Copyright Act 63अध्याय XIII · Offences
धारा 63 · प्रतिलिप्यधिकार या इस अधिनियम द्वारा प्रदत्त अन्य अधिकारों के अतिलंघन का अपराध
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
कोई व्यक्ति जो-
(क) किसी कृति में प्रतिलिप्यधिकार का, या
(ख) धारा 53क द्वारा प्रदत्त अधिकार को छोड़कर इस अधिनियम द्वारा प्रदत्त किसी अन्य अधिकार का,
जानबूझकर अतिलंघन करेगा या अतिलंघन दुष्प्रेरित करेगा, वह कारावास से, जिसकी अवधि छह मास से कम की नहीं होगी किन्तु तीन वर्ष तक की हो सकेगी, और जुर्माने से, जो पचास हजार रुपए से कम का नहीं होगा किन्तु दो लाख रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा:
परन्तु 1जहां ऐसा अतिलंघन, व्यापार या कारबार के अनुक्रम में अभिलाभ के लिए नहीं किया जाता है वहां न्यायालय, ऐसे पर्याप्त और विशेष कारणों से जो निर्णय में उल्लिखित किए जाएंगे, छह मास से कम की किसी अवधि के कारावास का दंडादेश दे सकेगा या पचास हजार रुपए से कम का जुर्माना अधिरोपित कर सकेगा ।
स्पष्टीकरण-किसी भवन या अन्य संरचना का सन्निर्माण, जो किसी अन्य कृति में प्रतिलिप्यधिकार का अतिलंघन करता है या यदि पूरा कर लिया जाए तो अतिलंघन करेगा, इस धारा के अधीन अपराध नहीं होगा ।
(क) किसी कृति में प्रतिलिप्यधिकार का, या
(ख) धारा 53क द्वारा प्रदत्त अधिकार को छोड़कर इस अधिनियम द्वारा प्रदत्त किसी अन्य अधिकार का,
जानबूझकर अतिलंघन करेगा या अतिलंघन दुष्प्रेरित करेगा, वह कारावास से, जिसकी अवधि छह मास से कम की नहीं होगी किन्तु तीन वर्ष तक की हो सकेगी, और जुर्माने से, जो पचास हजार रुपए से कम का नहीं होगा किन्तु दो लाख रुपए तक का हो सकेगा, दण्डनीय होगा:
परन्तु 1जहां ऐसा अतिलंघन, व्यापार या कारबार के अनुक्रम में अभिलाभ के लिए नहीं किया जाता है वहां न्यायालय, ऐसे पर्याप्त और विशेष कारणों से जो निर्णय में उल्लिखित किए जाएंगे, छह मास से कम की किसी अवधि के कारावास का दंडादेश दे सकेगा या पचास हजार रुपए से कम का जुर्माना अधिरोपित कर सकेगा ।
स्पष्टीकरण-किसी भवन या अन्य संरचना का सन्निर्माण, जो किसी अन्य कृति में प्रतिलिप्यधिकार का अतिलंघन करता है या यदि पूरा कर लिया जाए तो अतिलंघन करेगा, इस धारा के अधीन अपराध नहीं होगा ।
अपराध एक नज़र में
- अधिकतम दंड
- 3 वर्ष
- न्यूनतम दंड (विधिक)
- 6 माह
- जुर्माना
- ₹2,00,000
- संज्ञेय
- संज्ञेय
- जमानतीय
- अजमानतीय
- समझौता योग्य
- समझौता योग्य नहीं
- विचारण न्यायालय
- प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट
- संज्ञेय — पुलिस बिना वारंट गिरफ़्तार कर सकती है
- अजमानतीय — जमानत न्यायालय के विवेक पर है
प्रथम अनुसूची भाग II के नियम से निकाला गया — धारावार सूचीबद्ध नहीं
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