Wages Code 2अध्याय I · Preliminary
धारा 2 · परिभाषाएँ।
अक्षर आकार — स्तर 1, कुल 4 में से
इस संहिता में, जब तक संदर्भ अन्यथा अपेक्षित न हो,--
(क) "लेखा वर्ष" से तात्पर्य 1 अप्रैल से शुरू होने वाले वर्ष से है;
(ख) "सलाहकार बोर्ड" से तात्पर्य केंद्रीय सलाहकार बोर्ड या, जैसा भी मामला हो, धारा 42 के अधीन गठित राज्य सलाहकार बोर्ड से है;
(ग) "कृषि आय कर कानून" से तात्पर्य कृषि आय पर कर लगाने से संबंधित वर्तमान में लागू किसी भी कानून से है;
(घ) "उपयुक्त सरकार" से तात्पर्य है, --
(i) केंद्र सरकार द्वारा या उसके अधिकार के अधीन संचालित किसी प्रतिष्ठान या रेलवे, खान, तेल क्षेत्र, प्रमुख बंदरगाह, हवाई परिवहन सेवा, दूरसंचार, बैंकिंग और बीमा कंपनी या किसी केंद्रीय अधिनियम द्वारा स्थापित निगम या अन्य प्राधिकरण या केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम या केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों द्वारा स्थापित सहायक कंपनियों या केंद्र सरकार के स्वामित्व या नियंत्रण वाले स्वायत्त निकायों के संबंध में, जिसमें ऐसे प्रतिष्ठान, निगम या अन्य प्राधिकरण, केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, सहायक कंपनियों या स्वायत्त निकायों के प्रयोजनों के लिए ठेकेदारों के प्रतिष्ठान शामिल हैं, जैसा भी मामला हो, केंद्र सरकार;
(ii) किसी अन्य प्रतिष्ठान के संबंध में, राज्य सरकार;
(ई) "कंपनी" से तात्पर्य कंपनी अधिनियम, 2013 (18 ऑफ 2013) की धारा 2 के खंड ( 20 ) में परिभाषित कंपनी से है;
(f) किसी प्रतिष्ठान के संबंध में "ठेकेदार" से तात्पर्य ऐसे व्यक्ति से है, जो--
(i) संविदा श्रम के माध्यम से प्रतिष्ठान को माल या निर्मित वस्तुओं की मात्र आपूर्ति के अलावा, प्रतिष्ठान के लिए कोई निश्चित परिणाम उत्पन्न करने का कार्य करता है; या
(ii) प्रतिष्ठान के किसी भी कार्य के लिए मात्र मानव संसाधन के रूप में संविदा श्रम की आपूर्ति करता है और इसमें उप-ठेकेदार शामिल है;
(g) "अनुबंध श्रमिक" से तात्पर्य ऐसे श्रमिक से है जिसे किसी प्रतिष्ठान के कार्य में या उससे संबंधित कार्य में नियोजित माना जाएगा, जब उसे मुख्य नियोक्ता की जानकारी के साथ या उसके बिना किसी ठेकेदार द्वारा ऐसे कार्य में या उससे संबंधित कार्य में नियुक्त किया जाता है, और इसमें अंतर-राज्यीय प्रवासी श्रमिक शामिल हैं, लेकिन इसमें ऐसे श्रमिक (अंशकालिक कर्मचारी के अलावा) शामिल नहीं हैं जो--
(i) ठेकेदार द्वारा उसके प्रतिष्ठान की किसी गतिविधि के लिए नियमित रूप से नियोजित है और उसका रोजगार रोजगार की शर्तों के पारस्परिक रूप से स्वीकृत मानकों (स्थायी आधार पर नियुक्ति सहित) द्वारा शासित है, और
(ii) ऐसे रोजगार में समय-समय पर लागू कानून के अनुसार वेतन में आवधिक वेतनवृद्धि, सामाजिक सुरक्षा कवरेज और अन्य कल्याणकारी लाभ प्राप्त करता है;
(h) "सहकारी समिति" से तात्पर्य सहकारी समिति अधिनियम, 1912 (2 ऑफ 1912) या किसी अन्य कानून के तहत पंजीकृत या पंजीकृत मानी जाने वाली किसी भी राज्य में सहकारी समितियों से संबंधित किसी भी समय लागू कानून के तहत पंजीकृत समिति से है;
(i) "निगम" से तात्पर्य किसी केंद्रीय अधिनियम या राज्य अधिनियम द्वारा स्थापित किसी निगमित निकाय से है, लेकिन इसमें कंपनी या सहकारी समिति शामिल नहीं है;
(j) "प्रत्यक्ष कर" से तात्पर्य है--
(i) के अंतर्गत प्रभार्य कोई कर--
(ए) आयकर अधिनियम, 1961 (1961 का 43);
(बी) कंपनी (लाभ) अतिरेक अधिनियम, 1964 (1964 का 7);
(सी) कृषि आय कर कानून; और
(ii) कोई अन्य कर जिसे, उसकी प्रकृति या प्रभाव को ध्यान में रखते हुए, केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचना द्वारा इस संहिता के प्रयोजनों के लिए प्रत्यक्ष कर घोषित किया जा सकता है;
(k) "कर्मचारी" से तात्पर्य किसी प्रतिष्ठान द्वारा वेतन पर नियोजित किसी भी कुशल, अर्ध-कुशल या अकुशल, शारीरिक, परिचालन, पर्यवेक्षी, प्रबंधकीय, प्रशासनिक, तकनीकी या लिपिकीय कार्य को वेतन या पुरस्कार के लिए करने वाले किसी भी व्यक्ति (1961 के शिक्षुता अधिनियम, 1961 (52 ऑफ 1961) के अधीन नियोजित शिक्षु के अलावा) से है, चाहे रोजगार की शर्तें स्पष्ट हों या निहित, और इसमें उपयुक्त सरकार द्वारा कर्मचारी घोषित किया गया व्यक्ति भी शामिल है, लेकिन इसमें संघ के सशस्त्र बलों का कोई भी सदस्य शामिल नहीं है;
(l) "नियोक्ता" से तात्पर्य ऐसे व्यक्ति से है जो प्रत्यक्ष रूप से या किसी अन्य व्यक्ति के माध्यम से, या अपनी ओर से या किसी अन्य व्यक्ति की ओर से, अपने प्रतिष्ठान में एक या अधिक कर्मचारियों को नियोजित करता है, और जहाँ प्रतिष्ठान केंद्र सरकार या राज्य सरकार के किसी विभाग द्वारा संचालित होता है, वहाँ ऐसे विभाग के प्रमुख द्वारा इस संबंध में निर्दिष्ट प्राधिकारी, या जहाँ कोई प्राधिकारी निर्दिष्ट नहीं है, वहाँ विभाग का प्रमुख, और स्थानीय प्राधिकारी द्वारा संचालित प्रतिष्ठान के संबंध में, उस प्राधिकारी का मुख्य कार्यकारी अधिकारी, और इसमें शामिल हैं,--
(i) किसी ऐसे प्रतिष्ठान के संबंध में जो कारखाना है, कारखाने का अधिभोगी जैसा कि कारखाना अधिनियम, 1948 (63 ऑफ 1948) की धारा 2 के खंड ( n ) में परिभाषित है, और जहां किसी व्यक्ति को उक्त अधिनियम की धारा 7 की उपधारा ( 1 ) के खंड ( f ) के तहत कारखाने का प्रबंधक नामित किया गया है, तो वह नामित व्यक्ति;
(ii) किसी अन्य प्रतिष्ठान के संबंध में, वह व्यक्ति या प्राधिकरण जिसका प्रतिष्ठान के मामलों पर अंतिम नियंत्रण है और जहां उक्त मामले किसी प्रबंधक या प्रबंध निदेशक को सौंपे गए हैं, तो ऐसा प्रबंधक या प्रबंध निदेशक;
(iii) ठेकेदार; और
(iv) मृतक नियोक्ता का कानूनी प्रतिनिधि;
(m) "प्रतिष्ठान" से तात्पर्य किसी ऐसे स्थान से है जहाँ कोई उद्योग, व्यापार, व्यवसाय, विनिर्माण या पेशा चलाया जाता है और इसमें सरकारी प्रतिष्ठान भी शामिल हैं;
(n) "कारखाना" से तात्पर्य कारखाने अधिनियम, 1948 (1948 का 63) की धारा 2 के खंड ( m ) में परिभाषित कारखाने से है;
(ओ) "सरकारी प्रतिष्ठान" से तात्पर्य सरकार या स्थानीय प्राधिकरण के किसी कार्यालय या विभाग से है;
(पी) "आयकर अधिनियम" से तात्पर्य आयकर अधिनियम, 1961 (1961 का 43) से है;
(q) "औद्योगिक विवाद" से तात्पर्य है,--
(i) नियोक्ताओं और नियोक्ताओं के बीच, या नियोक्ताओं और श्रमिकों के बीच, या श्रमिकों और श्रमिकों के बीच कोई विवाद या मतभेद जो किसी व्यक्ति के रोजगार या गैर-रोजगार, या रोजगार की शर्तों, या श्रम की स्थितियों से संबंधित हो; और
(ii) किसी व्यक्तिगत श्रमिक और नियोक्ता के बीच किसी श्रमिक की बर्खास्तगी, छंटनी या सेवा समाप्ति से संबंधित या उससे उत्पन्न कोई विवाद या मतभेद;
(आर) "निरीक्षक-सह-सुविधाकर्ता" से तात्पर्य धारा 51 की उपधारा ( 1 ) के अधीन उपयुक्त सरकार द्वारा नियुक्त व्यक्ति से है;
(एस) "न्यूनतम मजदूरी" से तात्पर्य धारा 6 के अधीन निर्धारित मजदूरी से है;
(टी) "अधिसूचना" से तात्पर्य भारत के राजपत्र या किसी राज्य के आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना से है, जैसा भी मामला हो, और "अधिसूचित करना" शब्द को उसके व्याकरणिक रूपों और संबंधित अभिव्यक्तियों के साथ तदनुसार समझा जाएगा;
(u) "निर्धारित" से तात्पर्य उपयुक्त सरकार द्वारा बनाए गए नियमों द्वारा निर्धारित से है;
(v) "समान कार्य या समान प्रकृति का कार्य" से तात्पर्य ऐसे कार्य से है जिसके संबंध में आवश्यक कौशल, प्रयास, अनुभव और जिम्मेदारी समान हो, जब कर्मचारियों द्वारा समान कार्य परिस्थितियों में किया जाता है और किसी भी लिंग के कर्मचारियों के लिए आवश्यक कौशल, प्रयास, अनुभव और जिम्मेदारी के बीच यदि कोई अंतर है, तो रोजगार की शर्तों और स्थितियों के संबंध में व्यावहारिक महत्व का नहीं है;
(w) "राज्य" में केंद्र शासित प्रदेश शामिल है;
(x) "ट्रिब्यूनल" का वही अर्थ होगा जो औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (14 ऑफ 1947) की धारा 2 के खंड ( आर ) में दिया गया है;
(y) "मजदूरी" से तात्पर्य वेतन, भत्ते या अन्य किसी रूप में दिए जाने वाले सभी पारिश्रमिक से है, जो धन के रूप में व्यक्त किया गया हो या इस प्रकार व्यक्त किया जा सकता हो, और जो (2005 का 42), यदि रोजगार की शर्तें, व्यक्त या निहित, पूरी की जातीं, तो किसी नियोजित व्यक्ति को उसके रोजगार या ऐसे रोजगार में किए गए कार्य के संबंध में देय होता, और इसमें शामिल है, --
(i) मूल वेतन;
(ii) महंगाई भत्ता; और
(iii) यदि कोई हो तो प्रतिधारण भत्ता,
लेकिन इसमें शामिल नहीं है--
(क) किसी भी कानून के तहत देय कोई बोनस, जो रोजगार की शर्तों के तहत देय पारिश्रमिक का हिस्सा नहीं है;
(ख) किसी आवास का मूल्य, या प्रकाश, पानी, चिकित्सा सेवा या अन्य सुविधा की आपूर्ति का मूल्य, या किसी ऐसी सेवा का मूल्य जिसे उपयुक्त सरकार के सामान्य या विशेष आदेश द्वारा मजदूरी की गणना से बाहर रखा गया हो;
(ग) नियोक्ता द्वारा किसी पेंशन या भविष्य निधि में भुगतान किया गया कोई अंशदान और उस पर अर्जित ब्याज;
(घ) कोई परिवहन भत्ता या किसी यात्रा रियायत का मूल्य;
(ई) नियोजित व्यक्ति को उसके रोजगार की प्रकृति के कारण उस पर लगने वाले विशेष खर्चों को पूरा करने के लिए भुगतान की गई कोई भी राशि;
(f) मकान किराया भत्ता;
(जी) पक्षों के बीच किसी पुरस्कार या समझौते या न्यायालय या न्यायाधिकरण के आदेश के तहत देय पारिश्रमिक;
(h) कोई भी ओवरटाइम भत्ता;
(i) कर्मचारी को देय कोई कमीशन;
(j) रोजगार की समाप्ति पर देय कोई भी ग्रेच्युटी;
(k) कर्मचारी को देय कोई छंटनी मुआवजा या अन्य सेवानिवृत्ति लाभ या रोजगार की समाप्ति पर उसे किया गया कोई अनुग्रह भुगतान:
इस खंड के अंतर्गत मजदूरी की गणना करते समय, यदि नियोक्ता द्वारा कर्मचारी को खंड ( क ) से ( i ) के अंतर्गत किए गए भुगतान, इस खंड के अंतर्गत परिकलित कुल पारिश्रमिक के आधे या केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित किसी अन्य प्रतिशत से अधिक हो, तो ऐसे आधे या अधिसूचित प्रतिशत से अधिक की राशि को पारिश्रमिक माना जाएगा और तदनुसार इस खंड के अंतर्गत मजदूरी में जोड़ दिया जाएगा।
इसके अलावा, सभी लिंगों को समान वेतन देने के उद्देश्य से और वेतन भुगतान के उद्देश्य से, खंड ( घ ), ( च ), ( छ ) और ( ह ) में निर्दिष्ट पारिश्रमिकों को वेतन की गणना के लिए लिया जाएगा।
स्पष्टीकरण .--जहां किसी कर्मचारी को उसके नियोक्ता द्वारा देय वेतन के पूर्ण या आंशिक भाग के बदले में कोई वस्तुगत पारिश्रमिक दिया जाता है, तो ऐसे वस्तुगत पारिश्रमिक का वह मूल्य जो उसे देय कुल वेतन के पंद्रह प्रतिशत से अधिक नहीं है, उस कर्मचारी के वेतन का हिस्सा माना जाएगा;
(z) "श्रमिक" से तात्पर्य किसी भी उद्योग में किसी भी प्रकार का शारीरिक, अकुशल, कुशल, तकनीकी, परिचालन, लिपिकीय या पर्यवेक्षी कार्य करने के लिए नियोजित किसी भी व्यक्ति (शिक्षु अधिनियम, 1961 (52 ऑफ 1961) की धारा 2 के खंड (aa) के अधीन परिभाषित प्रशिक्षु को छोड़कर) से है, चाहे रोजगार की शर्तें स्पष्ट हों या निहित, और इसमें शामिल हैं--
(i) कार्यरत पत्रकार, जैसा कि कार्यरत पत्रकार एवं अन्य समाचार पत्र कर्मचारी (सेवा की शर्तें) एवं विविध प्रावधान अधिनियम, 1955 (45 ऑफ 1955) की धारा 2 के खंड ( एफ ) में परिभाषित है; और
(ii) विक्रय संवर्धन कर्मचारी (सेवा शर्तें) अधिनियम, 1976 (11 ऑफ 1976) की धारा 2 के खंड ( घ ) में परिभाषित विक्रय संवर्धन कर्मचारियों में, और औद्योगिक विवाद से संबंधित इस संहिता के अंतर्गत किसी भी कार्यवाही के प्रयोजनों के लिए, ऐसे किसी भी व्यक्ति को शामिल किया जाएगा जिसे उस विवाद के संबंध में, या उसके परिणामस्वरूप, बर्खास्त, पदमुक्त या छंटनी की गई हो, या जिसकी बर्खास्तगी, पदमुक्ति या छंटनी के कारण वह विवाद उत्पन्न हुआ हो।
लेकिन इसमें ऐसा कोई व्यक्ति शामिल नहीं है--
(क) जो वायु सेना अधिनियम, 1950 (1950 का 45), या सेना अधिनियम, 1950 (1950 का 46), या नौसेना अधिनियम, 1957 (1957 का 62) के अधीन है; या
(ख) जो पुलिस सेवा में कार्यरत हो या किसी कारागार में अधिकारी या अन्य कर्मचारी के रूप में कार्यरत हो; या
(ग) जो मुख्य रूप से प्रबंधकीय या प्रशासनिक क्षमता में कार्यरत हो; या
(घ) जो पर्यवेक्षी क्षमता में कार्यरत हो और पंद्रह हजार रुपये प्रति माह से अधिक वेतन या केंद्र सरकार द्वारा समय-समय पर अधिसूचित राशि प्राप्त करता हो।
(क) "लेखा वर्ष" से तात्पर्य 1 अप्रैल से शुरू होने वाले वर्ष से है;
(ख) "सलाहकार बोर्ड" से तात्पर्य केंद्रीय सलाहकार बोर्ड या, जैसा भी मामला हो, धारा 42 के अधीन गठित राज्य सलाहकार बोर्ड से है;
(ग) "कृषि आय कर कानून" से तात्पर्य कृषि आय पर कर लगाने से संबंधित वर्तमान में लागू किसी भी कानून से है;
(घ) "उपयुक्त सरकार" से तात्पर्य है, --
(i) केंद्र सरकार द्वारा या उसके अधिकार के अधीन संचालित किसी प्रतिष्ठान या रेलवे, खान, तेल क्षेत्र, प्रमुख बंदरगाह, हवाई परिवहन सेवा, दूरसंचार, बैंकिंग और बीमा कंपनी या किसी केंद्रीय अधिनियम द्वारा स्थापित निगम या अन्य प्राधिकरण या केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम या केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों द्वारा स्थापित सहायक कंपनियों या केंद्र सरकार के स्वामित्व या नियंत्रण वाले स्वायत्त निकायों के संबंध में, जिसमें ऐसे प्रतिष्ठान, निगम या अन्य प्राधिकरण, केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, सहायक कंपनियों या स्वायत्त निकायों के प्रयोजनों के लिए ठेकेदारों के प्रतिष्ठान शामिल हैं, जैसा भी मामला हो, केंद्र सरकार;
(ii) किसी अन्य प्रतिष्ठान के संबंध में, राज्य सरकार;
(ई) "कंपनी" से तात्पर्य कंपनी अधिनियम, 2013 (18 ऑफ 2013) की धारा 2 के खंड ( 20 ) में परिभाषित कंपनी से है;
(f) किसी प्रतिष्ठान के संबंध में "ठेकेदार" से तात्पर्य ऐसे व्यक्ति से है, जो--
(i) संविदा श्रम के माध्यम से प्रतिष्ठान को माल या निर्मित वस्तुओं की मात्र आपूर्ति के अलावा, प्रतिष्ठान के लिए कोई निश्चित परिणाम उत्पन्न करने का कार्य करता है; या
(ii) प्रतिष्ठान के किसी भी कार्य के लिए मात्र मानव संसाधन के रूप में संविदा श्रम की आपूर्ति करता है और इसमें उप-ठेकेदार शामिल है;
(g) "अनुबंध श्रमिक" से तात्पर्य ऐसे श्रमिक से है जिसे किसी प्रतिष्ठान के कार्य में या उससे संबंधित कार्य में नियोजित माना जाएगा, जब उसे मुख्य नियोक्ता की जानकारी के साथ या उसके बिना किसी ठेकेदार द्वारा ऐसे कार्य में या उससे संबंधित कार्य में नियुक्त किया जाता है, और इसमें अंतर-राज्यीय प्रवासी श्रमिक शामिल हैं, लेकिन इसमें ऐसे श्रमिक (अंशकालिक कर्मचारी के अलावा) शामिल नहीं हैं जो--
(i) ठेकेदार द्वारा उसके प्रतिष्ठान की किसी गतिविधि के लिए नियमित रूप से नियोजित है और उसका रोजगार रोजगार की शर्तों के पारस्परिक रूप से स्वीकृत मानकों (स्थायी आधार पर नियुक्ति सहित) द्वारा शासित है, और
(ii) ऐसे रोजगार में समय-समय पर लागू कानून के अनुसार वेतन में आवधिक वेतनवृद्धि, सामाजिक सुरक्षा कवरेज और अन्य कल्याणकारी लाभ प्राप्त करता है;
(h) "सहकारी समिति" से तात्पर्य सहकारी समिति अधिनियम, 1912 (2 ऑफ 1912) या किसी अन्य कानून के तहत पंजीकृत या पंजीकृत मानी जाने वाली किसी भी राज्य में सहकारी समितियों से संबंधित किसी भी समय लागू कानून के तहत पंजीकृत समिति से है;
(i) "निगम" से तात्पर्य किसी केंद्रीय अधिनियम या राज्य अधिनियम द्वारा स्थापित किसी निगमित निकाय से है, लेकिन इसमें कंपनी या सहकारी समिति शामिल नहीं है;
(j) "प्रत्यक्ष कर" से तात्पर्य है--
(i) के अंतर्गत प्रभार्य कोई कर--
(ए) आयकर अधिनियम, 1961 (1961 का 43);
(बी) कंपनी (लाभ) अतिरेक अधिनियम, 1964 (1964 का 7);
(सी) कृषि आय कर कानून; और
(ii) कोई अन्य कर जिसे, उसकी प्रकृति या प्रभाव को ध्यान में रखते हुए, केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचना द्वारा इस संहिता के प्रयोजनों के लिए प्रत्यक्ष कर घोषित किया जा सकता है;
(k) "कर्मचारी" से तात्पर्य किसी प्रतिष्ठान द्वारा वेतन पर नियोजित किसी भी कुशल, अर्ध-कुशल या अकुशल, शारीरिक, परिचालन, पर्यवेक्षी, प्रबंधकीय, प्रशासनिक, तकनीकी या लिपिकीय कार्य को वेतन या पुरस्कार के लिए करने वाले किसी भी व्यक्ति (1961 के शिक्षुता अधिनियम, 1961 (52 ऑफ 1961) के अधीन नियोजित शिक्षु के अलावा) से है, चाहे रोजगार की शर्तें स्पष्ट हों या निहित, और इसमें उपयुक्त सरकार द्वारा कर्मचारी घोषित किया गया व्यक्ति भी शामिल है, लेकिन इसमें संघ के सशस्त्र बलों का कोई भी सदस्य शामिल नहीं है;
(l) "नियोक्ता" से तात्पर्य ऐसे व्यक्ति से है जो प्रत्यक्ष रूप से या किसी अन्य व्यक्ति के माध्यम से, या अपनी ओर से या किसी अन्य व्यक्ति की ओर से, अपने प्रतिष्ठान में एक या अधिक कर्मचारियों को नियोजित करता है, और जहाँ प्रतिष्ठान केंद्र सरकार या राज्य सरकार के किसी विभाग द्वारा संचालित होता है, वहाँ ऐसे विभाग के प्रमुख द्वारा इस संबंध में निर्दिष्ट प्राधिकारी, या जहाँ कोई प्राधिकारी निर्दिष्ट नहीं है, वहाँ विभाग का प्रमुख, और स्थानीय प्राधिकारी द्वारा संचालित प्रतिष्ठान के संबंध में, उस प्राधिकारी का मुख्य कार्यकारी अधिकारी, और इसमें शामिल हैं,--
(i) किसी ऐसे प्रतिष्ठान के संबंध में जो कारखाना है, कारखाने का अधिभोगी जैसा कि कारखाना अधिनियम, 1948 (63 ऑफ 1948) की धारा 2 के खंड ( n ) में परिभाषित है, और जहां किसी व्यक्ति को उक्त अधिनियम की धारा 7 की उपधारा ( 1 ) के खंड ( f ) के तहत कारखाने का प्रबंधक नामित किया गया है, तो वह नामित व्यक्ति;
(ii) किसी अन्य प्रतिष्ठान के संबंध में, वह व्यक्ति या प्राधिकरण जिसका प्रतिष्ठान के मामलों पर अंतिम नियंत्रण है और जहां उक्त मामले किसी प्रबंधक या प्रबंध निदेशक को सौंपे गए हैं, तो ऐसा प्रबंधक या प्रबंध निदेशक;
(iii) ठेकेदार; और
(iv) मृतक नियोक्ता का कानूनी प्रतिनिधि;
(m) "प्रतिष्ठान" से तात्पर्य किसी ऐसे स्थान से है जहाँ कोई उद्योग, व्यापार, व्यवसाय, विनिर्माण या पेशा चलाया जाता है और इसमें सरकारी प्रतिष्ठान भी शामिल हैं;
(n) "कारखाना" से तात्पर्य कारखाने अधिनियम, 1948 (1948 का 63) की धारा 2 के खंड ( m ) में परिभाषित कारखाने से है;
(ओ) "सरकारी प्रतिष्ठान" से तात्पर्य सरकार या स्थानीय प्राधिकरण के किसी कार्यालय या विभाग से है;
(पी) "आयकर अधिनियम" से तात्पर्य आयकर अधिनियम, 1961 (1961 का 43) से है;
(q) "औद्योगिक विवाद" से तात्पर्य है,--
(i) नियोक्ताओं और नियोक्ताओं के बीच, या नियोक्ताओं और श्रमिकों के बीच, या श्रमिकों और श्रमिकों के बीच कोई विवाद या मतभेद जो किसी व्यक्ति के रोजगार या गैर-रोजगार, या रोजगार की शर्तों, या श्रम की स्थितियों से संबंधित हो; और
(ii) किसी व्यक्तिगत श्रमिक और नियोक्ता के बीच किसी श्रमिक की बर्खास्तगी, छंटनी या सेवा समाप्ति से संबंधित या उससे उत्पन्न कोई विवाद या मतभेद;
(आर) "निरीक्षक-सह-सुविधाकर्ता" से तात्पर्य धारा 51 की उपधारा ( 1 ) के अधीन उपयुक्त सरकार द्वारा नियुक्त व्यक्ति से है;
(एस) "न्यूनतम मजदूरी" से तात्पर्य धारा 6 के अधीन निर्धारित मजदूरी से है;
(टी) "अधिसूचना" से तात्पर्य भारत के राजपत्र या किसी राज्य के आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना से है, जैसा भी मामला हो, और "अधिसूचित करना" शब्द को उसके व्याकरणिक रूपों और संबंधित अभिव्यक्तियों के साथ तदनुसार समझा जाएगा;
(u) "निर्धारित" से तात्पर्य उपयुक्त सरकार द्वारा बनाए गए नियमों द्वारा निर्धारित से है;
(v) "समान कार्य या समान प्रकृति का कार्य" से तात्पर्य ऐसे कार्य से है जिसके संबंध में आवश्यक कौशल, प्रयास, अनुभव और जिम्मेदारी समान हो, जब कर्मचारियों द्वारा समान कार्य परिस्थितियों में किया जाता है और किसी भी लिंग के कर्मचारियों के लिए आवश्यक कौशल, प्रयास, अनुभव और जिम्मेदारी के बीच यदि कोई अंतर है, तो रोजगार की शर्तों और स्थितियों के संबंध में व्यावहारिक महत्व का नहीं है;
(w) "राज्य" में केंद्र शासित प्रदेश शामिल है;
(x) "ट्रिब्यूनल" का वही अर्थ होगा जो औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 (14 ऑफ 1947) की धारा 2 के खंड ( आर ) में दिया गया है;
(y) "मजदूरी" से तात्पर्य वेतन, भत्ते या अन्य किसी रूप में दिए जाने वाले सभी पारिश्रमिक से है, जो धन के रूप में व्यक्त किया गया हो या इस प्रकार व्यक्त किया जा सकता हो, और जो (2005 का 42), यदि रोजगार की शर्तें, व्यक्त या निहित, पूरी की जातीं, तो किसी नियोजित व्यक्ति को उसके रोजगार या ऐसे रोजगार में किए गए कार्य के संबंध में देय होता, और इसमें शामिल है, --
(i) मूल वेतन;
(ii) महंगाई भत्ता; और
(iii) यदि कोई हो तो प्रतिधारण भत्ता,
लेकिन इसमें शामिल नहीं है--
(क) किसी भी कानून के तहत देय कोई बोनस, जो रोजगार की शर्तों के तहत देय पारिश्रमिक का हिस्सा नहीं है;
(ख) किसी आवास का मूल्य, या प्रकाश, पानी, चिकित्सा सेवा या अन्य सुविधा की आपूर्ति का मूल्य, या किसी ऐसी सेवा का मूल्य जिसे उपयुक्त सरकार के सामान्य या विशेष आदेश द्वारा मजदूरी की गणना से बाहर रखा गया हो;
(ग) नियोक्ता द्वारा किसी पेंशन या भविष्य निधि में भुगतान किया गया कोई अंशदान और उस पर अर्जित ब्याज;
(घ) कोई परिवहन भत्ता या किसी यात्रा रियायत का मूल्य;
(ई) नियोजित व्यक्ति को उसके रोजगार की प्रकृति के कारण उस पर लगने वाले विशेष खर्चों को पूरा करने के लिए भुगतान की गई कोई भी राशि;
(f) मकान किराया भत्ता;
(जी) पक्षों के बीच किसी पुरस्कार या समझौते या न्यायालय या न्यायाधिकरण के आदेश के तहत देय पारिश्रमिक;
(h) कोई भी ओवरटाइम भत्ता;
(i) कर्मचारी को देय कोई कमीशन;
(j) रोजगार की समाप्ति पर देय कोई भी ग्रेच्युटी;
(k) कर्मचारी को देय कोई छंटनी मुआवजा या अन्य सेवानिवृत्ति लाभ या रोजगार की समाप्ति पर उसे किया गया कोई अनुग्रह भुगतान:
इस खंड के अंतर्गत मजदूरी की गणना करते समय, यदि नियोक्ता द्वारा कर्मचारी को खंड ( क ) से ( i ) के अंतर्गत किए गए भुगतान, इस खंड के अंतर्गत परिकलित कुल पारिश्रमिक के आधे या केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित किसी अन्य प्रतिशत से अधिक हो, तो ऐसे आधे या अधिसूचित प्रतिशत से अधिक की राशि को पारिश्रमिक माना जाएगा और तदनुसार इस खंड के अंतर्गत मजदूरी में जोड़ दिया जाएगा।
इसके अलावा, सभी लिंगों को समान वेतन देने के उद्देश्य से और वेतन भुगतान के उद्देश्य से, खंड ( घ ), ( च ), ( छ ) और ( ह ) में निर्दिष्ट पारिश्रमिकों को वेतन की गणना के लिए लिया जाएगा।
स्पष्टीकरण .--जहां किसी कर्मचारी को उसके नियोक्ता द्वारा देय वेतन के पूर्ण या आंशिक भाग के बदले में कोई वस्तुगत पारिश्रमिक दिया जाता है, तो ऐसे वस्तुगत पारिश्रमिक का वह मूल्य जो उसे देय कुल वेतन के पंद्रह प्रतिशत से अधिक नहीं है, उस कर्मचारी के वेतन का हिस्सा माना जाएगा;
(z) "श्रमिक" से तात्पर्य किसी भी उद्योग में किसी भी प्रकार का शारीरिक, अकुशल, कुशल, तकनीकी, परिचालन, लिपिकीय या पर्यवेक्षी कार्य करने के लिए नियोजित किसी भी व्यक्ति (शिक्षु अधिनियम, 1961 (52 ऑफ 1961) की धारा 2 के खंड (aa) के अधीन परिभाषित प्रशिक्षु को छोड़कर) से है, चाहे रोजगार की शर्तें स्पष्ट हों या निहित, और इसमें शामिल हैं--
(i) कार्यरत पत्रकार, जैसा कि कार्यरत पत्रकार एवं अन्य समाचार पत्र कर्मचारी (सेवा की शर्तें) एवं विविध प्रावधान अधिनियम, 1955 (45 ऑफ 1955) की धारा 2 के खंड ( एफ ) में परिभाषित है; और
(ii) विक्रय संवर्धन कर्मचारी (सेवा शर्तें) अधिनियम, 1976 (11 ऑफ 1976) की धारा 2 के खंड ( घ ) में परिभाषित विक्रय संवर्धन कर्मचारियों में, और औद्योगिक विवाद से संबंधित इस संहिता के अंतर्गत किसी भी कार्यवाही के प्रयोजनों के लिए, ऐसे किसी भी व्यक्ति को शामिल किया जाएगा जिसे उस विवाद के संबंध में, या उसके परिणामस्वरूप, बर्खास्त, पदमुक्त या छंटनी की गई हो, या जिसकी बर्खास्तगी, पदमुक्ति या छंटनी के कारण वह विवाद उत्पन्न हुआ हो।
लेकिन इसमें ऐसा कोई व्यक्ति शामिल नहीं है--
(क) जो वायु सेना अधिनियम, 1950 (1950 का 45), या सेना अधिनियम, 1950 (1950 का 46), या नौसेना अधिनियम, 1957 (1957 का 62) के अधीन है; या
(ख) जो पुलिस सेवा में कार्यरत हो या किसी कारागार में अधिकारी या अन्य कर्मचारी के रूप में कार्यरत हो; या
(ग) जो मुख्य रूप से प्रबंधकीय या प्रशासनिक क्षमता में कार्यरत हो; या
(घ) जो पर्यवेक्षी क्षमता में कार्यरत हो और पंद्रह हजार रुपये प्रति माह से अधिक वेतन या केंद्र सरकार द्वारा समय-समय पर अधिसूचित राशि प्राप्त करता हो।
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