Wages Code 48अध्याय VI · Payment of Dues Claims and Audit
धारा 48 · निगम या कंपनी न होने वाले नियोक्ताओं के खातों का लेखापरीक्षा।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) जहां किसी नियोक्ता, जो निगम या कंपनी न हो, और उसके कर्मचारियों के बीच इस संहिता के तहत देय बोनस के संबंध में कोई दावा, विवाद या अपील धारा 47 की उपधारा (1) में निर्दिष्ट किसी प्राधिकरण, अपीलीय प्राधिकरण, न्यायाधिकरण या मध्यस्थ के समक्ष लंबित हो, और ऐसे नियोक्ता के खाते, जिनका लेखा-परीक्षा कंपनी अधिनियम, 2013 (18 ऑफ 2013) की धारा 141 के प्रावधानों के तहत कंपनियों के लेखा परीक्षक के रूप में कार्य करने के लिए विधिवत योग्य किसी लेखा परीक्षक द्वारा की गई हो, ऐसे प्राधिकरण, अपीलीय प्राधिकरण, न्यायाधिकरण या मध्यस्थ के समक्ष प्रस्तुत किए जाते हैं, तो धारा 47 के प्रावधान, जहां तक संभव हो, ऐसे लेखा-परीक्षित खातों पर लागू होंगे।
(2) जब उपधारा (1) में निर्दिष्ट प्राधिकारी, अपीलीय प्राधिकारी, न्यायाधिकरण या मध्यस्थ, जैसा भी मामला हो, यह पाता है कि ऐसे नियोक्ता के खातों का किसी लेखापरीक्षा किसी लेखापरीक्षक द्वारा नहीं की गई है और उसकी राय है कि उसे संदर्भित प्रश्न का निर्णय करने के लिए ऐसे नियोक्ता के खातों की लेखापरीक्षा आवश्यक है, तो ऐसा प्राधिकारी, अपीलीय प्राधिकारी, न्यायाधिकरण या मध्यस्थ, आदेश द्वारा नियोक्ता को निर्देश दे सकता है कि वह अपने खातों की लेखापरीक्षा ऐसे लेखापरीक्षक या लेखापरीक्षकों द्वारा, जैसा वह उचित समझे, ऐसे समय के भीतर या ऐसे अतिरिक्त समय के भीतर करवाए जैसा वह निर्देश में निर्दिष्ट करे और इसके बाद नियोक्ता ऐसे निर्देश का पालन करेगा।
(3) जहाँ कोई नियोक्ता उपधारा (2) के अधीन खातों का लेखापरीक्षा कराने में विफल रहता है, तो उपधारा (1) में निर्दिष्ट प्राधिकारी, अपीलीय प्राधिकारी, न्यायाधिकरण या मध्यस्थ, जैसा भी मामला हो, धारा 54 के प्रावधानों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे लेखापरीक्षक या लेखापरीक्षकों द्वारा खातों का लेखापरीक्षा करा सकता है, जैसा वह उचित समझे।
(4) जब उपधारा (2) या उपधारा (3) के अधीन खातों का लेखापरीक्षा की जाती है, तो धारा 47 के प्रावधान, जहाँ तक संभव हो, इस प्रकार लेखापरीक्षित खातों पर लागू होंगे।
(5) उपधारा (3) के अधीन किसी भी लेखापरीक्षा के व्यय, और उससे संबंधित व्यय, जिसमें लेखापरीक्षक या लेखापरीक्षकों का पारिश्रमिक भी शामिल है, उपधारा (1) में निर्दिष्ट प्राधिकारी, अपीलीय प्राधिकारी, न्यायाधिकरण या मध्यस्थ द्वारा निर्धारित किया जाएगा, जैसा भी मामला हो, और नियोक्ता द्वारा भुगतान किया जाएगा, और ऐसे भुगतान में चूक होने पर धारा 45 की उपधारा (3) में निर्दिष्ट प्राधिकारी द्वारा नियोक्ता से उस उपधारा में दिए गए तरीके से वसूली की जाएगी।
(2) जब उपधारा (1) में निर्दिष्ट प्राधिकारी, अपीलीय प्राधिकारी, न्यायाधिकरण या मध्यस्थ, जैसा भी मामला हो, यह पाता है कि ऐसे नियोक्ता के खातों का किसी लेखापरीक्षा किसी लेखापरीक्षक द्वारा नहीं की गई है और उसकी राय है कि उसे संदर्भित प्रश्न का निर्णय करने के लिए ऐसे नियोक्ता के खातों की लेखापरीक्षा आवश्यक है, तो ऐसा प्राधिकारी, अपीलीय प्राधिकारी, न्यायाधिकरण या मध्यस्थ, आदेश द्वारा नियोक्ता को निर्देश दे सकता है कि वह अपने खातों की लेखापरीक्षा ऐसे लेखापरीक्षक या लेखापरीक्षकों द्वारा, जैसा वह उचित समझे, ऐसे समय के भीतर या ऐसे अतिरिक्त समय के भीतर करवाए जैसा वह निर्देश में निर्दिष्ट करे और इसके बाद नियोक्ता ऐसे निर्देश का पालन करेगा।
(3) जहाँ कोई नियोक्ता उपधारा (2) के अधीन खातों का लेखापरीक्षा कराने में विफल रहता है, तो उपधारा (1) में निर्दिष्ट प्राधिकारी, अपीलीय प्राधिकारी, न्यायाधिकरण या मध्यस्थ, जैसा भी मामला हो, धारा 54 के प्रावधानों पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना, ऐसे लेखापरीक्षक या लेखापरीक्षकों द्वारा खातों का लेखापरीक्षा करा सकता है, जैसा वह उचित समझे।
(4) जब उपधारा (2) या उपधारा (3) के अधीन खातों का लेखापरीक्षा की जाती है, तो धारा 47 के प्रावधान, जहाँ तक संभव हो, इस प्रकार लेखापरीक्षित खातों पर लागू होंगे।
(5) उपधारा (3) के अधीन किसी भी लेखापरीक्षा के व्यय, और उससे संबंधित व्यय, जिसमें लेखापरीक्षक या लेखापरीक्षकों का पारिश्रमिक भी शामिल है, उपधारा (1) में निर्दिष्ट प्राधिकारी, अपीलीय प्राधिकारी, न्यायाधिकरण या मध्यस्थ द्वारा निर्धारित किया जाएगा, जैसा भी मामला हो, और नियोक्ता द्वारा भुगतान किया जाएगा, और ऐसे भुगतान में चूक होने पर धारा 45 की उपधारा (3) में निर्दिष्ट प्राधिकारी द्वारा नियोक्ता से उस उपधारा में दिए गए तरीके से वसूली की जाएगी।
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