IT Act 69Aअध्याय XI · Offences
धारा 69A · किसी भी कंप्यूटर संसाधन के माध्यम से किसी भी जानकारी की सार्वजनिक पहुंच को अवरुद्ध करने के लिए निर्देश जारी करने का अधिकार।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) जहाँ केंद्र सरकार या उसके द्वारा इस संबंध में विशेष रूप से अधिकृत कोई अधिकारी संतुष्ट हो कि भारत की संप्रभुता और अखंडता, भारत की रक्षा, राज्य की सुरक्षा, विदेशी राज्यों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध या सार्वजनिक व्यवस्था के हित में या उपरोक्त से संबंधित किसी संज्ञेय अपराध के लिए उकसाने से रोकने के लिए ऐसा करना आवश्यक या उचित है, तो वह उप-धारा (2) के प्रावधानों के अधीन रहते हुए, लिखित में कारण दर्ज करते हुए, आदेश द्वारा, सरकार की किसी एजेंसी या मध्यस्थ को किसी भी कंप्यूटर संसाधन में उत्पन्न, प्रेषित, प्राप्त, संग्रहीत या होस्ट की गई किसी भी जानकारी को जनता द्वारा पहुँच से अवरुद्ध करने या जनता द्वारा पहुँच से अवरुद्ध करवाने का निर्देश दे सकती है।
(2) जनता के प्रवेश पर रोक लगाने के लिए जो प्रक्रिया एवं सुरक्षा उपाय अपनाए जा सकते हैं, वे ऐसे होंगे जैसे निर्धारित किए जाएँगे।
(3) उपधारा (1) के तहत जारी निर्देश का पालन करने में विफल रहने वाले मध्यस्थ को सात वर्ष तक की कारावास की सजा दी जाएगी और जुर्माना भी लगाया जाएगा।
(2) जनता के प्रवेश पर रोक लगाने के लिए जो प्रक्रिया एवं सुरक्षा उपाय अपनाए जा सकते हैं, वे ऐसे होंगे जैसे निर्धारित किए जाएँगे।
(3) उपधारा (1) के तहत जारी निर्देश का पालन करने में विफल रहने वाले मध्यस्थ को सात वर्ष तक की कारावास की सजा दी जाएगी और जुर्माना भी लगाया जाएगा।
अपराध एक नज़र में
- अधिकतम दंड
- 7 वर्ष
- जुर्माना
- जुर्माना — कोई विधिक सीमा नहीं, न्यायालय तय करेगा
- संज्ञेय
- संज्ञेय
- जमानतीय
- अजमानतीय
- विचारण न्यायालय
- प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट
- संज्ञेय — पुलिस बिना वारंट गिरफ़्तार कर सकती है
- अजमानतीय — जमानत न्यायालय के विवेक पर है
इसी अधिनियम के अपने उपबंध के अनुसार
इस धारा पर आपका निजी नोट
यह नोट सिर्फ़ आप देख सकते हैं।
