Wages Code 56अध्याय VIII · Offences and Penalties
धारा 56 · अपराधों की संरचना।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 (2 ऑफ 1974) में किसी बात के होते हुए भी, इस संहिता के अंतर्गत दंडनीय कोई भी अपराध, जो केवल कारावास या कारावास एवं जुर्माने से दंडनीय न हो, अभियुक्त व्यक्ति के आवेदन पर, किसी अभियोग के आरंभ से पहले या बाद में, राजपत्रित अधिकारी द्वारा, जैसा कि उपयुक्त सरकार अधिसूचना द्वारा निर्दिष्ट करे, ऐसे अपराध के लिए निर्धारित अधिकतम जुर्माने के पचास प्रतिशत के बराबर राशि पर, निर्धारित तरीके से समझौता किया जा सकता है।
(2) उपधारा (1) में निहित कोई भी बात किसी व्यक्ति द्वारा पांच वर्ष की अवधि के भीतर दूसरी बार या उसके बाद किए गए अपराध पर लागू नहीं होगी--
(i) पहले समझौता किए गए समान अपराध के कमीशन का;
(ii) उसी प्रकार का अपराध करने का जिसके लिए ऐसे व्यक्ति को पहले दोषी ठहराया गया था।
(3) उपधारा (1) में निर्दिष्ट प्रत्येक अधिकारी, उपयुक्त सरकार के निर्देश, नियंत्रण और पर्यवेक्षण के अधीन रहते हुए, अपराध का समझौता करने की शक्तियों का प्रयोग करेगा।
(4) किसी अपराध के समझौते के लिए प्रत्येक आवेदन ऐसे तरीके से किया जाएगा जैसा कि निर्धारित किया जा सकता है।
(5) जहाँ किसी अभियोग की शुरुआत से पहले किसी अपराध का समझौता हो जाता है, तो उस अपराध के संबंध में उस अपराधी के विरुद्ध कोई अभियोग नहीं चलाया जाएगा जिसके संबंध में अपराध का समझौता हुआ है।
(6) जहाँ किसी अभियोग के आरंभ के बाद किसी अपराध का समझौता किया जाता है, तो उपधारा (1) में निर्दिष्ट अधिकारी द्वारा लिखित रूप में उस न्यायालय को ऐसे समझौते की सूचना दी जाएगी जिसमें अभियोग लंबित है और अपराध के समझौते की सूचना दिए जाने पर, जिस व्यक्ति के विरुद्ध अपराध का समझौता किया गया है, उसे बरी कर दिया जाएगा।
(7) उपधारा (1) में निर्दिष्ट अधिकारी द्वारा दिए गए आदेश का पालन न करने वाला कोई भी व्यक्ति, ऐसे जुर्माने के अतिरिक्त, अपराध के लिए निर्धारित अधिकतम जुर्माने के बीस प्रतिशत के बराबर राशि से दंडित किया जाएगा।
(8) इस संहिता के प्रावधानों के तहत दंडनीय किसी भी अपराध का समझौता इस धारा के प्रावधानों के अनुसार और उसके अधीन ही किया जाएगा।
(2) उपधारा (1) में निहित कोई भी बात किसी व्यक्ति द्वारा पांच वर्ष की अवधि के भीतर दूसरी बार या उसके बाद किए गए अपराध पर लागू नहीं होगी--
(i) पहले समझौता किए गए समान अपराध के कमीशन का;
(ii) उसी प्रकार का अपराध करने का जिसके लिए ऐसे व्यक्ति को पहले दोषी ठहराया गया था।
(3) उपधारा (1) में निर्दिष्ट प्रत्येक अधिकारी, उपयुक्त सरकार के निर्देश, नियंत्रण और पर्यवेक्षण के अधीन रहते हुए, अपराध का समझौता करने की शक्तियों का प्रयोग करेगा।
(4) किसी अपराध के समझौते के लिए प्रत्येक आवेदन ऐसे तरीके से किया जाएगा जैसा कि निर्धारित किया जा सकता है।
(5) जहाँ किसी अभियोग की शुरुआत से पहले किसी अपराध का समझौता हो जाता है, तो उस अपराध के संबंध में उस अपराधी के विरुद्ध कोई अभियोग नहीं चलाया जाएगा जिसके संबंध में अपराध का समझौता हुआ है।
(6) जहाँ किसी अभियोग के आरंभ के बाद किसी अपराध का समझौता किया जाता है, तो उपधारा (1) में निर्दिष्ट अधिकारी द्वारा लिखित रूप में उस न्यायालय को ऐसे समझौते की सूचना दी जाएगी जिसमें अभियोग लंबित है और अपराध के समझौते की सूचना दिए जाने पर, जिस व्यक्ति के विरुद्ध अपराध का समझौता किया गया है, उसे बरी कर दिया जाएगा।
(7) उपधारा (1) में निर्दिष्ट अधिकारी द्वारा दिए गए आदेश का पालन न करने वाला कोई भी व्यक्ति, ऐसे जुर्माने के अतिरिक्त, अपराध के लिए निर्धारित अधिकतम जुर्माने के बीस प्रतिशत के बराबर राशि से दंडित किया जाएगा।
(8) इस संहिता के प्रावधानों के तहत दंडनीय किसी भी अपराध का समझौता इस धारा के प्रावधानों के अनुसार और उसके अधीन ही किया जाएगा।
इस धारा पर आपका निजी नोट
यह नोट सिर्फ़ आप देख सकते हैं।
