Copyright Act 41अध्याय IX · International Copyright
धारा 41 · कतिपय अन्तरराष्ट्रीय संगठनों की कृतियों के बारे में उपबन्ध
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) जहां-
(क) कोई कृति किसी ऐसे संगठन के द्वारा जिसको यह धारा लागू होती है या उसके निर्देश या नियंत्रण के अधीन बनाई जाती है या प्रथम बार प्रकाशित की जाती है, और
(ख) उस कृति के, यथास्थिति, बनाए जाने या प्रथम बार प्रकाशन के समय भारत में कोई प्रतिलिप्यधिकार इस धारा से पृथक् रूप में नहीं होगा, और
(ग) या तो-
(i) कृति का यथापूर्वोक्त प्रकाशन रचयिता के साथ उस निमित्त किए गए किसी ऐसे करार के अनुसरण में किया जाता है, जो कृति में किसी प्रतिलिप्यधिकार को, यदि कोई हो, रचयिता के लिए आरक्षित नहीं करता है, या
(ii) धारा 17 के अधीन कृति में कोई प्रतिलिप्यधिकार उस संगठन को होगा,
वहां इस धारा के आधार पर उसे उस कृति में प्रतिलिप्यधिकार समस्त भारत में होगा ।
(2) किसी संगठन को जिसको यह धारा लागू होती है और जिससे संबद्ध समय पर निगमित निकाय का विधिक सामर्थ्य नहीं था, प्रतिलिप्यधिकार को धारण, व्यवहृत और प्रवर्तित करने के प्रयोजनों के लिए, तथा प्रतिलिप्यधिकार के संबंध में सब विधिक कार्यवाहियों की बाबत निगमित निकाय का विधिक सामर्थ्य होगा और सब संबद्ध समयों पर हुआ समझा जाएगा ।
(3) जिन संगठनों को यह धारा लागू होती है, वे संगठन हैं जिन्हें केन्द्रीय सरकार शासकीय राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा ऐसे संगठन घोषित करे जिनके एक या अधिक प्रभुत्व सम्पन्न राज्य या उनकी सरकारें सदस्य हैं और जिनके बारे में यह समीचीन है कि यह धारा लागू हो ।
(क) कोई कृति किसी ऐसे संगठन के द्वारा जिसको यह धारा लागू होती है या उसके निर्देश या नियंत्रण के अधीन बनाई जाती है या प्रथम बार प्रकाशित की जाती है, और
(ख) उस कृति के, यथास्थिति, बनाए जाने या प्रथम बार प्रकाशन के समय भारत में कोई प्रतिलिप्यधिकार इस धारा से पृथक् रूप में नहीं होगा, और
(ग) या तो-
(i) कृति का यथापूर्वोक्त प्रकाशन रचयिता के साथ उस निमित्त किए गए किसी ऐसे करार के अनुसरण में किया जाता है, जो कृति में किसी प्रतिलिप्यधिकार को, यदि कोई हो, रचयिता के लिए आरक्षित नहीं करता है, या
(ii) धारा 17 के अधीन कृति में कोई प्रतिलिप्यधिकार उस संगठन को होगा,
वहां इस धारा के आधार पर उसे उस कृति में प्रतिलिप्यधिकार समस्त भारत में होगा ।
(2) किसी संगठन को जिसको यह धारा लागू होती है और जिससे संबद्ध समय पर निगमित निकाय का विधिक सामर्थ्य नहीं था, प्रतिलिप्यधिकार को धारण, व्यवहृत और प्रवर्तित करने के प्रयोजनों के लिए, तथा प्रतिलिप्यधिकार के संबंध में सब विधिक कार्यवाहियों की बाबत निगमित निकाय का विधिक सामर्थ्य होगा और सब संबद्ध समयों पर हुआ समझा जाएगा ।
(3) जिन संगठनों को यह धारा लागू होती है, वे संगठन हैं जिन्हें केन्द्रीय सरकार शासकीय राजपत्र में प्रकाशित आदेश द्वारा ऐसे संगठन घोषित करे जिनके एक या अधिक प्रभुत्व सम्पन्न राज्य या उनकी सरकारें सदस्य हैं और जिनके बारे में यह समीचीन है कि यह धारा लागू हो ।
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