CP Act 90अध्याय VII · Offences and Penalties
धारा 90 · मिलावटी पदार्थ युक्त उत्पादों का निर्माण, भंडारण, बिक्री, वितरण या आयात करने पर दंड।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) जो कोई स्वयं या अपनी ओर से किसी अन्य व्यक्ति द्वारा किसी मिलावटी पदार्थ युक्त उत्पाद का निर्माण, भंडारण, बिक्री, वितरण या आयात करता है, तो उसे दंडित किया जाएगा, यदि ऐसा कार्य--
(क) उपभोक्ता को कोई चोट न पहुंचे, जिसके परिणामस्वरूप छह महीने तक की कैद और एक लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है;
(ख) उपभोक्ता को गंभीर चोट न पहुँचाने पर, एक वर्ष तक की कारावास और तीन लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है;
(ग) उपभोक्ता को गंभीर चोट पहुँचाने का अपराध करने पर सात वर्ष तक की कारावास और पाँच लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है; और
(घ) उपभोक्ता की मृत्यु होने पर, कम से कम सात वर्ष की कैद, लेकिन आजीवन कारावास तक की कैद और कम से कम दस लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।
(2) उपधारा ( 1 ) के खंड ( ग ) और ( घ ) के अंतर्गत अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती होंगे।
(3) उपधारा ( 1 ) के अधीन दंड के बावजूद, न्यायालय प्रथम दोषसिद्धि के मामले में, उस उपधारा में निर्दिष्ट व्यक्ति को किसी भी कानून के तहत जारी किए गए किसी भी लाइसेंस को दो वर्ष तक की अवधि के लिए निलंबित कर सकता है, और द्वितीय या उसके बाद की दोषसिद्धि के मामले में, लाइसेंस रद्द कर सकता है।
स्पष्टीकरण .--इस अनुभाग के प्रयोजनों के लिए,--
(क) "मिलावट" से तात्पर्य किसी भी ऐसी सामग्री से है जिसमें बाह्य पदार्थ भी शामिल हैं, जिसका उपयोग किसी उत्पाद को असुरक्षित बनाने के लिए किया जाता है;
(ख) "गंभीर चोट" का वही अर्थ होगा जो भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 320 में दिया गया है।
(क) उपभोक्ता को कोई चोट न पहुंचे, जिसके परिणामस्वरूप छह महीने तक की कैद और एक लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है;
(ख) उपभोक्ता को गंभीर चोट न पहुँचाने पर, एक वर्ष तक की कारावास और तीन लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है;
(ग) उपभोक्ता को गंभीर चोट पहुँचाने का अपराध करने पर सात वर्ष तक की कारावास और पाँच लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है; और
(घ) उपभोक्ता की मृत्यु होने पर, कम से कम सात वर्ष की कैद, लेकिन आजीवन कारावास तक की कैद और कम से कम दस लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।
(2) उपधारा ( 1 ) के खंड ( ग ) और ( घ ) के अंतर्गत अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती होंगे।
(3) उपधारा ( 1 ) के अधीन दंड के बावजूद, न्यायालय प्रथम दोषसिद्धि के मामले में, उस उपधारा में निर्दिष्ट व्यक्ति को किसी भी कानून के तहत जारी किए गए किसी भी लाइसेंस को दो वर्ष तक की अवधि के लिए निलंबित कर सकता है, और द्वितीय या उसके बाद की दोषसिद्धि के मामले में, लाइसेंस रद्द कर सकता है।
स्पष्टीकरण .--इस अनुभाग के प्रयोजनों के लिए,--
(क) "मिलावट" से तात्पर्य किसी भी ऐसी सामग्री से है जिसमें बाह्य पदार्थ भी शामिल हैं, जिसका उपयोग किसी उत्पाद को असुरक्षित बनाने के लिए किया जाता है;
(ख) "गंभीर चोट" का वही अर्थ होगा जो भारतीय दंड संहिता (1860 का 45) की धारा 320 में दिया गया है।
अपराध एक नज़र में
- अधिकतम दंड
- आजीवन कारावास
- न्यूनतम दंड (विधिक)
- 7 वर्ष
- जुर्माना
- ₹5,00,000
- संज्ञेय
- संज्ञेय
- जमानतीय
- अजमानतीय
- विचारण न्यायालय
- सत्र न्यायालय
- संज्ञेय — पुलिस बिना वारंट गिरफ़्तार कर सकती है
- अजमानतीय — जमानत न्यायालय के विवेक पर है
इस धारा की अलग-अलग उपधाराओं में अलग दंड हैं; यहाँ अधिकतम दिखाया गया है।
प्रथम अनुसूची भाग II के नियम से निकाला गया — धारावार सूचीबद्ध नहीं
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