CAF Act 32अध्याय VI · Miscellaneous
धारा 32 · सत्यापन।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) किसी न्यायालय के किसी निर्णय, डिक्री या आदेश में किसी बात के होते हुए भी, राष्ट्रीय निधि में जमा की गई राशि को संविधान के अनुच्छेद 266 और 283 के अर्थ में भारत के सार्वजनिक खाते में जमा माना जाएगा और हमेशा जमा माना जाएगा, और इस संबंध में संसद द्वारा बनाए गए कानून द्वारा इसे विनियमित किया जाएगा।
(2) किसी न्यायालय के किसी निर्णय या आदेश में किसी बात के होते हुए भी, राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेश प्रशासनों द्वारा एकत्र की गई वे सभी धनराशियाँ जिन्हें तदर्थ प्राधिकरण के अधीन रखा गया है और राष्ट्रीयकृत बैंकों में जमा की गई हैं तथा उन पर अर्जित ब्याज राष्ट्रीय निधि में हस्तांतरित हो जाएगा।
(3) किसी न्यायालय के किसी निर्णय या किसी आदेश में किसी बात के होते हुए भी, राज्य निधि में जमा की गई राशि को संविधान के अनुच्छेद 266 और 283 के अर्थ में राज्य के सार्वजनिक खाते में जमा माना जाएगा और हमेशा जमा माना जाएगा, और इस संबंध में राज्य विधानमंडल द्वारा बनाए गए कानून द्वारा इसे विनियमित किया जाएगा।
(2) किसी न्यायालय के किसी निर्णय या आदेश में किसी बात के होते हुए भी, राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेश प्रशासनों द्वारा एकत्र की गई वे सभी धनराशियाँ जिन्हें तदर्थ प्राधिकरण के अधीन रखा गया है और राष्ट्रीयकृत बैंकों में जमा की गई हैं तथा उन पर अर्जित ब्याज राष्ट्रीय निधि में हस्तांतरित हो जाएगा।
(3) किसी न्यायालय के किसी निर्णय या किसी आदेश में किसी बात के होते हुए भी, राज्य निधि में जमा की गई राशि को संविधान के अनुच्छेद 266 और 283 के अर्थ में राज्य के सार्वजनिक खाते में जमा माना जाएगा और हमेशा जमा माना जाएगा, और इस संबंध में राज्य विधानमंडल द्वारा बनाए गए कानून द्वारा इसे विनियमित किया जाएगा।
इस धारा पर आपका निजी नोट
यह नोट सिर्फ़ आप देख सकते हैं।
