Copyright Act 31Bअध्याय VI · Licences
धारा 31B · निःशक्त व्यक्तियों के फायदे के लिए अनिवार्य अनुज्ञप्ति
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) किसी लाभ के आधार पर निःशक्त व्यक्तियों के फायदे के लिए या कारबार के लिए कार्यरत कोई व्यक्ति ऐसे प्ररूप और रीति में और ऐसी फीस के साथ, जो विहित की जाए, ऐसी किसी कृति को, जिसमें प्रतिलिप्यधिकार ऐसे व्यक्तियों के फायदे के लिए अस्तित्व में है प्रकाशित करने के लिए, उस मामले में, जिसको धारा 52 की उपधारा (1) का खंड (यख) लागू नहीं होता है अनिवार्य अनुज्ञप्ति के लिए प्रतिलिप्यधिकार बोर्ड को आवेदन कर सकेगा और प्रतिलिप्यधिकार बोर्ड ऐसे आवेदन का निपटारा यथासंभव शीघ्रता के साथ करेगा और उस आवेदन का निपटारा आवेदन की प्राप्ति की तारीख से दो मास की अवधि के भीतर करने का प्रयास किया जाएगा ।
(2) प्रतिलिप्यधिकार बोर्ड, उपधारा (1) के अधीन आवेदन की प्राप्ति पर, आवेदक के प्रत्यय पत्रों को सिद्ध करने और अपना यह समाधान करने के लिए कि आवेदन सद्भावपूर्वक किया गया है ऐसी जांच कर सकेगा या ऐसी जांच करने का निदेश दे सकेगा जो वह आवश्यक समझे ।
(3) यदि प्रतिलिप्यधिकार बोर्ड का, कृति में के अधिकारों के स्वामियों को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर देने के पश्चात् और ऐसी जांच करने के पश्चात् जो वह ठीक समझे, यह समाधान हो जाता है कि निःशक्त व्यक्तियों को कृति उपलब्ध कराने के लिए अनिवार्य अनुज्ञप्ति जारी किए जाने की जरूरत है, तो वह प्रतिलिप्यधिकार रजिस्ट्रार को आवेदक को उस कृति को प्रकाशित करने के लिए ऐसी अनुज्ञप्ति देने का निदेश दे सकेगा ।
(4) इस धारा के अधीन जारी प्रत्येक अनिवार्य अनुज्ञप्ति में प्रकाशन के साधनों और रूपविधान को, उस अवधि को, जिसके दौरान अनिवार्य अनुज्ञप्ति का प्रयोग किया जा सकेगा और प्रतियों के जारी किए जाने की दशा में, ऐसी प्रतियों की संख्या, जो जारी की जा सकेंगी, स्वामिस्व की दर सहित, विनिर्दिष्ट किया जाएगा:
परंतु जहां प्रतिलिप्यधिकार बोर्ड ने ऐसी अनिवार्य अनुज्ञप्ति जारी की है वहां वह आगे आवेदन किए जाने पर और अधिकारों के स्वामियों को युक्तियुक्त अवसर देने के पश्चात् ऐसी अनिवार्य अनुज्ञप्ति की अवधि बढ़ा सकेगा तथा और अधिक प्रतियों के, जो वह ठीक समझे, जारी किए जाने की अनुज्ञा दे सकेगा ।
(2) प्रतिलिप्यधिकार बोर्ड, उपधारा (1) के अधीन आवेदन की प्राप्ति पर, आवेदक के प्रत्यय पत्रों को सिद्ध करने और अपना यह समाधान करने के लिए कि आवेदन सद्भावपूर्वक किया गया है ऐसी जांच कर सकेगा या ऐसी जांच करने का निदेश दे सकेगा जो वह आवश्यक समझे ।
(3) यदि प्रतिलिप्यधिकार बोर्ड का, कृति में के अधिकारों के स्वामियों को सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर देने के पश्चात् और ऐसी जांच करने के पश्चात् जो वह ठीक समझे, यह समाधान हो जाता है कि निःशक्त व्यक्तियों को कृति उपलब्ध कराने के लिए अनिवार्य अनुज्ञप्ति जारी किए जाने की जरूरत है, तो वह प्रतिलिप्यधिकार रजिस्ट्रार को आवेदक को उस कृति को प्रकाशित करने के लिए ऐसी अनुज्ञप्ति देने का निदेश दे सकेगा ।
(4) इस धारा के अधीन जारी प्रत्येक अनिवार्य अनुज्ञप्ति में प्रकाशन के साधनों और रूपविधान को, उस अवधि को, जिसके दौरान अनिवार्य अनुज्ञप्ति का प्रयोग किया जा सकेगा और प्रतियों के जारी किए जाने की दशा में, ऐसी प्रतियों की संख्या, जो जारी की जा सकेंगी, स्वामिस्व की दर सहित, विनिर्दिष्ट किया जाएगा:
परंतु जहां प्रतिलिप्यधिकार बोर्ड ने ऐसी अनिवार्य अनुज्ञप्ति जारी की है वहां वह आगे आवेदन किए जाने पर और अधिकारों के स्वामियों को युक्तियुक्त अवसर देने के पश्चात् ऐसी अनिवार्य अनुज्ञप्ति की अवधि बढ़ा सकेगा तथा और अधिक प्रतियों के, जो वह ठीक समझे, जारी किए जाने की अनुज्ञा दे सकेगा ।
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