NFS Act 16अध्याय VII · Grievance Redressal Mechanism
धारा 16 · राज्य खाद्य आयोग।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) प्रत्येक राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा इस अधिनियम के कार्यान्वयन की निगरानी और समीक्षा के उद्देश्य से एक राज्य खाद्य आयोग का गठन करेगी।
(2) राज्य आयोग में निम्नलिखित सदस्य होंगे--
(क) अध्यक्ष;
(ख) पांच अन्य सदस्य; और
(ग) एक सदस्य-सचिव, जो राज्य सरकार का ऐसा अधिकारी होगा जिसका पद उस सरकार के संयुक्त सचिव के पद से कम न हो:
बशर्ते कि अध्यक्ष, सदस्य या सदस्य सचिव के पद पर कम से कम दो महिलाएं हों:
इसके अलावा, यह भी प्रावधान है कि अध्यक्ष, सदस्य या सदस्य-सचिव के पद पर एक व्यक्ति अनुसूचित जाति से और एक व्यक्ति अनुसूचित जनजाति से होना चाहिए।
(3) अध्यक्ष और अन्य सदस्यों की नियुक्ति निम्नलिखित व्यक्तियों में से की जाएगी--
(क) जो अखिल भारतीय सेवाओं या संघ या राज्य की किसी अन्य सिविल सेवाओं के सदस्य हैं या रहे हैं या संघ या राज्य के अधीन किसी सिविल पद पर कार्यरत हैं और कृषि, नागरिक आपूर्ति, पोषण, स्वास्थ्य या किसी संबद्ध क्षेत्र में खाद्य सुरक्षा, नीति निर्माण और प्रशासन से संबंधित मामलों में ज्ञान और अनुभव रखते हैं; या
(ख) सार्वजनिक जीवन में प्रतिष्ठित व्यक्ति, जिसे कृषि, कानून, मानवाधिकार, सामाजिक सेवा, प्रबंधन, पोषण, स्वास्थ्य, खाद्य नीति या सार्वजनिक प्रशासन में व्यापक ज्ञान और अनुभव हो; या
(ग) जिनके पास गरीबों के भोजन और पोषण अधिकारों में सुधार से संबंधित कार्य का सिद्ध रिकॉर्ड हो।
(4) अध्यक्ष और प्रत्येक अन्य सदस्य अपने पद ग्रहण करने की तिथि से अधिकतम पाँच वर्ष की अवधि के लिए पद धारण करेंगे और पुनर्नियुक्ति के पात्र होंगे:
बशर्ते कि कोई भी व्यक्ति पैंसठ वर्ष की आयु प्राप्त करने के बाद अध्यक्ष या अन्य सदस्य के रूप में पद धारण नहीं करेगा।
(5) राज्य आयोग के अध्यक्ष, अन्य सदस्यों और सदस्य-सचिव की नियुक्ति की विधि और अन्य नियम एवं शर्तें, जिनके अधीन उनकी नियुक्ति की जा सकती है, तथा राज्य आयोग की बैठकों का समय, स्थान और प्रक्रिया (ऐसी बैठकों में कोरम सहित) और उसकी शक्तियाँ, ऐसी होंगी जैसा राज्य सरकार द्वारा निर्धारित किया जा सकता है।
(6) राज्य आयोग निम्नलिखित कार्यों का निर्वहन करेगा, अर्थात्:--
(क) राज्य के संबंध में इस अधिनियम के कार्यान्वयन की निगरानी और मूल्यांकन करना;
(ख) स्वतः संज्ञान से या शिकायत प्राप्त होने पर अध्याय II के अंतर्गत प्रदान किए गए अधिकारों के उल्लंघन की जांच करना;
(ग) इस अधिनियम के प्रभावी कार्यान्वयन पर राज्य सरकार को सलाह देना;
(घ) खाद्य एवं पोषण संबंधी योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए, संबंधित सेवाओं के वितरण में शामिल राज्य सरकार, उनकी एजेंसियों, स्वायत्त निकायों और गैर-सरकारी संगठनों को सलाह देना, ताकि व्यक्ति इस अधिनियम में निर्दिष्ट अपने अधिकारों का पूर्ण रूप से लाभ उठा सकें;
(ई) जिला शिकायत निवारण अधिकारी के आदेशों के विरुद्ध अपीलों की सुनवाई करना;
(f) वार्षिक रिपोर्ट तैयार करना जिसे राज्य सरकार द्वारा राज्य विधानमंडल के समक्ष रखा जाएगा।
(7) राज्य सरकार राज्य आयोग को ऐसे प्रशासनिक एवं तकनीकी कर्मचारी उपलब्ध कराएगी, जिन्हें वह राज्य आयोग के उचित कामकाज के लिए आवश्यक समझे।
(8) उपधारा (7) के अधीन कर्मचारियों की नियुक्ति की विधि, उनके वेतन, भत्ते और सेवा शर्तें ऐसी होंगी, जैसी राज्य सरकार द्वारा निर्धारित की जाएं।
(9) राज्य सरकार अध्यक्ष या किसी सदस्य को पद से हटा सकती है जो--
(क) दिवालिया घोषित किया गया है, या किसी भी समय दिवालिया घोषित किया गया है; या
(ख) शारीरिक या मानसिक रूप से सदस्य के रूप में कार्य करने में असमर्थ हो गया हो; या
(ग) किसी ऐसे अपराध के लिए दोषी ठहराया गया हो, जो राज्य सरकार की राय में नैतिक पतन से संबंधित हो; या
(घ) उसने ऐसा वित्तीय या अन्य हित अर्जित कर लिया है जिससे सदस्य के रूप में उसके कार्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना है; या
(ई) उसने अपने पद का इस प्रकार दुरुपयोग किया है कि उसका पद पर बने रहना जनहित के लिए हानिकारक है।
(10) उपधारा (9) के खंड (घ) या खंड (ङ) के तहत किसी भी अध्यक्ष या सदस्य को तब तक नहीं हटाया जाएगा जब तक कि उसे मामले में सुनवाई का उचित अवसर न दिया गया हो।
(2) राज्य आयोग में निम्नलिखित सदस्य होंगे--
(क) अध्यक्ष;
(ख) पांच अन्य सदस्य; और
(ग) एक सदस्य-सचिव, जो राज्य सरकार का ऐसा अधिकारी होगा जिसका पद उस सरकार के संयुक्त सचिव के पद से कम न हो:
बशर्ते कि अध्यक्ष, सदस्य या सदस्य सचिव के पद पर कम से कम दो महिलाएं हों:
इसके अलावा, यह भी प्रावधान है कि अध्यक्ष, सदस्य या सदस्य-सचिव के पद पर एक व्यक्ति अनुसूचित जाति से और एक व्यक्ति अनुसूचित जनजाति से होना चाहिए।
(3) अध्यक्ष और अन्य सदस्यों की नियुक्ति निम्नलिखित व्यक्तियों में से की जाएगी--
(क) जो अखिल भारतीय सेवाओं या संघ या राज्य की किसी अन्य सिविल सेवाओं के सदस्य हैं या रहे हैं या संघ या राज्य के अधीन किसी सिविल पद पर कार्यरत हैं और कृषि, नागरिक आपूर्ति, पोषण, स्वास्थ्य या किसी संबद्ध क्षेत्र में खाद्य सुरक्षा, नीति निर्माण और प्रशासन से संबंधित मामलों में ज्ञान और अनुभव रखते हैं; या
(ख) सार्वजनिक जीवन में प्रतिष्ठित व्यक्ति, जिसे कृषि, कानून, मानवाधिकार, सामाजिक सेवा, प्रबंधन, पोषण, स्वास्थ्य, खाद्य नीति या सार्वजनिक प्रशासन में व्यापक ज्ञान और अनुभव हो; या
(ग) जिनके पास गरीबों के भोजन और पोषण अधिकारों में सुधार से संबंधित कार्य का सिद्ध रिकॉर्ड हो।
(4) अध्यक्ष और प्रत्येक अन्य सदस्य अपने पद ग्रहण करने की तिथि से अधिकतम पाँच वर्ष की अवधि के लिए पद धारण करेंगे और पुनर्नियुक्ति के पात्र होंगे:
बशर्ते कि कोई भी व्यक्ति पैंसठ वर्ष की आयु प्राप्त करने के बाद अध्यक्ष या अन्य सदस्य के रूप में पद धारण नहीं करेगा।
(5) राज्य आयोग के अध्यक्ष, अन्य सदस्यों और सदस्य-सचिव की नियुक्ति की विधि और अन्य नियम एवं शर्तें, जिनके अधीन उनकी नियुक्ति की जा सकती है, तथा राज्य आयोग की बैठकों का समय, स्थान और प्रक्रिया (ऐसी बैठकों में कोरम सहित) और उसकी शक्तियाँ, ऐसी होंगी जैसा राज्य सरकार द्वारा निर्धारित किया जा सकता है।
(6) राज्य आयोग निम्नलिखित कार्यों का निर्वहन करेगा, अर्थात्:--
(क) राज्य के संबंध में इस अधिनियम के कार्यान्वयन की निगरानी और मूल्यांकन करना;
(ख) स्वतः संज्ञान से या शिकायत प्राप्त होने पर अध्याय II के अंतर्गत प्रदान किए गए अधिकारों के उल्लंघन की जांच करना;
(ग) इस अधिनियम के प्रभावी कार्यान्वयन पर राज्य सरकार को सलाह देना;
(घ) खाद्य एवं पोषण संबंधी योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए, संबंधित सेवाओं के वितरण में शामिल राज्य सरकार, उनकी एजेंसियों, स्वायत्त निकायों और गैर-सरकारी संगठनों को सलाह देना, ताकि व्यक्ति इस अधिनियम में निर्दिष्ट अपने अधिकारों का पूर्ण रूप से लाभ उठा सकें;
(ई) जिला शिकायत निवारण अधिकारी के आदेशों के विरुद्ध अपीलों की सुनवाई करना;
(f) वार्षिक रिपोर्ट तैयार करना जिसे राज्य सरकार द्वारा राज्य विधानमंडल के समक्ष रखा जाएगा।
(7) राज्य सरकार राज्य आयोग को ऐसे प्रशासनिक एवं तकनीकी कर्मचारी उपलब्ध कराएगी, जिन्हें वह राज्य आयोग के उचित कामकाज के लिए आवश्यक समझे।
(8) उपधारा (7) के अधीन कर्मचारियों की नियुक्ति की विधि, उनके वेतन, भत्ते और सेवा शर्तें ऐसी होंगी, जैसी राज्य सरकार द्वारा निर्धारित की जाएं।
(9) राज्य सरकार अध्यक्ष या किसी सदस्य को पद से हटा सकती है जो--
(क) दिवालिया घोषित किया गया है, या किसी भी समय दिवालिया घोषित किया गया है; या
(ख) शारीरिक या मानसिक रूप से सदस्य के रूप में कार्य करने में असमर्थ हो गया हो; या
(ग) किसी ऐसे अपराध के लिए दोषी ठहराया गया हो, जो राज्य सरकार की राय में नैतिक पतन से संबंधित हो; या
(घ) उसने ऐसा वित्तीय या अन्य हित अर्जित कर लिया है जिससे सदस्य के रूप में उसके कार्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना है; या
(ई) उसने अपने पद का इस प्रकार दुरुपयोग किया है कि उसका पद पर बने रहना जनहित के लिए हानिकारक है।
(10) उपधारा (9) के खंड (घ) या खंड (ङ) के तहत किसी भी अध्यक्ष या सदस्य को तब तक नहीं हटाया जाएगा जब तक कि उसे मामले में सुनवाई का उचित अवसर न दिया गया हो।
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