम भी शामिल है;
(j) धारा 20 की उपधारा (1) के अधीन राष्ट्रीय प्राधिकरण के बजट की तैयारी;
(k) वित्तीय विनियमन एवं प्रक्रियाएँ, विशेष रूप से धारा 20 की उपधारा (2) के अधीन राष्ट्रीय प्राधिकरण के बजट को तैयार करने एवं लागू करने की प्रक्रिया;
(एल) धारा 21 के अधीन राष्ट्रीय प्राधिकरण के कोषों का निवेश;
(m) धारा 22 की उपधारा (1) के अधीन राष्ट्रीय प्राधिकरण द्वारा खातों और अन्य प्रासंगिक अभिलेखों का रखरखाव तथा खातों का वार्षिक विवरण तैयार करना;
(n) धारा 23 की उपधारा (1) के अधीन राष्ट्रीय प्राधिकरण द्वारा वार्षिक रिपोर्ट की तैयारी;
(ओ) धारा 25 की उपधारा (1) के अधीन राज्य प्राधिकरण के बजट की तैयारी;
(पी) वित्तीय विनियमन और प्रक्रियाएं, विशेष रूप से धारा 25 की उपधारा (2) के तहत राज्य प्राधिकरणों के बजट को तैयार करने और लागू करने की प्रक्रिया;
(q) धारा 26 के अधीन राज्य प्राधिकरणों द्वारा निधियों का निवेश;
(आर) धारा 27 की उपधारा (1) के अधीन प्रत्येक राज्य प्राधिकरण द्वारा खातों और अन्य प्रासंगिक अभिलेखों का रखरखाव और खातों के वार्षिक विवरण की तैयारी;
(एस) धारा 28 की उपधारा (1) के अधीन राज्य प्राधिकरणों द्वारा वार्षिक रिपोर्ट की तैयारी; और
(टी) कोई अन्य मामला जिसे निर्धारित करना आवश्यक है, या निर्धारित किया जा सकता है।
(3) इस अधिनियम के तहत बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के तुरंत बाद, संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिनों की अवधि के लिए रखा जाएगा, जो एक सत्र या दो या दो से अधिक लगातार सत्रों में समाहित हो सकती है, और यदि उपर्युक्त सत्र या लगातार सत्रों के तुरंत बाद वाले सत्र की समाप्ति से पहले, दोनों सदन नियम में कोई संशोधन करने पर सहमत हों या दोनों सदन इस बात पर सहमत हों कि नियम नहीं बनाया जाना चाहिए, तो नियम इसके बाद केवल ऐसे संशोधित रूप में प्रभावी होगा या अप्रभावी होगा, जैसा भी मामला हो; यद्यपि, ऐसा कोई भी संशोधन या निरस्तीकरण उस नियम के तहत पहले किए गए किसी भी कार्य की वैधता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेगा।
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