Wages Code 67अध्याय IX · Miscellaneous
धारा 67 · उपयुक्त सरकार को नियम बनाने का अधिकार है।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) उपयुक्त सरकार, पूर्व प्रकाशन की शर्त के अधीन रहते हुए, इस संहिता के प्रावधानों को लागू करने के लिए नियम बना सकती है।
(2) पूर्वोक्त शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, विशेष रूप से, ऐसे नियम निम्नलिखित सभी या किसी भी मामले के लिए प्रावधान कर सकते हैं, अर्थात्:--
(क) धारा 6 की उपधारा (4) के अधीन मजदूरी की गणना करने का तरीका;
(ख) धारा 6 की उपधारा (6) के खंड (ख) के अधीन श्रमिकों की कुछ श्रेणियों के लिए न्यूनतम मजदूरी दर के अतिरिक्त कार्य की कठिनाई को ध्यान में रखा जाएगा;
(ग) धारा 6 की उपधारा (6) के खंड (ग) के अधीन मानदंड;
(घ) वे मामले और परिस्थितियाँ जिनमें निर्धारित घंटों की संख्या से कम अवधि के लिए नियोजित कर्मचारी धारा 10 के अंतर्गत पूरे सामान्य कार्य दिवस के लिए मजदूरी प्राप्त करने का हकदार नहीं होगा;
(ई) धारा 13 की उपधारा (2) के अधीन कर्मचारियों के कुछ वर्गों के संबंध में लागू होने वाली सीमा और शर्तें;
(f) धारा 14 में निर्दिष्ट न्यूनतम मजदूरी दर निर्धारण के लिए लंबी मजदूरी अवधि;
(जी) धारा 18 की उपधारा (2) के खंड (एफ) के उपखंड (ii) के अधीन श्रम कल्याण के लिए गठित किसी निधि से लिए गए ऋणों की कटौती का तरीका;
(h) धारा 18 की उपधारा (4) के अधीन अतिरिक्त राशि की वसूली का तरीका;
(i) धारा 19 की उपधारा (1) के अधीन जुर्माना लगाने के लिए अनुमोदन प्रदान करने का प्राधिकार;
(j) धारा 19 की उपधारा (2) के तहत नोटिस में निर्दिष्ट किए जाने वाले कृत्यों और चूकों के प्रदर्शन का तरीका;
(k) धारा 19 की उपधारा (3) के अधीन जुर्माना लगाने की प्रक्रिया;
(एल) धारा 19 की उपधारा (8) के अधीन सभी जुर्माने और उनकी सभी वसूली को दर्ज करने के लिए रजिस्टर का प्रारूप;
(m) धारा 20 की उपधारा (2) के अधीन कर्तव्य से अनुपस्थिति के लिए कटौती करने की प्रक्रिया;
(n) धारा 21 की उपधारा (2) के अधीन क्षति या हानि के लिए कटौती करने की प्रक्रिया;
(ओ) धारा 21 की उपधारा (3) के अधीन सभी कटौतियों और उनकी सभी प्राप्तियों को दर्ज करने के लिए रजिस्टर का प्रारूप;
(पी) धारा 23 के खंड (बी) के अधीन रोजगार शुरू होने के बाद किसी कर्मचारी को दिए गए अग्रिम धन की वसूली के लिए शर्तें;
(q) धारा 23 के खंड (c) के अधीन पहले से अर्जित न किए गए कर्मचारी को अग्रिम वेतन की वसूली के लिए शर्तें;
(आर) धारा 24 के तहत ऋणों की वसूली के लिए कटौती और उस पर देय ब्याज की दर;
(एस) केंद्रीय सलाहकार बोर्ड और राज्य सलाहकार बोर्ड द्वारा धारा 42 की उपधारा (10) के अधीन गठित समितियों और उप-समितियों सहित प्रक्रिया को विनियमित करने का तरीका;
(टी) केंद्रीय सलाहकार बोर्ड, राज्य सलाहकार बोर्ड के सदस्यों का कार्यकाल, जिसमें धारा 42 की उपधारा (11) के तहत राज्य सलाहकार बोर्ड द्वारा गठित समितियों और उप-समितियों का कार्यकाल भी शामिल है;
(u) धारा 44 की उपधारा (1) के खंड (ख) के अधीन विभिन्न अवितरित देय राशियों को ऐसे प्राधिकारी के पास जमा करने का प्राधिकार और तरीका;
(v) धारा 45 की उपधारा (5) के अधीन अनेक कर्मचारियों के संबंध में एकल आवेदन का प्रपत्र;
(w) धारा 49 की उपधारा (1) के अधीन अपीलीय प्राधिकारी को अपील करने का प्रपत्र;
(x) धारा 50 की उपधारा (1) के अधीन नियोक्ता द्वारा रजिस्टर के रखरखाव का तरीका;
(y) धारा 50 की उपधारा (3) के अधीन वेतन पर्ची जारी करने का प्रपत्र एवं तरीका;
(ज़) धारा 51 की उपधारा (5) के अधीन निरीक्षक-सह-सुविधाकर्ता द्वारा प्रयोग की जाने वाली अन्य शक्तियाँ;
(ज़) धारा 56 की उपधारा (1) के अधीन जुर्माना लगाने का तरीका;
(ज़ब) धारा 56 की उपधारा (4) के तहत निर्दिष्ट राजपत्रित अधिकारी द्वारा अपराध के निपटारे का तरीका;
(सी) कोई अन्य मामला जिसे इस संहिता के प्रावधानों के तहत निर्धारित किया जाना आवश्यक है, या निर्धारित किया जा सकता है।
(3) केंद्र सरकार, पूर्व प्रकाशन की शर्त के अधीन रहते हुए, निम्नलिखित के लिए नियम बना सकती है,--
(क) धारा 9 की उपधारा (1) के अधीन न्यूनतम मजदूरी निर्धारित करने का तरीका;
(ख) धारा 9 की उपधारा (3) के अधीन राज्य सरकार से परामर्श करने का तरीका;
(ग) धारा 26 की उपधारा (7) के खंड (i) के अधीन छठे लेखा वर्ष के लिए समायोजन या समायोजन करने का तरीका;
(घ) धारा 26 की उपधारा (7) के खंड (ii) के अधीन सातवें लेखा वर्ष के लिए समायोजन या समायोजन करने का तरीका;
(ई) धारा 32 के खंड (क) और (ख) के अधीन सकल लाभ की गणना करने का तरीका;
(f) धारा 34 के खंड (c) के अधीन नियोक्ता के संबंध में ऐसी अतिरिक्त राशियाँ;
(जी) धारा 36 की उपधारा (1) के अधीन चौथे लेखा वर्ष तक और उसके अंतर्गत आगामी लेखा वर्ष में समायोजित किए जाने हेतु आगे ले जाए जाने वाले आबंटित अधिशेष के अतिरिक्त का उपयोग करने का तरीका;
(h) धारा 36 की उपधारा (2) के अधीन आगामी लेखा वर्ष में समायोजित करने के लिए आगे ले जाई जाने वाली न्यूनतम राशि या कमी का उपयोग करने का तरीका, और इसी प्रकार चौथे लेखा वर्ष तक;
(i) धारा 53 की उपधारा (1) के तहत जांच आयोजित करने का तरीका।
(4) इस धारा के अधीन केंद्र सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के तुरंत बाद, संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिनों की अवधि के लिए रखा जाएगा, जो एक सत्र या दो या दो से अधिक लगातार सत्रों में समाहित हो सकती है, और यदि उपर्युक्त सत्र या लगातार सत्रों के तुरंत बाद वाले सत्र की समाप्ति से पहले, दोनों सदन नियम में कोई संशोधन करने पर सहमत हों या दोनों सदन यह सहमति दें कि नियम नहीं बनाया जाना चाहिए, तो नियम इसके बाद केवल ऐसे संशोधित रूप में प्रभावी होगा या अप्रभावी होगा, जैसा भी मामला हो; यद्यपि, ऐसा कोई भी संशोधन या परिवर्तन उस नियम के अधीन पहले किए गए किसी भी कार्य की वैधता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेगा।
(5) इस धारा के अधीन राज्य सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के बाद यथाशीघ्र राज्य विधानमंडल के समक्ष रखा जाएगा।
(2) पूर्वोक्त शक्ति की व्यापकता पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, विशेष रूप से, ऐसे नियम निम्नलिखित सभी या किसी भी मामले के लिए प्रावधान कर सकते हैं, अर्थात्:--
(क) धारा 6 की उपधारा (4) के अधीन मजदूरी की गणना करने का तरीका;
(ख) धारा 6 की उपधारा (6) के खंड (ख) के अधीन श्रमिकों की कुछ श्रेणियों के लिए न्यूनतम मजदूरी दर के अतिरिक्त कार्य की कठिनाई को ध्यान में रखा जाएगा;
(ग) धारा 6 की उपधारा (6) के खंड (ग) के अधीन मानदंड;
(घ) वे मामले और परिस्थितियाँ जिनमें निर्धारित घंटों की संख्या से कम अवधि के लिए नियोजित कर्मचारी धारा 10 के अंतर्गत पूरे सामान्य कार्य दिवस के लिए मजदूरी प्राप्त करने का हकदार नहीं होगा;
(ई) धारा 13 की उपधारा (2) के अधीन कर्मचारियों के कुछ वर्गों के संबंध में लागू होने वाली सीमा और शर्तें;
(f) धारा 14 में निर्दिष्ट न्यूनतम मजदूरी दर निर्धारण के लिए लंबी मजदूरी अवधि;
(जी) धारा 18 की उपधारा (2) के खंड (एफ) के उपखंड (ii) के अधीन श्रम कल्याण के लिए गठित किसी निधि से लिए गए ऋणों की कटौती का तरीका;
(h) धारा 18 की उपधारा (4) के अधीन अतिरिक्त राशि की वसूली का तरीका;
(i) धारा 19 की उपधारा (1) के अधीन जुर्माना लगाने के लिए अनुमोदन प्रदान करने का प्राधिकार;
(j) धारा 19 की उपधारा (2) के तहत नोटिस में निर्दिष्ट किए जाने वाले कृत्यों और चूकों के प्रदर्शन का तरीका;
(k) धारा 19 की उपधारा (3) के अधीन जुर्माना लगाने की प्रक्रिया;
(एल) धारा 19 की उपधारा (8) के अधीन सभी जुर्माने और उनकी सभी वसूली को दर्ज करने के लिए रजिस्टर का प्रारूप;
(m) धारा 20 की उपधारा (2) के अधीन कर्तव्य से अनुपस्थिति के लिए कटौती करने की प्रक्रिया;
(n) धारा 21 की उपधारा (2) के अधीन क्षति या हानि के लिए कटौती करने की प्रक्रिया;
(ओ) धारा 21 की उपधारा (3) के अधीन सभी कटौतियों और उनकी सभी प्राप्तियों को दर्ज करने के लिए रजिस्टर का प्रारूप;
(पी) धारा 23 के खंड (बी) के अधीन रोजगार शुरू होने के बाद किसी कर्मचारी को दिए गए अग्रिम धन की वसूली के लिए शर्तें;
(q) धारा 23 के खंड (c) के अधीन पहले से अर्जित न किए गए कर्मचारी को अग्रिम वेतन की वसूली के लिए शर्तें;
(आर) धारा 24 के तहत ऋणों की वसूली के लिए कटौती और उस पर देय ब्याज की दर;
(एस) केंद्रीय सलाहकार बोर्ड और राज्य सलाहकार बोर्ड द्वारा धारा 42 की उपधारा (10) के अधीन गठित समितियों और उप-समितियों सहित प्रक्रिया को विनियमित करने का तरीका;
(टी) केंद्रीय सलाहकार बोर्ड, राज्य सलाहकार बोर्ड के सदस्यों का कार्यकाल, जिसमें धारा 42 की उपधारा (11) के तहत राज्य सलाहकार बोर्ड द्वारा गठित समितियों और उप-समितियों का कार्यकाल भी शामिल है;
(u) धारा 44 की उपधारा (1) के खंड (ख) के अधीन विभिन्न अवितरित देय राशियों को ऐसे प्राधिकारी के पास जमा करने का प्राधिकार और तरीका;
(v) धारा 45 की उपधारा (5) के अधीन अनेक कर्मचारियों के संबंध में एकल आवेदन का प्रपत्र;
(w) धारा 49 की उपधारा (1) के अधीन अपीलीय प्राधिकारी को अपील करने का प्रपत्र;
(x) धारा 50 की उपधारा (1) के अधीन नियोक्ता द्वारा रजिस्टर के रखरखाव का तरीका;
(y) धारा 50 की उपधारा (3) के अधीन वेतन पर्ची जारी करने का प्रपत्र एवं तरीका;
(ज़) धारा 51 की उपधारा (5) के अधीन निरीक्षक-सह-सुविधाकर्ता द्वारा प्रयोग की जाने वाली अन्य शक्तियाँ;
(ज़) धारा 56 की उपधारा (1) के अधीन जुर्माना लगाने का तरीका;
(ज़ब) धारा 56 की उपधारा (4) के तहत निर्दिष्ट राजपत्रित अधिकारी द्वारा अपराध के निपटारे का तरीका;
(सी) कोई अन्य मामला जिसे इस संहिता के प्रावधानों के तहत निर्धारित किया जाना आवश्यक है, या निर्धारित किया जा सकता है।
(3) केंद्र सरकार, पूर्व प्रकाशन की शर्त के अधीन रहते हुए, निम्नलिखित के लिए नियम बना सकती है,--
(क) धारा 9 की उपधारा (1) के अधीन न्यूनतम मजदूरी निर्धारित करने का तरीका;
(ख) धारा 9 की उपधारा (3) के अधीन राज्य सरकार से परामर्श करने का तरीका;
(ग) धारा 26 की उपधारा (7) के खंड (i) के अधीन छठे लेखा वर्ष के लिए समायोजन या समायोजन करने का तरीका;
(घ) धारा 26 की उपधारा (7) के खंड (ii) के अधीन सातवें लेखा वर्ष के लिए समायोजन या समायोजन करने का तरीका;
(ई) धारा 32 के खंड (क) और (ख) के अधीन सकल लाभ की गणना करने का तरीका;
(f) धारा 34 के खंड (c) के अधीन नियोक्ता के संबंध में ऐसी अतिरिक्त राशियाँ;
(जी) धारा 36 की उपधारा (1) के अधीन चौथे लेखा वर्ष तक और उसके अंतर्गत आगामी लेखा वर्ष में समायोजित किए जाने हेतु आगे ले जाए जाने वाले आबंटित अधिशेष के अतिरिक्त का उपयोग करने का तरीका;
(h) धारा 36 की उपधारा (2) के अधीन आगामी लेखा वर्ष में समायोजित करने के लिए आगे ले जाई जाने वाली न्यूनतम राशि या कमी का उपयोग करने का तरीका, और इसी प्रकार चौथे लेखा वर्ष तक;
(i) धारा 53 की उपधारा (1) के तहत जांच आयोजित करने का तरीका।
(4) इस धारा के अधीन केंद्र सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के तुरंत बाद, संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष, जब वह सत्र में हो, कुल तीस दिनों की अवधि के लिए रखा जाएगा, जो एक सत्र या दो या दो से अधिक लगातार सत्रों में समाहित हो सकती है, और यदि उपर्युक्त सत्र या लगातार सत्रों के तुरंत बाद वाले सत्र की समाप्ति से पहले, दोनों सदन नियम में कोई संशोधन करने पर सहमत हों या दोनों सदन यह सहमति दें कि नियम नहीं बनाया जाना चाहिए, तो नियम इसके बाद केवल ऐसे संशोधित रूप में प्रभावी होगा या अप्रभावी होगा, जैसा भी मामला हो; यद्यपि, ऐसा कोई भी संशोधन या परिवर्तन उस नियम के अधीन पहले किए गए किसी भी कार्य की वैधता पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेगा।
(5) इस धारा के अधीन राज्य सरकार द्वारा बनाया गया प्रत्येक नियम, बनाए जाने के बाद यथाशीघ्र राज्य विधानमंडल के समक्ष रखा जाएगा।
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