Copyright Act 53Aअध्याय XI · Infringement of Copyright
धारा 53A · मूल प्रतियों के पुनः विक्रय अंश का अधिकार
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) किसी रंगचित्र, मूर्ति या रेखाचित्र की मूल प्रति के अथवा किसी साहित्यिक या नाट्यकृति या संगीतात्मक कृति की मूल पांडुलिपि के दस हजार रुपए से अधिक कीमत पर पुनः विक्रय की दशा में, ऐसयी कृति का रचयिता, यदि वह धारा 17 के अधीन प्रतिलिप्यधिकार का प्रथम स्वामी था या उसके विधिक वारिस, ऐसी कृति में, प्रतिलिप्यधिकार के किसी समनुदेशन के होते हुए भी, इस धारा के उपबन्धों के अनुसार, ऐसी मूल प्रति या पांडुलिपि के पुनः विक्रय की कीमत में अंश प्राप्त करने के अधिकारी होंगे :
परन्तु ऐसा अधिकार, कृति में प्रतिलिप्यधिकार, की अवधि की समाप्ति पर अस्तित्व में नहीं रहेगा ।
(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट अंश ऐसा होगा जो प्रतिलिप्यधिकार बोर्ड नियत करे और इस निमित्त प्रतिलिप्यधिकार बोर्ड का विनिश्चय अन्तिम होगा:
परन्तु प्रतिलिप्यधिकार बोर्ड, कृति के भिन्न-भिन्न वर्गों के लिए भिन्न-भिन्न अंश नियत कर सकेगा:
परन्तु यह और कि किसी भी दशा में ऐसा अंश पुनः विक्रय की कीमत के दस प्रतिशत से अधिक नहीं होगा ।
(3) यदि इस धारा द्वारा प्रदत्त अधिकार के सम्बन्ध में कोई विवाद उत्पन्न होता है तो वह प्रतिलिप्यधिकार बोर्ड को निर्देशित किया जाएगा और जिसका विनिश्चय अन्तिम होगा ।
परन्तु ऐसा अधिकार, कृति में प्रतिलिप्यधिकार, की अवधि की समाप्ति पर अस्तित्व में नहीं रहेगा ।
(2) उपधारा (1) में निर्दिष्ट अंश ऐसा होगा जो प्रतिलिप्यधिकार बोर्ड नियत करे और इस निमित्त प्रतिलिप्यधिकार बोर्ड का विनिश्चय अन्तिम होगा:
परन्तु प्रतिलिप्यधिकार बोर्ड, कृति के भिन्न-भिन्न वर्गों के लिए भिन्न-भिन्न अंश नियत कर सकेगा:
परन्तु यह और कि किसी भी दशा में ऐसा अंश पुनः विक्रय की कीमत के दस प्रतिशत से अधिक नहीं होगा ।
(3) यदि इस धारा द्वारा प्रदत्त अधिकार के सम्बन्ध में कोई विवाद उत्पन्न होता है तो वह प्रतिलिप्यधिकार बोर्ड को निर्देशित किया जाएगा और जिसका विनिश्चय अन्तिम होगा ।
इस धारा पर आपका निजी नोट
यह नोट सिर्फ़ आप देख सकते हैं।
