NFS Act 39अध्याय XIII · Miscellaneous
धारा 39 · नियम बनाने की केंद्रीय सरकार की शक्ति।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) केंद्र सरकार, राज्य सरकारों से परामर्श करके और अधिसूचना द्वारा, इस अधिनियम के प्रावधानों को लागू करने के लिए नियम बना सकती है।
(2) विशेष रूप से, और पूर्वोक्त शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित सभी या इनमें से किसी भी मामले के लिए प्रावधान कर सकते हैं, अर्थात्:—
(क) धारा 4 के खंड (ख) के अधीन गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को मातृत्व लाभ प्रदान करने के लिए लागत साझाकरण सहित योजना;
(ख) धारा 4, 5 और धारा 6 के अंतर्गत मिलने वाले अधिकारों को कवर करने वाली योजनाएं, जिनमें धारा 7 के अंतर्गत लागत साझाकरण भी शामिल है;
(ग) धारा 8 के अंतर्गत पात्र व्यक्तियों को खाद्य सुरक्षा भत्ता के भुगतान की राशि, समय और विधि;
(घ) धारा 12 की उपधारा (2) के खंड (एच) के अनुसार ऐसे क्षेत्रों और तरीके से लक्षित लाभार्थियों को नकद हस्तांतरण, खाद्य कूपन या अन्य योजनाओं की शुरुआत करना ताकि उनके खाद्यान्न अधिकारों को सुनिश्चित किया जा सके;
(ई) धारा 22 की उपधारा (4) के खंड (डी) के अधीन व्यय को पूरा करने में राज्य सरकारों को सहायता प्रदान करने के मानदंड और तरीके;
(f) धारा 23 के अधीन खाद्यान्न की कमी होने की स्थिति में केंद्र सरकार द्वारा राज्य सरकारों को निधि उपलब्ध कराने का तरीका;
(जी) कोई अन्य मामला जिसे केंद्र सरकार द्वारा नियमों के माध्यम से निर्धारित किया जाना है, या किया जा सकता है, या जिसके संबंध में प्रावधान किया जाना है।
(3) इस अधिनियम के अधीन केंद्र सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के तुरंत बाद, संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिनों की अवधि के लिए रखा जाएगा, जो एक सत्र या दो या दो से अधिक लगातार सत्रों में समाहित हो सकती है, और यदि उपर्युक्त सत्र या लगातार सत्रों के तुरंत बाद वाले सत्र की समाप्ति से पहले, दोनों सदन नियम में कोई संशोधन करने पर सहमत हों या दोनों सदन इस बात पर सहमत हों कि नियम नहीं बनाया जाना चाहिए, तो नियम इसके बाद केवल ऐसे संशोधित रूप में प्रभावी होगा या अप्रभावी होगा, जैसा भी मामला हो; यद्यपि, ऐसा कोई भी संशोधन या निरस्तीकरण उस नियम के अधीन पहले किए गए किसी भी कार्य की वैधता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेगा।
(2) विशेष रूप से, और पूर्वोक्त शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे नियम निम्नलिखित सभी या इनमें से किसी भी मामले के लिए प्रावधान कर सकते हैं, अर्थात्:—
(क) धारा 4 के खंड (ख) के अधीन गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को मातृत्व लाभ प्रदान करने के लिए लागत साझाकरण सहित योजना;
(ख) धारा 4, 5 और धारा 6 के अंतर्गत मिलने वाले अधिकारों को कवर करने वाली योजनाएं, जिनमें धारा 7 के अंतर्गत लागत साझाकरण भी शामिल है;
(ग) धारा 8 के अंतर्गत पात्र व्यक्तियों को खाद्य सुरक्षा भत्ता के भुगतान की राशि, समय और विधि;
(घ) धारा 12 की उपधारा (2) के खंड (एच) के अनुसार ऐसे क्षेत्रों और तरीके से लक्षित लाभार्थियों को नकद हस्तांतरण, खाद्य कूपन या अन्य योजनाओं की शुरुआत करना ताकि उनके खाद्यान्न अधिकारों को सुनिश्चित किया जा सके;
(ई) धारा 22 की उपधारा (4) के खंड (डी) के अधीन व्यय को पूरा करने में राज्य सरकारों को सहायता प्रदान करने के मानदंड और तरीके;
(f) धारा 23 के अधीन खाद्यान्न की कमी होने की स्थिति में केंद्र सरकार द्वारा राज्य सरकारों को निधि उपलब्ध कराने का तरीका;
(जी) कोई अन्य मामला जिसे केंद्र सरकार द्वारा नियमों के माध्यम से निर्धारित किया जाना है, या किया जा सकता है, या जिसके संबंध में प्रावधान किया जाना है।
(3) इस अधिनियम के अधीन केंद्र सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के तुरंत बाद, संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिनों की अवधि के लिए रखा जाएगा, जो एक सत्र या दो या दो से अधिक लगातार सत्रों में समाहित हो सकती है, और यदि उपर्युक्त सत्र या लगातार सत्रों के तुरंत बाद वाले सत्र की समाप्ति से पहले, दोनों सदन नियम में कोई संशोधन करने पर सहमत हों या दोनों सदन इस बात पर सहमत हों कि नियम नहीं बनाया जाना चाहिए, तो नियम इसके बाद केवल ऐसे संशोधित रूप में प्रभावी होगा या अप्रभावी होगा, जैसा भी मामला हो; यद्यपि, ऐसा कोई भी संशोधन या निरस्तीकरण उस नियम के अधीन पहले किए गए किसी भी कार्य की वैधता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेगा।
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