The Emigration Act, 1983 37अध्याय VIII · Miscellaneous
धारा 37 · अधिकारियों और पदाधिकारियों को दीवानी न्यायालय की कुछ शक्तियां प्राप्त होंगी।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) इस अधिनियम के अधीन अपने कार्यों के निर्वहन हेतु उत्प्रवासियों के महारक्षक, पंजीकरण प्राधिकारी, सक्षम प्राधिकारी और प्रत्येक उत्प्रवासी संरक्षक को निम्नलिखित मामलों के संबंध में वही शक्तियाँ प्राप्त होंगी जो सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के अधीन किसी न्यायालय को वाद-विवाद करते समय प्राप्त होती हैं, अर्थात्:--
(क) गवाहों को बुलाना और उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करना;
(ख) किसी दस्तावेज की खोज और प्रस्तुति की आवश्यकता;
(ग) किसी न्यायालय या कार्यालय से किसी सार्वजनिक अभिलेख या उसकी प्रति की मांग करना;
(घ) शपथपत्रों पर साक्ष्य प्राप्त करना; और
(ई) गवाहों या दस्तावेजों की जांच के लिए कमीशन जारी करना।
(2) प्रवासी संरक्षक जनरल, या पंजीकरण प्राधिकरण, या सक्षम प्राधिकरण, या प्रवासी संरक्षक के समक्ष प्रत्येक कार्यवाही भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 193 और 228 के अर्थ में न्यायिक कार्यवाही होगी और प्रवासी संरक्षक जनरल, पंजीकरण प्राधिकरण, सक्षम प्राधिकरण और प्रत्येक प्रवासी संरक्षक को दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 195 और अध्याय XXVI के प्रयोजनों के लिए एक दीवानी न्यायालय माना जाएगा।
(क) गवाहों को बुलाना और उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करना;
(ख) किसी दस्तावेज की खोज और प्रस्तुति की आवश्यकता;
(ग) किसी न्यायालय या कार्यालय से किसी सार्वजनिक अभिलेख या उसकी प्रति की मांग करना;
(घ) शपथपत्रों पर साक्ष्य प्राप्त करना; और
(ई) गवाहों या दस्तावेजों की जांच के लिए कमीशन जारी करना।
(2) प्रवासी संरक्षक जनरल, या पंजीकरण प्राधिकरण, या सक्षम प्राधिकरण, या प्रवासी संरक्षक के समक्ष प्रत्येक कार्यवाही भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 193 और 228 के अर्थ में न्यायिक कार्यवाही होगी और प्रवासी संरक्षक जनरल, पंजीकरण प्राधिकरण, सक्षम प्राधिकरण और प्रत्येक प्रवासी संरक्षक को दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 195 और अध्याय XXVI के प्रयोजनों के लिए एक दीवानी न्यायालय माना जाएगा।
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