Wages Code 47अध्याय VI · Payment of Dues Claims and Audit
धारा 47 · निगमों और कंपनियों के बैलेंस शीट और लाभ-हानि खाते की सटीकता के बारे में अनुमान।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
(1) जहां, समक्ष कार्यवाही के दौरान--
(क) धारा 45 के अधीन प्राधिकारी; या
(ख) धारा 49 के अधीन अपीलीय प्राधिकारी; या
(ग) न्यायाधिकरण; या
(घ) औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (14 ऑफ 1947) की धारा 2 के खंड (एए) में निर्दिष्ट मध्यस्थ।
धारा 45 और 46 में निर्दिष्ट प्रकृति के किसी विवाद के संबंध में या धारा 49 के तहत अपील के संबंध में, यदि किसी नियोक्ता, जो एक निगम या कंपनी (बैंकिंग कंपनी के अलावा) है, का बैलेंस शीट और लाभ-हानि खाता, जिसका भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक द्वारा या कंपनी अधिनियम, 2013 (18 ऑफ 2013) की धारा 141 के तहत कंपनियों के लेखा परीक्षकों के रूप में कार्य करने के लिए विधिवत योग्य लेखा परीक्षकों द्वारा विधिवत लेखापरीक्षित किया गया है, उसके समक्ष प्रस्तुत किया जाता है, तो उक्त प्राधिकारी, अपीलीय प्राधिकारी, न्यायाधिकरण या मध्यस्थ, जैसा भी मामला हो, ऐसे बैलेंस शीट और लाभ-हानि खाते में निहित विवरणों और कथनों को सटीक मान सकता है और निगम या कंपनी के लिए हलफनामा दाखिल करके या किसी अन्य माध्यम से ऐसे विवरणों और कथनों की सटीकता को साबित करना आवश्यक नहीं होगा।
बशर्ते कि यदि उक्त प्राधिकारी, अपीलीय प्राधिकारी, न्यायाधिकरण या मध्यस्थ, जैसा भी मामला हो, संतुष्ट हो कि निगम या कंपनी के बैलेंस शीट या लाभ-हानि खाते में निहित विवरण और जानकारी सटीक नहीं हैं, तो वह ऐसे विवरण और जानकारी की सटीकता का पता लगाने के लिए आवश्यक समझे जाने वाले कदम उठा सकता है।
(2) जब उपधारा (1) में निर्दिष्ट प्राधिकारी, अपीलीय प्राधिकारी, न्यायाधिकरण या मध्यस्थ को, विवाद में पक्षकार ट्रेड यूनियन द्वारा, या अपील में पक्षकार कर्मचारियों द्वारा, और जहां ट्रेड यूनियन न हो, विवाद में पक्षकार कर्मचारियों द्वारा, या अपील में पक्षकार कर्मचारियों द्वारा, बैलेंस शीट या लाभ-हानि खाते में किसी मद से संबंधित स्पष्टीकरण की मांग करते हुए आवेदन किया जाता है, तो ऐसा प्राधिकारी, अपीलीय प्राधिकारी, न्यायाधिकरण या मध्यस्थ, यह संतुष्ट होने के बाद कि ऐसा स्पष्टीकरण आवश्यक है, आदेश द्वारा निगम या कंपनी को निर्देश दे सकता है कि वह ट्रेड यूनियन या कर्मचारियों को निर्देश में निर्दिष्ट समय के भीतर ऐसा स्पष्टीकरण प्रदान करे, और निगम या कंपनी ऐसे निर्देश का पालन करेगी।
(क) धारा 45 के अधीन प्राधिकारी; या
(ख) धारा 49 के अधीन अपीलीय प्राधिकारी; या
(ग) न्यायाधिकरण; या
(घ) औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (14 ऑफ 1947) की धारा 2 के खंड (एए) में निर्दिष्ट मध्यस्थ।
धारा 45 और 46 में निर्दिष्ट प्रकृति के किसी विवाद के संबंध में या धारा 49 के तहत अपील के संबंध में, यदि किसी नियोक्ता, जो एक निगम या कंपनी (बैंकिंग कंपनी के अलावा) है, का बैलेंस शीट और लाभ-हानि खाता, जिसका भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक द्वारा या कंपनी अधिनियम, 2013 (18 ऑफ 2013) की धारा 141 के तहत कंपनियों के लेखा परीक्षकों के रूप में कार्य करने के लिए विधिवत योग्य लेखा परीक्षकों द्वारा विधिवत लेखापरीक्षित किया गया है, उसके समक्ष प्रस्तुत किया जाता है, तो उक्त प्राधिकारी, अपीलीय प्राधिकारी, न्यायाधिकरण या मध्यस्थ, जैसा भी मामला हो, ऐसे बैलेंस शीट और लाभ-हानि खाते में निहित विवरणों और कथनों को सटीक मान सकता है और निगम या कंपनी के लिए हलफनामा दाखिल करके या किसी अन्य माध्यम से ऐसे विवरणों और कथनों की सटीकता को साबित करना आवश्यक नहीं होगा।
बशर्ते कि यदि उक्त प्राधिकारी, अपीलीय प्राधिकारी, न्यायाधिकरण या मध्यस्थ, जैसा भी मामला हो, संतुष्ट हो कि निगम या कंपनी के बैलेंस शीट या लाभ-हानि खाते में निहित विवरण और जानकारी सटीक नहीं हैं, तो वह ऐसे विवरण और जानकारी की सटीकता का पता लगाने के लिए आवश्यक समझे जाने वाले कदम उठा सकता है।
(2) जब उपधारा (1) में निर्दिष्ट प्राधिकारी, अपीलीय प्राधिकारी, न्यायाधिकरण या मध्यस्थ को, विवाद में पक्षकार ट्रेड यूनियन द्वारा, या अपील में पक्षकार कर्मचारियों द्वारा, और जहां ट्रेड यूनियन न हो, विवाद में पक्षकार कर्मचारियों द्वारा, या अपील में पक्षकार कर्मचारियों द्वारा, बैलेंस शीट या लाभ-हानि खाते में किसी मद से संबंधित स्पष्टीकरण की मांग करते हुए आवेदन किया जाता है, तो ऐसा प्राधिकारी, अपीलीय प्राधिकारी, न्यायाधिकरण या मध्यस्थ, यह संतुष्ट होने के बाद कि ऐसा स्पष्टीकरण आवश्यक है, आदेश द्वारा निगम या कंपनी को निर्देश दे सकता है कि वह ट्रेड यूनियन या कर्मचारियों को निर्देश में निर्दिष्ट समय के भीतर ऐसा स्पष्टीकरण प्रदान करे, और निगम या कंपनी ऐसे निर्देश का पालन करेगी।
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