Copyright Act 33अध्याय VII · Copyright Societies
धारा 33 · प्रतिलिप्यधिकार सोसाइटी का रजिस्ट्रीकरण
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) कोई व्यक्ति या व्यक्ति-संगम, प्रतिलिप्यधिकार (संशोधन) अधिनियम, 1994 के प्रवृत्त होने के पश्चात् किसी ऐसी कृति की बाबत जिसमें प्रतिलिप्यधिकार अस्तित्व में है, या इस अधिनियम द्वारा प्रदत्त किन्हीं अन्य अधिकारों की बाबत अनुज्ञप्ति जारी करने या अनुदत्त करने का कोई कारबार, उपधारा (3) के अधीन अनुदत्त रजिस्ट्रीकरण के अधीन या उसके अनुसार ही प्रारंभ करेगा या चलाएगा, अन्यथा नहीं:
परन्तु प्रतिलिप्यधिकार का कोई स्वामी, अपनी व्यष्टिक हैसियत में, अपनी स्वयं की कृतियों के बारे में अनुज्ञप्तियां अनुदत्त करने का अधिकार, जो रजिस्ट्रीकृत प्रतिलिप्यधिकार सोसाइटी के सदस्य के रूप में उसकी बाध्यताओं से संगत हो, बनाए रखेगा:
परंतु यह और कि किसी चलचित्र फिल्म या ध्वन्यंकन में सम्मिलित साहित्यिक, नाट्य, संगीतात्मक और कलात्मक कृतियों की बाबत अनुज्ञप्ति जारी या अनुदत्त करने का कारबार केवल इस अधिनियम के अधीन सम्यक् रूप से रजिस्ट्रीकृत किसी प्रतिलिप्यधिकार सोसाइटी के माध्यम से चलाया जाएगा:
परंतु यह भी कि प्रतिलिप्यधिकार (संशोधन) अधिनियम, 1994 के प्रवृत्त होने के ठीक पूर्व की तारीख को धारा 33 के उपबंधों के अनुसार कार्य करने वाली प्रस्तुतीकरण अधिकार सोसाइटी के बारे में यह समझा जाएगा कि वह इस अध्याय के प्रयोजनों के लिए प्रतिलिप्यधिकार सोसाइटी है और ऐसी प्रत्येक सोसाइटी, प्रतिलिप्यधिकार (संशोधन) अधिनियम, 1994 के प्रारंभ की तारीख से एक वर्ष की अवधि के भीतर अपने को रजिस्ट्रीकृत कराएगी ।
(2) कोई व्यक्ति-संगम, जो ऐसी शर्तों को पूरा करता है, जो विहित की जाएं, उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट कारबार को करने की अनुज्ञा के लिए प्रतिलिप्यधिकार रजिस्ट्रार को आवेदन कर सकेगा जो उस आवेदन को केन्द्रीय सरकार को प्रस्तुत करेगा ।
(3) केन्द्रीय सरकार, इस अधिनियम के अधीन रचयिताओं और अधिकारों के अन्य स्वामियों के हितों का, जनसाधारण के और विशिष्टतया ऐसे व्यक्तियों के समूहों के, जिनके बारे में इस बात की बहुत संभावना है कि वे सुसंगत अधिकारों के बारे में अनुज्ञप्तियां चाहेंगे, हित और सुविधा का तथा आवेदकों की योग्यता और वृत्तिक सक्षमता का ध्यान रखते हुए, ऐसे व्यक्तियों के संगम को, ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए जो विहित की जाएं, प्रतिलिप्यधिकार सोसाइटी के रूप में रजिस्ट्रीकृत कर सकेगी:
परन्तु केन्द्रीय सरकार, साधारणतया, एक ही वर्ग की कृतियों की बाबत कारबार करने के लिए एक से अधिक प्रतिलिप्यधिकार सोसाइटी रजिस्ट्रीकृत नहीं करेगी ।
(3क) उपधारा (3) के अधीन किसी प्रतिलिप्यधिकार सोसाइटी को अनुदत्त किया गया रजिस्ट्रीकरण पांच वर्ष की अवधि के लिए होगा और उसका प्रत्येक पांच वर्ष की अवधि की समाप्ति के पूर्व, विहित प्ररूप में अनुरोध किए जाने पर, समय-समय पर नवीकरण किया जा सकेगा तथा केंद्रीय सरकार धारा 36 के अधीन प्रतिलिप्यधिकार सोसाइटी के कार्यकरण पर प्रतिलिप्यधिकार रजिस्ट्रार की रिपोर्ट पर विचार करने के पश्चात् रजिस्ट्रीकरण का नवीकरण कर सकेगी:
परंतु किसी प्रतिलिप्यधिकार सोसाइटी के रजिस्ट्रीकरण का नवीकरण प्रतिलिप्यधिकार सोसाइटी के सतत् सामूहिक नियंत्रण के अध्यधीन होगा जो कृतियों के रचयिताओं के साथ प्रतिलिप्यधिकार या स्वामिस्व प्राप्त करने के अधिकार के स्वामियों के रूप में उनकी हैसियत में बांटा जा रहा हो:
परंतु यह और कि प्रत्येक प्रतिलिप्यधिकार सोसाइटी, जो प्रतिलिप्यधिकार (संशोधन) अधिनियम, 2012 के प्रवृत्त होने के पूर्व रजिस्ट्रीकृत है, प्रतिलिप्यधिकार (संशोधन) अधिनियम, 2012 के प्रारंभ की तारीख से एक वर्ष की अवधि के भीतर इस अध्याय के अधीन अपने को रजिस्ट्रीकृत कराएगी ।
(4) यदि केन्द्रीय सरकार का यह समाधान हो जाता है कि किसी प्रतिलिप्यधिकार सोसाइटी का प्रबंध ऐसी रीति से किया जा रहा है जो संबंधित रचयिताओं और अधिकार के अन्य स्वामियों के हितों के प्रतिकूल है तो वह ऐसी जांच करने के पश्चात् जो विहित की जाए, ऐसी सोसाइटी के रजिस्ट्रीकरण को रद्द कर सकेगी ।
(5) यदि केन्द्रीय सरकार की यह राय है कि संबंधित 1रचयिताओं और अधिकार के अन्य स्वामियों के हित में अथवा धारा 33क, धारा 35 की उपधारा (3) और धारा 36 के अननुपालन या ऐसी लिखत में, जिसके द्वारा प्रतिलिप्यधिकार सोसाइटी केंद्रीय सरकार द्वारा स्थापित या निगमित और रजिस्ट्रीकृत की गई है, उसे पूर्व सूचना दिए बिना किए गए ऐसे किसी परिवर्तन के कारण ऐसा करना आवश्यक है तो वह, आदेश द्वारा, ऐसी सोसाइटी के रजिस्ट्रीकरण को, जांच के लंबित रहने के दौरान, एक वर्ष से अनधिक ऐसी अवधि के लिए जो उपधारा (4) के अधीन ऐसे आदेश में विनिर्दिष्ट की जाए, निलंबित कर सकेगी और वह सरकार, प्रतिलिप्यधिकार सोसाइटी के कृत्यों का निर्वहन करने के लिए एक प्रशासक की नियुक्ति करेगी ।
परन्तु प्रतिलिप्यधिकार का कोई स्वामी, अपनी व्यष्टिक हैसियत में, अपनी स्वयं की कृतियों के बारे में अनुज्ञप्तियां अनुदत्त करने का अधिकार, जो रजिस्ट्रीकृत प्रतिलिप्यधिकार सोसाइटी के सदस्य के रूप में उसकी बाध्यताओं से संगत हो, बनाए रखेगा:
परंतु यह और कि किसी चलचित्र फिल्म या ध्वन्यंकन में सम्मिलित साहित्यिक, नाट्य, संगीतात्मक और कलात्मक कृतियों की बाबत अनुज्ञप्ति जारी या अनुदत्त करने का कारबार केवल इस अधिनियम के अधीन सम्यक् रूप से रजिस्ट्रीकृत किसी प्रतिलिप्यधिकार सोसाइटी के माध्यम से चलाया जाएगा:
परंतु यह भी कि प्रतिलिप्यधिकार (संशोधन) अधिनियम, 1994 के प्रवृत्त होने के ठीक पूर्व की तारीख को धारा 33 के उपबंधों के अनुसार कार्य करने वाली प्रस्तुतीकरण अधिकार सोसाइटी के बारे में यह समझा जाएगा कि वह इस अध्याय के प्रयोजनों के लिए प्रतिलिप्यधिकार सोसाइटी है और ऐसी प्रत्येक सोसाइटी, प्रतिलिप्यधिकार (संशोधन) अधिनियम, 1994 के प्रारंभ की तारीख से एक वर्ष की अवधि के भीतर अपने को रजिस्ट्रीकृत कराएगी ।
(2) कोई व्यक्ति-संगम, जो ऐसी शर्तों को पूरा करता है, जो विहित की जाएं, उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट कारबार को करने की अनुज्ञा के लिए प्रतिलिप्यधिकार रजिस्ट्रार को आवेदन कर सकेगा जो उस आवेदन को केन्द्रीय सरकार को प्रस्तुत करेगा ।
(3) केन्द्रीय सरकार, इस अधिनियम के अधीन रचयिताओं और अधिकारों के अन्य स्वामियों के हितों का, जनसाधारण के और विशिष्टतया ऐसे व्यक्तियों के समूहों के, जिनके बारे में इस बात की बहुत संभावना है कि वे सुसंगत अधिकारों के बारे में अनुज्ञप्तियां चाहेंगे, हित और सुविधा का तथा आवेदकों की योग्यता और वृत्तिक सक्षमता का ध्यान रखते हुए, ऐसे व्यक्तियों के संगम को, ऐसी शर्तों के अधीन रहते हुए जो विहित की जाएं, प्रतिलिप्यधिकार सोसाइटी के रूप में रजिस्ट्रीकृत कर सकेगी:
परन्तु केन्द्रीय सरकार, साधारणतया, एक ही वर्ग की कृतियों की बाबत कारबार करने के लिए एक से अधिक प्रतिलिप्यधिकार सोसाइटी रजिस्ट्रीकृत नहीं करेगी ।
(3क) उपधारा (3) के अधीन किसी प्रतिलिप्यधिकार सोसाइटी को अनुदत्त किया गया रजिस्ट्रीकरण पांच वर्ष की अवधि के लिए होगा और उसका प्रत्येक पांच वर्ष की अवधि की समाप्ति के पूर्व, विहित प्ररूप में अनुरोध किए जाने पर, समय-समय पर नवीकरण किया जा सकेगा तथा केंद्रीय सरकार धारा 36 के अधीन प्रतिलिप्यधिकार सोसाइटी के कार्यकरण पर प्रतिलिप्यधिकार रजिस्ट्रार की रिपोर्ट पर विचार करने के पश्चात् रजिस्ट्रीकरण का नवीकरण कर सकेगी:
परंतु किसी प्रतिलिप्यधिकार सोसाइटी के रजिस्ट्रीकरण का नवीकरण प्रतिलिप्यधिकार सोसाइटी के सतत् सामूहिक नियंत्रण के अध्यधीन होगा जो कृतियों के रचयिताओं के साथ प्रतिलिप्यधिकार या स्वामिस्व प्राप्त करने के अधिकार के स्वामियों के रूप में उनकी हैसियत में बांटा जा रहा हो:
परंतु यह और कि प्रत्येक प्रतिलिप्यधिकार सोसाइटी, जो प्रतिलिप्यधिकार (संशोधन) अधिनियम, 2012 के प्रवृत्त होने के पूर्व रजिस्ट्रीकृत है, प्रतिलिप्यधिकार (संशोधन) अधिनियम, 2012 के प्रारंभ की तारीख से एक वर्ष की अवधि के भीतर इस अध्याय के अधीन अपने को रजिस्ट्रीकृत कराएगी ।
(4) यदि केन्द्रीय सरकार का यह समाधान हो जाता है कि किसी प्रतिलिप्यधिकार सोसाइटी का प्रबंध ऐसी रीति से किया जा रहा है जो संबंधित रचयिताओं और अधिकार के अन्य स्वामियों के हितों के प्रतिकूल है तो वह ऐसी जांच करने के पश्चात् जो विहित की जाए, ऐसी सोसाइटी के रजिस्ट्रीकरण को रद्द कर सकेगी ।
(5) यदि केन्द्रीय सरकार की यह राय है कि संबंधित 1रचयिताओं और अधिकार के अन्य स्वामियों के हित में अथवा धारा 33क, धारा 35 की उपधारा (3) और धारा 36 के अननुपालन या ऐसी लिखत में, जिसके द्वारा प्रतिलिप्यधिकार सोसाइटी केंद्रीय सरकार द्वारा स्थापित या निगमित और रजिस्ट्रीकृत की गई है, उसे पूर्व सूचना दिए बिना किए गए ऐसे किसी परिवर्तन के कारण ऐसा करना आवश्यक है तो वह, आदेश द्वारा, ऐसी सोसाइटी के रजिस्ट्रीकरण को, जांच के लंबित रहने के दौरान, एक वर्ष से अनधिक ऐसी अवधि के लिए जो उपधारा (4) के अधीन ऐसे आदेश में विनिर्दिष्ट की जाए, निलंबित कर सकेगी और वह सरकार, प्रतिलिप्यधिकार सोसाइटी के कृत्यों का निर्वहन करने के लिए एक प्रशासक की नियुक्ति करेगी ।
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