Copyright Act 40अध्याय IX · International Copyright
धारा 40 · प्रतिलिप्यधिकार को विदेशी कृतियों पर विस्तारित करने की शक्ति
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
केन्द्रीय सरकार शासकीय राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा निदेश दे सकेगी कि इस अधिनियम के सब या कोई उपबंध-
(क) भारत के बाहर किसी राज्यक्षेत्र में, जिससे आदेश संबद्ध है प्रथम बार प्रकाशित कृतियों को उसी प्रकार लागू होंगे मानो वे भारत के अंदर प्रथम बार प्रकाशित की गई हों;
(ख) ऐसी अप्रकाशित कृतियों या उनके किसी वर्ग को, जिनके रचयिता कृति के बनाए जाने के समय किसी ऐसे विदेश के प्रजाजन या नागरिक थे जिससे आदेश संबद्ध है, उसी प्रकार लागू होंगे मानो वे रचयिता भारत के नागरिक रहे हों;
(ग) भारत के बाहर किसी राज्यक्षेत्र में, जिससे आदेश संबद्ध है, अधिवास की बाबत उसी प्रकार लागू होंगे मानो वह अधिवास भारत में हो;
(घ) किसी ऐसी कृति को, जिसका रचयिता उसके प्रथम बार प्रकाशन की तारीख को, या उस दशा में जिसमें रचयिता उस तारीख को मर चुका था, अपनी मृत्यु के समय ऐसे विदेश का प्रजाजन या नागरिक था, जिससे आदेश संबद्ध है, उसी प्रकार लागू होंगे मानो वह रचयिता उस तारीख को या उस समय भारत का नागरिक रहा हो,
और तब इस अध्याय के और आदेश के उपबंधों के अध्यधीन, यह अधिनियम तद्नुसार लागू होगा:
परंतु यह कि-
(i) किसी विदेश के संबंध में (जो ऐसे देश से भिन्न हो जिसके साथ भारत ने कोई संधि की है या जो प्रतिलिप्यधिकार से संबद्ध ऐसे अभिसमय का पक्षकार है जिसका भारत भी पक्षकार है) इस धारा के अधीन कोई आदेश करने से पूर्व केन्द्रीय सरकार अपना समाधान कर लेगी कि उस विदेश ने ऐसे उपबंध, यदि कोई हों, जैसे इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन प्रतिलिप्यधिकार की हकदार कृतियों के उस देश में संरक्षण के लिए अपेक्षित करना केन्द्रीय सरकार की राय में समीचीन प्रतीत हो, कर लिए हैं या करने का वचनबंध किया है;
(ii) आदेश में यह उपबंध हो सकेगा कि इस अधिनियम के उपबंध या तो साधारणतया या कृतियों के ऐसे वर्गों या मामलों के ऐसे वर्गों के संबंध में जैसे आदेश में विनिर्दिष्ट किए जाएं, लागू होंगे;
(iii) आदेश में यह उपबंध हो सकेगा कि भारत में प्रतिलिप्यधिकार की अवधि उस देश की, जिससे आदेश संबद्ध विधि द्वारा प्रदत्त अवधि से अधिक नहीं होगी किन्तु प्रतिलिप्यधिकार की ऐसी कोई अवधि इस अधिनियम के अधीन उपबंधित प्रतिलिप्यधिकार की अवधि से अधिक नहीं होगी;
(iv) आदेश में यह उपबंध हो सकेगा कि इस अधिनियम द्वारा प्रदत्त अधिकारों का उपभोग ऐसी शर्तों और औपचारिकताओं की, यदि कोई हों, पूर्ति के अध्यधीन होगा जैसी आदेश द्वारा विहित की जाएं;
(v) प्रतिलिप्यधिकार के स्वामिस्व के बारे में इस अधिनियम के उपबंधों को लागू करने में आदेश द्वारा ऐसे अपवाद और उपांतर किए जा सकेंगे जैसा उस विदेश की विधि को ध्यान में रखते हुए आवश्यक प्रतीत हों;
(vi) आदेश में यह उपबंध हो सकेगा कि यह अधिनियम या इसका कोई भाग आदेश के प्रारंभ से पूर्व बनाई गई कृतियों को लागू नहीं होगा या कि वह अधिनियम या उसका कोई भाग आदेश के प्रारंभ से पूर्व प्रथम बार प्रकाशित कृतियों को लागू नहीं होगा ।
(क) भारत के बाहर किसी राज्यक्षेत्र में, जिससे आदेश संबद्ध है प्रथम बार प्रकाशित कृतियों को उसी प्रकार लागू होंगे मानो वे भारत के अंदर प्रथम बार प्रकाशित की गई हों;
(ख) ऐसी अप्रकाशित कृतियों या उनके किसी वर्ग को, जिनके रचयिता कृति के बनाए जाने के समय किसी ऐसे विदेश के प्रजाजन या नागरिक थे जिससे आदेश संबद्ध है, उसी प्रकार लागू होंगे मानो वे रचयिता भारत के नागरिक रहे हों;
(ग) भारत के बाहर किसी राज्यक्षेत्र में, जिससे आदेश संबद्ध है, अधिवास की बाबत उसी प्रकार लागू होंगे मानो वह अधिवास भारत में हो;
(घ) किसी ऐसी कृति को, जिसका रचयिता उसके प्रथम बार प्रकाशन की तारीख को, या उस दशा में जिसमें रचयिता उस तारीख को मर चुका था, अपनी मृत्यु के समय ऐसे विदेश का प्रजाजन या नागरिक था, जिससे आदेश संबद्ध है, उसी प्रकार लागू होंगे मानो वह रचयिता उस तारीख को या उस समय भारत का नागरिक रहा हो,
और तब इस अध्याय के और आदेश के उपबंधों के अध्यधीन, यह अधिनियम तद्नुसार लागू होगा:
परंतु यह कि-
(i) किसी विदेश के संबंध में (जो ऐसे देश से भिन्न हो जिसके साथ भारत ने कोई संधि की है या जो प्रतिलिप्यधिकार से संबद्ध ऐसे अभिसमय का पक्षकार है जिसका भारत भी पक्षकार है) इस धारा के अधीन कोई आदेश करने से पूर्व केन्द्रीय सरकार अपना समाधान कर लेगी कि उस विदेश ने ऐसे उपबंध, यदि कोई हों, जैसे इस अधिनियम के उपबंधों के अधीन प्रतिलिप्यधिकार की हकदार कृतियों के उस देश में संरक्षण के लिए अपेक्षित करना केन्द्रीय सरकार की राय में समीचीन प्रतीत हो, कर लिए हैं या करने का वचनबंध किया है;
(ii) आदेश में यह उपबंध हो सकेगा कि इस अधिनियम के उपबंध या तो साधारणतया या कृतियों के ऐसे वर्गों या मामलों के ऐसे वर्गों के संबंध में जैसे आदेश में विनिर्दिष्ट किए जाएं, लागू होंगे;
(iii) आदेश में यह उपबंध हो सकेगा कि भारत में प्रतिलिप्यधिकार की अवधि उस देश की, जिससे आदेश संबद्ध विधि द्वारा प्रदत्त अवधि से अधिक नहीं होगी किन्तु प्रतिलिप्यधिकार की ऐसी कोई अवधि इस अधिनियम के अधीन उपबंधित प्रतिलिप्यधिकार की अवधि से अधिक नहीं होगी;
(iv) आदेश में यह उपबंध हो सकेगा कि इस अधिनियम द्वारा प्रदत्त अधिकारों का उपभोग ऐसी शर्तों और औपचारिकताओं की, यदि कोई हों, पूर्ति के अध्यधीन होगा जैसी आदेश द्वारा विहित की जाएं;
(v) प्रतिलिप्यधिकार के स्वामिस्व के बारे में इस अधिनियम के उपबंधों को लागू करने में आदेश द्वारा ऐसे अपवाद और उपांतर किए जा सकेंगे जैसा उस विदेश की विधि को ध्यान में रखते हुए आवश्यक प्रतीत हों;
(vi) आदेश में यह उपबंध हो सकेगा कि यह अधिनियम या इसका कोई भाग आदेश के प्रारंभ से पूर्व बनाई गई कृतियों को लागू नहीं होगा या कि वह अधिनियम या उसका कोई भाग आदेश के प्रारंभ से पूर्व प्रथम बार प्रकाशित कृतियों को लागू नहीं होगा ।
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